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Sunday, August 8, 2010

मैं फिर से विवाह करना चाहता हूँ....महानता पाने की ओर अग्रसर होना चाहता हूँ.....देश और दुनिया को बदल देना चाहता हूँ.....सतीश पंचम

          मैं फिर से विवाह करना चाहता हूँ.....फिर से विवाह हेतु सजना संवरना चाहता हूँ। यह बात मेरे मन में यूँ ही नहीं आई है….दरअसल इसके पीछे उन तमाम व्यक्तियों का इतिहास रहा है जिन्होंने कि दो- दो विवाह किए और अचानक ही महान हो उठे । अभी देख रहा हूँ शशि थरूर और सुनंदा जी महानता की ओर बढ़ रहे हैं, आमिर , अजहर, राहुल महाजन जैसे तो कई लोग पहले ही महान हो चुके हैं। साहित्य जगत में भी ज्यादातर लोगों के दो दो विवाह होने की बातें सुनी गई हैं। कई लोगों ने अपने  दूसरे विवाह को एक तरह से क्रिएटीवीटी की गंगोत्री ही माना और एक से एक रचनाएँ इस साहित्य जगत को सौंप गए और सौंप रहे हैं।

           दरअसल जब व्यक्ति दूसरा विवाह करता है तो उसे ऐसी कई दूसरी समस्याओं से दो चार होना पड़ता है जिसे कि वह सिर्फ एक विवाह कर नहीं समझ पाता। वह अगर एक ही विवाह पर सीमित रह जाए तो समझिए कि वह समस्याओं से भागना चाह रहा है और हमारे तमाम सुविचारों के लाईट हाउस यही कहते हैं कि समस्याओं से भागिए मत….उनका सामना किजिए। इसी में आपकी महानता है, इसी में आपकी विजय है।
    
     यह इसी विचारधारा का कमाल था कि मैंने पिछले कुछ दिनों से दूसरे विवाह से संबंधित मसलों पर सोचना शुरू किया। एक समस्या यह आ सकती है कि सिर पर जितने बाल बचे हुए हैं…..वह भी नोच लिए जांय, एकाध बर्तन की फेंक वेक झेलना पड़े, संभवत बेलनों की बमबार्डिंग भी झेलनी पड़ जाय और श्रीमती जी नाराज हो मायके चले जांय और जिसकी की आशंका ज्यादा है। गिरिजेश जैसे बेकार साथी तो यहां तक सलाह देते मिले कि दूसरी वाली के चक्कर में न घर के रहोगे न घाट के। तो मैंने सोचा कि एक घर अपने लिए घाट पर भी बनवा दूँ ताकि अगर घर से निकाला गया तो घाट पर रहने का ठिकान हो, बनारस में बने तमाम घाटों पर जो महल ओहल, कोठीयाँ , अटारियाँ  वगैरह बनी हैं वो सब क्या हैं, इसी महानता के नमूने हैं कि और कुछ ?

      अरे भई, पहले जब राजा लोगों के मल्टीविवाह होते थे तो बहुत संभव था कि महल में ढेर सारी महिलाओं के जमा हो जाने से उनमें खटपट की संभावनाएं ज्यादा थी। ऐसे में राजा लोगों के साथ भी यह घर के न घाट के वाली  स्थिति आई होगी और ऐसे में ही बनारस के घाटों पर उन्हें एक घर बनाने की बात सूझी होगी और जब कभी महल में रानी से खटपट होती होगी वह सीधे यह कह कर बनारस चल देते होंगे कि रहो तुम लोग अपने अपने वाक युद्ध, बाल नोचउल खटकर्म के साथ, मैं चला बनारस  और जनता समझ लेती कि कितने तो महान राजा हैं हमारे जो राज पाट छोड़ कर बनारस में घाट के किनारे जाकर रह रहे हैं, उनकी महानता का ही असर होता कि जिस जगह उनका अस्थाई घर होता उस राजा के नाम पर घाट का नाम रख उठता। आज भी बनारस में घाटों को ऐसे ही नामों से पहचाना जा सकता है।
 
