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Sunday, January 30, 2011

जलदेवता की राशनिंग.... सररर्र... सों.... सों......


    हम लोग अक्सर अपने जीवन में किसी किस्म की राशनिंग बर्दाश्त नहीं करते। नहीं चाहते कि कोई हमें अपने जीवनयापन के लिये नाप कर राशन देनाप कर पानी आदि की सुविधा दे। यदि कभी इस तरह की नौबत आ भी जाय तो तुरंत पैसे लेकर मार्केट से उस वस्तु की उपलब्धता के लिये जुगाड़ करने में लग जाते हैं ताकि नपा नपाया पाने से बचा जाय। यदि गरीब तबके को छोड़ दें तो खाये अघाये स्ट्रैटा वाले न जाने कितने घरों में राशन कार्ड केवल एक सरकारी दस्तावेज बन कर रह गये हैं। उनका इस्तेमाल यदा कदा सरकारी कामकाज के दौरान ही पड़ता है। कइयों को तो पता भी नहीं होगा कि उनका राशन कार्ड एरिया के किस राशन वाली दुकान के अंतर्गत अलॉटेड है। लेकिन यह भी सच है कि राशनिंग की अपनी उपयोगिता रही है। पहले भीअब भी और शायद आगे भी रहेगी।
  
     अभी हाल ही में मुझे एक तकनीकी वजह से विशेष किस्म की राशनिंग से दो चार होना पड़ा।  विशेष इसलिये क्योंकि फिलहाल मेरे घर में पानी की राशनिंग चल रही है। न सिर्फ मेरे घर में बल्कि पूरी सोसाइटी में। दरअसल  हमारे एरिया में पानी की पाइपलाइन की मरम्मत का काम पिछले दस दिनों से चल रहा है। इस वजह से पानी बहुत कम आता है। पहले भी कम ही आता था लेकिन एनफ़ था। चल जाता था काम। अब हालत यह हो गई है कि केवल पीने का पानी भर पा रहे हैं और वही टंकीयां जिन्हें पहले पौना-तिहा भर पा रहे थे अब आधी से भी कम भर पा रही है। ऐसे में समझ सकते हैं कि पानी की कितनी शॉर्टेज चल रही है। 
     
      अब इस तरह की शॉर्टेज में कुछ मजेदार वाकये भी होते रहे हैं। सोसाइटी में जहां एक ओर पानी के लिये कांव कांव चलती रहती है वहीं समूची लिफ्ट गीली रहती है क्योंकि लोग पानी की कमी के चलते बिल्डिंग से उतर कर पास के ही किसी नल से पानी भर-भुर के ढो-ढवा कर ला रहे हैं। बिल्डिंग की लिफ्ट उसी के लिये भरपूर काम में लाई जा रही है। कहीं कहीं पर तो पानी की कमी के दौरान बरतन ज्यादा न धोना पड़े इसलिये खिचड़ी या ऐसी ही किसी चीज को खा पीकर काम चलाया जा रहा है तो कहीं कपड़े बाहर लांड्री में धुलाए जा रहे हैं। यानि कि जलदेवता ने एक ओर खिचड़ी खिलाकर गरीबी का एहसास दिलाया है तो दूजी ओर लांड्री मं कपड़े धुलवाकर अमीरी का भी रूतबा दिलाया है। 

    लेकिन मैं यहां अपनी बात करूं तो मेरे घर में जलदेवता थोड़ा अलग ढंग से बिहेव कर रहे हैं। न सिर्फ जलदेवता बल्कि पवन देवता भी गलबहियाँ डाले अपनी कलाकारी दिखा रहे हैं। दरअसल मेरे घर में एक बड़ी टंकी है और एक छोटी। बड़ी टंकी का पानी एक नॉन रिटर्न वाल्व के जरिये छोटी टंकी में जाता है, यानि कि बड़ी टंकी से पानी छोटी टंकी में जा तो सकता है लेकिन रिटर्न नहीं आ सकता।
    
       इधर कन्सील्ड पाइपलाइनों का ये हाल है कि वे दीवार के अंदर ही अंदर आपस में चुप्पे चुप्पे बोल बतियाती रहती हैं। सभी पाइपें आपस में जुड़ी हुई हैं। उनकी आपसी बातों का पता तब चलता है जब उपर पानी की छोटी टंकी खाली होने के दौरान ...सांय....सुर्र....सों.. सों  की आवाजें सुनाई पड़ती है। और यहीं से शुरू होती है जलदेवता की राशनिंग। 

