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Monday, October 3, 2011

इंतजार वाला दर्शन........दर्शन वाला इंतजार

         मुंबई के एक मंदिर में दर्शन करने के दौरान कुछ आवाजें कानों में पड़ रही थीं। कभी मराठी, कभी गुजराती तो कभी हिन्दी में।  तनिक सुनिये तो।

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- शांतिबेन वाघेला,  आप जहां कहीं हों, चप्पल स्टैंड के पास आ जाइये। वहाँ आपके पति आपका इंतजार कर रहे हैं।




- जिन लोगों ने मंदिर में दर्शन कर लिये हैं वो कृपया बाहर की तरफ निकल जांय, गेट के पास भीड़ न लगायें।


- तीन नंबर गेट के कार्यकर्ता स्त्रियों और पुरूषों के लिये अलग अलग कतार बनाये रखें। जो लोग अपनी पत्नी या पति से अलग होकर लाईन में नहीं लगना चाहते उन्हें आगे मत जाने दिजिए। व्यवस्था बनाये रखिये। लेडिज अलग, जेन्टस अलग।


-  देखिये आधे घंटे महिलाओं की लाइन छोड़ी जा रही है। फिर पुरूषों के लिये लाइन छोड़ी जाएगी। आप लोग हमारा सहयोग करें।


-  मोबाइल पर बातें न करें। कृपया अपने मोबाइल को बंद रखें।


- आगे आगे बढ़ते रहिये। आगे...अरे आप पीली शर्ट अरे आगे बढ़िये क्यों एक जगह रूक कर खड़े हो भाई साब।


-  आप लोग चप्पल उतार कर जाइये। चप्पल स्टैंड कई सारे बने हैं। बिना मूल्य सेवा है। टोकन लेते जाइये चप्पल उतारते जाइये।


- ओ मोबाइल, अरे मोबाइल भाई साब, अरे सुनो यार आपसे ही कह रहा हूं। मोबाइल बंद रखिये।


- जो लोग मोबाइल पर गाने सुन रहे हैं, कृपया एक कान का प्लग निकाल कर रखें। निर्देश सुनते रहें।


- संगीता जोशी, आप जहां कहीं हों कृपया चप्पल स्टैंड के पास आ जाइये आप के पति वहां इंतजार कर रहे हैं।


- देखिये मैं बार बार कह रहा हूँ जल्दी दर्शन किजिए। बहुत ज्यादा कतार है।


- जब खुद की बारी आती है तो आप लोग भी धीमे हो जाते हो, जरा पीछे वालों का भी खयाल किजिए। चलिये जल्दी दर्शन किजिए।


- चप्पल उतार कर जाइये।
- अरे ओ भाई साहब सुनने में नहीं आ रहा क्या, मोबाईल बंद रखने के लिये कह रहा हूं।


- जल्दी चलिये। आप लोग पुरूष होकर क्या महिलाओं की तरह धीरे धीरे चल रहे हैं। आप लोगों से ज्यादा तेज तो महिलायें हैं। एक हाथ में बच्चे भी संभालती हैं, एक हाथ में पर्स, फिर भी आप लोगों से ज्यादा तेजी से दर्शन करती हैं।


- अरे भई जल्दी करिये, महिलाओं की कतार चालू होने वाली है।


- जल्दी...जल्दी। गेट नंबर दो के लोग महिलाओं और पुरूषों की कतार अलग अलग करवाने में मदद करें।


- मंदिर में दर्शन के बाद आप लोग कहां मिलेंगे तय  कर लें .....पुरूष..... महिला अलग अलग कतार बनाते जांय।


- ओ जीन्स वाले भाई साब.......... बाद में मिल लेना........कहीं भागी नहीं जा रहीं.........दर्शन हो जाने दिजिए फिर बाहर खूब बातें किजिए......... पुरूषों की  कतार में लगिये।


- कार्यकर्ता लोग तैयार रहें। महिलाओं की कतार खोलने के लिये।


- महिलाओं से निवेदन है अपने गहने उतार कर बैग में रख लें।


- हाथ में चप्पल उठाए हुए मत चलिये भाई साब ,  पूजा की थाली नहीं है। पहले से मैं कह रहा हूं आप लोग चप्पल स्टैंड पर अपनी चप्पलें उतार कर आगे बढ़िये।


