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Sunday, November 21, 2010

इंडिया मार्का हैंडपंप बजरिए हू तू तू........सतीश पंचम

 'इंडिया मार्का' वाकई में पूरी तरह से इंडिया मार्का है  

         मेरे घर के बाहर लगा इंडिया मार्का नल एकदम से सरकारी हो गया है। एकदम सरकार की तरह काम करता है। जिस तरह किसी सरकारी काम को करवाने में, दबी फाइल को उपर लाने में एक ही बिल्डिंग में दस बार उपर नीचे करना पड़ता है, पचीसों चक्कर लग जाते हैं, ठीक उसी तरह मेरे इस इंडिया मार्का नल के हैंडल को पन्नरह-बीस बार उपर नीचे करो तब जाकर कहीं वह जमीन में दबे पानी को उपर लाकर उड़ेलता है, वरना क्या मजाल है जो एक दो बार के हैंडलाइजेशन में ही पानी दे दे।
 
     गाँव में लगे इस इंडिया मार्का नल को रिपेयर करवाने के लिये हाल ही में एक इंजिनियर (मिस्त्री) को बुलाया गया । इंजिनियर मिस्त्री भाई साहब ने पहले तो उसे इस तरह देखा मानो बहुत देर कर दी गई बुलाने में। अब कुच्छो नहीं हो सकता शैली में। पहले बताना चाहिये था। समझ में नहीं आ रहा था कि वह मेरे इंडिया मार्का नल की बात कर रहे हैं या किसी मरीज की बात कर रहे हैं। बिल्कुल फिल्मी डाक्टरों वाला अंदाज।

       खैर, किसी तरह काम में जुटे जनाब। पहले तो उसका हैंडल खोलने में भाई साहब ने बीस पच्चीस मिनट ले लिया। हैंडल खुल ही नहीं रहा था। उनके औजारों पर नज़र गई तो सब एवन ग्रे़ड के घिसे हुए। लग रहा था कि जहां कहीं कोई नट-बोल्ट इनसे नहीं खुल रहा होगा, वहां आसपास मौजूद लोगों ने जबरदस्ती पब्लिक इंटरेस्ट में कोशिश की होगी और नतीजतन अदलतीहा औजार PLR की तरह इसे भी भोथरा कर दिया। अब तो अदालतें भी समझने लगी हैं कि कोई भी PLR पब्लिक इंटरेस्ट में कम, बल्कि निजी इंटरेस्ट में ज्यादा डाला जाता है। सो, चाहे कानून का औजार हो, या नल बनाने का ही औजार क्यों न हो, भोथरई सब जगह काबिज है।

       उधर हैंडपंप का हैंडल खुलने के बाद उसकी पाइपों को उपर हवा में उठा कर रखना था, ताकि इंजिनियर मिस्त्री साहब उसका निरीक्षण परीक्षण कर सकें। बड़ा वजनी काम था। आठ-दस लोगों की जरूरत पड़ी। सब लोग एक ओर से जोर लगा कर पंप को एक बाँस के जरिये बाँध कर हवा में कुछ देर के लिए थामे थे। समझ में नहीं आता कि गदर फिल्म में सन्नी देओल ने हैंडपंप कैसे उखाड़ा होगा। इधर तो आठ आठ लोग लग गये केवल हैंडपंप को उपर करने में, उखाड़ने की तो बात ही छोड़िए। एक बार तो मन किया कि गदर के सन्नी देओल को ही बुला लूं , लेकिन फिर सोचा., जाण दो, महीन काम है, कही आकर पूरा हैंडपंप ही उखाड़ दिया तो खर्चा बढ़ जायगा।

      किसी तरह इंजिनियर मिस्त्री साहब ने परीक्षण करते हुए बताया कि पाइप की चूड़ी घिस गई है, इसी से हवा ले रहा है पंप। इसे चूड़ी पहनाना पड़ेगा। पहले तो समझा ही नहीं कि ये चूड़ी पहनाना क्या होता है, फिर जब पाइप पर नज़र गई तो देखा आंटा घिस गया है, Threading करवाने की जरूरत है। मैं मन ही मन अपने कॉलेजयीन प्रोफेसरों पर झुझलाया कि कम्बख्तों ने बेकार ही मुझसे फीस ली, आज तक कभी मैकेनिकल इंजिनियरी के क्लास में पाइपों को चूड़ी कैसे पहनाई जाती है, नहीं सिखाया। सिखा दिये होते तो शायद आज काम दे जाता।

खैर, आगे और गहरे वाले पाइपों को खोलने की मंशा जताई गई कि क्या पता और नीचे के पाइपों को भी चूड़ी पहनाने की जरूरत हो। हवा वहां से भी लीक कर रही होगी भीतर की ओर। बात ही बात में फिर वही उठापटक। अबकी और ज्यादा लोग लग गये क्योंकि पाइप को हवा में लटाकाये रखने के साथ साथ उसके भीतरी रॉड को भी निकालना था जो कि काफी मेहनत मांगता था। किसी तरह दूसरा पाइप भी निकाला गया। पता चला कि उसे भी वही बीमारी है। चूड़ी पहनाने यानि की Threading करवाने की जरूरत है। इसी तरह कुछ और पाइप निकाले गये। सब में वही मर्ज। इंजिनियर मिस्त्री भाई साहब ने कहा कि उपर से लेकर नीचे तक की चूड़ियां सड़ गई है, ऐसे में लीकेज तो होना ही है।
मैं मन ही मन सोचने लगा यार, ये चूड़ियां तो सरकार की भी सड़ गई हैं, कहीं 2G स्पैक्ट्रम तो कहीं आदर्श घोटाला तो कहीं कॉमनवेल्थ तो कहीं कर्नाटक की जमीन हथियाई.....सब जगह तो व्यवस्था में लीकेज ही लीकेज है। उपर से जब सुप्रीम कोर्ट का डंडा पड़ा तब सरकार की ओर से अदालत में हलफनामा भी दिया जा रहा है कि हम ने भी कोई चूड़ियां नहीं पहनी हैं, जो भी 2G स्पैक्ट्रम आदि में बातें सामने आईं है वह पूरी तरह से एक प्रक्रिया के तहत निपटाई गई हैं और जहां भी अनियमितता दिखी वहां कार्रवाई की गई है।

