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Friday, October 28, 2011

ये भी इंडियै में होना था ? ........धुत्त..

        इस देश के कुत्ते तक फरारी से तेज भागते हैं। कम से कम इस वक्त समाचारों को देख कर तो यही महसूस हो रहा है।  फरारी के टेस्ट ड्राईव के दौरान कुछ कुत्ते न जाने किस ओर से आये और ट्रैक की ओर दौड़ लगा बैठे। बहुत संभव है माईकल शूमाकर ये सब देख हीनभावना से ग्रस्त न हो गये हों कि सारा जहां जीतकर मैं हारा तो इसी देश में जहां के कुत्तों तक ने मुझे चैलेंज दे दिया, हाय रे हतभागी।

        उधर इन कुत्तों के जज्बे को देख कुत्ता कम्यूनिटी ने आश्चर्यमिश्रित खुशी व्यक्त करते आज पार्टी करने का मन बनाया है। सुना है कि चेकोस्लोवाकिया से विदेशी नस्ल की एक श्वान नर्तकी को भी बुलाया गया है जिसके बारे में प्रसिद्ध है कि उसके  सड़क पर निकलते ही ट्रैफिक जाम हो जाता है, सारे के सारे कुत्ते वहां इकट्ठे हो जाते हैं। वैसे अंदर की खबर तो ये है कि रेस के आयोजकों ने ही उस श्वान नर्तकी को डबल पेमेंट देकर बुलाया है ताकि सारे कुत्ते इसके आस पास बने रहें और फरारी की रेस शांतिपूर्वक निपट जाय।

      खैर, कुछ कचहरीबाज  कुत्तो ने बाकायदा जानकारी लेने हेतु आवेदन देकर  पूछा है कि आखिर वह क्या कारण था कि बिहैवियरल साइंस के प्रतिपादक Mr. Pavlov ने कुत्ते को ही अपने Classical Conditiong  प्रयोगों के लिये चुना। आप लोगों की जानकारी के लिये बता दूं कि मनोविज्ञान के एक  प्रयोग के दौरान व्यवहार का अध्ययन करने के लिये  एक कुत्ते को बांध कर रखा जाता था और एक घंटी समयानुसार बजाई जाती। घंटी बजने के तुरंत बाद प्लेट में भोजन परोसा जाता। इस क्रिया के दौरान देखा गया कि भोजन देखते ही कुत्ते के लार चूने लगता और उसे माप लिया जाता। धीरे धीरे उस कुत्ते की ये हालत हो गई कि वो बिना भोजन देखे केवल घंटी की आवाज सुनते ही लार चूआने लगता। बस यूं मान लिजिये कि उसकी हालत बिल्कुल हमारे भ्रष्ट राजनेताओं की तरह हो गई। एकदम पावलोव के कुत्ते की तरह हमारे राजनेता भी बिहेव करते हैं।

       मसलन पहले के समय सड़क बनने का प्रस्ताव बनता था, फिर बाकायदा टेंडर निकलता था और फिर सड़क बनाने के बाद जो कुछ ग्राह्य अग्राह्य होता था नेताओं तक पहुंचता था। नेताओं की लार तब सड़क बनने के दौरान ही टपकती थी कि इसमें से देखें कितना माल मसाला मिल जाता है। होते होते अब ये समय आ गया कि प्रस्ताव पास होने की कौन कहे, केवल सुनाई भर दे जाय घंटी की तरह....हमारे नेताओं की लार टपकने लगती है, सड़क फड़क जब बनेगी तब बनेगी, ये बताओ हमारा हिस्सा कितना। कुछ तो सड़क होने पर भी दुबारा उसे खन बहाने से नहीं चूकते। एक तरह से देखा जाय तो pavlov के कुत्ते से ज्यादा कुत्तई हमारे इस वर्ग में बेखटके देखी जा सकती है। एक बार कुत्तों का Saliva मापक यंत्र खाली रह सकता है लेकिन नेता वर्ग का Saliva ? लाओ न कितना मपनी लाना है, गैलन के गैलन भर देंगे फिर ले जाइये जहां भी अध्ययन आदि के लिये ले जाना है।

