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Wednesday, April 6, 2011

'C3' पर 'C3' से.......

       अमूमन देखा गया है कि अपनी भाषा को लेकर लोग बड़ा भावुक हो जाते हैं, बड़े सेंटी सेंटी विचार व्यक्त करते हैं, कि हमारे भाषा के लिए फलां होना चाहिए, ढेकां होना चाहिए, भाषाई तौर पर तकनीकों को इजाद किया जाना चाहिए ब्ला.... ब्ला.... लेकिन जब उनकी मांग पूरी करते हुए वही तकनीक लाकर दे दो उनकी सारी भाषाई सेवा न जाने किस ओर चरने चली जाती है।


      कुछ ऐसी ही बातों से मैं दो-चार हुआ जब नोकिया के हिंदी कीपैड वाले सी-3 को खरीदने का मन बनाया। हुआ यूं कि मेरा पुराना फोन गड़बड़ाने लगा और नये फोन की जरूरत महसूस हुई। इतने में प्रवीण जी पोस्ट आ गई जिसमें कि नोकिया के सी-3 में हिंदी की-पैड उपलब्ध होने की खूबी बताई गई थी, इससे ब्लॉग लेखन आदि में सुविधा की बात बताई गई थी।   पढ़ते ही मेरा मन इस फोन पर लहक गया। फिर क्या था, प्रवीण जी से निजी तौर पर मेल करके इस फोन के बारे में और जानकारी लिया और चल पड़ा नोकिया गैलरी की ओर। मुझे लगा कि करना क्या है, सारे फीचर तो पता ही हैं, नेट पर जो ढूंढना था सो तो सब ढूँढ ही लिया है, केवल पैसे देने हैं और मोबाइल हाथ में, लेकिन वह सोच ही क्या जो बिन परेशानी के सोचाये।

      पहली परेशानी तो यही हुई कि मेरे द्वारा हिंदी की-पैड वाला नोकिया सी-3 कहने के बावजूद जब नोकिया गैलरी में बॉक्स खोला गया तो वह इंग्लिश की-पैड निकला, वहां के असिस्टेंट ने तब जानकारी दी कि वो वाला पीस आना बंद हो गया है, अब केवल इंग्लिश वाला फोन आता है। मुझे लगा कि ये बंदा फोन न होने के कारण बहका रहा है। उसे छोड़ दूसरी दुकान में गया, वहां भी वही जवाब मिला कि हिंदी की-पैड वाला फोन आना बंद हो गया है। अब मैं थोड़ा अचकचाया कि ये क्या बात है यार,  अभी बैंगलोर में प्रवीण जी ने यही फोन लिया है और अब यहां कहा जा रहा है कि वह फोन बंद हो गया है। थोड़ा डिटेल में पूछने पर एक ने बताया कि उसके की-पैड पर हिंदी होने से लोगों को परेशानी होती थी, अंग्रेजी के साथ साथ हिंदी अक्षर होने से कीपैड पर अक्षर छोटे हो जाते थे, इसलिए नोकिया ने वह हिंदी वाला अक्षर देना बंद किया और सिर्फ इंग्लिश की-पैड देना शुरू किया है।

         मैंने मन ही मन सोचा कहीं ये C3  भाषाई तकधिनवा की वजह से प्रांतवाद की भेंट तो नहीं चढ़ गया । फिर उससे पूछा कि कहीं से मंगवा सकते हो क्या, एकाध फोन किसी मुंबई के डीलर के पास तो होगा ही। लेकिन बंदे ने असमर्थता जाहिर की और मैंने भी ज्यादा जोर नहीं दिया।
 
    उसके बाद तो मैंने कुछ और नोकिया प्रायोरिटी डिलर छान मारे कि कहीं तो एकाध फोन पड़ा होगा किसी के पास लेकिन सब के जवाब नकारात्मक मिले।


      इसी दौरान मन हुआ कि एक बार दादर चल कर देखा जाय, वहां शायद मिल जाय। वहां जाने पर सेल्समैन का जवाब था - अब वो वाला फोन नोकिया ने बंद कर दिया है क्योंकि लोगों को उसके की-पैड पर मराठी होने से परेशानी होती थी।

