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Sunday, August 7, 2011

कृपया शांत रहें....सांसद सो रहे हैं....

-  ऐ जी सुबहिये सुबहिये कहाँ जा रहे हैं मुह उठा के - नेताईन ने नेताजी से पूछा ।


- अरे औऊर कहाँ, यहीं जरा संसद तक तनिक टहल आते हैं, दोस्तन से मिल आते हैं औऊर कुछ नहीं तो तनिक सो आते हैं।

- सोने काहें संसद मे जा रहे हैं, घरवा नहीं है का ।


- अरे तुम का जानों संसद मे सोने का मजा । जब चारों और ऐ बे तू बे लगा हो तब अपनी आँख बंद कर केवल सुनने भर से अध्यात्म लाभ मिल जाता है , लगता है जैसे पंडितजी कथा बांच रहे हैं और हम सुन रहे हैं , श्रोता लोग पंचामृत लेने के लिए मन मे नारायण का जाप कर रहे हैं और पंडितजी जल्दी जल्दी कथा बांच रहे हैं की जल्दी से सब ख़त्म करूँ और सीधा- पिसान जो मिले बाँध बूंध के चलूँ।

- लेकिन ऐसन माहोल होता है संसद मे की अध्यात्म मालुम पड़े।

- अरे अध्यात्म की बात कर रही हो वहां साक्षात् नारायण के दर्शन हो जाते हैं, भिन्न भिन्न रूप मे दर्शन होता है, कभी नगद नारायण के रूप मे, कभी कौनो निगम के चेरमन के रूप मे त कबहू मंत्री पद के रूप मे ।


        यह मेरी पोस्ट का वह अंश हैं जिसे कि मैंने 22 जुलाई 2008 के दिन अपनी एक पोस्ट में लिखा था। सुबह तकरीबन साढ़े छह बजे यह पोस्ट लिखा और थोड़ी देर बाद ऑफिस के लिये निकल गया। संजोग देखिये कि ठीक उसी शाम चार बजे सांसदों ने संसद में नगद नारायण लहरा दिया। नोटों की गड्डियां इस तरह हाथों में उठाकर लहराई जा रहीं थी मानों इंटे हों। उन नोटों को लहराते देख मुझे थोड़ी झुरझुरी सी हुई थी कि यार आज ही तो पोस्ट लिखा था जिसमें संसद में नगद नारायण दिखने का जिक्र था और संजोग से आज ही सचमुच संसद में यह वाकया घट भी गया। रात करीब पौने ग्यारह बजे राज भाटिया जी की टिप्पणी भी आई कि टीवी पर सचमुच नगद नारायण देखा।

   आज News 24 की रिपोर्ट में फिर से सांसदों को सोते देखा तो लगा कि जरूर कुछ न कुछ सपना देख रहे होंगे। इधर प्रणव मुखर्जी महंगाई पर कुछ चर्चा कर रहे थे उनके ठीक पीछे बैठे वीरप्पा मोइली लगातार सोये जा रहे थे। जब प्रणव मुखर्जी की किसी बात पर संसद में टेबल बजाने का टाईम आता तो आँख खोल वीरप्पा मोइली टेबल थपथपाने लगते। उनके इस नजरबचाऊ टेबल थपथपाई को देख आनंद आ रहा था।

        वहीं संसद में कई और सांसद दिखे जो मस्त नींद के मजे ले रहे थे। एक बार आँख खोलते फिर आसपास देखते कि सब वैसे ही है, फिर सो जाते । जाने ऐसी कौन सी रतियाही करते हैं, कौन सा काम करते हैं कि संसद में जमकर रात वाली नींद पूरी करते हैं :)

      खैर, अब तो इन लोगों के बारे में लिखते हुए भी सोचना पड़ता है कि कहीं सचमुच ही वह न हो जाय जो लिखा जाय। पता चला कि सांसद जी सपने में देख रहे हैं कि कोई ट्रैक्टर चला रहे हैं औऱ अगले दिन संसद में कोई ट्रैक्टर लिये ही न आ जाय कि धरना यहीं देंगे  :) 

    वैसे, अब तो कुछ भी असम्भव नहीं लगता। सब कुछ संभव लगता है। महंगाई हो, भ्रष्टाचार हो, बेरोजगारी आदि सब आउटडेटेड टॉपिक हो चले हैं। इन पर बात करना भी पिछड़ेपन की निशानी ही माना जायगा।

   वीरप्पा मोइली  जैसे वीरो, और सोओ, जितना सोना है सो लो। वैसे भी वहां बैठे रहकर कौन सा तीर मार ले रहे हो। जिन्हें जो कुछ कहना करना है वो तो आपसी इशारेबाजी, समझ समझौवल कर ले रहे हैं। आप वहां बैठ कर भी क्या करेंगे। कैमरे लगे हों तो लगा करें, आप लोगों को कवर करें सोते हुए तो किया करें, आप को क्या.....  लोकसभा हो या राज्यसभा.....क्या फर्क पड़ता है  आप को कौन सी शर्मो हया के पैसे मिलते हैं, :) 

 वैसे भी मिर्ज़ा ग़ालिब फरमा गये हैं -

उस बज़्म* में मुझे नहीं बनती हया किये
बैठा  रहा  अगरचे  इशारे  हुआ   किये  :)

 * बज़्म -  सभा,  महफ़िल


  - सतीश पंचम

9 comments:

Kajal Kumar said...

आजकल सोने का समय कम ही आता है क्योंकि संसद में आमतौर से हल्ला गुल्ला ज़्यदा रहता है भाषण कम ही होते हैं. मेजें थपथपाना सबकी किस्मत में कहां, बस मंत्री लोगों को ही टेबल मिलती है, पीछे के बैंचों के सामने टेबल नहीं होती है.

प्रवीण पाण्डेय said...

परमानन्द का स्थान।

Rahul Singh said...

कइयों के सपने की दुनिया है संसद.

anshumala said...

सीधी सी बात है जो लिखते है वो सच हो जाता है तो अपनी पोस्ट में दो चार अच्छे बिल प्रस्ताव कानून संसद में पास करा दीजिये नहीं तो कम से कम अन्ना हजारे का लोकपाल बिल ही पास करा दीजिये अपनी पोस्ट में क्या पता पिछली बार की तरह सच हो जाये, ना भी हुआ तो नुकशान थोड़े होगा कोई |

नीरज गोस्वामी said...

लाजवाब लेखन...ढेरों बधाई स्वीकारें...

नीरज

डॉ. मनोज मिश्र said...

इस विषय पर कुछ बोलना मतलब विशेषाधिकार की नोटिस????

Dinesh pareek said...

मुझे क्षमा करे की मैं आपके ब्लॉग पे नहीं आ सका क्यों की मैं कुछ आपने कामों मैं इतना वयस्थ था की आपको मैं आपना वक्त नहीं दे पाया
आज फिर मैंने आपके लेख और आपके कलम की स्याही को देखा और पढ़ा अति उत्तम और अति सुन्दर जिसे बया करना मेरे शब्दों के सागर में शब्द ही नहीं है
पर लगता है आप भी मेरी तरह मेरे ब्लॉग पे नहीं आये जिस की मुझे अति निराशा हुई है
http://kuchtumkahokuchmekahu.blogspot.com/

ajit gupta said...

आपको पूर्व संकेत हो जाता है या आप की कोई मिली भगत है?

अनूप शुक्ल said...

संसद में भी आजकल सोने का माहौल रहा नहीं। बहुत हल्ला मचता है। वो तो भला हो कानफ़ोन का कि आवाज कुछ कम हो जाती है और लोग झपकी मार लेते हैं। :)

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