- विजयलाल शर्मा आप जहां कहीं हों चप्पल स्टैंड के पास आ जाइये आपकी श्रीमती जी आपका वहां इंतजार कर रही हैं। विजयलाल शर्मा जी।


- कृपया मोबाइल पर माधुर्य भरी बातें दर्शन के बाद करें। पूरा दिन पड़ा है आप लोगों के पास।


- लाल शर्ट.....ओ भाई साब , आप....हां आप ही से कह रहा हूं....कतार के साथ आगे बढिये....साइड में होकर किसी का इंतजार मत किजिए.....चलिये...


- अरे बाबा आप जिसका इंतजार कर रहे होंगे वो भी आगे ही कहीं मिलेंगे आप को। चलिये बढ़िये आगे।


- पुरूष कतार के लोगों से निवेदन है कृपया मुड़ मुड़ कर महिलाओं की कतार में अपनी श्रीमती जी को न तलाशें, आगे बढ़ते रहें।


- दर्शन में ध्यान लगाइये। मंदिर में दर्शन हो जाने के बाद बाहर श्रीमती जी से आप लोग मिल लेंगें। अभी मंदिर के दर्शन में ध्यान लगाइये।


- चप्पल स्टैंड के पास ही अपनी चप्पलें जमा करें नहीं तो बाद में आप ही लोग ढूंढेंगे।


- चार नंबर गेट। पुरूषों की कतार रोक दो। महिलाओं की कतार चालू किजिए।


- मंदिर के गर्भगृह में जो पुरूष दर्शन कर रहे हैं वो जल्दी से अपना दर्शन पूरा कर बाहर आ जांय। महिलाओं की कतार खुलने वाली है।


- चलिये जल्दी किजिये।


- रोक दो पुरूष कतार। महिलाओें के लिये रास्ता छोड़िये।


- चलिये बहेन जी जल्दी जल्दी।


- हांजी, चप्पल स्टैंड के पास चप्पल उतारती जाइये।


- अरे ढेर सारे चप्पल स्टैंड हैं। आप लोग एक ही जगह क्यों चप्पल उतार रही हैं।


- आगे बढ़िये, जल्दी जल्दी।


- अपने गहने उतार कर बैग में रख लिजिए।


- ओ बहेन जी, नीली साड़ी वाली बहेन जी, आगे भी चप्पल स्टैंड है उधर आगे बढ़िये।


- अरे आप लोग समझ क्यों नहीं रहे। एक महिला अपनी चप्पल जहां उतारती है जरूरी है क्या पीछे वाली महिलाएं भी वहीं उतारें। आगे भी चप्पल स्टैंड है।


- ओ भाई साब, महिलाओं की दर्शन कतार चालू है, अभी तक आपका दर्शन नहीं हुआ क्या। कार्यकर्ता जल्दी जल्दी मंदिर के प्रांगण से पुरूष दर्शनार्थियों को रूकने न दें।


- अरे बाबा, मैं बार बार कह रहा हूं जिन्हें अपनी श्रीमती का इंतजार करना है वो बाहर की ओर जाकर इंतजार करें। एक ही गेट है सभी महिलाएं वहीं से निकलेंगी।


- ओ बहेनजी, आप लोग क्यों ऐसा कर रही हैं। एक ही चप्पल स्टैंड पर भीड़ मत लगाइये। आगे भी है चप्पल स्टैंड।


- अरे साथ में हैं मतलब क्या एक ही जगह भीड़ करना है क्या। आगे बढिये।


- दिनेश शुक्ला, आप जहां कहीं हों चप्पल स्टैंड के पास आ जाइये आपकी श्रीमती जी आपका इंतजार कर रही हैं।


- चलिये जल्दी...जल्दी।


- अरे बहेन जी जल्दी किजिए...क्या आप लोग बातें करने में लगी हैं। चलिये बातें घर में जाकर करिए।


- बच्चों का हाथ मत छोड़िये। चलिये जल्दी चलिये।


- प्रशांत परब, आप जहां कहीं हों चप्पल स्टैंड के पास आ जाइये वहां आपकी श्रीमती जी आपका इंतजार कर रही हैं।


- चलिये चलिये जल्दी आगे बढ़िये.........