         अब सेल्समैन का मराठी कीपैड वाला जवाब सुनकर मेरा माथा ठनका। दरअसल हिंदी और मराठी दोनो ही देवनागरी लिपीयां हैं। उसी वर्ण को हिंदी भाषी अपने हिसाब से हिंदी मानकर चलता है मराठी भाषी अपने हिसाब से मराठी मानकर चलता है। चूंकि मैं मराठी बहुल इलाके दादर में था इसलिए वहां के सेल्समैन को वहां के कस्टमरों द्वारा की-पैड पर मराठी होने से असुविधा होने जैसा फीडबैक मिला दूजी ओर हिन्दी वालोँ से हिन्दी के चलते असुविधा का फीडबैक मिला, नतीजतन नोकिया ने वह फोन ही मार्केट में उतारना बंद कर दिया।

      इस पूरे मामले में एक बात जो देखने में आई वह ये कि हर एक को अपनी ही भाषा से असुविधा दिखी, चाहे वह मराठी बंदा हो या हिन्दी.....फिर ये राजनेता किस बूते भाषाई प्रेम जताते हुए 'नारा-नूरी' लगवाते हैं !
 
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 खैर, यह फोन मुझे बड़ी बड़ी दुकानों में न मिलकर एक छोटे दुकान से अंतत: मिल गया।        फोन बढ़िया है, लकदक हिंदी से सुसज्जित। पोस्ट लिखते समय थोड़ी परेशानी नोटपैड से कॉपी पेस्ट करने में जरूर होती है,  क्योंकि तब यह 3000 शब्द सीमा को कॉपी करने में असमर्थता जताने लगता है। नतीजतन मुझे टुकड़ों टुकड़ों में कॉपी पेस्ट करते हुए यह पोस्ट लिखना पड़ा। शायद कुछ ट्रायल एरर अभी और चले :)
 
 
- सतीश पंचम
 
स्थान - वही, जहां के भाषायी कॉस्मोपोलिटन लैब में नोकिया का C3 फोन  'टैं' बोल गया।
 
समय -  वही, जब राजनेता कहे - हमें स्थानीय लोगों के हितों में  विदेशीयों का बहिष्कार करना चाहिए,  विदेशीयों की वजह से हमारे स्थानीय हितों पर असर पड़ता है  और तभी उसका फोन बजने लगे यह गाते हुए ...........  
 
बलेती पी गये हैं.... देसी अभी बाकी है......
चार बज गये हैं....पारी अभी.....  :)
  
( Nokia C3 का चित्र - प्रवीण जी के पोस्ट से )

8 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

हम भी जब दूसरे रंग के मोबाइल के लिये बतियाये तो कहा गया कि कीबोर्ड भरा भरा लगने के कारण नोकिया ने उतारना बन्द कर दिया है। मन धक से रह गया कि यह हिन्दी की खिड़की थी, बन्द कैसे हो गयी। पर यह जानकर सन्तोष है कि पुराना स्टॉक रखा है और धीरे धीरे बिकेगा।
हिन्दी, अंग्रेजी, मराठी और गुजराती, ये चार भाषायें हैं इसमें। नोकिया ने इस लिहाज से तो ठीक फोन उतारा था पर हमारे अंग्रेजीमना भारतीय उसका गलत फीडबैक दे बैठे और मजे की बात यह कि नोकिया ने समुचित प्रचार भी नहीं किया इसका।
आप एक ईमेल जड़ दीजिये नोकिया को कि यह भ्रम दूर कर ले और आधुनिक फोन E7 में भी हिन्दी अक्षर उतारे।

सञ्जय झा said...

लेकिन वह सोच ही क्या जो बिन परेशानी के सोचाये।

hum bhi yahi sochne lage hain........

rapchik...

बी एस पाबला said...

वाह! यह हुई ना बात :-)

नोकिया को मेलियाते हैं हम भी

Arvind Mishra said...

बधायी बधाई

नीरज गोस्वामी said...

हिंदी की पैड वाला फोन मैंने नहीं देखा लेकिन अगर नोकिया वालों ने इसे बंद कर दिया है तो दुःख की बात है...हिंदी के साथ सौतेला व्यवहार जब उसे अपनाने वाले ही करते हैं तो नोकिया को दोष क्या देना...आपने इसे खरीद लिया जान कर बहुत ख़ुशी हुई...
नीरज

देवेन्द्र पाण्डेय said...

c3 से ब्लॉगिंग! कमाल है।

Abhishek Ojha said...

अरे महाराज फ़ोन पे इतना टाइप कैसे कर लेते हैं. यहाँ तो एक एसेमेस टाइप करने में सोचना पड़ता है :)

Vivek Rastogi said...

मोबाईल से इत्ता सारा लिख डाला, आपकी ऊँगलियों को सलाम

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