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Saturday, January 15, 2011

विशेष मानसिकता का दोहन....बजरिये कप, टी शर्ट, कार और ..... कस्टमाइज्ड पोस्टल स्टैंप से भी :)

      हाल ही में CNBC चैनल पर खबर देखा कि Indian Postal Department ने  पर्सनलाईज्ड स्टैंम्प की कवायद शुरू करी है। पर्सनलाइज्ड स्टैंप से तात्पर्य लोग अपनी तस्वीरों वाले डाक टिकट पैसे  देकर बनवा सकते हैं और उसे पत्रों आदि पर इस्तेमाल कर सकते हैं। इस तरह के Personalised Stamps के पीछे डाक विभाग की सोच है कि ऐसे लोगों की मानसिकता का दोहन किया जाय जोकि हर किसी चीज को कस्टमाइज्ड तरीके से चाहते हैं और उसके लिये पे करने को भी तैयार हैं। 

      खबर देखकर मुझे अपने कई मित्रों की याद हो आई जोकि हर चीज में अपने आप को ही देखते हैं, उनके चाय के मग को देखिये तो उस पर उनकी या उनके बेटे की तस्वीर होगी, टी शर्ट पर देखिये तो वहां भी कोई तस्वीर वगैरह चस्पां होगी। मैं इसे गलत नहीं मानता, बाकी चीजों की तरह यह भी एक किस्म का शौक है, सनक है, एक तरह की चाह है। लेकिन लगता है कि हम लोग इस तरह के मैं ही  मैं  में  कुछ ज्यादा ही. 
 'मैं-नुमा' हो गये हैं।  

     मुझे अपने छात्र जीवन का एक वाकया याद आता है।  मेरे हिंदी के शिक्षक श्री एम पी सिंह जी की क्लास चल रही थी और एक छात्र (नाम याद नहीं आ रहा) हिंदी की क्लास में मस्ती करते हुए आस पास के छात्रों के किताब, कंपास आदि पर अपना नाम लिखे जा रहा था।  इधर वह किताब में फीं फीं करते हुए दबी हंसी के साथ नाम लिखता, दूसरा उससे तेरी तूरी करते हुए झगड़ता, इसी छीना झपटी में क्लास डिस्टर्ब हो रही थी।   एम पी सिंह जी ने बोर्ड पर लिखते लिखते कनखियों से देखा और सीधे जाकर उस छात्र के पास खड़े हो गये। सभी चुप।  

   बता दूं कि  मेरे हिंदी के शिक्षक श्री एम पी सिंह जी कभी किसी छात्र को मारते नहीं थे। कभी मारना भी पड़ गया तो केवल कान उमेठते थे हल्के से। छात्रों पर काबू करने का उनका जरिया होता था एक दो पंक्तियों का उनका सरल व्यंग्य इतना सरल कि हम बच्चे समझ जांय। 

 पूछा  - क्या हो रहा था ?

 एक ने बताया कि सर, ये मस्ती कर रहा था। हम लोगों के किताबों पर अपना नाम लिख रहा था। 

    किताबें खोलकर दिखाई गईं। शिक्षक महोदय ने किताबों पर उसका नाम लिखे देखा और मुस्कराते हुए बोर्ड की तरफ बढ़ गये। कक्षा चुप। पिन ड्राप साइलेंस। 

 अपनी गंभीर आवाज में बोले  - अपना नाम हर जगह लिखा होना बहुत अच्छा लगता है,  नहीं ? यहां भी मेरा नाम, वहां भी मेरा नाम, इत मेरा नाम, उत मेरा नाम। 

      ऐसा करो कि आज से आप लोग सुबह उठते ही अपना नाम जपना शुरू करो। शीशे के सामने खड़े हो जाया करो और बोलना शुरू   करो - 


          अजय....अजय....अजय......रमेश....रमेश...रमेश......वीणा...वीणा.......गीता....गीता......  आप लोगों को बहुत अच्छा लगेगा........... नहीं ? 

   लोग दूसरों का नाम जपते हैं अपने इष्टदेव राम, वाहेगुरू का नाम जपते हैं महान लोगों के नाम जपते हैं...... आप अपना नाम जपो...... देखो....एक बार करके देखो तो। 

     उसके बाद जिस छात्र ने मस्ती की थी वह तो शांत ही हो गया बाकी लोग भी चुपचाप लेक्चर पर ध्यान देने लगे। एम पी सिंह जी की यही तकनीक थी। गलती एक करेगा लेकिन संबोधन पूरी क्लास को होगा वह भी व्यंग्य बाण के साथ ताकि अगला सावधान हो जाय। 

