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Friday, December 7, 2012

देश बऊराना एफडीआई चौक.....

     देख रहा हूं एफडीआई को लेकर देश बऊरा गया है.....सरकार तो सरकार विपक्ष भी खुद के बऊराने पर गर्व कर रहा है। छुटुआ मुटुआ का तो कहना ही क्या। ये बऊराने की बजाय  चर्राना ज्यादा पसंद करते हैं। मुलायम और माया को ही देख लिजिए। जिस मुद्दे को लेकर लोकसभा से वॉकआउट कर दिये राज्यसभा में आते ही वॉक-इन कर लिये। एक वॉक आउट हुआ तो दूसरा इन हो लिया। मुद्दे पर इतनी विकट स्टैंडिंग लिये कि खुद सरकार हंसने- मुस्कराने से बचती रही कि कहीं दोनों बुरा न मान जांय। वैसे भी सहायता करने वाले की हंसी नहीं उड़ानी चाहिये, ऐसा शास्त्रों में लिखा है। किस शास्त्र में लिखा है ये अभी खोज का विषय है। फिलहाल इतने से ही संतुष्ट हुआ जा सकता है कि अगाध ठंड के मौसम में सरकार और विपक्ष जहां बऊराये थे वहीं ये दोनों चर्राये थे, और क्या खूब चर्राये। गज्जब।
   
    वैसे इस आपाधापी में एक और घटना हुई जिस पर कि लोगों का ध्यान कम ही गया। वो घटना रही अन्ना द्वारा केजरीवाल को सत्ता का लोभी बताना। लोग पढ़े और पढ़कर हट लिये। सरकार तो सरकार अब भाजपा भी अन्ना और केजरीवाल को भी पढ़कर हट लेती है, जैसे उनके लिये ये रोज की खबर सी हो मसलन टेम्पो और ट्रक में भिडन्त, बाईक सवार चोटिल, बैलों को ले जा रहा ट्रक पलटा वगैरह वगैरह। लेकिन कुछ समय पहले यही केजरीवाल और अन्ना थे जिनके प्रत्येक कदम पर सरकारी निगाहें लगी रहती थीं। एक छोटा सा बयान आया नहीं कि कैबिनेट की कड़ाही तिड़बिड़ा उठती थी। मानों गर्म तेल में पानी का छींटा पड़ गया हो। तब विपक्ष के तौर पर भाजपा भी बहुत प्यारी सखी बन कर  अन्ना और केजरीवाल से हां सखी, बोल सखी किये रहती थी। अब जब केजरीवाल और अन्ना के रास्ते जुदा हो गये हैं, केजरीवाल की राजनीतिक पार्टी बन गयी है तो वही भाजपा जो चल सखी, हां सखी कहते नहीं अघाती थी अब केजरीवाल के नाम से ऐसे बिदकती है जैसे केजरीवाल ने भाजपा के आसन्न प्रेमी को हड़पना चाहा हो। कहां तो वह गाहे-बगाहे सखीरूपी टीम के जरिये प्रेमिल सत्ता पाने हेतु चोरी-छिपे चिट्ठी भिजवाती थी, अपने लोगों को अन्ना के आंदोलनों में शरीक करवाती थी और कहां ये केजरीवाल आये कि भाजपा के सखी-सखा भाव को ठेंगा दिखा दिये। कुछ दो चार खुलासे भी कर दिये। अब न तो वह बहनापा रहा न तो यारी-दोस्ती। सो सरकार भी खुश है कि चलो जोड़ी-पाड़ी खुद ही सलट गये, एंटी इन्कम्बैंसी के चलते हमारे वोट घटेंगे तो विपक्ष के भी वोट बटेंगे। अगेन वी विल्ल रॉक। सो, सरकार भी अब टीम अन्ना, भाजपा, रामदेव को लेकर ज्यादा सीरियस नहीं है। जो चाहती है करवा लेती है। भले ही आर्म ट्विस्टिंग का आरोप लगे या लेग पूलिंग का। 

