मुझे लगता है कि महिला आरक्षण से ऐसे नेताओं की मुसीबत बढने वाली है जिनके घर में राजनीतिक आकांक्षाएं लिये कई कई महिलाएं होंगी…कोई देवरानी होगी, कोई जेठानी होगी, कोई ननद होगी। पहले जब तक पुरूषों को ही लडना होता था तो ठीक था, लेकिन जब महिलाओं के लिये सीटें आरक्षित हो जाएंगी तो …अब सब सोचेंगी कि मैं क्यों नहीं इस सीट पर लडूं।
घर में एक दूसरे के बाल पकड झोटउवल न कर लें, कपार, माथा न फोड लें इसी डर से शायद नेता आने वाली मुसीबतों को टाल रहे होंगे।
खैर, आम जनता तो वैसे भी कहां इस आरक्षण का लाभ उठाएगी….चाहे उसके घर में एक महिला हो या दस….उसे तो अपने कपडे लत्ते, दवा दारू, इस्कुलीया – कलेजहा से फुरसत मिले तब न वह इन पचडों में पडे।
मैं महिला आरक्षण का स्वागत करता हूँ। उन नेताओं के लिये प्रार्थना करता हूँ कि ईश्वर उन्हें महिला आरक्षण की वजह से होने वाले इमोशनल अत्याचारों से जूझने की असीम शक्ति देगा,….. और ऐसे भी कुछ नेता जोकि अब तक यहां वहां मुंह मारते होंगे अब संभल जाएंगे कि कहीं दूसरी वाली के मन में चुनाव लडने की भावना न उग आए :)
Update : मुझे तो जहां तक लग रहा है कि जल्द ही चतुर राजनेता अपने लिये एक सेफ पैसेज के तौर पर ‘इलेक्टोरल स्टेपनी’ रखना शुरू कर सकते हैं। जो भी सीट महिला रिजर्वेशन में जा रही हो, उस इलाके में पहले से ही एक महिला के रूप में ‘Electoral Stepney' ढूँढ कर रख लेंगे और अपनी श्रीमती जी को भी भरमाएं रहेंगे कि – सजनी तोरे खातिर.....
फिलहाल तो यह 'Political Stepney' या ‘Electoral Stepney' का फंडा कब अपना रंग दिखा दे, कुछ कहा नहीं जा सकता।
फिलहाल तो यह 'Political Stepney' या ‘Electoral Stepney' का फंडा कब अपना रंग दिखा दे, कुछ कहा नहीं जा सकता।
- Satish Pancham



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