- चलिये.......कार्यकर्तागण गेट नंबर एक से पुरूषों की कतार खोलने के लिये तैयार रहें।


- बहेन जी, आप आगे बढ़िये, आप के पति भी अभी पिछली कतार से दर्शन करने के लिये आ जाएंगे। मुड़ मुड़ के मत देखिये....आगे बढ़िये।


- चप्पल स्टैंड के पास जो लोग मिल गये हों कृपया बाहर की ओर निकल जांय, भीड़ न करें।


- ओ बहेन जी, पीली साड़ी वाली बहेन जी। रूकिये मत आगे बढ़िये.....


- हांजी आप लोग रूकिये मत आगे बढ़ते जाइये.....चप्पल स्टैंड.....चप्प.... 
 
 
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- सतीश पंचम

28 comments:

संतोष त्रिवेदी said...

इंतज़ार,पुकार और बेक़रार.....दर्शन ऐसे भी और ऐसे ही सुफल होते हैं !

anshumala said...

चप्पल स्टैंड कितना जरुरी है हमसे सुनिये, मेरी इमारत के नीचे ही दुर्गा पंडाल सजता है कल ही हमारे रिश्तेदार (वो भी करोड़पति जिनके बारे में आस पास के सभी लोग जानते है) का जूता चोरी हो गया केवल ५ मिनट में ज्यादा भीड़ भी नहीं थी सोचिये कितने का था ?? पूरे ५ हजार का जूता था जो महिना भर पाहिले ही ख़रीदा था बाकायदा पत्नी जी हमें बता कर गई थी (ब्रांड का नाम भी बताया था पर अभी याद नहीं )कल आ कर बताया की नीचे पंडाल से चोरी हो गया बेचारी दुखी हो गई कहने लगी लोग पूजा करने आते है या ये सब करने | मेरे पतिदेव ने कहा शायद जूते की खबर ज्यादा ही दूर तक फैला दी थी |

प्रवीण पाण्डेय said...

इसमें भगवान के प्रति पुकार कहाँ है।

Rahul Singh said...

एकदम लाइव, आंखों देखी हो तो कितनी सहज, लिखने बैठे तो कितना सोचना पड़े.

Arvind Mishra said...

लेकिन इतना आपको याद कैसे रहा ?

रिकार्ड कर बाद में सुन सुन के लिखे क्या ?
रोचक !

ajit gupta said...

आपने जितने नाम पुकारे हैं ना उनमें यदि सारे ही ब्‍लागरों के नाम होते तो और भी आनन्‍द आता।

सतीश पंचम said...

अंशुमाला जी,

आपने तो गजब उदाहरण दिया :)

सचमुच जब किसी वस्तु की ख्याति कुछ ज्यादा ही फैल जाय तो इसी तरह के झोल झपाटा होने की आशंका रहती है :)

सतीश पंचम said...

प्रवीण जी,

भगवान के प्रति पुकार कहीं न दिखाई देने पर मैं भी अचरज में था। दरअसल यह कतार मुम्बई के महालक्ष्मी मंदिर की थी जहां पर कि लक्ष्मी जी का जयकारा सुनाने की या कहने का शायद प्रचलन कम ही है। दुर्गा जी के कतार में सुन भी सकते हैं - जयकारा शेरावाली दा, जय अम्बे या बोल दुर्गा मात की। लेकिन यहां कहीं सुनने में नहीं आया कि - बोलो लक्ष्मी मैया की जय।

संभवत: लक्ष्मी जी प्रत्येक प्राणी के लिये 'प्राईवेट जयकारे' के रूप में मानी जाती होंगी। यूं भी शास्त्रों में धन-वैभव, सोना चांदी का खुला गुणगान करने में कुछ संयम का अंश होता है। संभवत: वही बात यहां भी हो।

सतीश पंचम said...

