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Monday, July 5, 2010

उपलों की आग.......बंदायमान भारत..... कुर्ता ही पहन लो......धोनी की शादी में धोती.....उफ्फ.....क्या गजब करते हो ............सतीश पंचम

     सदरू भगत आज खिन्न हैं.......एक ओर तो भारत बंद.....और दूसरी ओर......टीवी पर धोनी विवाह की खबरों वाली नंगई......तिस पर  रमदेई  रह रहकर एक ....एक व्यंग्यबाण बोलती है  कि सुनकर सदरू भगत कलझ कर रह जाते हैं।

 टीवी पर  बताया जा रहा था कि धोनी ने क्रीम कलर की ड्रेस पहनी है.....घोडे पर चढ़े हैं....लोग खुश हैं....पटाखे  फोड़  रहे हैं और उधर रमदेई हाथ चमका चमका कर कह रही थी  ....अई देखो...... अभी तक उघार बैठे हो.....नंगे बदन.....ये नहीं कि एक कुर्ता ही पहिन लो......लेकिन ....मजाल है जो मेरी बात मान जाओ..........अरे मेरा नहीं तो उ टीवी- उवी  वालन  का तो लिहाज करो......घेर घेर कर लोग बता रहे हैं कि..... बारात आ रही है......जयमाल हो रहा है....... बियाह हो रहा है...... कुच्छौ लिहाज करो बुढ़उ.....।

  लेकिन सदरू भगत एक तो गर्मी से परेशान थे उपर से यह बुढिया अलग खांव खांव किए थी कि  ढंग से कपड़ा पहनो......ये करो.....वो करो......।

 माथे पर सिकोड़ लाते बोले - अरे तू मुझे ढंग का कपड़ा पहनने के लिए इतनी उतावली क्यों हो रही है....देख नहीं रही कि खेत से कुदाल चला कर आ रहा हूँ....थोड़ा सा हवा लेने के लिए छाँव में बैठ क्या गया तू लगी बाराती बनने....बनवाने......अरे वो टीवी वाले हैं......उनका तो काम ही है किसी के भी बारात में बिन बुलाए घुसुड़ जाना और कुछ न हो तो खाने पीने को लेकर बकलोलई करना।

  लेकिन रमदेई माने तब न.....हाथ चमकाते हुए बोली.....अच्छा तो मुझे ज्यादा मत बताओ....जरा सा कुदाल क्या चलाकर आए कि मालूम पड़ता है बावन बिगहा जोतकर आए हो। देख नहीं रहे कि धोनीया के सादी के कारन...  हरिहर के बाबू..... जमुनी की माय और सिरिया की मेहरारू नवा नवा कपड़ा पहिन कर आज केतना मगन हैं।   सिरिया की मेहरारू ने तो नई नई साड़ी निकाली है गौने वाली.....एकदम खसर खसर बोलती है रगड़ खाने पर......औ एक तुम हो जो अभी तक धोती में बैठे भारत बंद मना रहे हो।

  अरे तो क्या करूँ.....मैं भी उन पगले टीवी वालो की तरह लटपटाय पड़ूँ.....नया नया कपड़ा पहिन कर रिपोटिंग.....उपोटिंग.... करूँ......तब तू मानेगी ?

तब ....बैठे रहो  अईसे ही भारत बंद मनाते हुए। ........एक तो बारिश आने से उपले गीले हो गए......जल्दी सुलग ही नहीं रहे.....धूँआ दे रहे हैं......और एक तुम हो जो मुझे सुलगाए जा रहे हो......सुलगा लो .....सुलगा  लो ......पा गए हो  मुझे...........वो तो मैं हूँ जो अब तक तुम्हारे साथ निबाहती चली आई.....दूसरी होती तो अब तक तुम्हें  छोड छाड कर जीना नरक बना गई  होती।

 तो अब तक रहकर तूने कौन सा यहाँ स्वर्ग रच दिया है .......बियाह दूसरे का....बारात दूसरे की......खर्चा दूसरे का और बाराती हम बने......अरे यही है तेरी अकिल.....।

 तो क्या वो जो टीवी पर ..... चिक्कन-चुक्कन.... साफ सुथरे लोग.....  पढ़े लिखे ..... टाई....सूट वाले लोग  धोनी के सादी पर बोल रहे हैं.... वो गलत हैं ?

अरे ऐसी भी अनपढ़ई न होनी चाहिए कि चिक्कन-चुक्कन लोगों की बात न समझ सको....... तुम तो रह गए अनपढ़..... सीखो उन टाई - टुई वालों से जो भारत बंद की बजाय धोनी की शादी पर जोर मार रहे हैं......सोचो तो.....  धोनी के सादी पर धोती पहने तुम भला  अच्छे लगते  हो  ?

