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Saturday, July 16, 2011

फ़लक तक चल साथ मेरे.....

        अक्सर कहा जाता है कि हाल फिलहाल के फिल्मी गानों मे Melody कम होते जा रही है, याकि लिरिक्स के नाम पर कुछ भी लिख दिया जाता है। संगीत पर ज्यादा जोर देकर गीत तैयार किया जाता है। लेकिन यह पूरा सच नहीं है। कुछ गीत बेहद रोमांटिक और कर्णप्रिय होते हैं। दबंग का 'ताकते रहते तुझको सांझ सवेरे' गीत  भी Melodeous गीतों की श्रेणी में आता है।  वहीं गुलज़ार के गीत तो खैर हैं ही ज्यादातर कर्णप्रिय....भले कभी कभार बीड़ी जलाने और पड़ोसी से आग लेने लगते हैं :)

    खैर, मैं बात करूंगा एक ऐसे गीत की जिसे कई बार सुना और सोचता था कि गीतकार कौन है...किसने लिखा होगा। सुनने में बहुत अच्छा लगता था।  वह गीत था 'टशन' फिल्म  का 'फ़लक तक चल साथ मेरे' गीत।  सुनते वक्त तो यह जिज्ञासा जरूर आती थी कि किसने लिखा होगा इन खूबसूरत पंक्तियों को, कौन होगा वो नग़मा-निग़ार जिसने कि अपने खूबसूरत बिंबों से इस गाने को सजाया है।  जिज्ञासा होती थी और कुछ समय में गुम भी हो जाती थी।  वरना तो केवल नेट पर सर्च करने की देर है, सारा कुछ सामने आ जाता है कि कौन गीतकार है, कौन संगीतकार कौन क्या। आज सुबह यह गीत फिर  सुना तो रहा नहीं गया और नेट पर सर्च करना शुरू किया।

        सर्च करते ही गीतकार के रूप में किन्ही 'कौसर मुनीर' का नाम दिखा। पहली बार यह नाम सुना। जिज्ञासा हुई कि भई ये कौन गीतकार है, जिसके बारे में कहीं अखबारों में या किसी टीवी आदि पर नहीं पढ़ा कभी। थोड़ा और सर्च किया तो एक फेसबुक प्रोफाइल मिला, लेकिन उसमें भी कुछ खास जानकारी न थी। बाद में एक जगह जानकारी मिली कि कौसर मुनीर का विवाह स्वर्गीय निर्मल पाण्डे के साथ 1997 में हुआ था लेकिन बाद में दोनों  अलग हो गये। इससे ज्यादा कुछ उनकी लेखकीय पृष्ठभूमि आदि के बारे में ज्यादा कुछ पता न चल सका।  हां, इतना जरूर पता चला कि हालिया रिलिज़ फिल्म 'अन्जाना अन्जानी' में भी कौसर मुनीर ने गीत लिखे हैं। उस फिल्म के गीत मुझे तो पसंद न आये लेकिन टशन फिल्म का यह गीत जरूर पसंद आया।        


फ़लक तक चल साथ मेरे
फ़लक तक चल साथ चल
ये बादल की चादर
ये तारों के आँचल
में छुप जायें हम.....पल दो पल
फ़लक तक चल साथ चल


चल वो चौबारे ढूँढें
जिन में चाहत की बूंदे
सच कर दें सपनों को सभीsss

आँखों को मींचे मींचे मैं तेरे पीछे पीछे
चल दूं जो कह दे तू.... अभीsss
बहारों की छत हो....दुवाओं के खत हो,
पढ़ते रहें ये ग़ज़ल,

फ़लक तक चल साथ मेरे
फ़लक तक चल साथ चल

सूरज को हुई है राहत
रातों को करे शरारत
बैठा है खिड़की पर तेरीsss

हाँ...इस बात पर चांद भी बिगड़ा
कतरा कतरा वो पिघला
भर आया वो आँखों में मेरीss
तो सूरज बुझा दूं
तूझे मैं सजा दूं
सवेरा हो तुझसे ही कल

फ़लक तक चल साथ मेरे

फ़लक तक चल साथ चल

    अक्षय कुमार और करीना पर फिल्माया गया वह बेहद खूबसूरत गीत यह रहा।



  

22 comments:

सञ्जय झा said...

badhiya.....jankari ke liye sukriya..

jai ho...

Poorviya said...

yahi mumbai ka jajba hai....


jai baba banaras....

anshumala said...

इसी को शायद संजोग कहते है ये गाना कल शाम मैंने टीवी पर देखा और तब से ही जुबान पर चढ़ा है अभी नेट पर आई तो यही गाना गुनगुना रही थी आप की पोस्ट को देखा तो समझ गई इसी गाने की कुछ बात होने वाली है | वैसे निहायत ही बेकार फिल्म का ये अच्छा गाना पहले से ही पसंद है किन्तु कभी ये जानने का प्रयास नहीं किया की किसने लिखा है आप ने जानकारी बढ़ा दी धन्यवाद इसके पहले आप ने एक विज्ञापन के अच्छे गाने के बारे में भी जानकारी बढाई थी |

Kajal Kumar said...

