सफेद घर में आपका स्वागत है।

Wednesday, November 10, 2010

नेट पर सर्फ करते हुए हाथ लगीं कुछ चुनिंदा कविताएं......सतीश पंचम

       हाल ही में नेट पर सर्फ करते हुए एक साइट  का पता चला जहां पर कि कविताएं ही कविताएं हैं और हर एक बेहद चुनिंदा किस्म की । किसी में धर्मवीर भारती जी गुनगुना रहे हैं तो किसी में सर्वेश्वर दयाल सक्सेना। एक जगह गुलजार भी दिखे । उन ढेरों कविताओं के बीच से कुछ यहां रख रहा हूं। आशा है आप लोगों को भी पसंद आएंगी  -



 दीदी के धूल भरे पाँव -  धर्मवीर भारती





         दीदी के धूल भरे पांव


- धर्मवीर भारती

-----------------------------



 - हे साँझ मइया - ----



- शलभ श्रीराम सिंह

--------------------------------------



मैं बल्ब और तू ट्यूब सखी 




-  बाल कृष्ण गर्ग

--------------------------------------




हरी मिर्च - 




 - सत्यनारायण शर्मा 'कमल'

---------------------------------------------------------------------------------------------------------




-पुत्रवधु से-


 -  प्रतिभा सक्सेना


--------------------------------------------------------------------


 ऐसी ही ढेरों कविताएं हैं वहां और ज्यादातर बेहद चुनिंदा किस्म की। अच्छी कविताओं के गुणग्राहक वहां जा सकते हैं।


   लिंक ये रहा - गीता-कविता


प्रस्तुति -  सतीश पंचम

16 comments:

राम त्यागी said...

कभी बर्तनों पर हाथ तो कभी कविताओं पर ...एक बात तय है कि आपकी हर कृति, रचना , संग्रह या खोज में मुझे क्वालिटी बहुत दिखती है !!

Akhtar Khan Akela said...

kvitaaoan kaa yeh khzaana laa jvab he mubark ho. akhtar khan akela kota rajsthan

गिरिजेश राव said...

कविता में खाने की चीज भी पसन्द आई तो हरी मिर्च!
पारखी हो।
इसमें एकाध मेरी कविताएँ भी डाल दिए होते। ठीक है कि उनमें खाने पीने की बात नहीं लेकिन इत्ती खराब भी नहीं हैं।

देवेन्द्र पाण्डेय said...

मैं लट्टू सा घूम गया
मिर्ची को चूम गया
...अपनी पसंद की दोनो कविताएं हैं।

rashmi ravija said...

क्या नायाब मोती चुन कर लाए हैं...एक से बढ़कर एक...और एकदम सच्चे, बिना किसी रंग-रोगन के....बेहद ख़ूबसूरत.

अब बार-बार लौट कर इस पोस्ट पर आना होगा.

मो सम कौन ? said...

"मैं बल्ब और तू ट्यूब सखी"
सबसे बढ़िया ये वाली लगी।

समय-स्थान सब भूल गये कवितओं के फ़ेर में, फ़िर कहते हो कि सिर्फ़ खाने वाली कविता पसंद है:)

abhi said...

वाह! मजा आ गया...
इस पोस्ट को बुकमार्क कर के रख रहा हूँ...बाद में नोट भी तो करना है न सब कवितायें :)

abhi said...

और वो साईट के लिए भी बहुत धन्यवाद

शेफाली पाण्डे said...

save kar liya link....dhanyvad

Majaal said...

हम यहाँ आते जातें रहते है, एक और अच्छी साईट है kavitakosh.org , उसे भी आजमाए ... एक हास्य कविता पढ़ी थी, इन ही दोने साईट में से किसी में, कवि महाराज ने ख़ुदकुशी पर नीरज, सुमित्रानंदन पन्त, निराला, आदि की शैली में गज़ब की परोडी करी थी ... देखते है.. अगर मिल गयी तो चिपका देंगे उसे भी ....

सारी रचनाए बढिया लगी ....जारी रखिये ...

प्रवीण पाण्डेय said...

सारी की सारी सुन्दर। की गई मेहनत के लिये हार्दिक आभार।

sanjay said...

pancham da...aap ki pasand.....hamesha...lok pasand hoti hai....bilkul soundhi......


pranam

महेन्द्र मिश्र said...

रचनाओं का बढ़िया संकलन हैं .... बहुत सुन्दर प्रस्तुति...आभार

निर्मला कपिला said...

धन्यवाद इतनी सुन्दर रचनायें पढवाने के लिये।

sada said...

बहुत ही सुन्‍दर ....सभी एक से बढ़कर एक रचनायें, जिनके लिये की गई आपकी मेहनत सार्थक प्रतीत हो रही है, बहुत-बहुत बधाई इस अनुपम प्रस्‍तुति के लिये .........।

Udan Tashtari said...

थोड़ा यहाँ ग्रहण कर लिया..बकिया के लिए वहाँ जाते हैं.

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'
A Photo from - Thoughts of a Lens

ढूँढ ढाँढ (Search)

© इस ब्लॉग की सभी पोस्टें, कुछ छायाचित्र सतीश पंचम की सम्पत्ति है और बिना पूर्व स्वीकृति के उसका पुन: प्रयोग या कॉपी करना वर्जित है। फिर भी; उपयुक्त ब्लॉग/ब्लॉग पोस्ट को हापइर लिंक/लिंक देते हुये छोटे संदर्भ किये जा सकते हैं।




© All posts, some of the pictures, appearing on this blog is property of Satish Pancham and must not be reproduced or copied without his prior approval. Small references may however be made giving appropriate hyperlinks/links to the blog/blog post.