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Tuesday, October 23, 2012

इतिहास-फितिहास....उत्खनन-फुत्खनन

Photo: Satish Pancham

    हाल ही में हुए पुरातात्विक उत्खननों कुछ ऐसे अभिलेख मिले हैं जिनसे पता चलता है कि तीन हजार वर्ष पहले भारतीय राज्यव्यस्था से जुड़ा कारोबारी वर्ग अपने वाहन चालक एंव नौकरों तक के नाम अपनी कंपनीयों की रजिस्ट्री कराता था, यही नहीं उनके नाम किसी गगनचुंबी इमारत में डूप्कलेक्स कक्ष भी पंजीकृत करवा देता था। अपने अधिनस्थों, नौकरों, वाहन-चालकों के प्रति इतना सहृदय होना भारत के स्वर्णिम इतिहास को दर्शाता है। 

    वहीं कुछ विद्वान इस तरह से ड्राईवरों, नौकरों के प्रति दर्शाये गये सहृद्यता को बड़ी बात नहीं मानते क्योंकि यह तीन हजार वर्ष पहले बहुत आम बात थी। कई लोगों ने अपने कारोबार में अपने नौकरों, ड्राईवरों, रसोइयों को हिस्सेदार बनाया था। संभवत: यही कारण है कि कइयों के मंत्रिमंडल या लगुए-भगुए समूह में शामिल लोगों को आम बोलचाल में किचन कैबिनेट कहा जाता था। उन "किचनैटों" का मुख्य कार्य केवल और केवल नेता-स्वामी की सेवा करना था, उसके हाथ-पैर दबाना था, बदले में नेता पूरी की पूरी कंपनी उनके पते पर रजिस्टर कर देता था। इस लिहाज से देखा जाय तो भारत का तीन हजार वर्ष पूर्व का काल किसी सतयुग से कम नहीं था, बल्कि सतयुग की कल्पना ही भारत के तीन हजार वर्ष पूर्व के मनोहर हालात को देखकर की गई थी :-)

(ईसवी सन् 5012 की इतिहास की उत्तर पुस्तिका के अंश)

  - सतीश यादव

6 comments:

Vinay Prajapati said...

नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ

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संजय @ मो सम कौन ? said...

भूमि हदबंदी कानून के अंतर्गत सीलिंग से बचने के लिये बड़े जमींदार अपने मजदूरों, कारिंदों और यहाँ तक कि अपने कुत्तों के नाम भी जमीन-फ़मीन ट्रांसफ़र-फ़्रांसफ़र कर देते थे।

प्रवीण पाण्डेय said...

भारत का इतिहास इतना दमदार निकलेगा कि भविष्य फूला नहीं समायेगा ।

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

कुछ दिनों के बाद इन ड्रायवरों के मालिक भी उत्खनन मे प्राप्त होगे, इनके गर्त में दबने का समय आ गया है।

Vivek Rastogi said...

और ऐसा ही कुछ सॉफ़्टवेयर वालों के लिये भी कुछ लिखा जायेगा, बेचारे दिन भर काम करते थे, मैनेजर उनकी वाट लगाता था, फ़िर भी बाहर अमरीका वमरीका जाने के चक्कर में पड़े रहते थे और हमेशा रेटिंग के पीछे दौड़ते रहते थे, ये गजब का प्राणी था ।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

बधाई-वधाई!

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