 तो क्या करूँ.....कोट-ओट पहन कर सैबाला बन जाउं......बात करती है........ तूझे  ये चिंता है कि धोनी की सादी पर नीक-अच्छे.... कपड़े पहनना चाहिए....लेकिन इसकी चिंता नहीं है कि महंगाई औ रसोई गैस को लेकर आज भारत बंद है। और भला तू क्यों चिंता करने लगी.....तू तो  उपले जलाती है ..........कभी गैस जलाती तो पता चलता कि कितना तकलीफ होता है लोगों को जब दाम बढ़ जाता है तो।

  अच्छा.....तो तुम्हें सबसिड्डी वाले गैस का दाम बढ़ने पर उन लोगों का दुख दिख रहा है .....यहाँ मैं रोज गाय भैंसों के गोबर उठा उठा कर......बारिस....गरमी में.....कीचड़ पाक में हेल कर..... उपले पाथती हूँ ......वह  तुम्हें नहीं दिखता......तब तुम्हारी सहानुभूति कहां बिला जाती है ? उन सबसिड्डी वालों से  बहुत परेम है न तुम्हें........जाओ वहीं रहो सहरी बन कर........।

सदरू भगत ने सुना तो था कहीं कि सब्सिडी के चलते सरकार को बहुत दिक्कत होती है.....बाकि इसपेटरम का भी कुछ पइसा ओइसा आया है सरकार के पास......तब दाम बढ़ाने का कौन तुक ?

 कुछ सोचते हुए रमदेई से बोले- तू कहती तो ठीक है रमदेइया लेकिन इ जो इसपेटरम का नोट आया है क्या वह महंगाई रोकने में उपयोग नहीं कर सकती थी सरकार ....देख नहीं रही कि आलू-टमाटर का दाम क्या से क्या हो गया......पहले ही महंगाई तेज है।

       महंगाई तेज है तो ये असर धोनी के बारात में तो नहीं दिख रहा है........लोग तो खूब बखान कर रहे हैं कि खाने में ये बना.....पहनाने में वो पहना.....हुँह.... वाह रे महँगाई....। अरे जिन लोगों ने भारत बंद करवाया है जरा उनसे पूछो कि क्या उन्होंने आज घर में खाना नहीं बनाया है भारत बंद के नाम पर.........चाँप के तो बैठे होंगे अच्छा अच्छा खाना खाकर....पेट सहलाते धोनी का विवाह देख रहे होंगे घर में बैठे बैठे.......चाहे इ लोग सत्ता में हों या नहीं.....सभी एक से हैं....... तो फिर हम ही क्यों झनखें.....।

और तुम्हें  तो खुस होना चाहिए कि खेती किसानी वाला चीज महंगा हो रहा है....तुम्हारी खेती का चीज का दाम बढ़ रहा है......सरकार समर्थन मूल्य नहीं दे रही तो विरोध भी तो नहीं कर रही है.....ले देकर दाम बढ़े सो बढ़ने दो......तुम ही क्यों चिंता में अधमरे हो रहे हो........चलने दो जैसा चल रहा है.....अब तो अदालतौ ने कह दिया है कि देस भगवान भरोसे चल रहा है....।

सदरू भगत ने मन ही मन कहा......हाँ सच तो है.....यह देस भगवान भरोसे ही तो चल रहा है......आम आदमी की चिंता किसी को नहीं.....प्रधानमंत्री की दाल में मिलावट क्या पकड़ाई ....एस पी कलट्टर तक झुल्ल हो गए.......बाकि आम आदमी चाहे दाल खाए या पाथर .....किसे फर्क पड़ता है। यही सब सोचते  पीढ़ा खसका कर बैठते हुए कहा....ला खाना लगा.....पोते से कह कुरता प्रेस कर दे .....आज मैं भी बाराती बन लूँ।

 उधर टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज आ रही थी - धोनी और साक्षी बंधन में बंधे।  नीचे न्यूज बार में स्टूपिड सा एक बधाई संदेश भागे जा रहा था - धोनी तुम खुश रहो  .....हम तुम्हारे साथ हैं।


 - सतीश पंचम

स्थान - वही, जहाँ के मंत्रालय का स्टाफ भारत बंद की पूर्व संध्या पर आदेश मिलने के कारण कल रात से ही हाजिर है ताकि कल दिन में भारत बंद के दौरान  मंत्रियों को चाय पानी बराबर मिलती रहे...... यातायात के साधनों के बंद होने का हील-हवाला न दिया जा सके ।

समय - वही, जब आदेश मिलने पर रात से ही हाजिर मंत्रालय कर्मी  अगले दिन जब चाय लेकर मंत्री के कमरे में जाए  और दरवाजे पर बैठा चपरासी कहे ....साहब आज आ नहीं पाएंगे....पत्थरबाजी के चलते घर से नहीं निकले हैं।

( सभी चित्र मेरे गाँव के हैं )
  

21 comments:

अजय कुमार said...

