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Wednesday, December 1, 2010

'फेक लाईफ' की 'फेक नेस्सेसिटी'.. ........सतीश पंचम

     कभी कभी तकनीक अपने साथ  'आधिकारिक तौर पर मान्य छद्म' या 'Official Fakeness'  लिये  होती है । इसे मैं एक तरह से 'तकनीकी छद्मपंती' याकि  'Official Fakeness of Technology' की संज्ञा देना चाहूंगा।

      दरअसल हुआ यूं कि एक मोबाइल स्टोर में मोबाइल के फीचर समझ रहा था कि तभी एक जगह ध्यान टिक गया। सेल्समैन ने कहा कि आप इस मोबाइल से फेक कॉल भी कर सकते हैं। फेक कॉल शब्द सुनते ही दिमाग की घंटी बजी कि ये क्या बला है ?

      जानकारी लेने पर पता चला कि इस मोबाइल में एक फेक कॉल जनरेट करने वाला बटन है। उसे दो सेकंड तक दबाये रखने पर कुछ समय बाद आपके फोन पर कोई फोन आएगा। ये एक तरह से केवल रिंगटोन होगा और आप उस फेक काल को रिसिव कर सकते हैं।

       मैं अब भी नहीं समझा कि ये अपने से ही कॉल करना और फिर उसी कॉल को खुद ही रिसिव करना क्या मतलब रखता है ?  तब बंदे ने बताया कि जब आप किसी मीटिंग या सभा आदि में बोर हो रहे हों, मित्र मंडली के बीच से पीछा छुड़ाना हो, वहां से हटना हो या फिर ऑफिस में बॉस के सामने दिखाना हो कि क्लॉइंट से बात कर रहा हूँ अभी मत डाँटिए तो ऐसे गाढ़े वक्त पर यह फेक कॉल बड़ा काम आता है।  इधर खुद से सेट किया हुआ  कॉल आया और उधर आप बात करने के बहाने वहां से सटक लिए।

   मुझे यह फ़ीचर बड़े काम का लगा। आए दिन हम लोग मोबाइल के चलते इस तरह के प्रिय अप्रिय स्थानों पर फंसते रहते हैं। वहीं, यह भी लगा कि यदि इसी तरह की तकनीक कभी पुराने जमाने के किसी डिवाइस में होती तो कितना अच्छा होता। 

    कल्पना करें कि भरे दरबार में द्रौपदी का चीर हरण हो रहा है और सामने ही दरबार में बैठे वरिष्ठ गुरूजन मुंडी नीचे किये चुप बैठे हैं। दरबार छोड़ कर जाना चाहें तो भी नहीं जा पाएं, एक तरह की अभद्रता होगी इस तरह से दरबार से बाहर निकल जाना। ऐसे वक्त यदि कोई फेक कॉल वाला मोबाइल डिवाइस होता तो शायद उसे अटेंड करने के बहाने हमारे वे वृद्ध गुरूजन दरबार से बाहर निकल लेते। लेकिन शायद उस वक्त मानव मस्तिष्क इतना विकसित नहीं हुआ हो,  वरना एकाध 'फेक दूत' का जुगाड़ तो कर ही लेते।

   अब इसे ही देखिये, जैसे कि  झूठ मूठ के ही फालतू से नृत्य पर भी राजा की हां में हां मिलाना पड़े, वाह वाह करना पड़े, या वहां के राजकुमारों की फोकट की जुएबाजी में नाहक ही बैठकर नज़रें गड़ाए रखना पड़े, बैठे बैठे बोर होना पड़े तो ऐसे समय  यह 'फेक दूत' बड़े काम आ सकते थे। इशारा करते ही फेक दूत दरबार में आकर महाराज की जय बोलते और तुरंत ही वहां  उपस्थित अपने सामंत से कहते कि फलां क्षेत्र में उपद्रव हो रहा है याकि फलां काम आन पड़ा है चलिए और वह दरबारी महाराज को हाथ जोड कर जय करते हुए ठाट से दरबार से बाहर आ जाता ।  न कोई दरबार का शिष्टाचार टूटता न कोई किसी किस्म की बेहूदगी होती। सब काम सलीके से। ऐसे में 'मेघदूतम्' की रचना करने के साथ साथ कालिदास जी 'फ़ेकदूतम्' की भी रचना जरूर  करते ।

     वहीं मैं यह भी कल्पना कर रहा हूँ कि मुंशी प्रेमचंद के लिखे 'शतरंज के खिलाड़ी' वाले दोनों नवाब यदि इस फेक कॉल के युग में होते तो क्या होता। मुंशी जी ने इस 'शतरंज के खिलाड़ी' किस्से में दर्शाया है कि  दोनो ही नवाब शतरंज खेलने में इतने मसरूफ़ रहते थे कि उन्हें सुबह से शाम का पता ही नहीं चलता था। राज्य में क्या हो रहा है, अंग्रेजों ने कहां तक कब्जा कर लिया है,  सेना के लिए आगे रसद पानी का इंतजाम है भी या नहीं इससे उन्हें कुछ फर्क नहीं पड़ता था। उनकी बेगमें अलग परेशान रहतीं थीं कि मिंयां हमेशा शतरंज में ही उलझे रहते हैं।

