सफेद घर में आपका स्वागत है।

Sunday, March 25, 2012

सुन रही हो कि नहीं.....

- हम इहां बम्मई में आपन काम धन्धा देखें कि तू लोग का रगरा-झगरा

- अरे तो मिलि-जुलि के रह नहीं सकती हो, कि जरूरी है लड़का बच्चा को लेकर
मार झगरा करना

- अरे त तनिक तूंही गम खाय लो.....कि जरूरी है हाथ में हंसुआ लेय के बजबै करो

- बिट्टी के तबियत कैसी है

- अरे त दवा-ओवा करवा दिया करो कि वह भी मैं ही आकर करवाऊँ

- सुन रही हो कि नहीं....अ तनि बिट्टी का दवा ओवा करा देना ....पइसा भेज रहा हूं

- अरे तो ......अरे......अब देस भर का पंवारा न पढ़ाओ......बात बता दूँ साफ.....

- कौन

- अरे तो बहिनिया के त अभी बिदाई दिया था तबले फिर आय पहुंची है त कौनो बात नहीं

- दे देना जो समझ में आये.....मोजम्मिल के इहां से जौन पियरकी वाली साड़ी
लाये थे वो होगी न.....तो उहै दे दो....का करोगी पेटी में रख के......

- अरे तो लेते आउंगा....अब बहिन क बिदाई छूछे करना ठीक नहीं न होगा....

- सुन रही हो कि नहीं...

- अरे त रत्तनवा के लिये जौन बाबा सूट भेजे थे वही दे दो के बिदा कर
दो.....बहिन का लड़का है तो अइसही भेजना ठीक नै न रहेगा.....अरे त दूसर
बाबा सूट लेते आउंगा....

- सुन रही हो कि नहीं....

- पन्नरह सै अबहियें इस्टेट बैंकिया से लगा दे रहे हैं....जाकर सुल्लूर
के संगे पइसा निकलवाय लेना.....

- हां त रिचारजौ कर दे रहे हैं...चिंता मत करो....औ लराई झगरा मत
करना...परेम से जेठान- देवरान रहि लेना....समझो कि जइसे कुल दिन ओइसे इहौ
दिन.....

- सुन रही हो कि नहीं

--------------

एक परदेसिहा वार्तालाप जिसे बस में बैठे बैठे सुन पाया। बगल में बैठा
बंदा मुंबई से कहीं अपने गाँव में रहने वाली पत्नी को फोन पर हिदायत दे
रहा था कि आपस में देवरानी जेठानी प्रेम व्यवहार से रहना....बच्चों को
लेकर झगड़ा मत करना....बहन (ननद) और उसके बच्चे जो घर आये हैं उनकी जाते
समय अच्छे से विदाई करना....अपनी साड़ी ननद को दे देना और जो नया वाला
बाबा सूट अपने बच्चे के लिये भेजा था वो भांजे के लिये दे देना....तुम
दोनों के लिये दूसरा भेज दूंगा......।

तमाम दुश्वारियों के बीच इस तरह की जिम्मेदारियां निभाते परदेसी मनुक्ख
को देख मन में एक अलग ही एहसास होता है। अमूमन इस किस्म की बातचीत उन
इलाकों की बसों में ज्यादा सुनाई देती हैं जिनमें कड़िया, पेंटर, सुतार
जैसे मेहनतकश लोग अपने घर परिवार से दूर रहते हैं और गरीबी के चक्रव्यूह
को भेदने में रात दिन जुटे रहते हैं । मुम्बई का संगम नगर इलाका उन्हीं
मेहनतकशों का इलाका है जहां कि यह वार्तालाप सुनाई दिया था।

- सतीश पंचम

14 comments:

सतीश पंचम said...

मोबाईल से पोस्ट ड्राफ्ट होने के कारण कहीं कहीं पंक्तियां गद्य की पटरी छोड़ पद्य की पगडंडी सरीखी लग रही हैं। उम्मीद है पठनीयता में होने वाली दिक्कत सुधीजन झेल लेंगे :)

संतोष त्रिवेदी said...

कोहू के बगल मा बईठी के चोरी ते बात सुनाब ठीक नय है बाबू !

...मस्त !

सतीश पंचम said...

जहां तक मैं समझता हूँ लेखकों को दूसरों की बातें सुनने का सार्वभौमिक अधिकार है :)

बशर्ते उन बातों के जरिये किसी को नुकसान पहुंचाने की मंशा न हो।

प्रवीण पाण्डेय said...

बाहर रह कर घर को नियमित हिदायत, सबसे प्रेम पूर्वक रहने की। वियोग, वह भी घर परिवार के हित में, पौरुषेय।

Padm Singh said...

समाज और आसपास हो रही घटनाओं को इतनी बारीकी से देख लेना ... आपकी संवेदनशीलता गज़ब है सतीश भाई

Deepak Saini said...

यही होता है जब कोई कमाने के लिए घर से बाहर जाता है

मान गए
आपकी पैनी नज़र और ....... सुपर दोनों को

Arvind Mishra said...

ई मर्दवा लोग न हों तो घर बखरी बिखर बिखर जाय :)
बिलकुल सही बातचीत कैच किया है ...

देवेन्द्र पाण्डेय said...

इसी बातचीत में तो अपना देस दिखता है। बाकी तs होइये गया इंडिया।

लेखक बातचीते नहीं सुनता भीतर तक घुस जाता है। तभी न बताता है सबके मन की बात। सोचिए त्रिवेदी जी, कितना त्रास झेलता है! तब कहीं कुछ लिख पाता है। इतना सुनने में तो कलेजा कई बार निकल के हाथ में आ जाता है..नहीं?

संजय @ मो सम कौन ? said...

घर और घरवालों के लिये घर बार छोड़कर परदेसी की जिंदगी बिताने वाले ये लोग किसी क्रूसेडर से कम नहीं हैं। दोनों पक्ष डबल जिम्मेदारी संभालते हैं।

rashmi ravija said...

यही सब बातें हैं जो अपने परिवार से लगाव बनाए रखती हैं...दूर रहकर भी घर के करता-धर्ता का अहसास बना रहता है और इन्ही के सहारे बम्बई जैसी जगह में भी कठिन जीवन जी लेते हैं ये लोग.

भावना said...

:)

Abhishek Ojha said...

:)

ajit gupta said...

बहुत अच्‍छा वार्तालाप। सामाजिक सरोकारों में रचा-बसा है हमारे गाँव का परिवार।

Shah Nawaz said...

ब्लॉग बुलेटिन पर जानिये ब्लॉगर पर गायब होती टिप्पणियों का राज़ और साथ ही साथ आपकी इस पोस्ट को भी शामिल किया गया है आज के बुलेटिन में.

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