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Thursday, July 28, 2011

जुल्फों की जुल्फई

      वो आईं,  थोड़ा मुस्काईं, जुल्फ लहराईं  और लोग थम से गये।  रूककर देखने लगे - बला की खूबसूरत है यह पाकिस्तानी विदेशमंत्री तो। कितना पढ़ी है ?  क्या पढ़ी है ?  इसकी शादी हो गई ?  हसबैण्ड कौन है ?  क्या करता है ? ऐसे ढेरों सवाल लोगों के मन में कौंधने लगे। इंटरनेट पर सर्च शुरू हुई, लोगों ने की-बोर्ड खटखटाये। तमाम खटखटाहटों के बीच कुछ और सवाल उट्ठे - पाकिस्तान तो कट्टर है न। उसके यहां ऐसे खुले में महिलायें बिना बुरके के होती हैं क्या ?  होती होंगी। बेनजीर भी तो बिना बुरके के चलती थी। लोग उसे भी जिताते ही थे। लेकिन यार ये तो बला की खपसूरत है ....... हमारे बॉलीवुड में आये तो कैटरीना, दीपिका, प्रियंका सबकी छुट्टी कर दे।


       कुछ ऐसे भी सवाल उभरे  - क्या ये पॉलिटिक्स संभाल पाती होगी, वो भी पाकिस्तानी  पॉलिटिक्स, जहां बात बात में कबीले अपनी कबीलापंती दिखाने लगते हैं, एक दूसरे को चिचोरने के लिये उठ खड़े होते हैं। तालिबानी गुर्गे क्या पाकिस्तान में अब नहीं हैं या सब हलाल हो गये। फिर क्या सोचकर इसे पाकिस्तानी विदेशमंत्री बनाया गया होगा ? जितनी लोग, उतने सवाल। और सवाल उठना लाजिमी है, आखिर ठेठिहर बूढ़ों को देख देख हमें आदत जो पड़ गई है। हमारे यहां जहां देखो वहीं पैंसठ- सत्तर के बूढ़े पॉलिटिशियन दिखते हैं । कोई काँख रहा हैं, कोई छड़ी के सहारे ईंगुरी ठेंगते चल रहा है, कोई  व्हील चेयर पर बरसों से डटा है लेकिन कुर्सी नहीं छोड़ी जाती । जहां कोई जवान दिखता भी है तो उसे युवा, झुझारू और न जाने किन तमगों से नवाज दिया जाता है।

      खैर, बात हो रही थी हिना रब्बानी की उम्र, उनकी शख्सियत की। मोहतरमा जब दिल्ली के हवाई अड्डे पर उतरीं तो इनकी जुल्फें लहराने का कोई मौका नहीं चूक रही थीं। कभी दांये कभी बायें, कभी सामने। उन लहराती जुल्फों को संभालने में ही मोहतरमा का एक हाथ हमेशा हवा में उठा रहा। बहुत संभव है हमारे मंत्री महोदय, तमाम अफसर-अफसरान उनकी जुल्फों की लहरावट देख कुछ तरावट भी महसूस किये हों कि चलो कोई तो आया जिसे देख खुश्क हो चुके पड़ोसी रिश्तों में तरावट आएगी। लेकिन जो खबरें आ रही हैं उसके अनुसार मोहतरमा कश्मीरी अलगाववादियों से भी मिलीं, उनके साथ दुक्खम सुक्खम बांटे-बटोरे...... ऐसे अलगाववादी जिनको खुद पता नहीं कि वो आखिर चाहते क्या हैं और किसके लिये ?  कम्बख्त हिना रब्बानी को देख मजरूह की तरह  वो कहीं कह न  बैठें -  हसीं आजकल के खुदा हो गये हैं.......खता करके भी बेखता हो गये हैं  :) 