       ऐसे वक्त पर मान लो यदि दोनो शतरंजबाजों में से किसी का मन कहता हो कि वह जाये दो चार घड़ी अपनी बेगम के साथ भी वक्त बिताये तो संकोच वश वह  नहीं जा पाता होगा कि दूसरा दोस्त क्या सोचेगा...कि बिछी बिसात को छोड़ कर चले गये ? ऐसे वक्त पर यदि उनकी बेगमें उन्हें मिस कॉल भी करतीं तो भी वह शतरंज नहीं छोड़ते कि कहीं लांछन न लग जाय कि बीवी के गुलाम हैं। फोन आया और चल दिये। ऐसे गाढ़े वक्त पर उनके लिये फेक काल वाला सिस्टम बड़े काम आता। दो सेकंड तक मोबाइल का बटन दबाते उसके कुछ देर बाद फेक कॉल आ जाता । उसे रिसिव करते हुए नेटवर्क न पकड़ने का बहाना बनाते बिछी हुई बिसात छोड़ कर नवाब साहब महफिल से निकल पड़ते और जा पहुंचते अपनी बेगम के पास।

     इधर हो सकता है कि वह सामने वाला शतरंजीया मित्र भी नवाब की चालूगिरी समझ रहा हो। वह भी फेक कॉल का इस्तेमाल करना जानता हो और मन ही मन कहे कि जा बच्चा कल मैं गया था कॉल रिसिव करने के बहाने और आज लौटा हूँ ।  फील, घोडा, प्यादा सब कल वाली पोजीशन पर जस के तस खडे हैं चौखटे में। अब जो तू गया है नेटवर्क और फेक कॉल के बहाने तो एक दिन और सही, बिसात बिछी रहने दो जस की तस।

      खैर, ये सह तो इतिहास की बातें हैं। लेकिन यदि ध्यान से सोचा जाय तो हम फेक चीजों के एक तरह से आदि हो चुके हैं। बचपन से ही, अब तक।

       अभी यही देखिये Baby Soother नाम के फेक निप्पल से बच्चों को दूध पिलाने का Fake उपक्रम किया जाता है। मुंह में जब Baby Soother होता है तो बच्चा एक तरह के दूध पीने वाले भ्रम में डूबा रहता है। बाद में जब उसके दाँत निकलने वाले होते हैं तो मसूड़ो की सुरक्षा हेतु Fake Baby Chewing Toy दिया जाता है ताकि जब दाँत निकलें तो उसकी कुनमुनाहट के चलते बच्चे अपने मसूड़ों को किसी ऐसे नरम चीज पर दबायें जो कि  उन्हें किसी चीज के चबाने का एहसास दे। यानि कि Fake technology of Life से हमारा सामना बचपन से ही होने लगता है।  आगे चलकर हम और भी कई चीजों के फेक इस्तेमाल के आदि हो जाते हैं। खैर, अब तो बात फेक कॉल तक जा पहुँची है। और वह भी आधिकारिक तौर पर कंपनीयां अपने मोबाइल सेटों में उपलब्ध भी करवा रही हैं कि जाइये फेक सुनिए.....फेक बतियाइये......फेक चलिये......फेक.....

  क्योंकि सोना भी कुछ हद तक अपने आप में फेकनेस्स की चाह रखता है :)

- सतीश पंचम


स्थान - वही, जहां पर फेक दस्तावेजों के जरिए एक आदर्श स्थापित किया गया है। 


समय - वही, जब बच्चे को डिब्बाबंद पाउडर वाला दूध पिलाया जाय और पीते ही बच्चा अपनी मम्मी से पूछे - ........मम्मी, आप डिब्बे के अंदर कैसे गईं थी :) 
  
(चित्र : गुगल दद्दा से साभार :)

16 comments:

Neeraj Rohilla said...

फ़ेक काल बहुत जरूरी हो जाती है, कभी किसी डेट पर जाओ और पहले दो मिनट में ही लगे कि बडी भारी गलती हो गयी तो एक ही उम्मीद होती है कि काश कोई काल कर दे और हम कहें...तुम बिल्कुल चिंता मत करो मैं दो मिनट में पंहुचता हूँ :)

अविनाश वाचस्पति said...

फेक संस्‍कृति के उन्‍नयन पर प्रसन्‍न होने वालों यह मूल्‍यों की गिरावट है, इतना तो समझ लीजै। एक इंसानियत का महल है, और उसे ढहाना है, चाहे किसी भी कलाबाजी से परन्‍तु सोचिए अगर वहां जेमर लगा हुआ हो और तब भी आपके पास काल आई और आपने रिसीव भी की, तो जो भद्द पिटेगी, वो सचमुच में बहुत ही भद्दी होगी।
खैर ... तकनीक के नशे में कैद हम, तकनीक को नशेड़ी बनाए दे रहे हैं
बेबस बेकसूर ब्‍लूलाइन बसें

Arvind Mishra said...