     हाँ तो अपनी बात पर आता हूँ कि मेरे साथ क्या क्या संभावनाएं आ सकती हैं……संभवत जब दो पत्नीयों के वजह से खर्च बढ़ जाएगा तो मैं महंगाई का रोना रोते हुए लेख पर लेख लिखूँगा और तमाम ऐसी संस्थाओं के जरिए ज्ञापन दूँगा जो कि ऐसे खटकर्म में लगे होने का दम भरते हैं रोते रहते हैं। वैसे एक बात मैने नोटिस किया है कि भले ही बाजार में दाल क्या भाव मिल रही है उसकी जानकारी न हो लेकिन महंगाई को लेकर हो हल्ला करना चाहिए। दरअसल यह महानता के लक्षण हैं। दरअसल महानता महँगाई को लेकर उसे झेलने में उतनी नहीं है जितनी की उस पर हाय तौबा मचाने से है। दोनों ही एक दूसरे के डायरेक्ट प्रपोशनल हैं…..जितनी ही ज्यादा महँगाई को लेकर चिल्ल पों मचाया जायगा महानता उतनी ही तेजी से फैलेगी।

        हाँ, तो मैं क्या कह रहा था कि फिर से विवाह करने से  दूसरी पत्नी के आ जाने से आवास की समस्या आ सकती है और मैं इस चक्कर में उन तमाम हाउसिंग प्रोजेक्टों के लिए दौड़ धूप करने को मजबूर हो सकता हूँ जो कि सस्ते और टिकाऊ घर देने का दम भरते हैं और इसी प्रक्रिया में उनमें पनप रहे भ्रष्टाचार के घुन से लोगों को रूबरू भी करवा सकता हूँ कि देखो फलां जमीन उस मंत्री के नाम पर सस्ते में अलॉट हुआ है, फलां जमीन फॉरेस्ट लैंड घोषित हो गया था लेकिन अब देखिए कि उस पर कई तरह के अवैध नियम सरकार ने खुद बनाते हुए लागू किया है और अब हाल ये है कि मुझे उसमें से एक फ्लैट तक नहीं नसीब होने दिया जा रहा…..अरेररे…रूकिए भई…..यह क्या कह गया मैं।
  
      ये पिछली पंक्तियों के अल्फाज मैं वापस लेता हूँ, क्योंकि अपने कहे को वापस लेना भी महानता के ही लक्षण हैं, देखते नहीं कि कितने तो बड़े बड़े लोग यही सब करके महान हो उठे हैं। प्रधानमंत्री जी ने पहले कहा कि अगले दो महीने में महंगाई होगी और होते होते चार महीने होने को आए नहीं कि खुद ही स्पष्टीकरण देते हुए अपने अल्फाज वापस भी ले लेते हैं कि खरीफ की फसल हमारे अनुमान पर खरी नहीं उतरी इसलिए मैं अपनी उन पिछली बातों को, अनुमानों को गलत मानने को बाध्य हूँ…..उनका इतना कहना होता है कि देखते देखते वह और महान हो उठते हैं।  

       दूसरा विवाह करने से एक समस्या यह भी हो सकती है कि बच्चे नाराज हो जांय, अपनी दूसरी मम्मी को लेकर नाराजगी जताएं, खाना पीना छोड़ दें….ऐसे में मैं यह वक्तव्य जारी कर सकता हूँ कि मैं समाज कल्याण में इतना उलझा रहता हूँ,  बाहरी कामों का बोझ इतना ज्यादा रहता है कि उसके चलते अपने घर परिवार तक के लिए समय नहीं दे पा रहा हूँ ,  उनका ख्याल नहीं रख पा रहा हूँ और हालत यह है कि मेरे घर में लोग भूखे हैं। यह और इस तरह के वक्तव्य महान साबित करने के लिए काफी हैं, क्योंकि अक्सर महान लोगों की संतानों की बदहाली के समाचार यदा कदा प्रकाशित होते रहते हैं।