       इस घटना को यहां लिखने का विशेष कारण यह है कि डाक विभाग की Personalised मानसिकता दोहन स्कीम मुझे  एम पी सिंह जी की खुद का नाम जपे जाने की स्कीम की तरह लग रही है। अब तक केवल बड़ी हस्तीयों के ही चित्र आदि छपते थे डाक टिकटों पर, उनके जन्मशती या कि किसी विशेष घटना आदि के यादगार के तौर पर। लेकिन आगे सब लोग अपना चित्र डाक टिकटों पर देख पाएंगे, देख देखकर प्रसन्न होंगे।  

     फिलहाल तो विदेशों में कई सरकारों के यहां Personalised Stamps का चलन है। लोग पैसे देकर अपनी तस्वीरें स्टैंम्प पर छपवाते भी हैं। अभी कुछ साल पहले एक खबर पढ़ा था कि किसी फिल्मी हीरो के नाम पर एक विदेशी सरकार ने डाक टिकट जारी किया है। यहां की मीडिया में खूब प्रचारित किया गया, लेकिन बाद में पता चला कि अरे वहां तो कोई भी पैसे देकर सरकारी छापेखाने से अपनी तस्वीरों वाले स्टैंप जारी करवा सकता है। ये तो हमारे मीडिया भाई बंधु लोग थे जो भारतीयों में पब्लिसिटी स्टंट के जरिये प्रचारित कर रहे थे कि फलां हीरो इतना महान है कि उसे विदेशी सरकार ने सम्मानित करते हुए उसके नाम स्टैंप जारी किया है। 

     खैर, स्टैंप वगैरह की स्कीम जब आएगी तब आएगी। अभी तो कई सारे साफ्टवेयर इस तरह की सुविधा देते हैं कि आप अपनी तस्वीरें स्टैंप के तरह की छाप सकते हो। नेट पर भी ढेर सारी साइट्स दिखीं जहां पर कि आप अपने नाम का कस्टमाइज्ड स्टैंप बनवा सकते हो। केवल फोटो अपलोड करने और पेमेंट देने की देर है।  

    इसी चुहल में मैंने अपने गाँव के एक बुजुर्ग शख्स की तस्वीर को एक साइट पर अपलोड किया। प्रिव्यू में तस्वीर स्टैंप वगैरह के साथ दिखने लगा। Next Step के दौरान साइट से पैसे मांगे जाने लगे तो मैने एक शरारत की। तस्वीर जहां प्रिव्यू दिखा रहा था उस पेज का स्क्रीन शॉट ले लिया और पिकासा में जाकर क्रॉप कर दिया। बदले में आई ये स्टैंप वाली तस्वीर जो बगल में लगी है :)

   यहीं ब्लॉगजगत में देखता हूं तो लोगों को अपनी तस्वीरें डिफरेंट डिफरेंट पोज़ में अपनी पोस्टों पर दिखाते  है। किसी से बतियाते हुए, बैगपैक टांगे हुए, कहीं जाते हुए, गंभीर दिखते हुए, सोचते हुए, सोते हुए, खंखारते हुए, मेरी तरह नहाते हुए भी :) 

       ऐसे लोगों के लिये ये गोल्डन चांस है कि स्टैंप पर अपनी तस्वीरें लगा लें।  यार मित्रों को भी दिखायें। बतायें कि मैं कैसा लगता हूं इस तरह के पोज़ में..... ब्लॉगजगत में तो सब देख ही चुके हैं कुछ नाते रिश्तेदारों को भी दिखाएं। वैसे भी मुझे लगता है कि जो लोग इस तरह से अपनी पोस्टों में विभिन्न विभिन्न पोज़ में अपनी तस्वीरें लगाते हैं वह अपनी अधूरी इच्छाओं को ब्लॉगजगत में पूरा करते हैं। संभवत: जवानी में उनकी इच्छा मॉडलिंग आदि में में जाने की हो लेकिन तब वह इच्छा पूरी नहीं कर पायें .....अब जाकर ब्लॉगिंग में वह साध पूरी कर रहे हों  :) 

       तो भई, अभिव्यक्ति के इसी संसार में लोग अपनी मॉडलिंग की इच्छा भी पूरी कर ले रहे हैं। कुछ मेरी तरह के हैं कि ब्लॉगिंग के जरिये अपने  फोटोग्राफी का भी शौक पूरा कर ले रहे हैं ।  नेट पर ढेर सारे फोटोग्राफी वाले ब्लॉग देखता हूं जहां पर कि केवल तस्वीरें ही तस्वीरें हैं। एक से बढ़कर एक। प्रकृति की, जीवन की, मुश्किलों की, विषय आधारित....ढेरों। मैं भी चाहता था कि अपने द्वारा खिंची गई प्रकृति, पर्यावर, खेत खलिहान, कीट- पतंगों, कोटर, मेंढक, चरखी, फूल आदि की तस्वीरों के लिये अलग ब्लॉग बनाउं लेकिन एक इस सफ़ेद घर ब्लॉग को ही संभालना बड़ी मुश्किल से हो पाता है, समय नहीं मिल पाता तो दूसरे ब्लॉग को कहां समय दे पाउंगा। इसलिये जो है सो यहीं है। धीरे धीरे विषयों के साथ, पोस्टों के साथ  एक- एक चित्र का अपलोड चलते रहेगा। कभी किसी विषय पर तो कभी किसी विषय पर। मेरे लिये गुगल के ब्लॉगर प्लेटफार्म का एक उपयोग यह भी सही..... मेरे कीट पतंगों को, कोटर वाले जीवों को नेट पर जगह तो मिल रही है  :)  

