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Sunday, March 20, 2011

इति होली गुझियम्........ बजरिए चऊचक दुपहरीया :)


     अब जबकि दुपहर तक आप लोग होली खेल चुके होंगे, और रगड़ रगड़ कर रंग छुड़ा रहे होंगे....कान के पास वाला, गर्दन के पास वाला, करिहांअ वाला....और न जाने कहां कहां वाला तो ऐसे में पेश है यह दुपहरिया पोस्ट जिसमें दो लोगों के आपसी संवाद के जरिए  राजनीतिक गुझिया पकाई गई है ....स्वाद बदलने हेतु थोडा सा होलियाना लंठई भी है....उम्मीद है झेल लेंगे 
:) 

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- मुलैमा को और कोई काम नही है क्या बे......जब देखो तब लग्गी लेकर ललकी टोपी पहिन आंदोलन पै आंदोलन किये जा रहा है।

- अरे तो मायावतीया भी कम थोड़े है......जहां देखो वहीं मूरती लगवाए जा रही है......अब मुलैमा तकधिनवा फानेगा तो मायावतीया भी अपना पावर दिखैबे करी।

- अरे तो कनगरेस कहां ढुका गई है,  .....इह सब में कुछ बोल क्यों नहीं रही।

- अरे बोलेगी तब नुं जब बोलने लैक रहेगी.....ससुर जब देखो तब छिनरपना फाने रहोगे तो जनता लन्डूरे चौधरी नहीं है कि चुपा जाय ।

- कनगरेस कौन छिनरपन कर रही है आर।

- ई ल्यौ....नहीं पता.....अरे सबसे बड़ी भुसुन्ड पार्टी है.......देखा नही बिकी-लीकवा क्या खोला है......हिलेरीया को परनब पसन्दै नहीं था.....उ तो चाहती थी कि लुन्गी वाला चिदम-बरवा बित्त मंत्री बने।

- ई हिलेरी किंटन उहै न है जिसका आदमी दूसरी औरतिया के चक्कर में पड़ गया था।

- हां यार वही, मोनिका लेभिन्सकी को लेके बहिनचो पूरा रासपति भवनै गुलज़ार किये रहता था । 

- अरे तो हिलेरीया को  का पड़ी थी बै..... बित्त मन्त्री हम चाहे जिसको बनाये.....या बिगाड़े ..भोसड़ीयावाले तुम कौन होते हो बोलने वाले।

- जही तो बात है रज्जा....बहुत गहिर राजनीत है.......अमरीका भोसड़ीयावाला जो भी फइसला करता है सो अपने लाभै के लिये करता है......परनब थोड़ा पुरान चोला है....अमरीकवा के खिलाफ बने रहने की आसंका थी औ यही सोच कर हिलेरीया की चुन्नी खड़ी हो गई थी ....लगी थी टहोका मारने कि परनब को नहीं बनाते तो अच्छा था।

- तो मान लो वो तहमद छाप चिदम-बरम को ही बित्त मन्त्री बनवाने में कामयाब होई जात त क्या होता ?

- अरे होता क्या....थोड़ा सा फेवर मिलता अमरीका वालन को......कल को कहीं भांटा-बैंगन, बीटी काटन,  केन टुकी चिकन फिकन जैसा मामला बझता तो उबार लेता.....बाकी तो बड़ी बड़ी डील के बारे में ओही लोग जाने।

- लेकिन आर एक बात है।

- क्या ?

- ई अमरीका वाले ससुरे हर जगह बल्लम-बाँस गाड़े रहते हैं....अभी लिबिऔ की चूतड़ उधेड़ने पहुंच रहे हैं हवाई जहाज से। 

- अरे तो उसमें उसका लाभ न है....आज उसे हर ओर अपना अंदरूनी बाजार को बिस्स के नकसा पर जमाना है, फइलाना है......अब उ सब में जोर न लगता है। 

- अरे तो कहां तक फइलायेगा ससुर कि सब बाजार कबजे में आ जाय ।

- अब ये तो समय ही बतायेगा ......वो देखो बम बारी सुरू भी कर दिया लिबिया पर।

- अरे कम से कम आज तो बमबारी रोक देना चाहिए था।

- काहें ?

- अरे आज होली है....आज के दिन भला कोई बमबारी करता है ।

- रह गये न लंणभक  के लंणभक....होली इंडिया में मनाई जाती है.....उ ससुर क्या जाने होली मनाना......हग के 
तो पानी छूते नहीं ....टिस्सू पेपर से काम चला लेते हैं... ..होली क्या खाक खेलेंगे. 