क्या फेंका है आज ....जबर्दस्त फंतासी ..आईये हम आप एक टाइम मशीन में बैठ अपनी ये नामुराद मुरादें पुरी कर ही लें ....
और लौटते वक्त बच्चन जी से भी मिल कर उनकी तमन्ना पूरी करने की जुगाड़ कर ले जो बोचारे यहे कहते सिधार गए कि
जो साकी मैं चाह रहा था वह न मिला मुझको साकी .....

मो सम कौन ? said...

भाई जी, कौन सी खाद डालते हो दिमाग में जो ऐसे उर्वर आईडिया आते हैं? मजा आ गया फ़ेक गाथा पढ़्कर। पर गुरू ये नहीं बताया कि फ़ोन कौन सा लिया?

Majaal said...

शुक्र है की ब्लोगिंग में बिना फेकिज्म के काम चल जाता है, किसी का भी ब्लॉग पढ़ो, पसंद न आए तो बंद कर के आगे बढ़ जाओ, कोई फेक काल ही जरूरत नहीं, कोई मोबाइल नहीं, चूहा पर्याप्त है ....

Rahul Singh said...

ब्रह्मं सत्‍यं जगन्मिथ्‍या.

Apanatva said...

SAFED GHAR AANA ACCHA LAGA.........

SAFED SAFED BANA RAHE ISKE LIYE LAGATAR PRAYATNSHEEL BANA RAHNA PADEGA.........

:)

दीपक डुडेजा DEEPAK DUDEJA said...

ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरान्तकारी भानु शशि भूमि सुतो बुधश्च. गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकराः भवन्तु


शांत हो जायं पंचमजी, शांत... शांत.....

इ सुसरे नहीं सुधरेगे... कुछो भी कर लेओ.

एको बात और,
लगे हाथ सरदार जी को भी समझाए देते... जब 'राजमाता' क्लास ले रही हो तो तुरंत फेक बटन दबा देते और बोलते सोरी, 'कृषिमंत्री' का फोन था

बिंदास.......... जियो रजा

rashmi ravija said...

बड़ी महिमा है इस फेक कॉल की....सच पहले इसका आविष्कार हो जाता...तो कई ग्रंथों...कहानियों का स्वरुप ही कुछ और होता...:) कितने रिश्ते बन जाते और कितने बिगड़ जाते...

पार आप बताएं..आपने वो मोबाइल लिया या नहीं??...अगले ब्लॉगर्स मीट में आपके मोबाइल पर कोई कॉल आया..तो हम तो उसे फेक कॉल ही समझेंगे...:)

सतीश पंचम said...

संजय जी, रश्मि जी,

मैंने वो SAMSUNG का मोबाइल लिया जरूर लेकिन अपनी श्रीमती जी के लिये, खुद के लिये नहीं :)

इसलिए मेरे सेल पर फेक कॉल आने का सवाल ही नहीं....मेरे सेल पर जो भी कॉल आए... उसे जेन्यूइन कॉल ही मानिएगा :)

सतीश पंचम said...

अविनाश जी,
@ सोचिए अगर वहां जेमर लगा हुआ हो और तब भी आपके पास काल आई और आपने रिसीव भी की, तो जो भद्द पिटेगी, वो सचमुच में बहुत ही भद्दी होगी।
---------

जैमर भी यदि फेक हुआ तो ?

:)

प्रवीण पाण्डेय said...

पहले तो बताईये किस सेट पर मिलती है। पर कोई लाभ नहीं होगा हमें क्योंकि आदतन हम मोबाइल को स्वयं ही म्यूट किये रहते हैं, मीटिंगों के समय।
कटने की कॉल चाहे अन्तरमन से आये या फेक मोबाइल से, कट अवश्य लेना चाहिये।

सतीश पंचम said...

प्रवीण जी,

यह फेक कॉल वाली फेसिलिटी SAMSUNG के ज्यादातर नये मॉडलों में मिलती है। मैने जो फोन लिया वो है बेसिक सीरिज की SAMSUNG GURU E1175T. यह मुख्यत: फोन करने या मैसेज आदि के ही लिये इस्तेमाल के लायक है न कि गेमिंग या wap use के लिए।

जब इतने बेसिक फोन में यह सुविधा दी गई है तो मुझे लगता है कि बाकी के Samsung वाले स्मार्ट फोन आदि में यह सुविधा जरूर जोड़ी गई होगी।

VICHAAR SHOONYA said...

बढ़िया पोस्ट. पढ़कर आनंद आ गया.

sanjay said...

MOTI KHAL KE PARETEN BHI AAP BARI KUSHALTA SE UGHAR DETE HAIN O BHI
VYNG KE DWARA......

RAPCHIK

PRANAM

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

सरपत सुनते ही याद आया - यहां गंगा के कछार में सैकडों एकड़ सरपत है और उसमें रह रही हैं ढ़ेरों नीलगाय। अब न कछार खतम होगा, न सरपत और न नीलगाय!

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