     और हां, जिस किसी को मॉडलिंग का शौक हो तो डाक विभाग से जरूर संपर्क करें । Personalised Stamps के लिये Indian Postal department ऐसे लोगों की आतुर निगाहों से बाट जोह रहा है  :)

 देखना चाहता हूं कि कितने लोग इतने महान हैं कि डाक विभाग उनके नाम से डाक टिकट तक जारी कर रहा है :)

 - सतीश पंचम 


10 comments:

hindizen.com said...

अच्छी बात बताई, अभी कम्प्युटर में अपनी कुछ दुरलभ तस्वीरे निकालता हूँ इस सेवा का लाभ लेने के लिए. नहीं मिलीं तो खुद ही खींच लूँगा. सेवा शुरू होने में तो अभी खासा समय होगा ही.
इस सेवा का उपयोग करके उन लोगों की घटिया स्टैम्प भी छपवा सकते हैं जिन्हें हम सख्त नापसंद करते हैं. उनके चेहरे को बिगाड़ कर स्टैम्प छपवाने में बड़ा मज़ा आएगा.

सम्वेदना के स्वर said...

हमने एक पोस्ट लिखी थी नाम अमर करने की चाह.. ऐतिहासिक ईमारतों के बदन पर अपना नाम गोद देना और अपनी महबूबा का भी कभी प्ल्स बनाकर और कभी दिल के अंदर..
हमने जब गुमनाम रहना चाहा तो लोगों ने बेनामी का जामा पहना दिया... और जब नाम लिखा तो शकल भी दिखा दी कि भैया तसल्ली कर लो हम भी हाड़ माँस वाले इंसान हैं...
और ब्लॉग जगत में मॉडलिंग का शौक पूरा करने की बात पर ज़ुबाँ सी लेने की अनुमति चाहते हैं!!

डॉ. मनोज मिश्र said...

@ देखना चाहता हूं कि कितने लोग इतने महान हैं कि डाक विभाग उनके नाम से डाक टिकट तक जारी कर रहा है :)
यही सही है.

Arvind Mishra said...

खुद को दिखना दिखाना मनुष्य की एक एक वृत्ति है बशर्ते यह प्रवृत्ति मनोविकार के स्तर पर न चली जाय

मनोज कुमार said...

अच्छा आइडिया दिए हैं। इसकी जानकारी नहीं थी। काफ़ी अच्छा टाइम पास हुआ। हमें अच्छा लगा रहा है स्टाम्प बनाना। पर वहीं आकर अटक गया हूं। कुछ चौदह पन्द्रह पाउंड मांग रहे हं, और उसके बाद आपने कैसे वोतस्वीर निकाल ली वो हमसे हो नहीं रहा।

सतीश पंचम said...

मनोज जी,

ये टाईम पास कल शाम को ही कर रहा था मैं :)

इस लिंक पर जाकर

http://photo.stamps.com/Store/?source=si10985886

दरअसल फोटो अपलोड करते ही एक प्रिव्यू दिखाता है वहीं उसी पेज का स्क्रीन शॉट ले लिया जाय और पिकासा मे जाकर उसी तस्वीर को Crop कर दिया जाय तो ऐसी तस्वीर निकल आती है :)

नाहक टाइम पास है :)

Vivek Rastogi said...

सभी लोग इसी मानसिकता का दोहन कर रहे हैं, डाक विभाग तो नया लगता है कि आईडिया निजी कंपनियों से मार लिया है।

बहुत सी निजी कंपनियों की तो रोजी रोटी ही नाम छापकर और फ़ोटो छापकर चल रही है, जब देखो इनके ईमेल अपने इनबॉक्स में आ जाते हैं, और कोमल दिमाग को हिलाने का काम करते हैं।

प्रवीण पाण्डेय said...

हमें नहीं बनवाना यह, मुँह पर जब डाकिया ठोंक लगायेगा तब सब ऐंठ निकल जायेगी।

सुशील बाकलीवाल said...

श्री प्रवीण पांडेयजी से सहमत.
वाकई बडी बेरहमी से मुंह पर ठप्पे तडातड की शैली में लगते हैं वहाँ.

gyanduttpandey said...

ए वाली साइट की बजाय एक गुमटी सिविल लाइंस में लगा कर लोगों के पोस्टेज स्टाम्प बनायें तो बहुत बिक्री सम्भव है।

धन्यवाद। नौकरी से रिटायर होने के बाद ध्यान रखूंगा इस आइडिया को! :)

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