सफेद घर में आपका स्वागत है।

Wednesday, February 2, 2011

इलायची....कच्चे आंम.....सेवइयां ....और..... बच्चई

     आज  शाम जब घर में सैवईया बनाने की तैयारी हो रही थी तो श्रीमती जी ने कहा कि बाजार से तो छोटी इलायची गायब ही हो गई है। जिस दुकान में जाओ वही कह रहा है कि नहीं है। एक से पूछा तो उसने बताया कि दो हजार से बाईस सौ रूपये किलो का भाव चल रहा है। श्रीमती जी की बातें सुनकर मैं हैरान हुआ कि क्या इतना तेज दाम चल रहा है इलायची का ? फिर मन को यह कह कर सांत्वना दिया कि हो सकता है फसल वगैरह खराब हुई हो।  

   खैर, शाम को जब बाहर निकला तो एक दुकान पर यूं ही पूछ लिया इलायची के बारे में। उसने भी यही जवाब दिया कि नहीं है। थोड़ा कुरेदने पर उसने बताया कि एक किलो इलायची के जब दो हजार से बाईस सौ दाम देने पड़ें तो बिक्री पर असर पड़ता है। लोगों को छुट्टा मुट्टा देने पर भी दस रूपये में तीन चार दाने चढ़ते है। लोग ज्यादा नहीं लेते और रखे रखे माल खराब होने लगता है। इसलिये इलायची ज्यादातर दुकानदारों ने रखना ही बंद कर दिया है। जो रख रहे हैं वो अपने रिस्क पर रख रहे हैं या फिर दुकान का नाम खराब न हो इसलिये रख रहे हैं कि कल को कोई ये न कहे कि इलायची तक नहीं रख पाता वह दुकानवाला। 

 उसकी बातें सुनकर थोड़ा सा अचंभित भी हुआ। मन ही मन सोचा कि वैसे भी इलायची कोई प्याज थोड़ी है कि जिसके बिना कई लोगों का किचन थम जाय। छोटी  इलायची  पान वाले लोग ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। वह लोग भी इस्तेमाल करते हैं कि नहीं क्या मालूम क्योंकि पान खाये मुझे जमाना हो गया है। हां, किसी की शादी में खाया था ये याद है। 

     आगे बढ़ा और सब्जी मार्केट की तरफ जाते ही एक दुकानवाले के पास कच्चे आम दिख गये। कच्चे आम....... वाह.....  बरबस ही खिंचा चला गया कच्चे आमों की ओर। वैसे भी कच्चे आम मेरी कमजोरी हैं।  नमक लगाकर आम के टिकोरों से खाना.....चटखारा.......मजा आ जाता है।  उसी मे जब एकाध खट्टूस आम निकल जाय तो खटास को महसूस करते हुए जो आँखें अधमिंची होने को होती हैं तो उस फिलिंग को एन्जॉय करने का आनंद ही कुछ और है। 

दुकानदार से पूछ बैठा -  कैसे दिया आम ?

- सौ रूपये  किलो। 

- इतने महंगे ? 

- हां यही है रेट। और कहीं मिलेगा भी नहीं। मार्केट की पहली खेप है। 

 वैसे भी हम पुरूषों को बार्गेनिंग करना आता नहीं।  ले लिया आधा किलो। 
    आधे किलो में चार ही आम चढ़े। यानि एक कच्चा आम साढ़े बारह रूपये का पड़ा। घर आकर उबलती अरहर की दाल में इन कच्चे आमो को डालने का मन था लेकिन  मेरे घर में सब को पसंद नहीं है खट्टे आमों वाली दाल। सो, उन आमों को छीलकर नमक के साथ चटखारे लेने बैठा तो फिर दांतों के कोठ होने का सिलसिला शुरू हो गया। पौना तिया आम फांकने के बाद श्रीमती जी का प्रवचन शुरू हुआ....ये क्या बच्चों की तरह कच्चे आम खा रहे हो। जबान को तनिक लगाम देना चाहिये। ये नहीं कि जो सामने आ जाय बस ले ही लो। क्या जरूरत थी सौ रूपये किलो वाला कच्चा आम लेने की। अभी कुछ दिन ठहरना चाहिये था।
     मैं चटखारे ले लेकर नमक लगाकर आम के टिकोरों को भकोस रहा था और उधर श्रीमती जी का प्रवचन चालू था। बच्चे भी आ जुटे थे। उधर किचन से सेंवैयों की भीनी भीनी खुश्बू आने लगी तो मन हुआ लगे हाथ उसे भी निपटा दिया जाय लेकिन श्रीमती जी के प्रवचन से पेट पहले ही भर चुका था। सो, सोचा कि नेट खंगाला जाय। बज़ पर जाते ही देखा कि रश्मि जी ने बज़ पर जो मेरा जन्मदिन वाली बात ब्रेक की थी उस पर आप लोगों के ढेरों शुभकामना संदेश थे। उधर पाबला जी वाले ब्लॉग पर भी आप लोगों के शुभकामना संदेश देखे। मन हरियर हो गया।  आप सभी का तहेदिल से शुक्रिया।

