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Thursday, March 8, 2012

महीन राजनीति

"जी उन तमाम मूरतियों का क्या करूं जो चौक-चौराहे पर जगह जगह लगी हैं"

"लगी रहने दो, कौन तुमसे तगादा कर रही हैं".

"लेकिन यह ठीक नहीं लग रहा.... सरकार हमारी, शासन हमारा लेकिन मूर्ति उस विरोधी की".

"तुम यार हो गजब.... एक बार कह दिया कि लगी रहने दो मूरतियां तो समझ नहीं आता क्या" ?

"लेकिन कोई तुक तो हो उनके बने रहने में"

"कुछ काम बेतुके भी किये जाते हैं, एक यह भी मान लो".

"लेकिन" ?

"लेकिन क्या" ?

"कल को कोई उन मूर्तियों पर कालिख पोत दे, चप्पलों का हार पहना दे, जानबूझकर क्षतिग्रस्त करने की कोशिश करे तो" ?

"तो क्या ? निपट लेंगे ऐसे तत्वों से".

"ऐसे तत्वों से निपटना आसान नहीं होता। देखा नहीं....यह कहते कि हमारे आराध्य का अपमान किया गया.....कई जगह गोलीयां भी चल जाती हैं".

"तो ये मूर्तियां कौन सी आराध्य की श्रेणी में आती है".

"आज नहीं हैं, कल को हो जाएंगी"

"जब होंगी तब देखा जायेगा".

"नहीं वो बात नहीं, आराध्य बनने के बीज इन्हीं मूर्तियों की बदौलत बो दिये गये हैं। अब तो केवल समय का फेर है.....आज नहीं तो कल वह बीज फलेंगे जरूर".

"तुम यार बड़े शंकालु-जीव लग रहे हो."

"आप को मेरी बातें विश्वास के काबिल नहीं लग रहीं तो न सही लेकिन सोचिये कल को इन्हीं मूर्तियों के साथ छेड़छाड़ हो जाय तो विरोधियों को कहने का मौका मिल जायेगा कि जब निर्जीव खड़ी मूर्तियों तक की सुरक्षा नहीं कर पाते तो जीते जागते लोगों की क्या रक्षा कर पायेंगे"

"निर्जीव खड़ी मूर्तियों की सुरक्षा से क्या मतलब......हम क्या यहां मूर्तियों की रक्षा करने के लिये बैठे हैं.....एक वही काम रह गया है, कहने दो विरोधियों को....उनसे उस वक्त निपटा जायगा.... ये बाहर शोर कैसा है" ?

"जी ये लोग आप के पैतृक गाँव से आये हैं...कह रहे हैं आपका नाप-जोख लेना है, आपकी आदम कद मूर्ति की स्थापना करना चाहते हैं".

"अरे हम क्या कोई भगवान हैं। मना कर दो कि हम इन झंझटों में नहीं पड़ते".

"जी बहुत कहा लेकिन वे टल ही नहीं रहे".

"कौन कौन हैं, क्या नाम बता रहे हैं".

"जी एक कोई रामकलेश हैं, एक जगमोहन जी हैं, एक रामअजोर...."

"ओह....ये रामअजोर कब से हमारा भक्त हो गया" ?

"जी वही आदमी उनका प्रतिनिधी बनकर कह रहा था कि आपका नाप-जोख करना है.....आप उनके आराध्य हो".

"चप्पल लाना जरा.....मार कर भगावो सालों को....मूरति बनाने आये हैं..... साले कल तक यही हमारे पिछवाड़े डण्डा किये थे....ऐसे ही लोगों की वजह से पार्टी गर्त में चली गई थी.... हटाओ सालों को.... और सुनो.... वो क्या कह रहे थे....मूर्तियों से छेड़छाड़, कालिख और हार....क्या क्या......"

"जी वही जो आप सुने थे....अब हम जा रहे हैं आप को जो समझ आये आप किजिये"

"अरे तुम मूर्तियों की फिक्र मत करो....कोई न कोई साला यह खुराफात करेगा ही..... कानून व्यवस्था बिगड़ी तो हम खुद आदेश जारी कर देंगे कि इन मूर्तियों को लेकर कानून व्यवस्था बिगड़ रही है, हटाया जाय.....अभी खुद हटा देंगे तो समझ रहे हो न....."

"जी...."

"तो जाओ"

"उन लोगों से क्या कहूं..." ?

"कह दो...जाकर हल जोतें.....लड़के-बच्चों को समय दें.... ये फिजूल का उजबकई करना छोड़ दें......न मार-मार के हमईं इनकी मूर्ति बना देंगे.....राजनीति ससुरी जो न कराये"।


- सतीश पंचम

14 comments:

GYANDUTT PANDEY said...

पंचलाइन - जो कल तक पिछवाड़े डण्डा किये रहता है, वो आज मूर्ति बनाता है।

देवेन्द्र पाण्डेय said...

महीन व्यंग्य।

प्रवीण पाण्डेय said...

खड़ी मूर्ति में बदले की अधिक संभावनायें हैं..

संतोष त्रिवेदी said...

:-)

कौशल किशोर मिश्र said...

"अरे तुम मूर्तियों की फिक्र मत करो....कोई न कोई साला यह खुराफात करेगा ही..... कानून व्यवस्था बिगड़ी तो हम खुद आदेश जारी कर देंगे कि इन मूर्तियों को लेकर कानून व्यवस्था बिगड़ रही है, हटाया जाय.....अभी खुद हटा देंगे तो समझ रहे हो न....."

jai baba banaras...

संतोष त्रिवेदी said...

जीत की सारी खुमारी उतार दो,
बहके हुए लोगों की यारी बिसार दो,
सपने हमें दिखाए जो अभी-अभी,
हकीकत में उनको जमीं पर उतार दो !!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

राजस्थान में एक समय हनुमानों की मूर्तियों के नाक कान तोड़ने के मामले हो रहे थे तो प्रशासन रातो रात उनकी मुरम्मत करवा के रंग पुतवा देता था कि सांप्रदायिक धंधा न होने लगे... पर यहां तो राजनीतिक धंधा हो चला है ☺

Rahul Singh said...

मूर्त में अमूर्त.

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

ये मूर्तियाँ कभी न कभी बवाल तो कराएंगी ही...।
जितना टल जाय उतना ही अच्छा।

ajit gupta said...

अखिलेश जी फरमा रहे थे कि यहाँ अस्‍पताल बना देंगे लेकिन यहाँ पक्षी विहार बना देना चाहिए। सारी मूर्तियों पर पक्षी आकर बैठेंगे और फिर क्‍या क्‍या नहीं करेंगे?

वाणी गीत said...

अभी खुद हटा देंगे तो समझ रहे हो न....."
सब समझ रहे हैं !

Er. Rahul kumar said...

kya khoob kaha sir!

abhishek shrivastava said...

in murtiyo ko yu hi chod dein 2-3 hazar saal baad khudai mein milne par logon ke reserch ke kaam aayengi

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

ये अन्दर की बात है, इतने पहले प्रैस में लीक कैसे हो गई?

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