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Monday, January 28, 2013

साहित्य सम्मेलन में साहित्यकार बीरबल

  
 
   बीरबल ने साहित्य सम्मेलन में एक परिचर्चा के दौरान कहा- "बादशाह अकबर को साहित्य-फाहित्य समझ नहीं आता। इसलिये उन्होंने मुझे भेजा है। मैं उनका प्रतिनिधि हूं"।

     बगल में ही दिल्ली का कोई घुटा हुआ साहित्यकार बैठा था, पूछ लिया - "बीरबल जी, आप कैसे अकबर के प्रतिनिधि हो सकते हैं, रहीम जी आपसे ज्यादा साहित्य समझते थे, उन्हें क्यों नहीं भेजा गया" ?

  
   "उन्हें इसलिये नहीं भेजा गया क्योंकि वे बातों को चीजों से जोड़कर बोलते हैं, सूई, तलवार, धागा, चंदन, भुजंग, दूध, खीरा, नमक आदि के साथ साथ बहुत क्रियात्मक हो लेते हैं - लिपटत, मलिये, तोड़िये, मथत....ये सारी बातें साहित्य सम्मेलन कवर करने वाले संवाददाता लोग नहीं समझेंगे, अर्थ का अनर्थ करेंगे मसलन रहीम गर कहेंगे -

 
 
"बड़े काम ओछो करै, तो न बड़ाई होय।
ज्यों रहीम हनुमंत को, गिरिधर कहे न कोय"     
 
     इतना सुनते ही आपके संवाददाता तुरंत ब्रेकिंग न्यूज चला देंगे कि - "रहीम ने हनुमान को कृष्ण के सामने ओछा बताया" और सबसे पूछने लगेंगे कि क्या रहीम पर विद्वेष फैलाने के मामले में केस चलना चाहिये कि नहीं ?  आपके क्या विचार है ? पैनल डिस्कशन होगा, तमाम लोग आ जुटेंगे और फिर आपके बजरंगीये भी रहीम पर पिल पड़ेंगे कि अबदुर्ररहीम खानखाना ने ऐसे कैसे कह दिया :-)

   "सो बी डिप्लोमेटिक माय डियर डेल्ही बेस्ड साहित्यकार ...ठंड रक्खो....जूस शूस पियो.....बैकरूम में शाही अंगूरों के रसों से भरी सुराही रखी है, हुक्कासेवी हों तो नेजा भी है, कोयला और गुड़ अपने घर से ले आइयेगा, चिलम हम दे देंगे" :-)
 
 - सतीश पंचम
 
 
चित्र: गूगल से साभार

13 comments:

ई. प्रदीप कुमार साहनी said...

आपकी इस उत्कृष्ट पोस्ट की चर्चा बुधवार (30-01-13) के चर्चा मंच पर भी है | जरूर पधारें |
सूचनार्थ |

प्रवीण पाण्डेय said...

अच्छा किया कि रहीम को नहीं भेजा, नहीं तो दाँय अधिक मचती।

Sonal Rastogi said...

jabardast

काजल कुमार Kajal Kumar said...

डेल्ही बेस्ड साहित्यकार अब नहीं जाएंगे इस तरह की चच्चा-फच्चा में

smt. Ajit Gupta said...

अगले साल क्‍या गुल खिलता है? देख‍ते रहिए।

mridula pradhan said...

achcha vyang.....

ताऊ रामपुरिया said...

बिल्कुल सटीक है जी.

रामराम.

मैं और मेरा परिवेश said...

बढ़िया

Er. Shilpa Mehta : शिल्पा मेहता said...

wowww :) :) :)

अनूप शुक्ल said...

साहित्य सम्मेलन में साहित्यकार बीरबल----क्या कर रहे थे फ़ालतू में ?

ब्लॉग बुलेटिन said...

आज की ब्लॉग बुलेटिन सनातन कालयात्री की ब्लॉग यात्रा - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

देवेन्द्र पाण्डेय said...

जोरदार कटाक्ष।

P.N. Subramanian said...

सामयिक और एप्रोप्रियेट कटाक्ष

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