 दरअसल मैं काफी पहले कुछ  हल्के फुल्के अंदाज में अपना जन्मदिन मनाता था। बाद में शादी वगैरह होने के बाद ये सब थोड़ा अजीब सा लगने लगा। मोमबत्ती जलाना, फूंकना, बुझाना थोड़ा किडिश सा लगने लगा और शनै शनै यह सब छूट छाट गया ।  अब मैं अपने बच्चों का जन्मदिन मनाता हूं। इधर श्रीमती जी का आग्रह रहता है कि जब बच्चे जिद करते हैं तो केक वगैरह लाकर काट देना चाहिये। 
 मैं श्रीमती जी की बातें सुनकर हंसता हूँ....... ये क्या बात हुई ..... मेरे द्वारा कच्चे आम खाना बच्चों जैसी हरकत है.....एक तरह की बच्चई है और केक काटना बड़ो वाली हरकत है.......बड़कई है ? 

 और मेरे कहते न कहते श्रीमती जी आँखें तरेरते किचन की ओर निकल लीं .... मानों कह रही हों -  रह गये न गँवईं के गँवईं आदमी......  जाने कब शहरी बनोगे :)

 इधर मैं चुपचाप फ्रिज से कटी - कटाई पेस्ट्रीज निकालता हूँ..... पेस्ट्रीज...... न बचपना न बुढ़ापा......एक किस्म का चुलबुलापा..... फिलहाल देख रहा हूँ भगवान जी के पास सेवंइयां एक कटोरी में भोग लगाने के लिये रखी जा चुकी हैं....और मैं इधर उन पेस्ट्रियों को निपटा रहा हूँ  :) 
  
- सतीश पंचम

स्थान - वही, जहां पर कि कच्चे आम सौ रूपये किलो और छोटी इलायची दो हजार रूपये किलो के भाव से मिल रहे है।

समय - वही, जब इलायची का व्यापारी आम वाले व्यापारी से मिले और कहे - भाई साहब..... कृषि मंत्रालय के अंतर्गत इलायची मंत्रालय आता है या नहीं ? बहुत दिन से पवार साहेब कुछ कहे नहीं हैं  :)

 (चित्र - गुगल ददा से साभार :)

25 comments:

rashmi ravija said...

मन हरियर हुआ ना....यहाँ तो बज्ज़ पर डालते हुए डर लग रहा था...कहीं लाल-पीला ना
हो जाए.:)

{वैसे पता है...मन ही मन कहा जा रहा होगा...अच्छा तो आप डरती भी हैं :)}

ये कच्चे टिकोरों की ऐसी गाथा मत लिखा कीजिए...जिह्वा-मुख सब तरल तरल हो जाता है...

सेवईयों -पेस्ट्री से सजा जन्मदिन तो बहुत बढ़िया रहा...एक बार फिर अनेकों शुभकामनाएं

: केवल राम : said...

चलो कुछ भी हो आपको जन्मदिन की ढेरों शुभकामनायें ...हमारी तरफ से स्वीकार करना ...

anshumala said...