    खैर, एफडीआई जी को लाया जा रहा है। देश को आगे बढ़ाया जा रहा है। जहां देश नहीं बढ़ना चाहता वहां लाठी से कोंच कोंच कर आगे ठेला जा रहा है। इस ठेलमठाल में जनता समझ नहीं पा रही कि देश को ठेल ठेलकर कहां ले जाया जा रहा है। कहीं ज्यादा ठेल दिये तो देश एकदम आगे सरक जायगा। फिर पता नहीं उसका घर देश की सीमा में ही पड़ेगा कि किसी नो मेन्स लैंड पर ? ईश्वर जी जानें। वैसे सुना है ईश्वर जी भी आरटीआई के चलते परेशानी में फंसे हैं। चित्रगुप्त ने उन्हें गुप्त रूप से ऐसे आरटीआई के बारे में सूचित  किया है जिसमें किसी ने पूछा है कि ईश्वर जी का यात्रा व्यय वाला वाऊचर कितने का आता है, उस पर टैक्स लगता है या नहीं ? यदि टैक्स लगता है तो कितना और यदि नहीं लगता तो उन्हें फ्री फंड में संसार की यात्रा करने का अधिकार किस कानून के अंतर्गत दिया गया है ?

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मेरे दूसरे ब्लॉग  'Thoughts of a Lens' से



    यह फोटो आज सुबह ही ऑफिस जाते वक्त मोबाइल से लिया जिसमें पीछे की दीवार पर वही अलबेली बातें लिखी हैं कि अरबों का घोटाला हुआ, इतने का उतना हुआ और रास्ते के ठीक दूसरे सिरे पर एक शख्स सो रहा है। वहीं दीवार की ओर ही थोड़ा ध्यान से देखेंगे तो तस्वीर के एक हिस्से में तेज उजाला भी पड़ रहा है जिसमें से किसी नेता का पोस्टर पर बना मुस्कराता चेहरा सड़क पर सोये शख्स को देख रहा है। वस्तुत: यही हो भी रहा है।

    - सतीश यादव

9 comments:

संतोष त्रिवेदी said...

गज़ब बउराहट है वाकई !!

Er. Shilpa Mehta : शिल्पा मेहता said...

@ इस ठेलमठाल में जनता समझ नहीं पा रही कि देश को ठेल ठेलकर कहां ले जाया जा रहा है। कहीं ज्यादा ठेल दिये तो देश एकदम आगे सरक जायगा। फिर पता नहीं उसका घर देश की सीमा में ही पड़ेगा कि किसी नो मेन्स लैंड पर ? ईश्वर जी जानें।
....
सत्वचन जी सत्वचन - इस ठेल ठाल में देस कहीं तो सरक ही जाएगा - पाहिले इ मुआ अंग्रेजन के गुलाम हुई गए थे हम लोग - इब्की बार धीरे धीरे अटालियन के हुई जावेगे .... तो का हुआ - हमहूँ कौनो रहने वाले हैं तब तक - भुगतेंगे आने वाले पीढ़ियों के बच्चे - हमें का ....

:( :(

सञ्जय झा said...

log prem me babla hua jata tha.....

ab rajniti me bourapan aata ja raha hai......

rapchik chitran hai.....

jai ho....

काजल कुमार Kajal Kumar said...

एफ़ डी आई की तो क्‍या कहूं पर हां चि‍त्र भारत की कवि‍ता है :(

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

:)

प्रवीण पाण्डेय said...

हमें तो सारी बातों पर विदेशी हाथ लगने लगा है।

देवेन्द्र पाण्डेय said...

फोटू बहुत बढ़िया लगा और ओके बारे में जो लिखे हैं ऊ भी। एक बात सीख रहा हूँ आपसे कि फोटू में अपना नाम लिख देना चाहिए।

smt. Ajit Gupta said...

देश तो अब विकसित हुआ ही जानिए। भगवान से यात्रा का बिल नहीं पूछते, हमारे यहां सरकार के भगवानों से भी नहीं पूछा जाता।

GYANDUTT PANDEY said...

देश अब करप्शन, ईमानदारी और काला धन के मुद्दे से थकेला हो गया प्रतीत होता है।

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