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Thursday, August 19, 2010

विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर पेश है मेरे द्वारा हींची गईं कुछ तस्वीरें...........सतीश पंचम

   World photography day के अवसर पर मेरे द्वारा हिंची गई कुछ तस्वीरें................



'हमको चीन्हो........ तो जानें'.........
 उत्सुक नज़रें, बहती नाक, धूलिहर देंह  और गँवईं मुस्कान........... 





'बकायी दीवार' ...........यदि बकायेदारों ने समय से बकाया चुका दिया होता, तो बैंक के सामने लगी इस बकायेदारों के लिस्ट की यह हालत न होती




पिया मोरा बिदेस...........  ऐसे में पेड़-पुनूई, गाछ-ओछ, चिरई- चुनमुन हर ओर उदासी है सखी


 'खुराक'  
     बड़े हो चुके बच्चे को अब तक दूध पिला रही है भैंस....... फिगर के बिगड़ने के अंदेशे से अपने बच्चों को दूध न पिलाने वाली मॉडर्न माँओं से कहीं बेहतर है यह देहातन माँ  :)


'चप्पू और चुप ' - गोमती नदी पार करते समय मल्लाह सहित चार लोग एक ही नाव में सवार हैं, लेकिन हर कोई अलग अलग दिशाओं में देख रहा है..... अपने आप में गुम है, चुपचाप हैं .........हम भी इसी तरह अपनी जीवन नैया में अपने आप में गुम रहते हैं, पता ही नहीं होता कि हमारे साथ नाव में और कोई भी सवार है। 



'सुदामा की मसहरी' -  चारपाई पर सूखते चावल देख बरबस ही 'कृष्ण और सुदामा' याद आ गए :)  


मोटर साईकिल से जाते हुए जल्दी में ली गई एक तस्वीर......'गँवई माणूस' 



- सतीश पंचम

स्थान - वही, जहाँ पर चित्रा और खलीजीया का मिलन हुआ।

समय - वही, जब जहाज से काले रंग का कच्चा तेल रिसकर समुद्र में जाने लगे और तलहटी में बैठी कोई विरहिणी मछली कहे.........जा रे कारे बदरा....... बलमू के गाँव.....वो तो ठहरे बुद्धू...... नहीं समझे रे.....

(सभी चित्र मेरी ग्राम्य यात्रा के दौरान लिए गए हैं)

21 comments:

आलोक मोहन said...

wah edam desi
bahut acche

rashmi ravija said...

नयनाभिराम तस्वीरें हैं.....सुन्दर कैप्शन के साथ.
अंतिम तस्वीर तो किसी पेंटिंग सी लग रही है...

honesty project democracy said...

अच्छी प्रस्तुती और सच्ची भावना ...

DEEPAK BABA said...

सुंदर चित्र, विचारात्मक कैप्शन के साथ. हरकत वो जो दिल को छु ले.

Arvind Mishra said...

लगता है आज साथ ही विश्व ग्राम्य दिवस है ...

VICHAAR SHOONYA said...

पंचम जी मेरी नजर में आप एक अच्छे फोटोग्राफर हैं. ये बात मैं आज के तो नहीं बल्कि आपके द्वारा खीचे गए पुराने चित्रों के अनुभव से कह रहा हूँ.

प्रवीण पाण्डेय said...

सारे चित्र गाँव को उच्चारित कर रहे हैं।

ललित शर्मा-للت شرما said...

सतीश जी
बहुत बढिया चित्र गंवई गांव के

आभार

Mithilesh dubey said...

bahut badhiya bhiya

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत ही सुंदर चित्र हैं जी, आनंद आगया.

रामराम

अविनाश वाचस्पति said...

एक ऐसा चित्र जिसे देखकर हंसी रोकी न जाए। तुरंत से पेशतर नवभारत टाइम्‍स को ई मेल कर दीजिए सतीश भाई। आज का नवभारत टाइम्‍स ध्‍यान से पढ़ें। आपके फोटोग्राफिक रूझान को देखते हुए विश्‍वास है कि आपके पास ऐसा अद्भुत चित्र अवश्‍य होगा। सादर/सस्‍नेह

डॉ महेश सिन्हा said...

:)

मो सम कौन ? said...

छा गये गुरू, तस्वीरें तो बढ़िया हं हीं, कैप्शन्स चार चांद लगा गये।
बकाई दीवार और भैंस चाले चित्र सबसे ज्यादा मारू लगे।

दीपक 'मशाल' said...

अच्छे कलात्मक चित्र लगे.. बधाई.

बी एस पाबला said...

एक शानदार चित्रमय अभिव्यक्ति

बी एस पाबला

वाणी गीत said...

ग्राम्य जीवन की सुन्दर तस्वीरें ...
हाय! हमारा गाँव ना हुआ ...:):)

मुनीश ( munish ) said...

khoob !

Tarkeshwar Giri said...

nik photu hai Pancham bhaiya

मनोज कुमार said...

नयनाभिराम तस्वीरें हैं!

cmpershad said...

बढिया चित्र ..... भारत की सच्ची तस्वीर खींच दी आपने ॥

Sanjeet Tripathi said...

ek se ek photo aur utni hi acchi caption lagai hai aapne, ekdam satik aur maaru...

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