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Saturday, April 23, 2011

लक्जरियॉटिक गरीबी

गरीबी को अब तक मैं दुख और तमाम अभावों से आच्छादित एक परिस्थिती के रूप
में ही जानता आया था लेकिन आज देख रहा हूं कि गरीबी लक्जरीयॉटिक भी होती
है, इतनी कि गरीब एअर कंडीशन की हवा लेते आराम से अंगरेजी में हंसता
बतियाता है, अपने अमेरिकन टूरिस्टर जैसे महंगे लगेज बैगेजेस के बीच से
हारमोनिया की तरह का लैपटॉप निकालता है और बज पर बजबजाता है।
फिलहाल कुछ उसी तरह का लक्जरियॉटिक गरीब बना भारतीय रेल के गरीब रथ
से सफर करते हुए अपने नोकिया सी 3 से यह पोस्ट लिख रहा हूं। न जाने
किस ने सुझाया होगा कि इस रेल का नाम गरीब रथ रखो, लेकिन जिसने भी
सुझाया होगा वह जरूर महाभारत सीरियल बहुत मन लगाकर देखता होगा,
जिसमें कि रथों पर सवार हस्तिनापुर के गरीब आपस में लड़ते भिड़ते समय
भी अपनी गुड मार्निंग तात श्री, गुड मार्निंग ग्रैंडपा वगैरह करना
नहीं भूलता था। ठीक उसी तरह के महंगे गरीबों को यहां साक्षात देख
रहा हूं। कोई अपने फोन पर गुड ऑफ्टरनून करने के बाद सीधे ही पुराने
कोटेशन से मुकरने पर इट्स रेडिक्यूलस कहते झाड़ पिला रहा है तो कोई
महिला अपने बच्चे को डांटते हुए कह रही है वाय आर यू कमिंग डाउन, इस
देअर एनी मिनिंग टू कम डाउन.....और बच्ची सकपका कर उपरी बर्थ पर
चिपकी रह जाती है क्योंकि अपनी बर्थ नीचे उतरना कोई मायने नहीं
रखता.......बर्थ से उपर होना ही मिनिंगफूल है ।
वैसे यह नीचे उतरने न उतरने वाला फलसफा है बड़ा मौजू , हम लोग जब कभी अपने
से नीचे होने लगते हैं तो दूसरे टोक देते हैं, अमां क्या करते हो, जब
ज्यादा उपर जाने लगते हैं तो अमां संभलकर, ज्यादा मत उड़ियो....और जब अपनी
पोजिशन बरकरार रखते हैं तो - ब्रिंग अ चेंज यार, कब तक यूं ही पुरानेपन
पर अटके रहोगे।

बहरहाल वह महिला जो अपने बच्चे को अंगरेजी में डांट रही थी अब हिंदी
में कह रही है - बहुत मारूंगी, शायद अंगरेजी में पिटाई करने का असर ना
होता हो :)

- सतीश पंचम

स्थान - संपूर्ण एअर कंडीशंड गरीब रथ का एक गरीब बर्थ ।

समय - वही, जब फिल्म में गरीबी दिखाने हेतु डायरेक्टर कहे - हिरोनी को थोड़ा लिपस्टिक जास्ती लगाना...... नईं तो पब्लिक बोलेगी - खरचा बचाया।

11 comments:

सतीश पंचम said...

Nokia c 3 से सिधे लिखे इस पोस्ट में लाइनें कई जगह टूट फूट रही हैं, कुछ तो गद्य की पटरी पकड़ी पद्य पटरीयां नजर आ रही है....लगता है ट्रायल एरर का दौर अभी और चलेगा ।

Kajal Kumar said...

शुकर है कि ग़रीब रथ है इसका नाम, भिखारी रथ नहीं है वर्ना इंटेंसिटी और भी बढ़ सकती थी...

Rahul Singh said...

दौड़ तो पड़ी है पटरी पर यह.

प्रवीण पाण्डेय said...

गरीब भी सुविधापूर्वक चल सकते हैं, इसी लिये चली ये ट्रेन।

मनोज कुमार said...

"लक्जरियॉटिक गरीबी" लिखी गई नोकिया सी थ्री से ... लाइने टूटी फूटी हैं तो क्या हुआ, बातें तो सीधे मन तक पहुंच रही हैं न!

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

यह नामकरण वैसा ही है जैसे करोड़ों की लागत से बने बंगले पर ‘अमुक कॉटेज’ का बोर्ड लगा देते हैं। यह गरीबी का उपहास ही कहा जाएगा।

आदमी अपने को ‘छोटा’ कहकर ‘और बड़ा’ दिखने की कोशिश कर रहा होता है। गिरिजेश जी के शब्दों में कुछ-कुछ आक्रामक विनम्रता (aggressive humility)टाइप।

संगीता पुरी said...

रोचक !!

ajit gupta said...

भारत से गरीब कम हो रहे हैं, यह ताजा सर्वेक्षण है। आप मोबाइल से इतना लिख लेते है, बडी अच्‍छी बात है।

निवेदिता said...

interesting....

अनूप शुक्ल said...

ऊपर की तीन-चार टिप्पणियों से काफ़ी हद तक सहमत ! वे तीन-चार टिप्पणियां कौन सी हैं यह अभी तय तो कर लिया लेकिन बतायेंगे नहीं।

Abhishek Ojha said...

हम भी ठीक ऊपर वाली टिपण्णी से सहमत हूँ. अगर मोडरेशन के चक्कर में कुछ और ऊपर आ गया तो हम अपनी सहमती के जिम्मेवार नहीं है :)

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