अरविन्द जी,

इसे रिकार्ड करके फिर लिखने की जहमत नहीं उठानी पड़ी। शाम के समय फुरसत में बैठा और जब लिखने बैठा तो वही ध्वनियां पुन: हल्के हल्के स्मरण हो आईं। । सो जैसे जैसे लिखता गया.... बोलने का लहजा, माहौल आदि याद आते गये और ई पोस्टवा तैयार भई :)

सतीश पंचम said...

राहुल जी,

जी हां, यह बात मैने भी महसूस की है कि सोच सोचकर लिखने पर ये फ्लो नहीं बन पाता। प्रत्यक्ष देखने पर उसे उकेरना आसान हो जाता है।

सञ्जय झा said...

leo panchan da ne subere-subere
'mahalaxmi' ke darshan tapchik
istyle me karbayo....

jai ho....

सतीश पंचम said...

अजीत गुप्ता जी,

एक बार मन में आया कि ब्लॉगरों के नाम डाल कर पोस्ट लिखूं लेकिन फिर इरादा बदल दिया। ब्लॉगरों के नाम लिखने से कुछ सीमित सी हो जाती पोस्ट। एक घेराव सा लिये हुए। इसलिये वास्तविक नाम / माहौल को ही रहने दिया।

BTW - एक मौज तो ली ही जा सकती है :)

अनूप शुक्ल, आप जहां कहीं हों चप्पल स्टैंड के पास पहुंच जाइये वहां आपके परम मित्र
अरविन्द मिश्र इंतजार कर रहे हैं।

गिरिजेश राव आप जहां कहीं हों कृपया चप्पल स्टैंड के पास आ जांय वहां कोई उर्मी जी आपका इंतजार कर रही हैं।

ओ मोबाइल वाले भाई साब, मोबाइल में क्या अपडेट कर रहे हैं। दर्शन करने आय़े है तो दर्शन किजिए, जरूरी है क्या फेसबुक पर अपडेट किया ही जाय।

ओ बहेन जी, आप महिलाओं की कतार में खड़े होइये.....जरूरी है क्या पुरूषों की कतार में खड़े होना.....और आप भाई साब....महिलाओं की कतार से दूर खड़े रहिये। दर्शन करने आये हैं दर्शन किजिए.....चप्पल कृपया उतार कर जाइये।

प्रवीण पाण्डेय जहां कहीं हों चप्पल स्टैंड के पास आ जाइये आपकी श्रीमती जी आपका काफी देर से इंतजार कर रही हैं।

रश्मि रविजा जहां कहीं हों चप्पल स्टैंड के पास चली आयें। वहां आपकी सहेली आभाजी इंतजार कर रही हैं।

सतीश पंचम जहां कहीं हों तुरंत चप्पल
स्टैंड के पास आ जांय आपकी श्रीमती जी भी
आपका इंतजार कर रही हैं ...

कार्यकर्ताओं से निवेदन है कृपया ध्यान रखें, ढेर सारे ब्लॉगर चप्पल स्टैंड के पास जमा हो रहे हैं। पुराना हिसाब किताब पूरा करने के चक्कर में देखें कहीं चप्पलों का नुकसान न होने पाये :)

Deepak Saini said...

पोस्ट को पढते हुए ऐसा लगा रहा था की जैसे मैं भी मंदिर के अंदर हूँ

ajit gupta said...

नयी मौज में बहुत आनन्‍द आ रहा है।

रूप said...

Kuchh jama ! Pancham ki jagah saptam lag gaya....,!Kuchh jama ! Pancham ki jagah saptam lag gaya....,!

रोहित बिष्ट said...

नरेन्द्र (स्वामी विवेकानंद) ने सदैव माँ काली से ज्ञान-भक्ति और वैराग्य माँगा। ईश्वर से पुकार तो आध्यात्मिक उन्नति के लिए होनी चाहिए,दुनियावी जरूरतें तो स्वतः ही पूरी हो जाएँगी।सजीव वर्णन।

अनूप शुक्ल said...