        और मान लो कि कभी मेरे घर में दोनों पत्नीयों के बीच मार-कुटाई वाले क्षण उपस्थित भी हुए तो तुरंत मीडिया वालों के बीच इस मसले को उठा दूँगा,  और ज्यादा न कुछ हो सका तो दोनों में से किसी एक पर या दोनों पर ही हाथ उठा दूँगा और देखते ही देखते मीडिया में सुर्खियां बटोर लूँगा। और यह सुर्खीयां बटोरने का ही असर होगा कि संभवत किसी रियलिटी शो में भी चुन लिया जाउं, क्योंकि आजकल सुना है ऐसे जगह हाथ उठाऊ लोगों की ज्यादा चलती है। वही लोग आजकल महानता के पैमाने हैं।
  
     पिछले कुछ समय से यही सब गुणा भाग कर रहा हूँ, कैलकुलेशन में लगा हुआ हूँ अब देखिए कब सफल हो पाता हूँ। देख रहा हूँ कि किचन में श्रीमती जी मसाला कूट रही हैं, बच्चे कार्टून देख रहे हैं, मैं लेख लिख रहा हूँ और मन ही मन हिम्मत बना रहा हूँ कि-

अजी सुनते हो…..बाजार से सब्जी लाना है। अब अपना पेटी-बाजा बंद भी करोगे कि बस उसी में लगे रहोगे…..लैपटाप न हुआ सौतन हो गई….काली कलूटी…..हुँह।

      आंय………ये औरतें भी न, सारा का सारा चिंतन खराब कर देती हैं, इधर पति महान बनने की ओर अग्रसर है कि ये टोक देंगी, घर को संसद बना कर रख दिया है….बात बात पर प्रश्नकाल, कहाँ जा रहे हो, क्या कर रहे हो....... क्या लिख रहे हो वगैरह वगैरह। और जब उनसे झगड़ पड़ो तो तपाक से बातचीत बंद कर शून्यकाल शुरू कर देती हैं। बाज आया ऐसी पत्नी से।

 अब तो दूसरा विवाह कर ही लेना चाहिए, बिना देर किए….. माना कि महान बनने में कई तकलीफें आती हैं लेकिन क्या इसी तकलीफों के डर से महानता को तज दूँ….भाग खड़ा होउँ…..नहीं….बिल्कुल नहीं। शुभस्य शीघ्रम।  

- सतीश पंचम

स्थान – विवाह का  मंडप।

समय – वही, जब नाउन मेरे पैरों में दूसरे विवाह से पूर्व रंगना लगा रही हो और पास खड़ी पहली पत्नी बगल में रखे मूसल की ओर ताक रही हो इस अंदाज में कि मेरे सिर पर अब पड़ा कि तब पड़ा :)

 ( थिंकर का चित्र नेट से साभार, शेष सभी चित्र मेरे निजी कलेक्शन से )

38 comments:

शोभना चौरे said...

बहुत अच्छी सोच है हम भी ब्लाग में आपको महान बताकर एक साक्षात्कार छाप देंगे |
बहुत सटीक व्यंग्य तथाकथित महान लोगो पर |
चित्र बहुत अच्छा लगा खासकर मूसल ??

गिरिजेश राव said...

हम दोस्तों को हमेशा सही सलाह देते हैं। :)

गिरिजेश राव said...

@ ………ये औरतें भी न, सारा का सारा चिंतन खराब कर देती हैं, इधर पति महान बनने की ओर अग्रसर है कि ये टोक देंगी, घर को संसद बना कर रख दिया है….बात बात पर प्रश्नकाल, कहाँ जा रहे हो, क्या कर रहे हो....... क्या लिख रहे हो वगैरह वगैरह। और जब उनसे झगड़ पड़ो तो तपाक से बातचीत बंद कर शून्यकाल शुरू कर देती हैं। बाज आया ऐसी पत्नी से।

:)
मलिकाइन को पढ़ाया कि नहीं?