       उधर सुनने में आया है कि अब गहन जांच की जा रही है कि फार्मूला वन के ट्रैक पर कुत्ते कैसे आ गये। अच्छा तो यह होगा कि श्री धर्मेन्द्र जी से गुजारिश की जाय कि जब तक फार्मूला वन की रेसिंग चले तब तक कृपा करके ट्रैक के आस पास बने रहें।

 वो क्या है कि उनके डॉयलॉग - "कुत्ते मैं तेरा खून पी जाउंगा" की दहशत कुत्ता जमात में  कुछ ज्यादा ही है :)


- सतीश पंचम

20 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

पता नहीं यहाँ कौन जीतेगा, कुत्तों के भविष्य का प्रश्न है।

डॉ. मनोज मिश्र said...

सही ओर इशारा है,आभार.

Kajal Kumar said...

कुत्तों का क्या है ये तो कई दूसरी जगह भी पहुंच जाते हैं...

Abhishek Ojha said...

पोस्ट हे हट के एक बात याद आई, हॉस्टल में कुत्ता-घंटी वाले प्रयोग पर हम अपने एक दोस्त का खूब मजाक उड़ाते थे :)

आशीष श्रीवास्तव said...

इसमे कांग्रेस का हाथ है या संघ का ?

Rahul Singh said...

पावलो प्रयोग मानवीय 'सीखने' के व्‍यवहार को समझने के लिए ही किया गया था.

Vivek Rastogi said...

सटोरिये तो सट्टा लगा रहे हैं कि कुत्ता फ़िर रेस के मैदान में होगा।

shilpa mehta said...

:)
:D
Number 0ne Formula (race) hai :) :)

shilpa mehta said...

@ ashish ji - joint parliamentary jaanch committee baithai jaane kee mang karee jaaye ?
:)

सतीश पंचम said...

मुझे तो लगता है बहुत पहुँचे हुए कुत्ते थे, तभी तो जहां लाख डेढ लाख का टिकट मिल रहा था वहां वे फ्री में पहुँच गये थे :)

आशीष श्रीवास्तव said...

@Shilpa ji,
पार्लीयामेंटरी कमेटी की मांग के लिए अनशन किया जाए या योग शिविर ?

सञ्जय झा said...

kabbi to man jaya karen sarkar.......
udhar sukhne na pata idhar dhul dete
hain......

majjedar....

jai ho...

Gyandutt Pandey said...

विचित्र समाज है यह! कुत्तों से ज्यादा फरारी को महत्व देता है।

मनोज कुमार said...

सुनने मेम आया है कि रह-रह कर आती धूल भी अपनी खास भूमिका निभाने वाली है। कुत्ते भी!

संतोष त्रिवेदी said...

kutta-mahima jaankar to lagta hai ki ham sasur kutton se bhi gaye-gujre hain ?

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

आपने कुत्तो की तुलना नेता से कर क्या दी, कुत्ता समाज आहत हो गया। खबर मिली है कि इस बेइज्जती के लिए वे आपके ऊपर मानहानि का मुकदमा ठोंकने वाले हैं। तैयार रहिए...। :)

Arvind Mishra said...

पकड़ के मारा है साले इन कुत्तों को !

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

@इसमे कांग्रेस का हाथ है या संघ का ?
ज़ाहिर है, विदेशी शक्तियों का हाथ ही है। कुत्तोंके बारे में कोई कमेंट्स नहीं!

वाणी गीत said...

अथ श्री कुत्ता पुराण :)
सुन्दर विचार, इसमें सुन्दर क्या है , दूसरों को ढूँढने दीजिये !

ajit gupta said...

अजी अब तो ऐसी लार टपकती है कि पूरा प्रोजेक्‍ट ही साफ हो जाता है। बहुत तगड़ा व्‍यंग्‍य।

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