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Tuesday, October 9, 2012

देशज "बइठऊकी"

- अरे तो क्या उसका दामाद कुछ काम धंधा नहीं करता क्या, अरे तो देख ताक कर बियाह करना था ना, बताओ इतने बड़े घर की लड़की है और मरद बहेतु निकल गया.....अरे तो देख तो रही हूँ कि दमाद को बार बार टीबी पर बता रहे हैं कि कर्जा खाया था किसी का......

- अरे तो ऐसा दामाद भी नहीं होना चाहिये कि कुल करजै कर डारे

- दुरभाग है, देखो कैसे बीतता है लड़किया का, बीपत तो बड़ी भारी है

- अरे वो बिमला का आदमी नहीं, वो भी तो करजै कर डारा था न, आखिर में देखो कलकत्ता में डरैबरी कर रहा है

- अरे तो एतना जलदी डरायबरी थोडौ न मिल गया था, पहले खलासी बना था बिमला का आदमी, चार पांच साल खलासी था बाद में हाथ सफा होते होते डरैबर हो गया

- देखो, क्या लिखा है, ओइसे टाई ओई लगाकर दिख तो रहा है टीवी पर, कोट भी पहिरा है, मोंछ भी है, सब कर्जा करके इतना बन ठन के दिख रहा है, खुद के कमाई का पहिनता तो न जाने क्या करता

- अरे कोई कह रहा था कि कर्जा नहीं लिया किसी दोस्त ओस्त ने दिया था

- अइसे ही दे दिया था ?

- नहीं, अइसे ही क्यों देगा, कोई पागल है जो पइसा अइसे ही दे देगा दोसदारी के नाम पर.

- सब लोग तो कहते हैं दिया था, बिना सूद लगाये

- ये तो बहुत नई बात सुन रही हूं, भला कोई दोसदारी में इतना कैसे लुटा देगा, ऐसा कभी सुना तो नहीं

- सुना क्यों नहीं, किसन भगवान और सुदामा का नहीं सुनी थीं, वो भी तो दोसदारी में दे दिये थे, वइसे ही आज भी है, भारत को अइसे ही परंपरा मानने वाला देस नहीं कहते

- तो क्या ये दामाद सुदामा की तरह दरिद्र था ?

- वो तो उसके लोग ही जानें लेकिन अब तो टीवी पर दिख रहा है जो वही बता रही हूं , देखो कैसे आँख फाड़ के देख रहा है टीवी में से, जइसे अबहीं बाहर आ जायेगा..... एतना गुस्सईल दमाद है कि बस

- अरे अइसे ही लछमिनिया का पाहुन भी था, बियाह के टैम जब सब दे दवा लिया तो कहने लगा भैंस चाहिये दहेज में वरना खाना न खाऊंगा

- तब ?

- तब क्या, बहुत मनाने-चोनाने के बाद अंत में एक बैल दिया तो माना

- भैंस क्यों नहीं दिये ?

- भैंस देने पर लछमिनिया को ही दुहना पड़ता, अब बैल ले गया है तो खुद ही जांगर ठेठायेगा.....

- ऐ बिट्टी, देख दाल बह तो नहीं रही, तनिक चूल्हा धीमा कर तो :-)

  - सतीश पंचम

(फेसबुक पर इस पोस्ट को आंशिक रूप से पोस्ट किया था )

8 comments:

anshumala said...

एक दुखी गरीब दामाद ने गाना गया था "मेरा ससुरा बड़ा पैसा वाला" बेचारे को कोई फायदा नहीं हो रहा था , अब देखो जो दामाद जी खुद पैसा वाले हो गये है तो चुपा गये है पूरी ससुरारी लगी है बचाने में, तो काहे कुछ बोले , भाई बेटी दी है तो इतना तो करना ही पड़ेगा , ऊ तो दामाद जी का भला हो ज्यादा कुछ नहीं किया नहीं तो लोग तो जान तक देने पर भी तुले है , कुछ और कर गये तो पता नहीं किस किस की जान जाएगी | भगवान सभी के दामाद को इतनी तरक्की दे सबकी बिटिया दामाद फले फुले |

काजल कुमार Kajal Kumar said...

अरे कोई मुझे भी अइसे ही दे दो (कि‍सी को जवाब भी नहीं देना पड़ेगा)

प्रवीण पाण्डेय said...

आज सब दामादों को टनों जलन हो रही होगी।

नीरज गोस्वामी said...

आप और आपकी पोस्ट दोनों...लाजवाब

नीरज

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

:)

GYANDUTT PANDEY said...

बड़रा जी सहियै लिखे रहे मैंगो मैन! अब भला उनकी बरोबरी बिमला का डरैवर आदमी कर रहा है!?

GYANDUTT PANDEY said...

बकिया, पोस्ट तो वैसी ही है - लाजवाब!

सागर said...

हमरी समुझ महियाँ यहु नाय आवत कि यत्ती बढ़िया-बढ़िया पोस्ट सब कहाँ तेरे उठाय के देई मात्ति :)

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