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Wednesday, July 18, 2012

......

      वह राजेश खन्ना की अदाकारी का ही जलवा था कि अभी कुछ दिनों पहले आनंद फिल्म देख रहा था और साथ ही साथ भोजन भी चल रहा था। आनंद के प्राण त्यागने वाले सीन के बाद भोजन गले से नीचे नहीं उतरा, थाली सरका दी और मुंह-हाथ धोने वाश बेसिन की ओर चल पड़ा। 
 पीछे से बेटी को कहते सुना  "पापा लगता है बहुत बड़े फ़ैन हैं राजेश खन्ना के"।

    शायद बेटी को नहीं पता कि उसके पापा अभी दो साल पहले ही उसकी मम्मी के साथ मुंबई के रीगल सिनेमा में आराधना फ़िल्म देखने गये थे। शो जब छूटा तो आखरी लोकल ट्रेन जा चुकी थी और हम  दोनों सड़कों पर टहलते हुए फिल्म पर बतिया रहे थे , टैक्सी वाला आकर सामने खड़ा हुआ - "कहां जाना है साहब" ? 

और मैं कह बैठा - "ले चलो जिधर तुम्हारा मन करे".

   वो तो श्रीमती जी थीं, जो संभाल ले गईं  "घर पर बच्चे इंतजार कर रहे होंगे और इधर आप राजेश खन्ना हुए जा रहे हैं"।

अलविदा राजेश जी, अलविदा।

- सतीश पंचम

10 comments:

संतोष त्रिवेदी said...

कभी अलविदा ना कहना...:-(

संगीता पुरी said...

बढिया ..

समग्र गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष

सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi said...

ले चलो जिधर तुम्‍हारा मन करे...

वाह..

हर इंसान में एक हीरो होता है, राजेश खन्‍ना के साथ हम उसे जीने लगते हैं।

आनन्‍द देखने के बाद कुछ ख्‍याल अपने भी ऐसे रहे (कुछ दिन)

kshama said...

Haan.....Anand behad yadgar film thee.

प्रवीण पाण्डेय said...

जीवन्त चरित्र अन्दर तक हिला गया था..

BS Pabla said...

चरित्रों को जीवंत करती कई फिल्में मन मष्तिष्क में हलचल करती हैं
'आनंद' भ़ी उनमे से एक है

अलविदा आनंद

rashmi ravija said...

कल शाम मेरी कामवाली आई...उम्र पचास के आस-पास ....अंदर आते ही बोली.."राजेश खन्ना नहीं रहा ना.." आँखों में आँसू तो नहीं थे पर आवाज़ में बेपनाह दर्द.
मैने पूछा.." तुम देखती थी उनकी फिल्मे"..तो लजा कर सर तिरछा कर के बोली.."हाँ, उसकी सब फिल्म देखी हैं...अच्छा लगता था "
हम सबको आप बहुत अच्छे लगते थे...अलविदा काका..

smt. Ajit Gupta said...

आनन्‍द तो जेहन से निकलती नहीं। श्रद्धांजलि।

संजय @ मो सम कौन ? said...

ऐसी किसी पहली पोस्ट पर कुछ लिख रहा हूँ, उस दिन से ही बहुत अजीब सा लग रहा है| हाल ही में कई स्तंभ ढह गए, लेकिन ऐसा अजीब नहीं लगता था| एक अलग ही अंदाज रहा उनका आखिर तक, गुरूर कहें या स्वभाव लेकिन कुछ चरित्र बदलते नहीं जैसे आनंद कभी मरते नहीं, वैसे ही|

खुश रहना मेरे...

GYANDUTT PANDEY said...

अरे, मुरारीलाल, बहुत बढ़िया पोस्ट लिखे हो!

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