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Saturday, February 6, 2010

ज्यादा धूप सेंकने से काम जीवन खुशहाल होता है वाली नई रीसर्च पर जनसंख्या और पर्यावरण मंत्रालय में जब ठन जाय :)

    जब से वैज्ञानिकों ने एक रीसर्च कर बताया है कि वाईग्रा से ज्यादा  सिर्फ धूप सेंकने से मनुष्य का काम जीवन खुशहाल रहता है तब से सडक पर तंबू गाड कर शिलाजीत बेचने वाले धुन्नी राम के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई है। सोच रहे हैं कि इस धंधे में रहूँ या धंदा बदल लूं। धुन्नी राम को अब तक सिर्फ वाईग्रा से ही कंपीट करना पड रहा था। अब धूप नाम से एक और कंपीटीटर आ गया है। 

     उधर जनसंख्या मंत्रालय में अफसर अलग परेशान थे। धूप को जनसंख्या बढाने का कारण बतायें तो पर्यावरण मंत्रालय नाराज हो जायगा। खाद्य और कृषि मंत्री की स्थिति और बुरी थी। वह समझ नहीं पा रहे थे कि धूप को गलत बतायें या सही, क्योंकि धूप सेंकने से यदि जनसंख्या बढती है तो उसी धूप से फसलें भी उगती हैं। इन्हीं सब बातों को लेकर बनी ‘धूप सेंक कमेटी’ के अफसर काफी उहापोह में थे।

      बगल के बोर्ड रूम में प्रधानमंत्री जी सचमुच के परेशान थे। एक ओर तो मीडिया में अपने नेताओं के रोज रोज के फालतू बयानों जैसे बाटला के फर्जी होने, दूध के दाम बढने वगैरह वाले बयानों से पहले से परेशान थे, उपर से एक एक कर प्रकृति के नये नये आयाम पता नहीं कहां से खुल रहे थे। कभी ग्लेशियरों के पिघलने को लोकर ‘पचौरी चाट भण्डार’ में बमचक मची है तो कभी धूप सेंकने को लेकर पर्यावरण और जनसंख्या मंत्रालय के बीच ठनी है। विभिन्न बयानबाजीयों को लेकर कृषि मंत्री तो कृषकाय हो चले हैं।
  
      मंत्रीयों से मीडिया के आगे मुंह न खोलने की ताकीद पहले ही प्रधानमंत्री कर चुके हैं। एहतियात के तौर पर दही भेजी जा चुकी है  कि मुंह में दही जमाये रखना है। मामला ठंडा होने के बाद मुंह में जमी दही की दरकन नापी जाएगी। जिसकी दही अच्छे से जमी होगी, बिना दरक के होगी,  उसके रिपोर्ट कार्ड में पद और गोपनीयता की शपथ का शत प्रतिशत पालन करने के लिये नंबर दिये जाएंगे।

     उधर टीवी पर धूप सेंक कर काम जीवन खुशहाल होने की बात को लेकर टॉक शो चल रहा था। माथे पर बडी बडी बिंदी लगाये एक महिला कह रही थीं कि लालू जी से इस बारे में श्वेत पत्र मांगा जाना चाहिये कि कहीं जनसंख्या बढाने के मामले में उनकी धूप सेंकन विधि का हाथ तो नहीं है।  एक चश्मा लगाये सफारी सूट पहने शख्स कह रहे थे कि लादेन के इतने सारे बच्चे होने की वजह अनजाने में ही ज्यादा धूप सेंक लेना है क्योंकि लादेन को अक्सर अफगानिस्तान के रेतीले, उजाड बंजर जमीन पर ही टीले टब्बरों के बीच घूमते देखा गया है।

     हद तो तब हो गई जब एक ऐड एजंसी वाले ने कहा कि किसानों के बीच सन बाथ लोशन बांटा जाय ताकि जब वह धूप में हल चलायें तो धूप का असर ज्यादा न हो। वरना किसानों द्वारा धूप सेंक ज्यादा होने से जनसंख्या बढने की संभावना है। किसानों के लिये खास सन बाथ लोशन के लिये उसने जिंगल भी तैयार किये हैं -

हरीया हल चलाता है
छाँव लोशन लगाता है

         जनसंख्या को लेकर बनी कमेटी के चेयरमैन ने सरकार को लिखा कि जगह जगह कंडोम वेंडिंग मशीन की बजाय, ‘छाँव लोशन’ बाँटने वाली मशीने लगा दी जांय। गरीबों के घरों में जहां छत न हो वहां छत का इंतजाम किया जाय नहीं तो धूप घर के अंदर आने से जनसंख्या बढने का खतरा है। नई कालोनियों में टेरेस फ्लैट का सिस्टम खतम किया जाय औऱ ऐसी कालोनीयो को मान्यता न दी जाय जो धूप सेंकने लायक स्थान उपलब्ध करवाती हैं।

        इधर पशुओं में भी इस रीसर्च को लेकर काफी बमचक मची थी। एक कुत्ता दूसरी कुतिया से कह रहा था,  तू अब समझी मैं क्यू  अक्सर छांव मे जाकर पडा रहता था। मुझे अपनी नहीं इस देश की फिक्र थी, जनसंख्या की फिक्र थी और तू है कि मुझे हमेशा गलत समझती रही कि मैं तूझसे प्यार नहीं करता, तुझसे दूर दूर रहता हूँ।
 
      इधर टीवी पर ब्रेकिंग न्यूज आ रही है कि ‘चल छैंया छैंया’ गीत को पद्मश्री से नवाजा जा रहा है :)

- सतीश पंचम

(चित्र - साभार इंटरनेट से)

18 comments:

महफूज़ अली said...

