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Wednesday, October 31, 2012

"मस्ताभिलेख" उत्खननम्

     हाल ही में हुए उत्खननों से कुछ ऐसे अभिलेख मिले हैं जिनके बारे में इतिहासकार मानते है कि इन अभिलेखों में तीन हजार वर्ष पहले के किसी तोता-मैना प्रेम-प्रसंग का वर्णन है। वहीं दूसरी ओर कुछ लिपि विशेषज्ञों का मानना है कि यह उस काल के दो तोतों के बीच हुआ कव्वाली टाईप सवाल-जवाब है इससे ज्यादा कुच्छ नहीं।

    वहीं इस तोता-मैना प्रेम प्रसंग को लेकर एक अन्य विशेषज्ञ का कहना है कि अभिलेख के द्वितीय सोपान में
 मैना के नाम के आगे कुछ रकम दर्ज है लेकिन उस जगह से प्लास्टर उखड़ जाने के कारण असल कीमत पढ़ी नहीं जा सकी है।

   वहीं दूसरे इतिहासकार का मानना है कि शून्यों की संख्या और उखड़े हुए प्लास्टर के क्षेत्र को कैलिपर से नापा जाय तो कुल आठ शून्य और बैठेंगे। इस लिहाज से असल कीमत पचास करोड़ है। 



   दूसरी ओर एक अन्य वरिष्ठ इतिहासकार का मानना है - चूँकि तीन हजार साल पहले शून्य की कोई कीमत नहीं थी, कोई कितनी भी संख्या में शून्य लगा सकता था इसलिये उखड़े हुए प्लास्टर के बराबर शून्य गिनना और उस आधार पर मैना की कीमत बताना उचित नहीं। अपने बात की पुष्टि के लिये इतिहासकार महोदय ने तीन हजार साल पहले के घोटालों का उदाहरण दिया जिनमें लोग कहीं भी कभी भी भक्क से मुँह खोलकर कह देते थे- पचास हजार करोड़ के घोटाले हुए, सत्तर लाख करोड़ के घोटाले हुए।

   उधर समाजशास्त्र के विशेषज्ञों का मानना है कि उस दौर में इतनी महंगाई नहीं थी। इसलिये हो सकता है कि मैना की कीमत पचास रूपये से ज्यादा न हो लेकिन चारणों द्वारा मैना की कीमत बढ़ा चढ़ाकर बताई गई हो।

    इसी दौरान स्टूडियो में बुलाये गये पक्षी विशेषज्ञ श्री बहेलिया सिंह "ठठेर" का मानना है कि मैना की कीमत पचास रूपये से लेकर पचास करोड़ तक हो सकती है बशर्ते पता हो कि मैना का प्रेमी वह तोता आखिर करता क्या था, उसकी हैसियत कैसी थी, कुछ काम-धंधा भी करता था कि ऐसे ही बैठा रहता था :)

( ईसवी सन् 5012 की इतिहास की उत्तर पुस्तिका के अंश :)


- सतीश यादव

3 comments:

सञ्जय झा said...

.......
.......

PANCHAM DA'

GR8"...

JAI HO.

Dr V B said...

We want all such findings compiled in a book.

प्रवीण पाण्डेय said...

शून्य ने हमारे यहाँ पर ही मूल्य पाया और यहीं अवमूल्यन हो गया।

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