    दरअसल होता यह है कि बड़ी टंकी में पानी होने के बावजूद टोटी से पानी पूरे फ्लो में तभी उतरता है जब छोटी टंकी में कम से कम एक- डेढ़ इंच लेवल का पानी बचा हो। वरना बड़ी टंकी में चाहे जितना पानी हो, वह पतली धार के रूप में ही आएगा।  इधर पानी की शार्टेज के दौरान वह डेढ इंच का मिनिमम स्तर भी नहीं रह पाता। पूरी टंकी खाली हो जाती है और उन खाली पाइपों में पवन देवता आकर विराजमान हो जाते हैं। 
   
      अगले दिन जब बड़ी टंकी में पानी आता भी है तो उस पानी में इतना प्रेशर नहीं रहता कि वह छोटी टंकी के पाइपों में बसे पवन देवता यानि कि एयर पैकेट्स को धकिया सके। और  इसलिये छोटी टंकी खाली की खाली ही रहती है। ऐसे में बड़ी टंकी में पानी रहने के बावजूद वह पूरे फ्लो के साथ टोटी से नीचे नहीं उतर पाता।  बूंद बूंद वाली पतली धार के जरिए एक बाल्टी भरने में पंद्रह बीस मिनट का वक्त लग जाता है। 
  
    अब जहां इतनी पतली धार हो तो घर के तमाम काम निपटाने, कपड़े बर्तन आदि धोने के दौरान खीझ तो होती ही है कि इतना वक्त लग रहा है। उधर ऑफिस जाने, बच्चों के स्कूल जाने के वक्त पर स्लो पानी आने का साइड इफेक्ट भी दिख रहा है। मसलन, नहाने के दौरान बाल्टी की धीमी भरावट देख घर के लोग आधी पौनी बाल्टी होते होते अधीर होकर उतने में ही नहा ओहा कर फारिग हो रहे हैं, वरना नहाने में अब तक कम से कम दो बाल्टी पानी हर किसी को लग रहा था। 
    
      उधर श्रीमती जी अलग टोकती रहती हैं कि प्लंबर को बुलाकर ठीक क्यों नहीं करवाते। ये क्या बात हुई कि बड़ी टंकी में पानी होने के बावजूद सिर्फ इसलिये की छोटी टंकी को क्यों नहीं भरा गया थोड़ा थोड़ा ही पानी मिले। इधर मैं खुश हूं कि चलो इस पानी की पतली धार वाली राशनिंग के चलते पूरी टंकी फटाक से खाली होने से बच जाती है। थोड़ा बहुत जो बड़ी टंकी में बच जाता है अगले दिन के पानी के साथ मिलकर थोड़ा सा राहत ही देता है। वरना तो पूरे फ्लो में यदि पानी टोटियों से उतरता तो निश्चित था कि घर के लोग तब पुरानी आदत के हिसाब से ही पानी का इस्तेमाल करते और टंकी निश्चित ही खाली हो जाती। मजबूरन मुझे भी बाकियों की तरह बिल्डिंग से नीचे जाकर पानी ढोकर लाना पड़ता। 
    
    अपनी तरह के इस अनोखी राशनिंग का ही असर है कि घर के तमाम पानी वाले काम धीमे ही सही हुए जा रहे हैं, बाकीयों की तरह नीचे नहीं उतरना पड़ रहा है। और तो और,  मैं निश्चिंत हो इस पर पोस्ट भी लिख रहा हूं :)   

     लेकिन एक डर है, पोस्ट लिखने के बाद कल को कहीं जलदेवता खुशी से फूले न समाने लगें और पूरे फ्लो से टोटीयों में नहीं उतर जांय, वरना टंकी का खाली होना तय है।  वैसे भी हम इंडियन कही गई बातों को लेकर कुछ ज्यादा ही आशंकित रहते हैं कि कहीं हमारे द्वारा किसी बात पर खुशी व्यक्त करते ही कल को उसका उल्टा न होना शुरू हो जाय.....I Mean....The Great Indian superstitious Mentallity............. .......Laden with....... 'थोथी आशंका' :)

   - सतीश पंचम

स्थान - वही, जहां पर जलदेवता पवन देवता के साथ मिलकर मेरे घर की टोटियों में सन सनन सांय सांय गीत गाते हैं।

समय - वही, जब अमरीकी सरकार कुछ लोगों के पैरों में रेडियो कॉलर लगा रही हो ताकि उनको अमेरिका में ट्रैक किया जा सके, उनकी मूवमेंट पता चल सके और तभी करीना कपूर आयें और कहें - प्लीज एक ट्रेकिंग कॉलर शाहिद कपूर के पैरों में भी पहना दें। कम्बख्त  इन्कम टैक्स वालों ने छापा मारा प्रियंका चोपड़ा के घर ताकि टैक्स चोरी का पता लग सके और सुबह सुबह शाहिद कपूर ने आँख मलते हुए वहां दरवाजा खोला था।  पता नहीं आजकल कहां-कहां मुँह मारता फिरता है मुआं :)

18 comments:

Kajal Kumar said...