     बहरहाल हिना रब्बानी को भारत आना था, यहां के मंत्रीयों वंत्रीयो से मिलना था, फोटो शोटो खिंचानी थी, जाहिर है कुछ उन्हें अपने देश के आकाओं की ओर से स्पेशल इंस्ट्रक्शन भी मिले होंगे कि किसके सामने हंसना हैं, किसके सामने बोलना है, कहां जुल्फ लहराना है, कहां ऐनक चढ़ानी है।  मोहतरमा वही सब तो कर रहीं थीं। अलगाववादियों से मिलीं, आडवाणी से मिलीं, सुषमा से मिलीं, और अभी मेल मिलाप का कारक्रम आगे चल ही रहा है, ऐसे में हिना रब्बानी का उद्देश्य क्या है इसपर नज़र बनाये रखना बहुत जरूरी है क्योंकि कई बार इस तरह के मेल मिलाप अपने आप में गूढ़ अर्थ वाले होते हैं और कहीं न कहीं टार्गेटेड पब्लिक के बीच एक खास संदेशे देते हैं। ऐसे में इन मुलाकातों को महज मेल मिलाप और बातचीत के नाम पर यूं ही इग्नोर नहीं किया जा सकता।

    रही बात हिना रब्बानी के केश सज्जा और लाली पौडर की तो इसपर लोग अभी आगे बहुत चुटकीयां लेंगे, बहुत तंज कसेंगे क्योंकि अर्से बाद कहीं किसी हसीन शख्सियत को ऐसे पद पर और इस रूप में देखा गया है। जब राजीव गाँधी के कार्यकाल के दौरान बेनजीर आईं थी तब भी चुटकुलेदारों को चुटकुले बनाने में कोई विशेष मेहनत नहीं करनी पड़ी थी। खूब चुटकुले बनाये गये थे। बाद में नरसिंहराव के कार्यकाल में भी यह चुटकुला चलन जारी रहा। अभी देखते हैं हिना रब्बानी को लेकर आगे कैसे कैसे चुटुर-पुटुर गढ़े जाते हैं :)

     फिलहाल तो जिस तरह से अफगानिस्तान में अमरीकी सेना के हटने की खबरों के बाद वहां राजनीतिक हत्यायें बढ़ी हैं, लादेन प्रकरण के बाद अमरीकी-पाकिस्तानी रिश्तों में जिस तरह खटास बढ़ी है और चीनीयों से दोस्ती बढ़ी है, तो इन सब बातों को देखते हुए विदेश मंत्री हिना रब्बानी को बहुत सचेत होकर अपनी विदेश नीति चलानी होगी वरना इस अमरीकी दुराव और चीनी लगाव के बहूत ही भयंकर परिणाम होंगे। ये अपने जुल्फ ही संवारती रह जाएंगी, उधर तालिबान अपने गुल खिलाने शुरू कर देगा। बहुत संभव है कहीं बेनजीर के जमाने जैसा फतवा न जारी हो कि किसी औरत का गैरमरदों के साथ बिना बुरके के बतियाना, हंसना, तालिब कानून अल्ले गल्ले फल्लां-फल्लां की नाफरमानी है, मजहब के खिलाफ है।

    फिलहाल तो मज़ाज की शायरी इस वक्त बहुत माकूल लग रही है जिसमें मज़ाज कहते हैं -


बहुत मुश्किल है दुनियाँ का संवरना

तेरी जुल्फों का 'पेच-ओ-खम' नहीं है।

   
- सतीश पंचम

19 comments:

अनूप शुक्ल said...

सारे टीवी वाले पाकिस्तान की विदेश मंत्री का हुलिया तलाशने में लगे हैं कल से। :)

Rahul Singh said...

शेर में समा गई पूरी पोस्‍ट, वाह.

मनोज कुमार said...

आप भी वही देख रहे थे जो ...
ख़ैर छोड़िए ...

किस किस की बोलें बतियाएँ, सब अच्छे हैं,
आगे पीछे, दाएँ बाएँ सब अच्छे हैं।
सबको खुश रखने की धुन में सबके हो लें,
मिल बैठें सब, पियें पिलायें सब अच्छे हैं।

देवेन्द्र पाण्डेय said...

सफेद घर की रंगीन पोस्ट मन को भा गई।

Deepak Saini said...

ये विदेश मंत्री है ?
मैंने तो सोचा कोई हिरोइन है

प्रवीण पाण्डेय said...

अभी तक तो काश्मीर-केन्द्रित विदेश नीति थी पाकिस्तान की, अब हिना-केन्द्रत हो गयी है।

सतीश पंचम said...

@ आप भी वही देख रहे थे जो.........

