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Tuesday, July 5, 2011

दुपहरीया बतकूचन

- टीम अन्ना.........टीम बाबा.........टीम मनमोहन.....टीम विपक्ष.........सब कोई लोकपाल खा रहे हैं......लोकपाल पी रहे हैं.......लोकपाल ओढ़ रहे हैं......लोकपाल बिछा रहे हैं.........ससुर लोकपाल न हुआ , दसौना-बिछौना हो गया है।

- वइसे ई सिब्बलवा बहुत कलाकार आदमी है.......देखा नहीं कइसे बबवा को थुन्हियाया है।

- अरे त बबवौ बहुत आग मूत रहा था ........ठनढा कर दिया रात भर में.......लेकिन यार.......हुआ तो बहुते गलत...सरकार ससुर मनमानी पर आ गई है..........जिसे देखो........उसी को खदेड़ लेती है।

- अरे त खदेड़े न त का करे.......ससुर जब एस तरफ जाइयेगा तो अनसन औ ओस तरफ जाईयेगा तो फैसन........बताईये सरकार पिछवाड़े लतियायेगा नहीं तो का पूजा करेगा।

- तुम यार सरकार की भाखा बोल रहे हो.........जनता की ओर से बोलने में इतना डरते क्यों हो।

- अरे तो कितने सारे लोग बोल तो रहे हैं जनता की ओर से .........बिपच्छ बोल रहा है.....अन्नौ बोल रहे हैं......लोकपाल वाला केजरीबलवा बोल रहा है........और तो और सोनिया-राहुलौ जनता की ओर से ही बोल रहे हैं.......एक हम नहीं बोलेंगे तो क्या जनता मुरझा जायेगी।

- अब मुरझाये चाहे हरियराये......लेकिन ई सब चक्कर में एक बात जरूर पता चला कि.....लात खाना जनता की कुण्डली में लिखा है....जब रामराज था तब भी परजा को रवनवा लतियाया, किसनकाल में कंसवा परेसान किया था, जो कमी बेसी था उसे इन्नर देउवा पूरा किया कहिके कि गोबरधन मत पूजो इन्नरदेव को पूजो न बारिस कर देंगे हो कर देंगे हा कर देंगे........औ परेसान किया भी.....आगे जाकर मौरकाल में असोकवा ने मार-काट किया , गुप्तकाल में समुद-दर गुप्तवा उधम मचाया..... पबलिकिया क फसल ओसल बरबाद किया.....बिना लिखा पढ़ी के इफरात में जमीन कब्जा किया ...औ उपर से समुद-दर गुप्त प्रसस्तिओ गुदवा कर टांग दिया कि देखो यही है जो तमाम जगै जमीन कबजियाया था........आगे जाकर कभी वर्मन बन्स तो कभी मुगल बन्स तो कभी रानी भिक्टोरिया......सब कोई जनतै का खलरा छोड़ाया है।

- तो का कहते हो कि यथार्थवादी बन कर चुप रह के सब देखते रहा जाय।

- तो अब तक कौन सा आस्तीन मोड़े अंदोलन में सामिल थे।

- नहीं, मेरा कहने का मतलब है कि लेख ओख तो लिख ही सकते हैं......अखबार में.........कालम-कोटर में लिखने का असर पड़ता है भई। सरकार दबाव में आती है।

- अच्छा, ठीक है लिखो, औ तनिक जल्दी लिखो न सरकार कहीं ये न कहने लगें कि तुमने पहले क्यों नहीं लिखा.......लोकपाल का ड्राफ्ट आप ही की वजह से अटका हुआ है...... वो देखो, कपिल सिब्बल आप ही को ढूँढ रहे हैं :)

- सतीश पंचम

11 comments:

सञ्जय झा said...

eh......rahpet..rahpet kar lagaye....
lag raha tha bas ye laga o laga lekin
.......akhir me khoob laga..........

rapchik post tapchik mod me mast raha ........

tanatan tali.....

jai ho.

अरुण चन्द्र रॉय said...

अच्छी लगी बतकुच्चन .... इस दुपहरिया लम्बी क्यों नहीं होती...

shilpa mehta said...

अरे बाबा रे - सिब्बल हमें ढूंढ रहे हैं ? तो भागें जान बचा के - कि कहीं हमीं पर पता नहीं क्या क्या घपलों के इल्जाम थोप दें, कमिटी बिठा दें, आंसू गैस के गोले दाग दें ..... वैसे ही प्रदूषण के चलते आँखें जलती रहती हैं .....

डॉ. मनोज मिश्र said...

जियरा तर होई ग इ बतकही से.

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

आशुतोष की कलम said...

मजा आ गइल ऐ बतकुच्चन में

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

लेख तो अभै हाल लिख दें, तनिक सस्ता कलम ढूंढ रहे हैं, जल्दी ही चीन से आने वाला है, दम्बूक छाप। क्या मस्त लिखता है, लाल स्याही राजनैतिक क़ैदियों के खून से नहीं बना है, उइसा इस्पस्टीकरण दे चुकी है उहाँ की सरकार। सरकार ठहरी, इस्पस्टीकरण तो देना पडता ही है।

सतीश पंचम said...

जाकिर जी,

आपकी टिप्पणी के लिये बहुत बहुत शुक्रिया।

आपको पहले भी आगाह कर चुका हूँ कि अपनी टिप्पणियों में विषय से इतर कोई लिंक न दें। टिप्पणी बक्से में यह बात अलग से लिखी भी है। इसके बावजूद आप टिप्पणियों में लिंक देते चले जा रहे हैं।

अत: आपकी टिप्पणी खेद सहित हटा रहा हूँ।

प्रवीण पाण्डेय said...

ढूढ़ लिया तो आप आलोकपाल हो जायेंगे।

Arvind Mishra said...

तईं राऊर भी सावधान रहिये ....न जाने केकर नज़र एहरौ न पड़ जाय !

anitakumar said...

:)इस दोपहरी की बातचीत का मजा तो लिया ही हमने भाषा भी खूब मजे ले कर पढ़ी

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