सामयिक है ,सबको धो डाला

शोभना चौरे said...

इतनी जल्दी प्रतिक्रिया |बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना |वैसे हमारी परम्पराए ही है की शादी में न जाने कहाँ कहन से रिश्तेदार अ जाते है ऐसा आजकल की नै पीढ़ी कहती है |अब जब धोनी अपने देश को जीतता है तो वो अपना ही तो अक h
हुआ न ??
धोनी की शादी और भारत बंद अक ही दिन होते तो ?मिडिया वाले क्या करते ?
बहुत अच्छी पोस्ट |
अच्छा.....तो तुम्हें सबसिड्डी वाले गैस का दाम बढ़ने पर उन लोगों का दुख दिख रहा है .....यहाँ मैं रोज गाय भैंसों के गोबर उठा उठा कर......बारिस....गरमी में.....कीचड़ पाक में हेल कर..... उपले पाथती हूँ ......वह तुम्हें नहीं दिखता......तब तुम्हारी सहानुभूति कहां बिला जाती है ? उन सबसिड्डी वालों से बहुत परेम है न तुम्हें........जाओ वहीं रहो सहरी बन कर.....
अक ग्रहिणी के दर्द को महसूस करना बहुत बड़ी बात है | बरसात में गाँव की इंधन की समस्या व्ही महसूस क्र सकता है जिसने कभी बारिश में चूल्हा जलाया हो ?

शोभना चौरे said...

kuchh trutiya hai likhne me kshma kre .

राज भाटिय़ा said...

लानत है इन मिडिया वालो को, अब अपनी अम्मा की शादी भी दिखा दे यह मिडिया वाले

महेन्द्र मिश्र said...

मीडिया वालों को धोनी के बहाने कुछ तो मेटर मिल गया है कल तक रिपीट करेंगे.... क्या रिसोर्ट था....एक टी.वी. वाला तो शादी के बाद की जगह खाली रिसोर्ट आज बार बार दिखा रहा है ..धोनी घोड़े पर पंद्रह मिनिट तक चढ़ा ... आखिरी का समय सटीक लिखा है ...आभार ....

प्रवीण पाण्डेय said...

धोनी की शादी में तो कुर्ता पहन लेना चाहिये था सदरू भगत को । भारत बन्द को समर्थन और काम बन्द । दोनो न्यूज़ में जी लिये ।

Arvind Mishra said...

बैकगरौंड में भारत की असली तस्वीर के साथ धोनी की शादी और भारत बंद और एक गवईं बतकही ...
सब कुछ तो साफ़ दीख रहा है ..........

महफूज़ अली said...

हमनी के त दोबारा आये के पड़ी.... बहुते लम्मा पोस्ट है.... पूरा बीस किलोमीटर लम्मा ........त आत हईं .... रउवा के तनि उपला जलाई ला त तक....

महफूज़ अली said...

अऊर तनि राव साहब के संदेसा दे दिहा.... के उनकर पोस्टवा पे कमेंटवा नई खे जात ..... कौउनो पिराबलम बुझात ता....

डा० अमर कुमार said...


सदरू भगत अमर रहें ।
वईसे उनकी एक अलहदा राय है कि,
साक्षी ने उनको अग्नि के चारों ओर दौड़ा कर जीवनपर्यन्त का रन-आउट ले लिया है ।
रज्जा, पोस्टिया बड़ा चौंचक बनएले हउआ !

वाणी गीत said...

@ वो तो मैं हूँ जो अब तक तुम्हारे साथ निबाहती चली आई.....दूसरी होती तो अब तक तुम्हें छोड छाड कर जीना नरक बना गई होती...
मुझे लगता है की नब्बे प्रतिशत भारतीय पत्नियों का सबसे पसंदीदा वाक्य यही है ...

घोड़ी वाले से धोनी के शादी के समय पहने जाने वाले वस्त्रों की पूछताछ करते इन मीडिया कर्मियों पर सर धुनने के अलवा और क्या किया जा सकता है ...
रोचक अंदाज़ में लिखी पोस्ट ...!!

बेचैन आत्मा said...

gaanv men arth vyavstha aur bhautikta kii aisi chinta shuru ho to vah din door nahin jb hamar desh vikasit deshon kii soochii men shamil ho jayega.
hasy-vyangy kii niralii shaili men likha aalekh mast hai.

sandhyagupta said...

jai ho !