मनोज जी,

अब वही देखा जायगा न जो दिखाया जायगा। चैनल बदलने पर भी वही सब शोर शराबे म्यूजिक ट्यूजिक के साथ समाचारों के नाम पर दिखाया जा रहा था। क्यों आई हैं किस स्तर पर बातचीत चल रही है, किस मसले को उठाया गया, किन कैदियों की रिहाई की बात चली ऐसा कुछ नहीं। केवल हिना रब्बानी की जुल्फें, हिना रब्बानी का पर्स, उनके जूते ब्ला..ब्ला..ब्ला। अब हर वक्त तो सब टीवी वाले जेठालाल गडा नहीं रहते, सो मन मारकर देखना पड़ता है।

और जहां तक ऐसे देखने न देखने का सवाल है, मुझे लगता है कि देखते तो सभी हैं। कुछ उसे कह देते हैं कुछ नहीं कहते। बेहतर है कि बात को पान की गिलौरी की तरह मुंह में रखकर घुलाने की बजाय कह दिया जाय :)

सञ्जय झा said...

media ka dwara pesh kiya gaya nazara
ko badhiya se akhare hain......

sab bahar-bahar ki hi khabar de rahe
andar ki khabar bahar kyon nahi ho rahi......

jai ho....

दीपक बाबा said...

हाय ......

हम तो दिल थाम के बैठे हैं......

कर लेने दो भाई मन की..... अभी तो आनंदमाय रहो....... बाकि पीछे पीछे इनके फूफा भी तैयार बैठे हैं आने को.....

Poorviya said...

अभी तो आनंदमाय रहो....... बाकि पीछे पीछे इनके फूफा भी तैयार बैठे हैं आने को...


Ek aur kargil ki tayari hai uski barsi par...heena to tarikh mukarar karne aaye hai ki agla kargil pakistan kis tareekh ko suru kare taaki hamare desh ke jawan saheed ho aur kuch log us par rajneeti kare aur kuch log taboot jaise ghotale kare....
jai baba banaras......

Anu Singh Choudhary said...

टीवी वालों को आपका ये पोस्ट मेल कर रही हूं। मज़ा लेते हुए भी सधी और सही बात कही जा सकती है, इसपर एक-दो वर्कशॉप्स की ज़रूरत है मीडियावालों को।
हिना की खुशरंगीनी से पड़ोसी मुल्क के साथ रिश्तों की बर्फ कितनी पिघलेगी, देखना तो ये है। बाकी, मज़ाज के शेर ने पूरे पोस्ट का निचोड़ पेश कर दिया।

ajit gupta said...

अर्थ यह हुआ कि मंत्री खूबसूरत नहीं होना चाहिए। विदेश मंत्री तो कदापि नहीं। उसकी काबिलीयत उसकी सुन्‍दरता की भेंट चढ़ जाती है।

Kajal Kumar said...

राजनीति में भी सुंदर दिखने वाले चेहरे हों तो बुरा ही क्या है :)

Arvind Mishra said...

वे तो जलवे दिखा के चली गयीं और हम हैं कि अभी भी गश खाए जाते हैं -
क्या वाकई वे इतनी खूबसूरत थीं या जलवों का कमाल था ..
हमारे किसी भी तरीका के सामने वे कहाँ ठहरती हैं ?
हाँ कूट राजनीति का तकाजा यह कि हारा विदेश मंत्री भी कोय छोरा बनारस वाला हो !

Arvind Mishra said...

*तारिका

rashmi ravija said...

लोगो को ये ग़लतफ़हमी है...कि पकिस्तान में औरतें/लडकियाँ बुर्के में रहती हैं...'स्टुडेंट एक्सचेंज' प्रोग्राम में एक भतीजी एक साल के लिए लाहौर में थी....बता रही थी, वहाँ भी लडकियाँ जींस टी.शर्ट में घूमती हैं...डिस्क हैं...कैफे है...और मुंबई की तरह फ्लेवर्ड हुक्के का प्रचलन भी...उसका तो कहना था जितने बुर्के उसे मुंबई में दिखते हैं...उतने कराची लाहौर में नहीं दिखे.

डॉ. मनोज मिश्र said...

@
तेरी जुल्फों का 'पेच-ओ-खम' नहीं है....
वाह-वाह.

Arunesh c dave said...

बहुत ही अच्छा लिखा है आपने हास्य के साथ गंभीर बातो को खूबसूरती से लपेटा है

Gyandutt Pandey said...

ये फोटुयें तो फोटो वाले ब्लॉग में आने लायक थीं! बाई गॉड की कसम! :D

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'

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A Photo from - Thoughts of a Lens

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