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Thursday, March 11, 2010

महिला आरक्षण की वजह से पनपेंगे इमोशनल अत्याचार


        मुझे लगता है कि महिला आरक्षण से ऐसे नेताओं की मुसीबत बढने वाली है जिनके घर में राजनीतिक आकांक्षाएं लिये कई कई महिलाएं होंगी…कोई देवरानी होगी, कोई जेठानी होगी, कोई ननद होगी। पहले जब तक पुरूषों को ही लडना होता था तो ठीक था, लेकिन जब महिलाओं के लिये सीटें आरक्षित हो जाएंगी तो …अब सब सोचेंगी कि मैं क्यों नहीं इस सीट पर लडूं।
    घर में एक दूसरे के बाल पकड झोटउवल न कर लें, कपार, माथा न फोड लें इसी डर से शायद नेता आने वाली मुसीबतों को टाल रहे होंगे।
     खैर, आम जनता तो वैसे भी कहां इस आरक्षण का लाभ उठाएगी….चाहे उसके घर में एक महिला हो या दस….उसे तो अपने कपडे लत्ते, दवा दारू, इस्कुलीया – कलेजहा से फुरसत मिले तब न वह इन पचडों में पडे।
      मैं महिला आरक्षण का स्वागत करता हूँ। उन नेताओं के लिये प्रार्थना करता हूँ कि ईश्वर उन्हें महिला आरक्षण की वजह से होने वाले इमोशनल अत्याचारों से जूझने की असीम शक्ति देगा,….. और ऐसे भी कुछ नेता जोकि अब तक यहां वहां मुंह मारते होंगे अब संभल जाएंगे कि कहीं दूसरी वाली के मन में चुनाव लडने की भावना न उग आए :)
Update  :  मुझे तो जहां तक लग रहा है कि जल्द ही चतुर राजनेता अपने लिये एक सेफ पैसेज के तौर पर ‘इलेक्टोरल स्टेपनी’ रखना शुरू कर सकते हैं। जो भी सीट महिला रिजर्वेशन में जा रही हो, उस इलाके में पहले से ही एक महिला के रूप में ‘Electoral Stepney'  ढूँढ कर रख लेंगे और अपनी श्रीमती जी को भी भरमाएं रहेंगे कि – सजनी तोरे खातिर.....
 फिलहाल तो  यह 'Political Stepney' या ‘Electoral Stepney'  का फंडा कब अपना रंग दिखा दे, कुछ कहा नहीं जा सकता।

- Satish Pancham
 

17 comments:

Arvind Mishra said...

और फिर रणहू- पुतहू तो भी मचेगी -(शब्द साभार -गिरिजेश राव )

मनोज कुमार said...

जय हो।

Udan Tashtari said...

झोटउवल त मचबे करि...:)

तनु श्री said...

---कोई समस्या नही होगी ,समस्या पुरुष प्रधान लोंगों की सोच में है .
जैसे देश के कुछ नेता लोग इसमें अपनी भविष्य की राजनीती देख रहे हैं-----

नीरज मुसाफिर जाट said...

ईश्वर ने उन्हे सेंटर फ्रेश तो दे दी है, लेकिन अभी वे खा नही रहे हैं.
खायेंगे, देखते हैं कब तक!!!!

Vivek Rastogi said...

अब तो सबको अपना भविष्य वैसे सेंटर फ़्रेश में ही दिख रहा है।

डॉ .अनुराग said...

तो कब खरीद कर भेज रहे है सेंटर फ्रेश .......

प्रवीण पाण्डेय said...

लगता है कि घर अब राजनीति का अखाड़ा बन जायेगा । चलिये नेताओं को संसद के अतिरिक्त घर में भी राजनीति की चालें चलने का अवसर मिलेगा ।

Shiv Kumar Mishra said...

राजनीति की लम्बाई-चौड़ाई ऐसे ही बढे...जय सेंटर फ्रेश!!!

सतीश पंचम said...

मुझे तो जहां तक लग रहा है कि जल्द ही चतुर राजनेता अपने लिये एक सेफ पैसेज के तौर पर ‘इलेक्टोरल स्टेपनी’ रखना शुरू कर सकते हैं। जो भी सीट महिला रिजर्वेशन में जा रही हो, उस इलाके में पहले से ही एक महिला के रूप में ‘इलेक्टोरल स्टेपनी’ ढूँढ कर रख लेंगे और अपनी श्रीमती जी को भी भरमाएं रहेंगे कि – सजनी तोरे खातिर.....

अभिषेक ओझा said...

इस एंगल से तो देखा/सोचा ही नहीं था :)

महेन्द्र मिश्र said...

खैर आने वाला समय गवाही देगा ....

अनूप शुक्ल said...

जब होगा तब देखा जायेगा सीन!

शरद कोकास said...

स्त्री शिक्षा और जगरुकता के अभाव मे यह सम्भावना सही भी हो सकती है ।

हिमांशु । Himanshu said...

यह दृष्टिकोण भी सही है !
सुन्दर प्रविष्टि !

हिमांशु । Himanshu said...

और हाँ, मुझे आपकी पुरानी वाली उजली टेम्पलेट ही अच्छी लग रही थी !

Pankaj Upadhyay (पंकज उपाध्याय) said...

ठाकरे परिवार मे तो शायद अभी से डिसाइड हो गया हो :)

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