ना सेवई मिली ना पेस्ट्री इसलिए मेरी तरफ से भी सादी सी जन्मदिन की बधाई |

कभी सुना था की

वो नारी क्या नारी जिसने खाई मिठाई

और वो नर क्या नर जिसने खाई खटाई

पर मैंने आप की तरह ही बहुत से पुरुषो को अपने ही दांत खट्टे करते देखा है |

उबाल तो दाल रही थी मुझे लगा की आप लिखेंगे की पत्नी उबलने लगी | वैसे उनका उबलना वाजिब भी है इस महंगाई में एक तरफ ५० के अमिया से खुद के दांत खट्टे कर रही है दूसरी तरफ महंगाई के कारण सेवई बिना इलायची के खानी पड़ रही है |

और पवार साहब चुप ही रहे तो बेहतर है इधर उन्होंने मुह खोला और उधर इलायची का भाव और बढ़ा |

देवेन्द्र पाण्डेय said...

दांत खट्टे सेवईं मीठी
कैसे कोई खाये
कहीं प्याज रूलाये कहीं
इलायचीं होश उड़ाये
..जन्म दिन की ढेरों शुभकामनाएँ।

Abhishek Ojha said...

मुंह में पानी आ गया कच्चे आम पढ़ के :)
जन्म दिन की बधाई. केक की उम्मीद तो रही नहीं अब आपके जन्मदिन पर. बम्बई आता हूँ तो सेवइए खिया दिह :)

संजय @ मो सम कौन ? said...

गनीमत है समय रहते पता चल गया। दस मिनट हैं अभी तारीख बदलने में:))

बेबज़्ज़ होने का कितना घाटा होता है, कोई हम से पूछे:))

हैप्पी बड्डे buddy.

जियो हजारों साल।

डॉ महेश सिन्हा said...

अब इंडिया में भी सब चीज डालर में मिलेगी
बहुत परेशान किए अमेरिकों को :)

राज भाटिय़ा said...

इलायची मै अभी कुछ समय भारत से १००० रुपये किलो ले कर आया था, सब से बढिया वाली, वैसे भाव था ६,८सॊ के बीच मै, ओर अब एक दम से डबल बाप रे, कच्चे आमो को काला नमक लगा कर खाओ, लेकिन ध्यान रहे सामने कही कोई पडोसन ना हो सामने, वर्ना वो दाल से ज्यादा उबल पडेगी आप की दबी आंख को देख कर:)
जनम दिन की बधाईयां जी

सतीश पंचम said...

राज जी,

हजार रूपये तो वाकई में सस्ते हैं। इधर इलायची का भाव जानने की इच्छा हुई तो गुगल खंगालने पर इकोनॉमिक टाईम्स की यह खबर सामने आई।

Restricted arrivals from producing regions further fuelled the uptrend in cardamom prices.

At the Multi Commodity Exchange counter, cardamom for delivery in March surged by Rs 33.80, or 2.40 per cent, to Rs 1,442.80 per kg, with an open interest of just one lot.

Traders said strong demand in the spot market due to ongoing marriage season, amid restricted arrivals from southern region led to upsurge in cardamom futures prices.


संभवत: वायदा कारोबार और खुदरा रेट मिलकर छोटे दुकानदार तक भाव और तेज कर देता है इसलिये जिस दुकानदार से मेरी बात हुई उसने दो हजार से बाइस सौ का रेट बताया था।

डॉ. मनोज मिश्र said...

चलिए यह तो बहुत ही बढ़िया रहा कि जन्मदिन के दिन आपको कच्चा आम तो मिल गया जो कि आप को बहुत ही पसंद है.

प्रवीण पाण्डेय said...

जन्मदिन की ढेर बधाईयाँ। अमिया और इलायची की कहानी, मँहगी कहानी।

Rahul Singh said...

पोस्‍ट में आज बैठे-ठाले षटरस मिल जाएंगे सोचा था, इसलिए लगा कि आपने पूरा नहीं किया.

Arvind Mishra said...

जन्मदिन की तनिक विलंबित शुभकामनाएं !
आप गंजब हैं अभी भी कच्चा आम खाते हैं मतलब अमियाँ
यह हापुस है या दक्षिण का कोई आम ?

ajit gupta said...

आज क्‍या बात है, कच्‍चा आम? महिला खाती तो दस प्रश्‍न हो जाते लेकिन यहाँ तो आप खा रहे हैं! मुँह में पानी ला दिया।

सतीश पंचम said...

अरविंद जी,

आम की वेरायटी के बारे में कुछ कह नहीं सकता शायद दक्षिण का ही है। आम के उपलब्धता के आधार पर शायद दक्षिण का ही कोई किस्म होगा।

मनोज कुमार said...

