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Wednesday, March 31, 2010

गिलकारी और उरियानी.......सतीश पंचम

गिलकारी


जमीं पर हो रहे
तमाम बहस मुबाहसों
तमाम तकरीरों,
तमाम तहरीरों का है ये असर
कि
आसमां के पलस्तर अब झडने लगे हैं
गिलकार* से कहो
हाथ आसमां पर दुबारा फिरा दे।



गिलकार* – छतों / दीवारों पर प्लास्टर करने वाला

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हमलिबास


उनकी उरियानी* पर
जब हमने कुछ कहना चाहा
वो हमसे ही कहने लगे,
अमां बडे यावागो* हो
फतूही* पहन हमसे गूफ्तगू करना चाहते हो
बात तो तब है
जब हमलिबास होकर बतियाओ।


उरियानी* – नग्नता, विवस्त्रता
यावागो* – उटपटांग बातें करने वाला
फतूही* – बिना आस्तीन की एक किस्म की कुरती / सदरी


- सतीश पंचम

स्थान – वही, जहां का आसमान वहां की बिल्डिंगो की उंचाई और झोपडों की नीचाई के कारण खुरदरा सा लगता है ।

समय – वही, जब अपनी उरियानी से तंग आकर एक फिल्म अभिनेत्री कपडे की मिल में अपने लिये कुछ ढंग के कपडे तलाशने पहुँची और उसे देखते ही मिल का भोंपू खुदबखुद बज उठा.......अब मिल कुछ समय और चले शायद :)

12 comments:

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

क्या सौभाग्य है आपका - उरियानी पहने अभिनेत्री देखी है। हमने तो उरियानी पहने केवल मेढ़की देखी है! :)

प्रवीण पाण्डेय said...

पलस्तर में मिलावट है, फिर गिर जायेगा ।

मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी रचना। बधाई।

डॉ. मनोज मिश्र said...

जब हमलिबास होकर बतियाओ...वाह.

अभिषेक ओझा said...

"बात तो तब है
जब हमलिबास होकर बतियाओ।"
ये बात !

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) said...

खुदा ’जे के सीमेन्ट’ का ऎड अब तक देखे नही शायद, देखे तो इस बार आसमान का पलस्तर तो पक्का होगा..

उर्दु लफ़्ज़ न जाने क्यू बडे अच्छे लगते है हमे और आप उनके मायने भी बता देते है तो नोट करना भी बडा आसान हो जाता है..

दोनो आज़ाद नज़्मो के क्या कहने..वाह!!

Shiv Kumar Mishra said...

बहुत खूब!
अब कमलिबास तक तो ठीक था, हमलिबास कैसे हों?

Vivek Rastogi said...

बहुत ही बढ़िया शब्दों का उपयोग ।

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Britishers were advertising outside India that "Indians are uncivilized. Therefore we are making them civilized. Therefore we should stay there. Don't object." Because United Nations, they were asking, "Why you are occupying India?"

खुशखबरी !!! संसद में न्यूनतम वेतन वृद्धि के बारे में वेतन वृद्धि विधेयक निजी कर्मचारियों के लिये विशेषकर (About Minimum Salary Increment Bill)

गिरिजेश राव said...

बचपन में सुनी एक लोकोक्ति याद आ गई:

"उघार गइलें लाँगट के लगे त लाँगट कोदो के पुअरा लपेटले रहलें।"

अर्थ न पता हो तो पूछ लें हम बता देंगे।
लगे हाथ टिप्पणियों की संख्या भी +2 हो जाएगी और हमरा बकाया भी पूर जाएगा।

क्या आप के वस्ताद ऑनलैन उर्दू सिखाते हैं?
हाँ अपनी एक कविता भी याद आ गई, जाने क्यों :
http://kavita-vihangam.blogspot.com/2009/12/8.html

सतीश पंचम said...

@ गिरिजेश जी,

बढिया लोकोक्ति कही है गिरिजेश जी। लेकिन मैं तो पहले से ही अपने आप को लॉंगट मान चल रहा हूं और पुअरा की कौन कहे, एकदम दिगंबरावस्था ( नग्न) में ही विचरण करने वाला मानता हूँ, एसे में क्या कोदो का पुअरा और क्या वी आई पी अंडरवियर, सब मेरे लिये बराबर :)


हां, जहां तक ऑनलाईन उर्दू की बात है तो वह केवल अपने बचपन के मुसलिम मित्रों से सीखी हुई उर्दू है जो कि मेरी क्लास में पढते थे। उन्हे मैंने गुरमुखी खेल केल में पढाया था और बदले में उन्होंने मुझे उर्दू की अलिफ, बे से परिचित कराया था।

मैं तो उर्दू लिपि से पूरी तरह से परिचित न हो सका पर पट्ठों ने गुरूमुखी में बाजी मारी थी। दसवीं में सबसे ज्यादा नंबर गुरूमुखी में इब्राहीम के आए थे और बदले में मुझे नागपाल का समोसा और मुंबई के पंजाबी कैंप की लस्सी मिली थी :)

उर्दू पढने औऱ उसके शब्दों को सीखने की ललक अब भी बनी हुई है और मैं अक्सर अपने कुछ पोस्टों में इसका यदा कदा इस्तेमाल भी करता हूँ।

कुछ कविताएं, मैंने कालेजयीन जीवन में लिखी थी, कुछ याद रही, कुछ भूल गई। इसराफील उसी दौरान की लिखी कविता है ।


वैसे, यहां पंजाबी कैंप में टैक्सियों के बूढे सिक्ख ड्राईवर मेरी प्रेरणा रहे हैं जो कि विभाजन के बाद भारत आए थे और अब अक्सर सुबह सुबह टैक्सियों में गुरमुखी की बजाय उर्दू के अखबार पढते दिखते हैं।


बाकी तो जहां से भी शब्द सीखने मिले मैं लपक लेता हूँ :) कहीं किसी शब्द के बारे में त्रुटि हो तो बेहिचक बताईये।

वैसे मैं शब्दों के अर्थ बताते समय पूरी सावधानी बरतते हुए रामचंन्द्र वर्मा जी की लिखी उर्दू-हिंदी कोष में दिये अर्थ बताता हूँ। जानता हूँ कि अर्थ का अनर्थ होते देर नहीं लगती :) वैसे भी ऑनलाईन बहुत कचरा भरा है और उसमें और इजाफा करना ठीक नहीं ।

हिमांशु । Himanshu said...

हमलिबास बनो तो कोई बात बने ! बिलकुल !
बहुत लुभाया इस रचना ने ! उर्दू शब्दों की संगत तो गज़ब की है ! आभार ।

मुनीश ( munish ) said...

mast hai pra ji !

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