Shiv said...

सदरू भगत को कुरता ता पहिनना चाहिए था...धोनी का बियाह में नहीं पहनेंगे ता का टॉम क्रूज का बियाह में पहिनेंगे? प्रधानमंत्री शायद रंग वाला चीज खाकर ही रंग बदलते रहते हैं. कलट्टर वगैरह का ड्रामा ता दिखावे का है. ऊ जानबूझ कर रंग खाते हैं.

बड़ी चौचक पोस्ट है.

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

बेहद रोचक प्रस्तुति!
इन मीडिया वालों का बस चले तो न जाने ये क्या कुछ दिखा डालें .

गिरिजेश राव said...

एक आदमी लगातार इतना अच्छा कैसे लिख सकता है ? यही सोच रहा हूँ दोस्त !

बस उद्धृत करूँगा:
सिरिया की मेहरारू ने तो नई नई साड़ी निकाली है गौने वाली.....एकदम खसर खसर बोलती है रगड़ खाने पर......औ एक तुम हो जो अभी तक धोती में बैठे भारत बंद मना रहे हो।

एक तो बारिश आने से उपले गीले हो गए......जल्दी सुलग ही नहीं रहे.....धूँआ दे रहे हैं......और एक तुम हो जो मुझे सुलगाए जा रहे हो......सुलगा लो .....सुलगा लो ......पा गए हो मुझे

इसकी चिंता नहीं है कि महंगाई औ रसोई गैस को लेकर आज भारत बंद है। और भला तू क्यों चिंता करने लगी.....तू तो उपले जलाती है ..........कभी गैस जलाती तो पता चलता कि कितना तकलीफ होता है लोगों को जब दाम बढ़ जाता है तो।

इ जो इसपेटरम का नोट आया है क्या वह महंगाई रोकने में उपयोग नहीं कर सकती थी सरकार ....देख नहीं रही कि आलू-टमाटर का दाम क्या से क्या हो गया......पहले ही महंगाई तेज है।

इसपेटरम का नोट आया है क्या वह महंगाई रोकने में उपयोग नहीं कर सकती थी सरकार ....देख नहीं रही कि आलू-टमाटर का दाम क्या से क्या हो गया..

और तुम्हें तो खुस होना चाहिए कि खेती किसानी वाला चीज महंगा हो रहा है....तुम्हारी खेती का चीज का दाम बढ़ रहा है......सरकार समर्थन मूल्य नहीं दे रही तो विरोध भी तो नहीं कर रही है

'इसपेटरम' पर तो ठहर कर यह सोचा कि गँवई आदमी महानगरी हो कर भी उल्टे पुल्टे सोचता है :)

Mrs. Asha Joglekar said...

सदरू भगत को कुर्ता पहनाने पर तुली रामदेई । धोनी के ब्याह की रिपोर्टिंग, भारत बंद, गैस और उपले । सारे भारत की परेशानियों का खाका खींच दिया ।

Divya said...

Wonderful narration of the marriage, a concern of old couple, and about village life.

@-एक तो बारिश आने से उपले गीले हो गए......जल्दी सुलग ही नहीं रहे.....धूँआ दे रहे हैं......और एक तुम हो जो मुझे सुलगाए जा रहे हो......सुलगा लो .....सुलगा लो ......पा गए हो मुझे..

Very touching lines....beautifully expressed the dilemma of the old man and his wife.

Poor they are but so generous from heart. A soul stirring narration .

Great post !

Divya said...

Read about you in the post by Arvind Mishra ji. In the morning around 8 am I wrote a beautiful comment on his post with all my heart but it was not published there. I didn't save the comment also, but let me write two three lines again which i wrote there...

"Satish Pancham ji is indeed a wonderful writer. I enjoy reading his posts which reveals nicely the beauty of our villages.

The description about scorpion bite was so realistic that i felt the sting in my toe.

I am an ardent admirer of your wonderful writings. Kindly visit my blog to encourage an aspiring writer like me.

Regards,

rashmi ravija said...

.अरे वो टीवी वाले हैं......उनका तो काम ही है किसी के भी बारात में बिन बुलाए घुसुड़ जाना और कुछ न हो तो खाने पीने को लेकर बकलोलई करना।

हा हा कमाल की पंक्तियाँ हैं...
बहुत ही रोचक पोस्ट...

Maria Mcclain said...

Nice blog & good post. overall You have beautifully maintained it, you must try this website which really helps to increase your traffic. hope u have a wonderful day & awaiting for more new post. Keep Blogging!

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