श्रीमती जी जब सामने हों तो संस्मरण सुनाने में भी अतिरिक्‍त सचेतता आना स्वाभाविक ही है, पर इससे आपकी संस्मरण गाथा की स्‍वाभाविकता का ह्रास बिल्कुल नहीं हुआ है। सचेत होकर संस्मरण लिखना समकालीनता की मांग हो सकती हो पर आपकी यह सचेतता केवल अवधारणात्‍मक नहीं है, बल्कि यह आपके व्यहार या आचरण से फूटती हुई प्रतीत हुई जो हमें गहरे संवेदित करती चली गई। आम और इलायची तो बहाना है, बचपना जीना और गंवईपना आपकी ही नहीं आपकी रचनात्मक विशिष्‍टता का परिचायक है।
देरी से ही सही, जन्म दिन की धेरों शुभकामनाएं।

सतीश पंचम said...

गिरिजेश राव जी की चैट के दौरान प्राप्त मौजात्मक टिप्पणी :)

जन्मदिन की ढेरों बधाइयाँ... अभिषेक ओझा, सतीश पंचम वगैरह मर्द हमेशा उम्मीद से रहते हैं इसलिये उन्हें कच्चे आम की दरकार रहती है.

सोमेश सक्सेना said...

हमारी भी विलम्बित शुभकामनाएं स्वीकार कीजिए।
बड़ा स्वादिष्ट पोस्ट रहा आपका। अपना तो ये हाल हो गया कि जी ललचाए रहा न जाए। :)

tapesh chauhan said...

जन्म दिन की बहुत - बहुत बधाई ( देरी से मालूम पड़ा ).....वैसे मैंने कई बार लोगो से सुना है कि एक आदमी (मर्द ) को खटाई, मिठाई और लुगाई से परहेज करना चाहिए.......पता नही कहा तक सच है.............?

Udan Tashtari said...

चलो, आम के चटखारे तो ले ही लिए.

पुनः बधाई.

Suresh Chiplunkar said...

गिरजेश राव जी ने तो हमारे मन की बात कह डाली…
जन्मदिन हेतु "टोकरी भर" शुभकामनाएं…
और 100 इलायची दानों भर स्नेह स्वीकार करें… :) :)

शोभना चौरे said...

सतीशजी
देर से ही सही जन्मदिन की अनेकों शुभकामनाये |
आपने तो आम के आम और गुध्लियो के दाम भी गिना दिए |आम और इलायची का सम्बन्ध भी अच्छा रहा !

gyanduttpandey said...

आम? अभी तो यहां बीस रुपये के ड़ेढ़ किलो मटर की घुघुरी/निमेना चल रहा है भकोसनार्थ! :)

जन्म दिन की बहुत बधाई बन्धु!

anitakumar said...

सतीश जी बहुत ज्यादा दिन बस एक दिन देर से जन्म दिन की बधाई देर दे रही हूँ, अब खाड़ी पार करते करते बधाई ट्रेफ़िक में फ़ंस गयी थी और इधर हमारी तरफ़ सड़कें भी चांद से मुकाबला करने में लगी हैं। बस इसी कारण। वैसे हमारे दांत तो पढ़ कर ही खट्टे हो गये, अब सैंवई अकेले अकेले मत उड़ा जाइए

avanti singh said...

इलायची की एक फोटो को ढूंढते हुए आप के ब्लॉग तक पहुचना हुआ,बहुत ही उम्दा लिखते है आप,बधाई.......

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'
A Photo from - Thoughts of a Lens

ढूँढ ढाँढ (Search)

© इस ब्लॉग की सभी पोस्टें, कुछ छायाचित्र सतीश पंचम की सम्पत्ति है और बिना पूर्व स्वीकृति के उसका पुन: प्रयोग या कॉपी करना वर्जित है। फिर भी; उपयुक्त ब्लॉग/ब्लॉग पोस्ट को हापइर लिंक/लिंक देते हुये छोटे संदर्भ किये जा सकते हैं।




© All posts, some of the pictures, appearing on this blog is property of Satish Pancham and must not be reproduced or copied without his prior approval. Small references may however be made giving appropriate hyperlinks/links to the blog/blog post.