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Friday, November 27, 2015

बुत बनाउंगा तेरी और पूजा करूंगा....!

"दाल का भाव जानकर क्या करोगे वत्स ? ये जानों कि सरदार पटेल होते तो आज का भारत कुछ और होता। वैसे प्याज सामान्य रेट पर बिक रहा है। हां, वो सुभाष चंद्र बोस थे न वे बहुत महान थे"


"जी वो तो मैं भी जानता हूं लेकिन दाल के दाम कम क्यों नहीं हो रहे ?"


"श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी बहुत महान थे"।


"जी, जानता हूँ। वो आजकल आलू भी कुछ ज्यादा कीमत में......."


"नई आलू की फसल आने दो, दामों में फर्क पड़ जायगा। वैसे भारत की धरती कभी सोना उगलती थी। विदेशी हमारा सोना भर भर कर ले गये"।


"जी वो एक्सपोर्ट कम हो रहा है......रूपया ढल रहा है"।


"अरे यार तुम अपनी दाल की फिक्र छोड़ कर एक्सपोर्ट पर क्यूं जान दे रहे हो ? वैसे बता दूं कि यह समय रहते सरकार की ओर से उठाया गया कदम है ताकि दाल वगैरह की कीमत काबू में रहे। एक्सपोर्ट जारी रखते तो तुम्हारी दाल और ज्यादा दाम में बिकती। एक्सपोर्ट कम होने से कीमतें काबू में हैं। वैसे तुम जानते हो भारत की जमीन इतनी उपजाऊ थी कि सारे संसार को अन्न खिला सकती थी"।


"सुना है रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा है कि निवेश कम होना चिंता का विषय है"।


"अबे तू कब से लाट गवर्नरों की बातों पर ध्यान देने लगा। वैसे बात निकली है तो बता दूं कि विदेशी आये थे तो कह रहे थे कि हम दूध में चीनी की तरह घुल कर रहेंगे और वहीं गलती हो गई। हमारे शासकों ने दरियादिली दिखाई और उन्होंने कब्जा करके हमें लूटा, हमारा देश बरबाद कर दिया। हमें ये नहीं भूलना चाहिये"।


"जी वो गैस सब्सिडी सरेंडर करने की सोच रहा था लोकिन सुना ग्यारह हजार करोड़ की गैस उद्योगपति ने चुरा ली"


"अबे तुम लोग सुनी सुनाई पर बहुत ध्यान देते हो। मैं तुम्हें भारत का स्वर्णिम अतीत बता रहा हूँ और तुम दाल चावल आलू पर पिले पड़े हो। वैसे बता दूं कि गुप्तकाल में लोग बहुत खुशहाल थे। बीच में मुगल आये और सब गड़बड़ा गया। बाकि हमारा देश तो हमारा देश है। जिसे जाना हो जाये अपनी बला से...... बाय द वे .....पहले पुष्पक विमान भी था.....!"

- सतीश पंचम


3 comments:

देवेन्द्र पाण्डेय said...

अच्छा किया जो यहाँ सहेज दिया। बढ़िया व्यंग्य है।

सतीश पंचम said...

हां, मुझे भी जम रहा था यह लेख। सो साट दिया ब्लॉग पर :)

अभिषेक आर्जव said...

hmmmm

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