सतीश पंचम said...

गिरिजेश जी,

मलकाईन को यह पढ़वा दूँगा तो ऐसा तगड़ा केस चलेगा गूगल पर पतियों को बिगाड़ने का.... कि वह दिवालिया हो जाएगा कम्पेन्सेसन देते देते :)

Arvind Mishra said...

दिमाग सनक गया है क्या ?
हुक्का पानी सब बंद हो जायगा
और बनारस के घाटों पर के मकानों और बारादरियों की बात करते हैं तो बता दूं मैंने घाट घाट का पानी पी पीकर यही देखा की सब अब वीरान पडी है ...भुतही लगती थीं ...रही होंगी कभी लक दक...
कल सुबह बताईयेगा की फैसले पर अभी भी कायम हैं या समझौता हो गया!
आम भारतीयों के कई मामले या तो खाने की मेज या शयन स्थल तक निपट ही जाते हैं
नया सवेरा नयी सोच के साथ धमक पड़ता है !

Himanshu Mohan said...

समझ नहीं आता कि ईर्ष्या करूँ, सहानुभूति रखूँ - या तरस खाऊँ।
मनोरञ्जक चिंतनीय थिंकन!

cmpershad said...

सेकण्ड इन्निग्स के लिए शुभकामनाएं:)

मो सम कौन ? said...

आप बनो जी महान, हमारी तो देखी जायेगी। हमारी सलाम-नमस्ते लेते जाना सतीश भाई, काहे से कि महान लोग हमसे और हम उनसे वास्ता नहीं रखते हैं, रखा ही नहीं पाते हैं।

पोस्ट का समय वाला हिस्सा बहुत बढ़िया लगा, हमारी चली तो भाभीजी को भड़कायेंगे जरूर कि मौका और निशाना चूक न जाये।

सतीश पंचम said...

यार ये दोस्त लोग तो अभी से दगा दे रहे हैं। शादी के समय तो शायद भाग खड़े हों :)

संजय जी तो अभी से हड़काने लगे, गिरिजेश भाई लगता है घराती बराती दोनों की साईड से हैं और अरविंद जी, हिमांशु जी आप दोनों लगता है मेरे दुबारा विवाह करने से खुश नहीं हो....कल को कहीं पुलिस उलिस का चक्कर पड़ गया तो विरोध में शायद आप लोग गवाही भी दे देंगे....बड़ी आफत है भाई :))

लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मैं पीछे हट रहा हूँ....अभी अभी दाल में नमक को लेकर ससंदीय कार्यालयीन धारा 'ए आई ओ गप्प' के अनुसार बहस होते होते रह गया और प्रस्ताव ध्वनि मत से धरा का धरा रह गया क्योंकि मेरी क्रोधात्मक ध्वनि समय पर धीमी पड़ गई :)

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

दो बीबीयाँ हों तो आपस में लड़ने वाली होनी चाहिए। कम से कम खाविंद तो बचा रहे।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

मरने के बाद फत्तू(नाम पे किसी को आपत्ति हो तो लफत्तू पढा जाये, वर्ना सत्तू आदि कुछ भी) उस लोक की घंटी बजाने पहुंचा तो उसके आगे दो आदमी पहले से थे। यमराज के पेशकार ने खाता बही देखकर पहले मुर्दे से कहा, "कंवारे रहे, न जिम्मेदारी देखी न दुख! अगले जन्म तक नर्क में सडो।" फत्तू खुश। पेशकार ने दूसरे से कहा, "शादीशुदा थे, दुख भोग चुके, अब अगले जन्म तक स्वर्ग में ऐश करो।" फत्तू और खुश। अब उसकी बारी आयी, पेश्कार ने अपनी निब टूटी कलम से उसकी बत्तीसी पर लिखा, "दो शादियाँ करने वाले सुपर अहमक को तन्दूरी नरक में तब तक पकाया जाये जब तक इसे अकल न आ जाये"

मो सम कौन ? said...