बिन पानी सब सून ...
(देखा कबीर को ये सब पहले ही पता था)

डॉ. मनोज मिश्र said...

इस देश के बंटाधार में इस राशनिंग का भी कम योगदान नहीं है.

Arvind Mishra said...

चलिए आप ने यह ब्लॉग टोटका कर दिया....हालत सुधर जायेगी :)

प्रवीण पाण्डेय said...

जलदेवता की राशनिंग कभी कभी जीवन को नये सिरे से सोचने पर विवश कर देती है। जीवन के हर क्षेत्र में राशनिंग प्रयोग होते रहें तो जीवन के प्रति प्रेम बहुतायत में हो जायेगा।

Patali-The-Village said...

जीवन के हर क्षेत्र में राशनिंग प्रयोग होते रहें तो जीवन के प्रति प्रेम बहुतायत में हो जायेगा।

सोमेश सक्सेना said...

रोजमर्रा की चीजों पर इतना अच्छा कैसे लिख लेते हैं आप? और वो भी रेखाचित्र के साथ ताकि समझने में कोई दिक्कत न हो।
मजेदार लेख संदेश के साथ :)

mridula pradhan said...

kafee manoranjak lagi.

मनोज कुमार said...

कभी-कभी सोचता हूं ये राशनिंग किसके लिए है? आम लोगों के लिए ही ना, ‘खास’ को कोई फ़र्क़ पड़ता है क्या? उनके लिए तो शास्त्री जी की ये पंक्तियां हैं,
ऊपर-ऊपर पी जाते हैं, जो पीने वाले हैं
कहते ऐसे ही जीते हैं, जो जीने वाले हैं।

.... और प्रसंगानुकुल है या नहीं जमुना प्रसाद उपाध्याय जी की ये पंक्तियां भी याद आ गईं तो सोचा शेयर कर लूं
नदी के घाट पर भी यदि सियासी लोग बस जाएँ।
तो प्यासे लोग इक-इक बूँद पानी को तरस जाएँ।।
ग़नीमत है कि मौसम पर हुक़ूमत चल नहीं सकती,
नहीं तो सारे बादल इनके खेतों में बरस जाएँ।।

anshumala said...

पानी की राशनिंग और बोतल का पानी इन दोनों से मेरी मुलाकात भी इस तथा कथित सुख सुविधाओ से भरपूर महानगर मुंबई में ही हुआ | "गोरी भर ला पनघट से पानी " सुना था यहाँ तो उसे करना भी पड़ा दो बार वही मरम्मत के चलते |और एक ठो अमेरिकी पट्टा हम लोगों के सांसदों और विधायको को भी पहनाना चाहिए ताकि पता तो चले की वोट लेने के बाद कहा गये | मजेदार पोस्ट |

P S Bhakuni said...

paani ka mahatv samajh main aaya .
achhi post hetu abhaar .

sanjay jha said...

apne to 'sukhi tonti' se bhi logon ko
pani-pani kar diya.........

pranam.

tapesh chauhan said...

अपना गाँव ही बढ़िया है .....ताज़ा पानी ताज़ी हवा .......चले आओ .....

Rahul Singh said...

सीख ली जा सकने वाली सोच और तकनीक.

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

अच्छा लगा यह गरज के साथ छीटों भरा पवन जल सम्वाद!
और आज यह भी पता चला कि (छोटी टंकी में) कुछ पानी के लिये कुछ खोना भी पड़ता है!!

Poorviya said...

jai ho jal devta ki ---
ham sab ke uper unca aashirwad bana rahe---

rashmi ravija said...

आपके ख़ास अंदाज़ में लिखी..रोचक पोस्ट

रंजना said...

इतना तो नहीं पर इससे कुछ कैफियत वाली राशनिंग यदि सालों भर देश के हर नागरिक के घर में रहे,तो हम जल समस्या से कुछ और वर्ष बचे रह सकते हैं..वर्ना तो हम मुहाने पर खड़े ही हैं कि बहुत जल्दी यह रोज की घर घर की कहानी बनेगी.

कविता रावत said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति

जन्मदिन की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामना

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'

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