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Tuesday, October 18, 2011

भदेस बतकूचन

- ई आडवाणीया भी रथ लेकर आ रहा है, देखिये कैसे इसवागत के लिये लोग ठाड़ हैं


- जिसको कुछ काम नहीं होता वही ठाड़ हो ऐसे काम में लगा रहता है

- तो अभी कौन सा आप खट रहे हो, मन हो तो आप भी ठाड़ हो जाइये

- वो लिफाफा मिले तो ठाड़ होउं, लेकिन मिले तब न

- कौन सा लिफाफा

- वही जो पत्रकार लोग को मिला था जिसमें हजार हजार का नोट था, अखबारों में फेवर में लिखने की इलतिजा करते हुए

- तब क्या खाकर कैश फार वोट मामले में भजपाई हलकान हैं, सुना है जेदुरप्पौ नाम का चमचमाता मेडल इनके सीने पर टंगा है

- औ कंगरेसी कौन से झुल्ले मुल्ल हैं, उनके पास कोई तमगन की कमी है, एक से एक घोटालेबाज चलित्तर

- कौन नहीं हैं, सपै को देख लिजिये, मायावतीयै को देख लिजिये....हर कोई एक से एक जबरजंग

- तो किसको वोट दिजिएगा

- अब जही तो यच्छ प्रश्न है

- तब जाकर यच्छै से पूछिये उसका उत्तर

- उनको भी न मालूम होगा

- तब किससे पूछियेगा

- यह दूसरा प्रश्न है

- करोड़पति करोड़पति नहीं खेल रहा हूं, वाकई पूछ रहा हूं

- यह तीसरा प्रश्न हो गया

- लांण.......... तुम यहीं प्रश्न गिनते रहो, हम चलते हैं

- कहां

- चउथा प्रश्न पूछने

- प्रश्न का नाम गाम कुछ होगा

- "वोटवा केंहर पड़ी"  ?   

:-)

****************
 
              -  Satish Pancham
.

12 comments:

ajit gupta said...

वोटवा केंहर पडी का अर्थ तो समझाओ भाई।

सतीश पंचम said...

इसका अर्थ है - 'वोट किधर को पड़ेगा' ?

Poorviya said...

.हर कोई एक से एक जबरजंग

- तो किसको वोट दिजिएगा
jai baba banaras....

rashmi ravija said...

अगिला बतकुच्चन कब पोस्ट करीबा??...मजा आई गवा..:)

डॉ. मनोज मिश्र said...

बढ़िया चिंतन.
@@@- "वोटवा केंहर पड़ी" ?

:-)..
....जहाँ बिरदरी वाले कहियां या जहाँ माल मिली.

संतोष त्रिवेदी said...

बुढ़ापा ख़राब करै की पूरी तय्यारी हवै !

Arvind Mishra said...

सब उहीं वोटवा के खातिर हुयी रहा बा !

anshumala said...

पत्रकार तो कई बार पञ्च सितारा होटले के खाने पर बिक जाते है किस गधे ने नोट देने की बेफकुफी की | एक बार पंचा साल मिले तो सब अपना मैडल बढ़ा लेंगे | अब तो एक विकल्प और चाही एमे से कोनो नहीं !

प्रवीण पाण्डेय said...

लिफाफा सबको मिलता है क्या?

singhSDM said...

क्या बात है.... धुर देसी अंदाज़ और बात पते की . लिखते रहिये.

वन्दना अवस्थी दुबे said...

एकदम चकाचक बतकही. ये कैश फ़ॉर कवरेज़ का मामला सतना में भी हुआ :) लिखा है हमने.

Gyandutt Pandey said...

चऊथे सवाल का जवाब मिल जाये तो पोस्ट में ठेलने के पहले हमें बता दीजियेगा।
बाकी, इस चौथे सवाल को "ऊंट किस करवट बैठेगा" के नाम से भी जाना जाता है। ऊंट की करवट के ज्यादा विकल्प नहीं होते।
सांपनाथ या नागनाथ - यही च्वाइस है।

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