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Monday, November 5, 2012

अमां कायदे से पेश आओ....

       ऐसा माना जाता है कि चार हजार वर्ष पूर्व अर्थात प्राच्य काल में ढिल्लीका एक राजनैतिक महाक्षेत्र बन चुका था। वहां से प्राप्त तत्कालीन अभिलेख दर्शाते हैं कि तत्कालीन राजनीतिक दल एक दूसरे पर "कहकर" एहसान जताने से भी नहीं चूकते थे। ऐसे ही एक अभिलेख में उल्लिखित है कि एक विदेशी आक्रमण के दौरान जब एक पक्ष सत्तापक्ष में था और दूसरा विपक्ष में तब कुछ ऐसी अंदरूनी चीजें घटित हुई थी कि तब के विपक्षी दल ने सत्ता पक्ष का साथ दिया था। कालांतर में जब वही विपक्ष सत्ता में आ गया तब उसने प्रथम पक्ष को अपने उस एहसान का याद दिलाया कि कैसे उसने विदेशी आक्रमण के समय, मुश्किल वक्त पर उसका साथ दिया था. अत: वह उस एहसान को न भूले और कायदे से पेश आये. इस प्रकरण से स्पष्ट है कि विदेशी आक्रमण के समय एकजुट होना चार हजार वर्ष पूर्व एहसान अथवा उपकार की श्रेणी में आता था।

( ईसवी सन् 6012 की इतिहास की उत्तर पुस्तिका के अंश )

- सतीश यादव

2 comments:

अजय कुमार झा said...

जय हो । अभेलेख से पुस्तक बहुत घनघोर मालूम दे रही है । फ़ौरन ही फ़्लिपकार्ट से मंगवाने का आर्डर जारी करते हैं । प्रकाशन तो सफ़ेद घर ही है न ।

कुछ बिखरा ,बेसाख्ता , बेलौस , बेखौफ़ ,बिंदास सा

Er. Shilpa Mehta : शिल्पा मेहता said...

पुस्तक छपने कब वाली है ?

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'

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A Photo from - Thoughts of a Lens

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