जब संगीत में शब्द ठूंसे जाएंगे तो वो कहां बन पाएंगे...

सतीश पंचम said...

याद दिलाने के लिये शुक्रिया अंशुमाला जी, मैं तो उस पोस्ट को लगभग भूल ही गया था। इन दिनों वह Ad नहीं दिखता।

सुधीजनों के लिये यह रहा गुलज़ार द्वारा लिखित Commercial Ad से संबंधित उस पोस्ट का लिंक।

http://safedghar.blogspot.com/2011/02/ad.html

Global Agrawal said...

गुलजार जी के गीत तो सुनते ही अंदाजा हो जाता है की उन्होंने लिखे हो सकते हैं ,वीर फिल्म का गीत "सुरीली अखियों वाले" एक दम से याद आ गया
:)
फिलहाल इस ज्ञानवर्धक पोस्ट के लिए आभार :)

Rahul Singh said...

सचमुच प्‍यारा गीत, यहां आ कर ध्‍यान में आया.

निशांत मिश्र - Nishant Mishra said...

अच्छा गीत है लेकिन मैं जब भी इसे सुनता हूं मुझे लगता है गायक गा रहा है "पलंग तक चल साथ मेरे..."

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

आपने एक अच्छा गीत सुनवा दिया। शुक्रिया।
आपकी पारखी दृष्टि चहुँओर घूमती है।

Gyandutt Pandey said...

फलक का अर्थ मुझे भी नहीं मालुम, पर पलंग की कल्पना करना ठीक नहीं लगता।
संगीत के मामले में औरंगजेब का शिष्य लगता हूं मैं!

प्रवीण पाण्डेय said...

अहा, बेहद कर्णप्रिय।

Arvind Mishra said...

बहुत रूमानी गीत है -फलक का अर्थ क्या क्षितिज है ?

सतीश पंचम said...

अरविंद जी,

'फ़लक' शब्द से तात्पर्य संभवत: 'आसमान' है। उर्दू डिक्शनरी अभी मिल नहीं रही, बाद में उससे ढूँढकर बताता हूँ।

सतीश पंचम said...

अरविन्द जी,

उर्दू डिक्शनरी में 'फ़लक' का अर्थ 'आसमान' बताया गया है।

Vivek Jain said...

गाने आजकल भी अच्छे लिखे जाते है,पर अच्छे गानों का अच्छे गायक और संगीतकार से मिलन होना भी जरुरी है,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

निशांत मिश्र - Nishant Mishra said...

यहाँ 'फलक' को 'पलंग' सुन लेने में कुछ बुरा लग सकता है पर याद कीजिये 'याराना' फिल्म के उस गीत में लोग आज भी गाते हैं, "मेरी ज़िंदगी बदल दी,.... बैठा दिया पलंग पे मुझे खाट से उठा के".
यदि आप ऐसे कुछ और उदहारण देखना चाहते हों तो इस वेबसाईट पर जाएँ:

http://www.man-bol.com/

Arvind Mishra said...

@सतीश जी,
फलक का मतलब आसमान ही है ..शुक्रिया! उर्दू डिक्शनरी क्या सारी डिक्शनरियाँ बगल मेज पर रहती हैं -हर शब्द प्रेमी को रखनी चाहिये नसीहत भी ) ....

गाने के बोल सीमाहीन आसमान तक साथ साथ चलने को कह रहे हैं !

डॉ. मनोज मिश्र said...

बहुत ही कर्णप्रिय,आभार.

रेखा said...

बेहद प्यारी गीत सुनाने के लिए धन्यवाद

मनोज कुमार said...

यह गाना और इस आलेख की प्रस्तुति के लिए धन्यवाद!

(हम जब हैदराबाद में थे तो फ़लकनुमा एक्सप्रेस से जाते थे ... बस ऐसे ही कहा, फ़लक पर भी चर्चा हो रही थी, तो याद आ गया।)

मनोज कुमार said...

यह गाना और इस आलेख की प्रस्तुति के लिए धन्यवाद!

(हम जब हैदराबाद में थे तो फ़लकनुमा एक्सप्रेस से जाते थे ... बस ऐसे ही कहा, फ़लक पर भी चर्चा हो रही थी, तो याद आ गया।)

नीरज गोस्वामी said...

सच कहा आपने ये तो बहुत विलक्षण गीत है...अभी तक इसे सतही तौर पर ही सुना था लेकिन आज जाना इसमें कितना कुछ छुपा है...शुक्रिया आपका...

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