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Saturday, October 22, 2011

अखिल भारतीय 'बाबा-बाबी' शैक्षिक अनुसन्धान संस्थान

    बेहद अय्याश माने जाने वाले  लिबिया के  तानाशाह गद्दाफी के मारे जाने के बाद बहुत संभव है उसकी ढेर सारी महिला बॉडीगॉर्ड्स अब रोजगार हेतु 'बाबा-बाबी स्पेशिलिटी कोर्स' करके कहीं प्रवचन आदि देने की तैयारी कर रही होंगी ......नाम भी गजब......सुश्री गद्दाफी देवी 'गॉर्जियस' .......सुश्री ब्लैक बेल्टहीया जी 'पटाखा'......सुश्री चमको 'फुलौरी'.......


         सोचता हूं मैं भी एकाध ऐसा ही आश्रम खोल लूं जहां कि ऐसे हालात के मारे बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध हो सके, कुछ खा कमा सकें। नाम हो - अखिल भारतीय बाबा-बाबी शैक्षिक अनुसन्धान केन्द्र। जहां तक मुझे लगता है कि आज रोजगार उपलब्ध करवाना प्राथमिकी है, भ्रष्टाचार तो कल भी मिट सकता है। यदि लोग बेरोजगार रहेंगे तो कल को लोग चोरी, राहजनी, लूटमार पर उतर आएंगे जो कि भ्रष्टाचार से कहीं ज्यादा घातक साबित हो सकता है।

        इसी बात पर सरकार को एक प्रस्ताव भेजने का मन कर रहा है जिसमें कि मुख्य बातें बिंदुवार ढंग से रखी जांय, मसलन -

  • बाबा-बाबी स्पेशिलिटी कोर्सेस से रोजगार सृजन में सहायता मिलेगी।
  • इसमें जीरो इन्वेस्टमेंट है, बोलबचन और स्नेहवचन से काम चल जाता है। बैंकों से लोन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी, कर्ज के चुकते आदि का झंझट भी नहीं।
  • ऐसी शिक्षा व्यवस्था रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट आदि के जंजालों से मुक्त होगी।
  • आये दिन होने वाले मनरेगा आदि के भ्रष्टाचार से छुटकारा मिलने में आसानी होगी। आखिर कितनी सड़कें कागजों पर बनाई-बिगाड़ी जाएंगी और कब तक ?
  • शिक्षा पर सरकारों को बजट का कम हिस्सा खर्च करना पड़ेगा। देखा गया है कि हमारे बजट का ढेर सारा पैसा आई आई टी आदि तकनीकी संस्थानों पर खर्च होता है लेकिन वहां से इंजिनियर बनने के बाद वे बच्चे विदेशों में चले जाते हैं। उन पर सब्सिडाइज्ड शिक्षा वाला पैसा फिजूल चला जाता है, विदेशी नागरिक उनकी प्रतिभा का उपयोग कर लेते हैं। बाबा-बाबी स्पेशिलिटी कोर्स से निकले लोग इसका उल्टा करेंगे। वे विदेशी नागरिकों को भारत में बुला प्रवचन देंगे जिससे कि विदेशी मुद्रा की आवक बढ़ेगी, पर्यटन का विकास होगा। इस प्रकार से बाबा-बाबी इंस्टिट्यूटस ब्रेन ड्रेन की समस्या यानि प्रतिभा पलायन रोकने में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से सहायक होंगे ।
  • इस तरह की शिक्षा व्यवस्था हेतु ज्यादा जमीनों के अधिगृहण की जरूरत नहीं पड़ेगी और न ही नोयडा एक्सटेंशन आदि जैसा टेंशन पनपेगा। जिसे जहां सुभीता होगा वहीं पेड़ के नीचे अपनी प्रवचन की दुकान खोल सकता है।
  • इन क्रियाकलापों से विश्व मानचित्र पर भारत अपने वही पुराने अतीत 'गुरूओं वाला देश' जैसा स्टेटस पा सकता है। ए एल बाशम जैसे इतिहासकार अपनी किताबों का नाम Wonder that was india लिखने की बजाय 'Wonder that is india' रख सकते हैं।
  • हमारे नीति नियंताओं का शुरू से मानना रहा है कि हमारी शिक्षा व्यवस्था सर्वसुलभ हो, हर किसी को शिक्षा उसकी अभिरूचि के अनुसार मिले, जीवन यापन में सहायक हो। इस बात में बाबा-बाबी इंस्टिटयूट्स पूरी तरह सहायक प्रतीत होते हैं। वैसे भी माना जाता है कि लोगों को अपने से ज्यादा दूसरों को समझाने में रूचि होती है, और यह गुण बाबा-बाबी प्रशिक्षुओं के लिये प्लस प्वाइंट है। बहुत संभव है भारतीय इस मामले में शेष विश्व से बीस ही ठहरें।  
         इन तमाम बातों को देख मुझे लग रहा है कि जब तक विदेशी लोग पेटेंट आदि के चक्कर में घुसें हमें अखिल भारतीय बाबा-बाबी शैक्षिक अनुसंन्धान केन्द्र खोलने में तनिक भी देरी न करनी चाहिये। वरना कल को ये हो सकता है कि हम केवल ताकते रह जांय और गद्दाफी की कोई महिला अंगरक्षक भारत में आकर प्रवचन देते देते कहीं 'Gaddafian Thoughts and Philosophy' न पढ़ाने लग जाय  :)


 - सतीश पंचम

17 comments:

shilpa mehta said...