- अरे तो ये कहां लिखा है कि जो टिस्सू पेपर का यूज करता है वो होली नहीं खेलता.

- अरे मेरे कहने का मतलब ये है कि होली खेलने के बाद बहुत साफ सफाई लगता है.....उतना साफ सफाई वाला ये अगरेज लोग नहीं बुझाता हमें तो।

- अरे नहीं,  साफ सफाई के मामले में इनका कोई सानी नहीं है, देखा नहीं था इराक से लेकर अफगानिस्तान तक इन ससुरों ने पूरा इलाका ही साफ कर दिया था। ये अलग बात है कि इस चक्कर में इ लोग किसी लंठ से कम नहीं बुझा रहे, एसे लंठ जो कि इलाके का बड़भैया बनने के चक्कर में बझ गया हो और निकल न पा रहा हो।

- अरे तो हिलेरी जैसे उसकी बड़बहिनी लोग हैं न जो उसे बड़भैया बनाने में जोग छेम से जुटी हैं।

- लेकिन हमारे यहां की बड़बहिनी लोग के बारे में ऐसा कभी नहीं सुनने में आया कि फलावती जी किसी देश का अंदरूनी राजनीत में दखल दिये हों।

- अरे यहां के बड़बहिनी लोग को अपना मूर्ति लगाने से, रेल चलाने से फुरसत मिले तब तो दूसरे देश का अंदरूनी राजनीत में दखल दें। और जो कसर रह जाती है उसे यहां के बड़भैया नेता लोग पूरा कर देते हैं। 

- मतलब ?
- मतलब ये कि, जयललिता को करूणानिधि छेंके हुए है, मायावती को मुलैमा छेंके हुए है, ममता को बुद्दधदेब छेंके हुए है....अब ऐसे में ये लोग अपना लोकल घर संभालें कि बिदेसी दखलंदाजी।


- लेकिन सोनिया को कौन छेंके हुए है....वो तो दखल रख सकती अंतर-रास-टरीय असतर पर ।

    - सोनिया ? अरे उनका दखल तो अपने भतीजे की सादी तक में नहीं है.....वो क्या खाक दखल रखेगी।  देखा नहीं, वरूण की सादी तक में नहीं गई....भला ऐसा भी कोई मनमुटाव पालता है.....राजनीत अलग चीज है.....पारिवारिक अलग चीज है।  सादी - ब्याह के समय भी जो अपनी पुरानी टेक पर अड़ा रहे वो भला क्या दूसरे देस के अंदरूनी मामले में दखल रखेगा। 

- लेकिन जहां तक मुझे लगता है  सोनिया बरूण की सादी में इसलिये नहीं गई क्योंकि इससे राहुल के भविस्स पर असर पड़ सकता है......कल को कोई बरूण जैसे भाजपाई चोला को गान्ही जैसे सेकुलर से न जोड़ने लग जाय.....ससुर ये भी एक बिडम्बना ही है, क्या किया जाय। 

-  अब जो लोकल राजनीत में इतना बिज्जी हो वह भला बिदेसी राजनीत में कैसे दखल रख सकता है.....अरे वो कौन चला आ रहा है ? 

- अरे, ये तो राबड़ी देबी हैं....ये कहां जा रही हैं तरजनी अंगुली उठाये हुए ?

- ओह.....नितिश बाबू की कोठी पर रंग फेंकने जा रही हैं.......जाइये जाइये.....आपौ का याद रखेंगी..... वैसे, बिदेसी लोग सोनिया से ज्यादे राबड़ी को जानते हैं.....इसलिये नहीं कि ये लालू की पतनी है....बलकि इसलिए कि ये लालू को बिल क्लिंटन नहीं बनने देतीं......मजाल है जो एक भी मोनिका लेभिन्सकी जैसी कोई लालू की ओर ताक भर ले......तुरंत राबड़ी झोंटउवल न कर लें तो कहना। 

- सो तो है ...... और बिदेसी मामले में हिलेरी चाहे जितनी ताकतवर हो....इस मामले में राबडी से कमजोर ही ठहरेगी......लईका बच्चन के मामले में भी   ...... मोनिका जैसी की कुटाई छंटाई करने में भी  :)

- सतीश पंचम

स्थान -  वही, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां के सिल्वर स्क्रीन वाली  रातें होली के रंगों को भी मात देती हैं। 

समय - वही, जब मोनिका लेविंस्की होली के दिन रंग लेकर लालू से कहें - चच्चा, आज होली है.....चाची से कहिए हमें आपसे होली खेलने की इजाजत दे दें 