मेरी समझ में नहीं आ रहा कि ऐसे में सरकारी धन के लीकेज को रोकने के लिए सरकार को चूड़ी पहने रहना चाहिए या कि उतार कर साईड में रख देना चाहिए। बड़ा गड्डम गड्ड है।

खैर, इंडिया मार्का हैंडपंप बन गया है, लीकेज रूक गया है और पानी फिर से मिलने लगा है, गंदला ही सही, धीरे धीरे चलाते चलाते साफ होने लगेगा। उधर चूड़िहार, यानि कि चूड़ी पहनाने वाला इंजिनियर भी जा चुका है।

- सतीश पंचम

स्थान – वही, जहां के हैडपंप हेतु आठ दस सन्नी देओल लगे थे।

समय – सर्द मौसम में धूप सिंकाई वाला।

11 comments:

Vivek Rastogi said...

हम बोलते बहुत हैं, कि आंटे घिस गये हैं सरकार के पर बदलने के लिये जितने इंजीनियर चाहिये उतने इंजीनियर और सन्नी दओल इकट्ठे नहीं हो पाते... कुछ भारत के भविष्य के शहीदों को एकत्रित करना होगा जो शहादत का माद्दा रखें।

ajit gupta said...

भारतीय नलकूप दुरस्‍त हो गया, घोर आश्‍चर्य का विषय है। फिर तो बदलिए ना इन सरकारी पाइपों को भी जो सरकारी पैसे की लीकेज कर के स्विस बैंको में भर रहे हैं। बढिया व्‍यंग्‍य था।

प्रवीण पाण्डेय said...

जहाँ चूड़ियाँ होनी थीं वहाँ नहीं है, जहाँ नहीं होनी थी, सबने पहन रखी हैं।

दीपक डुडेजा DEEPAK DUDEJA said...

इंडिया मार्का सरकार की चूड़ी और बनवाइए..... तभी लीकेज बंद होगा.. पैसा का ....

गिरिजेश राव said...

@जिस तरह किसी सरकारी काम को करवाने में, दबी फाइल को उपर लाने में एक ही बिल्डिंग में दस बार उपर नीचे करना पड़ता है, पचीसों चक्कर लग जाते हैं, ठीक उसी तरह मेरे इस इंडिया मार्का नल के हैंडल को पन्नरह-बीस

सो, चाहे कानून का औजार हो, या नल बनाने का ही औजार क्यों न हो, भोथरई सब जगह काबिज है।

इंजिनियर मिस्त्री भाई साहब ने पहले तो उसे इस तरह देखा मानो बहुत देर कर दी गई बुलाने में। अब कुच्छो नहीं हो सकता शैली में। पहले बताना चाहिये था।

समझ में नहीं आता कि गदर फिल्म में सन्नी देओल ने हैंडपंप कैसे उखाड़ा होगा। ..एक बार तो मन किया कि गदर के सन्नी देओल को ही बुला लूं , लेकिन फिर सोचा., जाण दो, महीन काम है, कही आकर पूरा हैंडपंप ही उखाड़ दिया तो ...

उपर से लेकर नीचे तक की चूड़ियां सड़ गई है, ऐसे में लीकेज तो होना ही है।

चूड़िहार, यानि कि चूड़ी पहनाने वाला इंजिनियर भी जा चुका है।

बम्फास्टिंग पोस्ट! आगे कछु और कहते लेकिन अब तक इलज़ाम चने की झाड़ का था, कहीं नलका इलज़ाम लगाने लगे तो बात बतंगड़ हो जावेगी।

मो सम कौन ? said...

आपके इंडिया मार्का हंडपंप की चूड़ी तो बन गई, बधाई हो।
सरकार ने तो साफ़ ऐलान कर ही दिया है कि चूड़ी नहीं पहन रखीं, भेजिये न उन्हीं इंजीनियर मिस्त्री भाई साहब को, पहना आयेंगे:)

दीपक डुडेजा DEEPAK DUDEJA said...

याद आगया...... एक ठो 'लालबहादुर' आपको भी मिला हुवा है........

नीरज बसलियाल said...

हाई सतीश जी,
हमेशा पढता हूँ, टिप्पणी आज दे रहा हूँ :)
देश की चूड़ियाँ ठीक करने के बावजूद अभी कुछ देर और गन्दला पानी निकलेगा| देखते हैं शायद २०१२ तक कुछ हो| उम्मीदों का साफ़ पानी आये|

Rahul Singh said...

लगता है अच्‍छे-अच्‍छों को पानी पिलाएगा आपका 'इंडिया मार्का हैंडपंप.'

sanjay said...

pump ko churi pahnakar likeg to rok di ..... lekin vyawastha me jo likeg
hai uske liye koun si churi lagayenge

pranam.

Arvind Mishra said...

चूड़ी कसना गाँव का बच्चा बच्चा जानता है ,आप गांवं गिरांव के नहीं लगते अब ..पूरा बम्बईया हो गए हैं !

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