अबसे धूप में ही खड़ा रहूँगा.... पर धूप में खड़ा होने के बाद करूँगा क्या? कुंवारा होना भी ना कभी कभी मुसीबत बन जाता है....

मुनीश ( munish ) said...

"हरीया हल चलाता है
छाँव लोशन लगाता है"
Seems Sun shine going to be taxed soon ! U r at ur satirical best here. maha mast !

अर्कजेश said...

छा गए ...

"हरीया हल चलाता है
छाँव लोशन लगाता है"

:) ये बात पहले पता लगा ली गयी होती तो जनसंख्‍या काहे इतनी बढ पाती । और हमें "भारत में जनसंख्‍या वृद्धि" वाले लेख में "मनोरंजन के साधनों के अभाव" के साथ साथ एक और प्‍वाइंट लिखने को मिल जाता ।

Shiv Kumar Mishra said...

अद्भुत!!! कमाल का लिखा है. बिल्कुल कमाल का. क्या कल्पनाशीलता है भाई. वाह! वाह!

Suresh Chiplunkar said...

नारायणदत्त तिवारी ने पता नहीं कितनी धूप सेंकी होगी… धूप सेंक-सेंक कर पता नहीं कहाँ-कहाँ से लालमलाल हो गये तिवारी जी…

अच्छा हुआ आपने बता दिया, अमिताभ ने तो रूप की रानी को दी थी, लेकिन अब राहुल बाबा को भी धूप में न निकलने की सलाह देंगे हम… :) एक तो वैसे ही शादी नहीं हो पा रही, ऊपर से ये मुई धूप…

Arvind Mishra said...

इधर धूप निखर पडी है -अब समझ में आया कबीर का सार ..तभी तो कहूं ये मामला क्या है .
पंचम भैया बहुतै आभार ई गुत्थिया समझावे की खातिर

अनिल कान्त : said...

आनंद आ गया . कमाल का लिखे हो भैया

डॉ .अनुराग said...

तभी सुना है एन डी तिवारी अपनी सारी मीटिंगे धुप में लेते थे .....जे हो महाराज जी......अब अमेरिका धूप पर भी पेटेंट लायेगा ......

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

यहां दरख्तों के साये में धूप लगती है।
चलो चलें यहां से उम्र भर के लिये!
ऐसी लाइनें अब बदल जानी चाहियें!

यहां दरख्तों के साये में धूप लगती है।
चलो बसें यहां उम्र भर के लिये! :-)

कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra) said...

अच्छा... तब तो गिव मी सम सन्शाइन जैसे गानों पर कड़े प्रतिबंध की बात की जानी चाहिये..

@ एहतियात के तौर पर दही भेजी जा चुकी है कि मुंह में दही जमाये रखना है। मामला ठंडा होने के बाद मुंह में जमी दही की दरकन नापी जाएगी।

बहुत करारा व्यंग है..

डॉ. मनोज मिश्र said...

इधर पशुओं में भी इस रीसर्च को लेकर काफी बमचक मची थी। एक कुत्ता दूसरी कुतिया से कह रहा था, तू अब समझी मैं क्यू अक्सर छांव मे जाकर पडा रहता था। मुझे अपनी नहीं इस देश की फिक्र थी, जनसंख्या की फिक्र थी और तू है कि मुझे हमेशा गलत समझती रही कि मैं तूझसे प्यार नहीं करता, तुझसे दूर दूर रहता हूँ।
यह सही है,जनसंख्या नियंत्रण के लिए..

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

सतीश पंचम जी!
आपका लेख बहुत सुन्दर है!
यह चर्चा मंच में भी चर्चित है!
http://charchamanch.blogspot.com/2010/02/blog-post_5547.html

RAJ SINH said...

यार बड़ी दूर की कौड़ी ले आये . हम तो धुप में बाल दाढी मूंछ सफ़ेद करने जाते थे ( जीव बुद्धी लगने के लिए ) . अब समझ में आया की बाकी का रोग कैसे लग गया :) .

rashmi ravija said...

हा हा ...अच्छा हुआ देर से इस पोस्ट पर आई...रोचक पोस्ट के साथ टिप्पणियों का मजेदार तड़का भी मिल गया पढने को..बहुत ही बढ़िया..हास्य-व्यंग

Parul said...

aapki bhasha shaili asardar hai :)

Devendra said...

सुंदर कटाक्ष.
लेकिन अपने यह क्या किया! कहीं इसे पढ़कर हमारी सरकार धूप पर टैक्स लगाने का निर्णय लेती है तो आपकी खैर नहीं.हा.हा.हा....मजा आ गया पढ़कर.

वन्दना अवस्थी दुबे said...

बहुत बढिया, रोचक जानकारी से भरपूर.

KAVITA RAWAT said...

Vartmaan dharatal par likhi post achhi lagi.
Mahashivratri ki haardik shubhkamnayen...

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'

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