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Friday, October 8, 2010

बकरी का चुम्बन......कँटहरी बतियां ........और लौण्डियाबाजी की कला.........सतीश पंचम

       कभी-कभी लगता है कि कुछ ऐसा लिखा जाय कि मन कहे - हां आज तुम मेरी तरफ़ से चाय पीयो  :)

    लेकिन लिखूं भी तो क्या......कविताएं मुझे जल्दी समझ नहीं आती (सिवाय खाने पीने वाली कविताओं को छोड़ :-) , गद्य लिखने का मन नहीं हो रहा और फालतू  के व्यंगालापों  से मन बिदक रहा है।

 सो यूं ही बैठे बैठे कुछ अलहदा किसम की त्रिवेणीयां 'सरक-सुरूक कर' बन आई हैं। 

 लिजिए नोश फ़रमाइए -

(1)

गुँथे हुए गुड़हल के फूल, पीले पुंकेसरों के संग 
बहुत  जल्द    कुम्हला   जाते   हैं  न  देवता ?

चाय की प्याली में रख दूं , ताजगी आ जायगी ।













(2)

वो शोहदा लड़की को कबसे छेड़ रहा है
लड़की भी कबसे खुद को छेड़वाये जा रही है

कभी कभी बीमारियाँ अच्छी लगती है।

(3)

अबीर गुलाल सब खेल चुके हम दोनों
बच गया है ये  थोड़ा सा शीतल जल

आओ इसी को  आँच दे दें ।

(4)


लाल बत्ती पर गाड़ीयां कुछ नहीं रूकती 
कुछ की फ़ितरत है रूके रह जाने की



सुना है लौण्डियाबाजी भी एक कला है ।

(5)

वो करीमन की बकरी आज फिर चर गई
गुलाब की पत्तीयाँ फिर से कम हो गईं हैं

कांटों ने कहा, बकरी का चुंबन.......श्रीखंड जैसा।











****************************

- सतीश पंचम

(चित्र: नेट से साभार)

13 comments:

DEEPAK BABA said...

वाह साहेब, लगे हाथ त्रिवेणी में भी हाथ धो लिए.

बढिया लगा.

लौंडियाबाज़ी भी एक कला है.

कुछ लुफ्त आया.

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत ही पहुँची हुई प्रविष्टि ... वाह

Arvind Mishra said...

सचमुच सररर से गुजर गयी ....

मो सम कौन ? said...

1. किसको देवता को?

2. कभी कभी? - हमेशा।

3. ....

4. कला नहीं ललित कला।

5. और बकरी ने क्या कहा?

तीसरी त्रिवेणी पर कोई चुहल सूझी नहीं, सतीश भाई, टिप्पणी कर दी है।
आप रोज लिखो कविता, हम रोज करेंगे टिप्पणी।

Udan Tashtari said...

वाह!!! आज तुम मेरी तरफ़ से चाय पीयो :)

गिरिजेश राव said...

अभी हाजिरी। टिप्पणी ई मेल से।
पड़ोसी की तबियत खराब होने में रात डेढ़ बजे तक नेट और हॉस्पिटल दोनों में व्यस्त रहे।

sanjay said...

aur hamare taraf se pani......


pranam.

प्रवीण पाण्डेय said...

उदात्त विचारों का पठन।

rashmi ravija said...

क्या बात है!!
त्रिवेणियाँ तो एकदम नायाब हैं..नए अंदाज़ वाली

mukti said...

आप कमाल हो! और क्या कहूँ?

संजय भास्कर said...

आप कमाल हो!

संजय भास्कर said...

सुंदर प्रस्तुति....

नवरात्रि की आप को बहुत बहुत शुभकामनाएँ ।जय माता दी ।

संजय भास्कर said...

बहुत पसन्द आया
हमें भी पढवाने के लिये हार्दिक धन्यवाद
बहुत देर से पहुँच पाया....... ....माफी चाहता हूँ..

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