ओह ओह - यह व्यंग्य जनरल ही था ना ? किसी एक "बाबा" या "बाबी" पर तो नहीं था ?? आजकल यह व्यंग्यबाणों का जो सिलसिला चलता है - यह बड़ा डरावना लगता है मुझे तो बाबा - पता नहीं किस दिशा में चले हैं ?

कौन इन्हें अपने ऊपर ले कर कब रीएक्ट कर जाए - कुछ पता नहीं लगता |

सतीश पंचम said...

मैंने जनर्लाईज्ड व्यंग्य ही लिखा है, किसी के उपर ओढ़ाते हुए नहीं। अब इसे कोई अपने से जोड़ने लगे तो कोई क्या कर सकता है :)

स्पेसिफिकली यह व्यंग्य फलते फूलते बाबा इंडस्ट्रीज को लेकर लिखा गया है जिसमें कि अपार संभावनायें दिख रही हैं :)

shilpa mehta said...

:)

shilpa mehta said...

vaise bhi satish ji - ab yah "engineering" aur "medical" college ka dhandha utna "munaafe vaala" to rahaa nahi

koi aashcharya nhai yadi yah "अखिल भारतीय 'बाबा-बाबी' शैक्षिक अनुसन्धान संस्थान" bhi shuru ho jayein :)

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

लेकिन रामलीला मैदान कांड (भाग-१) के बाद ‘बाबा-इंडस्ट्री’ का शेयर डाउन चल रहा है। अन्ना समर्थक भी पिटने लगे हैं; तो क्या उम्मीद की जाय।

लगता है कि राजनेता अपनी खोयी हुई जमीन फिर से हासिल करने वाले हैं।

प्रवीण पाण्डेय said...

आपकी रोजगार योजना कामयाब रहेगी।

Arvind Mishra said...

इसके पहले वो आ जाय जल्दी कीजिये गोमती का किनारा आपका मुन्तजिर है ....:)

दीपक बाबा said...

अरे भाई यहाँ तो कुछ और ही नज़ारा है, हम तो सोचे अपुन टाइप के लोगो को कुछ काम वाम मिलेगा.

संगीता पुरी said...

Gaddafian Thoughts and Philosophy
बढिया विषय रहेगा !!

anshumala said...

प्रस्ताव तो सरकार मान जाएगी और पास भी कर सकती है पर मंत्री जी का निजी फायदा क्या होगा सब बात तो उसी पर निर्भर होगा |

Khushdeep Sehgal said...

गद्दाफ़ी की मौत से एक दिन पहले हिलेरी क्लिंटन का अचानक लीबिया दौरा संयोग था या...

जय हिंद...

संतोष त्रिवेदी said...

एकठो हमरा भी रजिस्ट्रेसन किया जाय !

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

वाह, बहुत सुन्दर! पधकर अच्छा भी लगा और दुख भी हुआ कि अब "बाबागिरी सर्टिफ़िकेशन कोर्स" पर मेरी महीनों से ड्राफ़्ट में पड़ी अधूरी पोस्ट अधूरी ही रह जायेगी।

ajit gupta said...

पुरानी परम्‍परा फिर शुरू करवाना चाह रहे हो, अर्थात परम्‍परावादी हो? हमारे यहाँ क्‍या कम है आज भी लगभग एक करोड हैं। दुनिया के कई देशों की तो इतनी जनसंख्‍या भी नहीं होगी। इन सभी को अमेरिका भेजना चाहिए जिससे वे अमेरिका को कुछ अच्‍छा सिखा सकें।

Gyandutt Pandey said...

सुना है कद्दाफी जी की बॉडीगार्डनियाँ उक्रेन भाग गई हैं! आप तो आश्रम वहीं जा कर खोलें! :)

अमित शर्मा said...

पञ्च दिवसीय दीपोत्सव पर आप को हार्दिक शुभकामनाएं ! ईश्वर आपको और आपके कुटुंब को संपन्न व स्वस्थ रखें !
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"आइये प्रदुषण मुक्त दिवाली मनाएं, पटाखे ना चलायें"

सञ्जय झा said...

hamra application bhi submit kiya jai
.....................

jai ho......

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