भाई जी,
आप अपनी ज़िद पर डटे रहो बेशक, जनमत का झुकाव बहु(बहू)मत की तरफ़ ही है। अब तो हमारे वड्डे उस्ताद जी भी हमारी सपोर्ट में आ गये हैं। मुरव्वत में सीधे से कुछ न कह सके लेकिन फ़त्तू को तंदूरी चिकन बनाकर अपना पक्ष उनहोंने रख ही दिया है। हमारी नहीं मानते न सही, लेकिन बड़ों की तो मान जाओ।

Udan Tashtari said...

कर लो...हम क्या समझायें...


कोई पहली बार गढ्ढे में गिरने जा रहा हो तो उसे पकड़े और समझाये मगर जो बार बार आदतन कूदने लगे उसका क्या उपाय..


इतना सोचना भी एक महान हिम्मत का परिचायक है..कहना तो खैर है ही!!

जिओ!! शायद कुछ और प्रेरणा पा जायें आपसे.

लेखन की मारक क्षमता के लिए तो नमन है ही हमेशा.

वाणी गीत said...

इस महंगाई में भी ऐसा सोचना गज़ब हिम्मत की बात है ...
मगर दोस्तों की सलाह पर गौर जरुर फरमाएं ...!

व्यंग्य शानदार है ...!

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

लाख बात की एक बात -हर आदमी की तरक्की की पीछे एक औरत का हाथ होता है अगर दो चार औरतो का हाथ लग जाये तो तरक्की के हाई वे पर कौन रोक सकता है . इसलिये सोचिये मत कर ही डाले .

मुनीश ( munish ) said...

Go ahead ...Do it man ,do it...once kids are settled and all EMIs paid ..this is the ultimate Liberation a true man can think of provided his joints do not start aching and BP- VP remains normal !

परमजीत सिँह बाली said...

ऐसे कामों मे ज्यादा सोच विचार नही करनी चाहिए...आप कर ले यह भी...हमारी शुभकामनाएं सदा आपके साथ हैं:)

Archana said...

जब सोच ही लिए हो तो पूछ क्यूँ रहे हो...वैसे एक बार भौजी से भी पूछ लो.क्या पता कही वो भी महान बनने की ना सोच रही हो. :)

Suresh Chiplunkar said...

बकिया सब तो ठीक है, लेकिन ये बताईये कि दूसरी शादी के बाद पलंग से उतरेंगे किस तरफ़ से?

क्योंकि सुबह की चाय-नाश्ता तैयार करने के लिये तो पहले आपको ही उठना पड़ेगा ना…
=========
(देखिये हम औरों की तरह नहीं हैं जो शादी से पहले ही अड़ंगे लगा रहे हों, हम बाद का विचार भी करते हैं…) :) :)

'अदा' said...

पंचम जी,
बहुत कम पुरुषों के सर में पूरे बाल होते हैं...अभी तक आपके हैं...
आपके महापुरुष बनने की इच्छा में ..कहीं आपको आपके काले घने बालों से हाथ न धोना पड़े .....जब पुद्काई शुरू होगी तो...पूरे पंचम सुर में आ जायेंगे आप...
हाँ नहीं तो..!!

महेन्द्र मिश्र said...

सतीश जी महान होने की अच्छी खासी परिभाषा अपने जता दी है याने हर हाल में महान होने के लिए दो चार बीबी होना ही चाहिए .... हा हा हा

JHAROKHA said...

aapki mahanta ki mahima ka bakhan sar- aankhon par. bahut hi karara vyng aurbahut hisateek prastuti karan.par main aapko dusara vivah karke mahan bante nahi dekhna chahati
hun.mera vichar hai ki aap itna badhiya likhte likhte hi aapne aap mahaan ban jayenge .hai na mahan bannae ka aur dusara rasta.
poonam

मनोज कुमार said...

