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Monday, February 21, 2011

गुलज़ार का लिखा कॉमर्शियल Ad और उसकी खूबसूरती....

    Bajaj Allianz का यह पुराना Ad देखा है आपने ? जब टीवी पर यह Ad चल रहा था तभी इसे देखकर लगा कि हो न हो इसे गुलज़ार ने लिखा होगा और नेट पर सर्च करते ही मेरा अनुमान सच निकला। उपर से इन लिरिक्स को जिस अंदाज में सुखविंदर ने अपनी आवाज दी है वो इस Ad को और भी खूबसूरत बना गया। साथ है विशाल भारद्वाज का संगीत.....


  हाल फिलहाल यह Ad  अब फिर से खूब दिखने लगा है.......लिरिक्स की खूबसूरती देखिये.....


ये किस प्यारी हिफ़ाजत में हो


बेफ़िक्री की हालत है


याराsss


बड़ी मज़बूत बाहों में हो


सूरज की हरारत है


याराsss


तुम्हारे वास्ते तूफ़ान सहलेंs


मुस्कराओ तुम,


जियो हर लमहाss



तुम्हें ज़िंदगी पीने की आदत है

याराsss याराsss याराsss


- गुलज़ार


  आप भी देखिये इस Ad को और गुनगुनाइए ......कि.... तुम्हें ज़िंदगी पीने की आदत है :)







  प्रस्तुति - सतीश पंचम

13 comments:

ajit gupta said...

गुलजार जैसे गीतकार ऐसे ही है जिनको शब्‍दों से पहचाना जा सकता है। लेकिन यह विज्ञापन पहले नहीं देखा था।

anshumala said...

हा विज्ञापन तो वाकई मुझे भी काफी पसंद था पहले से ही पर मुझे नहीं लगा था की गुलजार भी विज्ञापनों के लिए जिंगल जैसा कुछ लिख सकते है | मै तो विज्ञापन बनाने वाले की दाद दे रही थी की वाह क्या विज्ञापन बनाया है गाने की तरह जुबान पर चढ़ जाता है |

Suresh Chiplunkar said...

मैंने भी नहीं देखी थी यह विज्ञापन फ़िल्म…
आपकी पारखी नज़र पड़ गई ये अच्छा हुआ… :)

शिवकुमार ( शिवा) said...

सुंदर प्रस्तुति .

रंजना said...

पहली बार सुनी/देखी....

सचमुच लाजवाब है...बहुत ही कर्णप्रिय...लेकिन यदि एक पूरी गीत होती,तो कितना आनद आता न...

बस लग रहा है,पांच छः मिनट का एक पूरा गीत इस रिदम में सुनने को मिलता....

Arvind Mishra said...

कितना रुमान दबा छुपा के बैठा है यह जौनपुरी !

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

सचमुच लाजवाब है...बहुत ही कर्णप्रिय...
कई बार देखा है इसे। बस इसकी जड़ तक पहुँचने का हुनर आप जैसा नहीं है।

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

बहुत मधुर है और चित्रांकन भी आकर्षक।

rashmi ravija said...

गज़ब का विज्ञापन है ये...awesome

संजय @ मो सम कौन ? said...

पी. गोपीचंद को खेलते कभी नहीं देखा, लेकिन जब मालूम चला था कि उसने किसी कोला कंपनी का विज्ञापन करने से इस बेस पर मना कर दिया था कि स्वास्थ्य के लिये ऐसे ड्रिंक्स के नुकसानदयक होने के कारण वह खुद भी इनका सेवन नहीं करते और इस नाते इसे प्रमोट करने का काम नहीं करेंगे भले ही एक भारी भरकम रकम मिल रही हो, तो उनके प्रति मन में श्रद्धा हो आई थी।
गुलजार साहब के हम भी फ़ैन रहे हैं, विज्ञापन भी अच्छा ही होगा, लेकिन हमें इस कंपनी ने जला रखा है। चार साल बाद भी दो अलग अलग पालिसीज़ में लगाया पैसा मूलधन से भी नीचे है, तो हम तो तारीफ़ नहीं करेंगे:))

डॉ. मनोज मिश्र said...

गज़ब.

प्रवीण पाण्डेय said...

साहित्यिक गीत से एड भी निखर आता है।

Dharmendra kumar said...

Bahut Achchha Laga padkar

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