मजेदार ही है। चकाचक च! :)

श्रीलाल शुक्ल जी ने एक लेख में मंदिर की घटनाओं के बारे में लिखा है। उसमें उन्होंने लिखा था : मैंने अपने जूते कार में उतार दिये। इससे एक तो जूते चोरी जाने की संभावना कम हुई दूसरे श्रद्धा का दिखावा भी हो गया। पत्नीजी को विश्वास था कि यहां चप्पल चोरी नहीं जायेंगी सो वे पहने रहीं।

मंदिर से लौटने पर पता चला कि श्रीमती जी की चप्पलें चोरी हो गयीं थीं।

मुझे आन्तरिक खुशी हुई कि चोरों ने मेरे विश्वास की रक्षा की।


बाकी आपकी ब्लागर वाली टिप्पणी के बारे में जब आप अनूप शुक्ल के बारे में कहते

अनूप शुक्ल, आप जहां कहीं हों चप्पल स्टैंड के पास पहुंच जाइये वहां आपके परम मित्र
अरविन्द मिश्र इंतजार कर रहे हैं।


तो अनूप शुक्ल पलट के पूछते- कौन वाले अरविंद मिश्र ? वैज्ञानिक चेतना संपन्न ब्लागर अरविन्द मिश्र या शाहजहांपुर वाले कवि/व्यंग्यकार अरविन्द मिश्र?

shilpa mehta said...

सतीश भाई जी - पार्थ कह रहा है - लाइन में आगे जाना हो तो अनाउंस करने वाले से कहें -" हाँ - मैंने पहना है रूपा फ्रंट लाइन - तो आगे तो मैं ही जाऊंगा - क्योंकि जो रूपा फ्रंट लाइन पहनते हैं - वही आगे रहते हैं ना ?"

:)

देवेन्द्र पाण्डेय said...

चकाचक दर्शन।
एक बार भांग चढ़ा कर महाशिव रात्रि के दिन फूल वाले को चप्पल दिखा कर, रात्रि 10 बजे, बाबा का दर्शन करने चला गया था। फूल वाले से कहा..चप्पल देखबा न भैय्या..? उसने तपाक से उत्तर दिया..चिंता जिन करा। जब तक हम रहब चप्पलो यहीं रही।
दर्शन करके लौटा तो न चप्पल था न फूलवाला!

Arvind Mishra said...

हमें तो कोई शक नहीं मंगर व्यंगी श्रृंगी शुकुल जी को फ़रिया दीजिये कौन से अरविन्द मिश्र :)?

दीपक बाबा said...

चप्पल स्टेंड .........


काहे सतीश जी, पुरानी यादों को कचोटते हैं..:)

Vivek Rastogi said...

गजब की रैम है आपकी, बिल्कुल लैटेस्ट मॉडल की रैम लगती है, अपनी तो रैम बहुत पुरानी हो चुकी है।

वाणी गीत said...

लक्ष्मी जी के जयकारे लोंग मन में ही करते हैं , दूसरे ने सुन लिया और जयकारे लगाने लगे तो लक्ष्मी जी कहीं रूट ना बदल लें ...
रोचक पोस्ट और टिप्पणियां !

rashmi ravija said...

और रश्मि रविजा ने अपनी सहेली आभा से कहा,"हाय, इतनी सुन्दर चप्पल... कहाँ से ली??...इतने सस्ते में?...अच्छा सेल लगा था...बताया भी नहीं मुझे....अगली बार मत भूलना....मुझे भी चाहिए....साथ चलेंगे :)

बी एस पाबला BS Pabla said...

मंदिर की मौज
फिर टिप्पणी की मौज

दोनों हिट है

रश्मि रविजा जी की टिप्पणी से मनीषा पांडेय जी की पोस्ट याद हो आई जिसे आज ही पढ़ा है।

Poorviya said...

khusi man se log mandir jate hai..aur
khinn man se waha se laute hai ....log kahi na kahi kisi na kisi bhav se loot hi jate hai....

sunder cammentry ......

jai baba banaras.....

देवेन्द्र पाण्डेय said...

हाय! इतने अच्छे कमेंटस्!! कहां से आते हैं इतने कमेंट बटेरू आइडियाज?

काजल कुमार Kajal Kumar said...

अनाउंसमेंट वाले सज्जन की ड्यूटी अगर लाइनों को धक्का मारने में लगा दें तो दुनिया मिन्टों में दर्शन कर अपने घर पहुंच जाए ☺

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