सतीश जी बाक़ी सब तो ठीक है, पर ...
"मैं फिर से विवाह करना चाहता हूँ."
एक बार किचन में झांक लीजिए ...
किचन में श्रीमती जी मसाला ही कूट रही हैं ना ...!

डॉ.कविता वाचक्नवी Dr.Kavita Vachaknavee said...

आपकी तथाकथित महानता की आस कहीं स्त्रीमुक्ति अभियान में न रूपांतरित हो जाए, बंधु ! इसलिए श्रीमती जी की महानता की कामना का भी ओर छोर ज़रा पता कर लें.

सतीश पंचम said...

मुनीश जी,

ये BP - Heart वगैरह की राजसी बीमारीयां तो मेरी महानता के बाद ही आएंगी क्योंकि यह केवल महान लोगों को ही ज्यादातर होती हैं और उनके खर्च अपोलो-लीलावती जैसे बड़े मेडिकल संस्थाएं उठाती हैं।

और एसी महानता तब आएगी मैं जब दूसरी शादी कर लूँगा....हाथ पैर अभी तक तो सलामत हैं मेरे :)

सतीश पंचम said...

अर्चना जी और कविता जी,

आप दोनों ने आशंका जताई है कि कहीं महानता चाहने की इच्छा यदि दूसरी ओर भी पनप रही हो तो ???

यहां मेरा मानना है कि महानता पाना केवल पुरूषों का अधिकार है....महिलाएं इस मामले में अबला ही कहलाती हैं चाहे वह इस तरह के मामलों में कितनी भी महान हों :)

और मेरी श्रीमती जी जिस रफ्तार से मुझ पर विवाहोपरांत बर्तन आदि फेंकेंगी उस हिसाब से कहीं से मैं उन्हें अबला नहीं मान सकता, फिर महान होने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता :)

ताऊ रामपुरिया said...

चिंता की कोई बात नही है. आप दूसरा विवाह अतिशीघ्र किजिये और कोई आये या ना आये, हम जरूर आऊंगा.

अब पते की बात...दूसरी शादी तो कोई भी ऐरा गैरा कर सकता है. आप हमारी बात मान के चलेंगे तो हम आपकी तिसरी तो क्या चौथी भी करवा के रहूंगा.

कोई शक?

रामराम.

बी एस पाबला said...

एक मुस्कुराहट आ गई आपकी इस व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति पर

बी एस पाबला

rashmi ravija said...

बस बस इस ख़याल ने सर उठा लिया ना आपके मन में...अब महान बनने में कोई देर नहीं :)

बहुत ही सटीक व्यंग्य...पूरी खबर ले ली उनलोगों की...जावेद अख्तर को मेल तो नहीं कर रहें ये पोस्ट??...आपकी उनसे बात हुई है...:)

प्रवीण पाण्डेय said...

आप महान बनिये, हम भी आपको पूरी तरह से महान बनता देख महान बनने का प्रयास करेंगे। आप इस विषय में इतना कैसे सोच लेते हैं। हमारा तो दिमाग फ्यूज़ हो चुका है।

सतीश पंचम said...

रश्मि जी,

अभी तो केवल मन में ख्याल भर आया है कि दूसरा विवाह करूँ और इसी चक्कर में लगातार गुणा भाग लगा रहा हूँ कि लड़की कैसी हो, कहां की हो.....घर में फाइट होने पर मीडिया में बाइट दे पाएगी कि नहीं, यदि कल को मैं पीट पाट दूँ तो मार के निशान कैमरे पर बेझिझक बता पाएगी की नहीं....इस सब के चक्कर में टीआरपी कितनी उपर जाएगी, कितने रियलिटी शोज् से ऑफर आने के चांस है वही सब कैलकुलेशन करते करते इतना बिजी हूँ कि जावेद अख्तर जी से बात करने की छोड़िए उन्हें यह पोस्ट तक मेल न कर सका।

अब आपने याद दिला तो दिया लेकिन मैं फिर भी मेल कर पाउंगा कि नहीं, कह नहीं सकता क्योंकि अभी अभी मुझे दस बारह रियलिटी शोज के ऑफर आ चुके हैं, सो उसी उधेड़ बुन में हूँ कि किस रियलिटी शो को पकडूं और किसको ना कहूँ :)

सतीश पंचम said...

