सफेद घर में आपका स्वागत है।

Saturday, March 10, 2012

अच्छर सटा के......

“अब फिर चलूं इस कलमुही साईकिल लेकर घिरिर घिरिर रेंगाते हुए” .


“तो क्या पहले नहीं जाते थे साईकिल लेकर ? किसने कहा था आपसे कि चुनाव लड़िये और साईकिल वाले से हारिये” ?

“तो क्या कोई कहे तभी चुनाव लड़ा जाता है” ?

“वो आप जानों, मना कर रही थी कि हाथी वाले के इहां से मत लड़िये चुनाव, लेकिन आप मानें तब न” ?

“तुम तो ऐसे कह रही हो जैसे तुम्हें मालूम था कि हाथी हारेगा” .

“हाथी हारने वाला था या नहीं मैं नहीं जानती, लेकिन इतना जरूर जानती हूं कि यदि आप हाथी वाले से हारते तो इतना नकर नकर नहीं करते….. अभी साईकिल से हार गये तो रोज काम पर जाने से पहले साईकिल को गरिया देते हो कि इसी ने हराया, सोचिये कि आप को हाथी ने हराया होता तो क्या तब भी आप अपनी सईकिलिया को कोसते” ?

“मतलब” ?

“मतलब ई कि साईकिल बेचारी इसीलिये कोसी जा रही है कि आप उसी से हारे हो और वही आपके पास है, गाहे-बेगाहे सामने पड़ जाती है….. जो चुनाव चिन्ह हाथी से हारते तो कोसने के लिये हाथी कहां से लाते….. खुद का ठेकाना नहीं और कौसउवल के लिये हाथी पालियेगा” ?

“देखो गुलइची की महतारी, पहिले ही बहुत देर हो रही है, तुम अउर जियादे हमको न उलझावो”

“हम कहां आप को उलझा रहे हैं”

“एक तो हम मुखमंत्री नाहीं बन सके, और उपर से दतकेर्रा फाने हो”

“उत्तर परदेस का मुखमंत्री बनना आपके किसमतै में नहीं है तो क्या करोगे”

“अरे अइसे कइसे नहीं है – देख लेना एक दिन हम संकठा सिंह ‘हिलोर’ उत्तर परदेस का मुखमंत्री बनि के रहेंगे हां, बता देते हैं साफ”

“अरे जाइये, नाम संकठा और आये हैं मुखमंत्री बनने”

“देखो.....देखो तुम हद से जियादे आगे बढ़ि रही हो, भला क्या बुराई है हमारे नाम में” .

“हम काहें मुखमंत्री नहीं बन सकते” ?

“वो इसलिये कि आप के नाम में तीन ही अच्छर है… ‘सं’ ‘क’ ‘ठा’ और उत्तर परदेस का चलन है कि यहां वही मुखमंत्री बनेगा जिसके नाम में चार अच्छर हो”

“हांय....क्या बक रही हो” ?

“और क्या....देख लो...राजनाथ के नाम में चार अच्छर....मायावती....चार अच्छर....मुलायम चार अच्छर....और अखिलेस चार अच्छर” !

“तो क्या हम इसलिये मुखमंत्री नहीं बन पाये कि हमारे नाम में चार अच्छर नहीं है” !

“और क्या….. यहां तक कि कल्याण के नाम में एक अच्छर लंगड़ ही सही चार अच्छर का रिश्ता कायम है”.

“तुम्हारी बात पर बिसवास नहीं होता गुलईची की महतारी” .

“बिसवास करो न करो....तुमहारी मरजी….. देखे तो थे पांच अच्छर वाले जगदंबिका को एक ही दिन में उत्तर परदेस की कुरसी छोड़नी पड़ी थी”.

“हां सो तो है….. तो क्या कहती हो, नाम बदल दूं.....संकठा से संकठेस रख लूं” ?

“संकठेस रखिये कि लंठेस रखिये...हम जा रही हैं अदहन रखने...तुम्हारे पेट-पटौनी का इंतजाम करने........अउर हां, इतना जानती हूं कि उत्तर परदेसवा चार नाम वालों से चले न चले तुम्हारे घर की रसोई चार अच्छर वाले सिलिंडरै से चलती है..... बात बता दूं साफै-साफ......चलती हूं...न...”.

"अरे सुन तो गुलईची की महतारी....अरी मेरा नया नाम तो बताती जा.....अरी सुन तो....अरी....... " :-)


- सतीश पंचम

14 comments:

संजय @ मो सम कौन ? said...

अच्छर महिमा अपरंपार:)

Vivek Rastogi said...

जैसे गाड़ी भी चार अच्छर के पेटरोल से चलती है, अच्छर पर खतरनाक विश्लेषण !

देवेन्द्र पाण्डेय said...

:)

काजल कुमार Kajal Kumar said...

एक और फ़ि‍ल्‍मी क की तर्ज़ पर एक स और जोड़ लेना चाहि‍ए मसलन स्‍संकठा, क्‍या जाने बात बन जाए

संतोष त्रिवेदी said...

:-):-)

Rahul Singh said...

हाथी पर भारी सायकल.

ajit gupta said...

ओह नाम ने सारा गुड़-गोबर कर दिया। अब रोज गरियाओं सायकल को। धांसू।

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

ऊ नाम राखि लेव जौन तोहरे दादा गोहरावत रहेन- “संकठवा”

च‍उचक पोस्ट
:)

रंजना said...

हा हा हा हा...बढ़िया व्यंग्य काढ़ा आपने..

वैसे यह वयंग्य रहिये कहाँ गया है, सच्चाई बनता जा है...

अब तो लगता है अगले लगन(चुनावी लग्न) में भरमार लग जायेगी पुराने जोगियों के नए नामों की...

सोनिया मैया आ राहुल बाबा कौन सा नाम रखेंगे ...??? अनुमान लगाइए...

प्रवीण पाण्डेय said...

चुनाव चिन्ह अपने आप में बहुत कुछ कहते हैं..

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

बहुत बढ़िया... क्या विश्लेषण किया आपने...
सादर.

Arvind Mishra said...

इति श्री मुख्यमंत्री नामकरण पोस्टम~!

अनूप शुक्ल said...

क्या बात है जी! क्या बात है! :)

abhishek shrivastava said...

kamal ka bhunsa kuutai karte hain satees bhai,hanste hanste pet me darad ho gaya.waise दतकेर्रा ka kya matlab hota hai?

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'
A Photo from - Thoughts of a Lens

ढूँढ ढाँढ (Search)

Loading...
© इस ब्लॉग की सभी पोस्टें, कुछ छायाचित्र सतीश पंचम की सम्पत्ति है और बिना पूर्व स्वीकृति के उसका पुन: प्रयोग या कॉपी करना वर्जित है। फिर भी; उपयुक्त ब्लॉग/ब्लॉग पोस्ट को हापइर लिंक/लिंक देते हुये छोटे संदर्भ किये जा सकते हैं।




© All posts, some of the pictures, appearing on this blog is property of Satish Pancham and must not be reproduced or copied without his prior approval. Small references may however be made giving appropriate hyperlinks/links to the blog/blog post.