     और तभी राबड़ी रसोई से बाहर आते हुए कहें  -  पूरा बताओ...... लट्ठमार होली खेलोगी या गाल सहलाने वाली 'चमचट्ट होली'।  अगर चमचट्ट होली खेलना हो तो पहले वही खेल लो.....बाद में तो लट्ठमार होली मैं खुद खेलूंगी  :)

(सभी चित्र : गूगल बाबा से साभार)

19 comments:

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

ई है मन हिलोर बतिया...। च‍उचक मजा आ गया जी...।

एक मुठ्ठी गुलाल अपनी ओर से हवा में उड़ाकर आपको न्यौछावर करता हूँ। जोगीरा सररर...

Poorviya said...

holi subh ho..........

jai baba banaras...............

अनूप शुक्ल said...

ये पोस्ट मजेदार रही। होली मुबारक!

प्रवीण पाण्डेय said...

न कान का रंग छूटा, न हँसी बन्द हो रही है।

वन्दना अवस्थी दुबे said...

रंग-पर्व पर हार्दिक बधाई.
पोस्ट पढने आती हूं, फुरसत से :)

Rahul Singh said...

इंटरनेशनल कलरफुल होली, बधाई.

डॉ. मनोज मिश्र said...

.होली पर्व पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं ...

sidheshwer said...

जाए द हो मरदे!
इन सभकरे अलावे दुनिया औरे बहुत कुछ बा।
बाकी बाबू तूँ लिखे ल मस्त।
एकदम पानी निय्र हिलोर मारत गद्य!

जय हो।
सदा आनंदा रहैं यहि द्वारे!

डॉ० डंडा लखनवी said...

देश-विदेश के नम्बरदारों को अच्छी होली खिलाया है।
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देश को नेता लोग करते हैं प्यार बहुत?
अथवा वे वाक़ई, हैं रंगे सियार बहुत?
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होली मुबारक़ हो। सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

राज भाटिय़ा said...

होली के रंगॊ की तरह रंगबिरंगी आप की पोस्ट,होली की हार्दिक बधाई, धन्यवाद

वाणी गीत said...

विदेश में होली क्यों नहीं खेली जाती , उदहारण से हंस -हंस कर पेट में बल पड़ गए...
कहाँ हिलेरी और कहा राबड़ी ...सही कहा ठेठ देसी भारतीय पत्नियों के सामने पतियों की क्या मजाल जो इधर- उधर नजर घुमा लें ...:)
पर्व की बहुत शुभकामनायें !

सञ्जय झा said...

suna hai ke monika madam hamre city-beutiful bhi aaeel rahin..........

pata nahi kahan kahan........


jai ho.

मनोज कुमार said...

मज़ेदार पोस्ट।
हार्दिक शुभकामनाएं। बधाई।

नीरज गोस्वामी said...

काशी नाथ दद्दा याद आई गए आपका पोस्टवा पढ़ के...गज़ब किये हैं आप...वाह...

नीरज

anshumala said...

होली तो कल हो ली पोस्ट आज पढ़ रही हूँ सो अगली होली का अग्रिम बधाई ले ले | बिलकुल देसी पोस्ट ,कान और जबान दोनों अच्छे से धोना पड़ेगा क्योकि बड़े दिनों बाद ये सब देसी शब्द सुनने को मिला है साल पहले ब्लॉग जगत में ही पढ़े थे ये सारे देसी ---- - - - मजेदार पोस्ट :))

दीपक बाबा said...

@लंणभक

gurudev jara लंणभक thoda or prakaash daale jaate.....

सतीश पंचम said...

दीपक जी,

चूंकि अब होली बीत गई है, इसलिए 'लंणभक' का अर्थ फिर कभी :)

दरअसल इस तरह के देशज शब्दों का आनंद लेने के लिए एक मस्ती भरी अल्हड़ मानसिकता से गुजरना पड़ता है.....कभी मूड़ बना तो जरूर लिखूंगा :)

देवेन्द्र पाण्डेय said...

ई देखो!
हमहूँ ससुर के नाती रह गये बुड़बक!
ई सोचत रहे कि सफेद घर में होली का खेली गई होगी ! मगर इहाँ तो चऊचक मजा छाया रहा होली का।
..काश कि गांव की जनता इतनी ही समझदारी से बहस कर पाती और स्वतंत्र हो निर्णय ले पाती।

वन्दना अवस्थी दुबे said...

खूब बखिया उधेड़ी है भाई. बहुत बढिया.

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