@ सुरेश जी,

बकिया सब तो ठीक है, लेकिन ये बताईये कि दूसरी शादी के बाद पलंग से उतरेंगे किस तरफ़ से?
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सुरेश जी,

क्या आपको लगता है कि दो बीवीयों वाला पति होने पर मैं पलंग पर सो पाउंगा ?

पलंग की तो छोड़िए....दूसरी शादी करने पर मुझे किसी पेड़ पर मचान बना कर न रहना पड़ जाय :)

लेकिन मैं महान बनने के लिए मचान वाला जीवन भी अपनाने को तैयार हूँ....दिक्कत यह है कि पेड़ पर पहले से मौजूद बंदर कहीं मुझे भगा न दें यह कहते हुए कि इधर ऑलरेडी कंजेस्टेड है :)

सतीश पंचम said...

महेन्द्र जी, ताऊ जी, धीरू जी,

आप लोगों का कहना है कि दो क्या तीन चार शादीयां करो....लेकिन कभी आप लोगों ने सोचा है कि चार शादीयां करने से पहले से डांवाडोल सेक्स रेशियो क्या असर पड़ सकता है ?

पहले ही महिलाओ की संख्या पुरूषों से कम है ऐसे में हर पुरूष चार शादीयां करने लग जाय तो इस समाज का क्या होगा....इस देश का क्या होगा ? देश छोड़िए....मेरा क्या हाल होगा कभी सोचा है ? पूरी की पूरी तनख्वाह उनके सिंगार पटार पर ही खर्च हो जाएगी... स्नो पावडर पर खर्च हो जाएगी....और जो बच जाएगी वह मेरे मरहम पट्टी पर खर्च होगी ( भई मार-कुटाई भी सहनी पड़ सकती है :)

सतीश पंचम said...

@ समीर जी' s comment-

जिओ!! शायद कुछ और प्रेरणा पा जायें आपसे.
------------

अब आप देख ही रहे हैं प्रवीण जी प्रेरणा ले लिए हैं...कह भी रहे हैं कि..आप महान बनिये, हम भी आपको पूरी तरह से महान बनता देख महान बनने का प्रयास करेंगे :)

उम्मीद है आप भी महान बनने की ओर अग्रसर होंगे :)

अनूप शुक्ल said...

...बेहिचक बेवकूफ़ी करने की इच्छा का नाम यौवन है- परसाई

कितना यौवन भरा पड़ा है आपके कने। :)

अनूप शुक्ल said...

...बेहिचक बेवकूफ़ी करने की इच्छा का नाम यौवन है- परसाई

कितना यौवन भरा पड़ा है आपके कने। :)

बेचैन आत्मा said...

..तो मैंने सोचा कि एक घर अपने लिए घाट पर भी ...
..यह हुआ न मुहावरे का तोड़ वाह
..सच कहूँ तो आपकी पोस्ट पढ़कर शुरू-शरू में शुरूर छा रहा था, बड़ा मजा आ रहा था, नई संभावनाएं, नए जीवन द्वार, यकबयक खुलते ही जा रहे थे मगर हाय! सब झण्डू हो गए जब एक-एक कर आपने मुसीबतों की पिटारी खोल दी.

..ताव दिलाकर बेताल से डराना..ये क्या बात हुई..!

Sanjeet Tripathi said...

paile to hamari bhabhi ji ko ye post padhwao ji, uske baad hi aage koi baat karenge aapse haan

;)

aur lage haath ye anoop ji ne ye jo sawal puchhaa hai uska javab bhi de dijiyega.....

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