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Thursday, December 3, 2009

जब ब्लॉगर होने के कारण शादी न हो सके और जुडने वाला रिश्ता तोड दिया जाय......

 यदि आपने शोले देखी हो तो उसमें एक विशेष सीन है कि जब अमिताभ बच्चन बसंती और धर्मेंद्र की शादी की बात करने बसंती की मौसी के यहां जा बैठते हैं और लगते हैं अपने दोस्त का गुणगान करने। यह गुणगान कम और अवगुणगान ज्यादा होता है। यह पोस्ट उसी सीन से प्रेरित हो लिखी गई है। 
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   -अरे बेटा बस इतना समझ लो कि घर में जवान बेटी सीने पर पत्थर के सिल की तरह है। बसंती का ब्याह हो जाय तो चैन की सांस लूँ।


   - हां सच कहा मौसी, बडा बोझ है आप पर


   - लेकिन बेटा, इस बोझ को तो कोई कुँएं में यूं ही फेक तो नहीं देता न। बुरा नहीं मानना, इतना तो पूछना ही पडता है कि लडके का खानदान क्या है उसके लच्छन कैसे हैं कमाता कितना है।

-         कमाने का तो ये है मौसी कि एक बार बीवी बच्चों की जिम्मेदारी समझने लगेगा तो ढंग से कमाने भी लगेगा।

-         तो क्या अभी कुछ भी नहीं कमाता

-         नहीं नहीं ये मैंने कब कहा मौसी, कमाता है लेकिन अब रोज रोज तो आदमी गुगल एड सेंस से तो नहीं कमा सकता ना..... तो कभी कभी गँवा भी देता है ।

-         गँवा देता है से मतलब, क्या कोई जुआरी है


-         नहीं नहीं मौसी, ये मैंने कब....... कहा लेकिन मौसी ब्लॉगिंग चीज ही है ऐसी कि अब मैं आपको क्या बताउं।


-         तो क्या ब्लॉगिंग का लती है.... नशेडी है।


-         छी छी छी मौसी, वो और नशेडी......ना ना ...अरे वो तो बहुत अच्छा और नेक इंसान है। लेकिन मौसी एक बार जब कम्पूटर पर बैठ जाय तो फिर अच्छे बुरे का कहां होश रहता है, जो मन में आता है लिखता है, टिपियाता है, जिसको मन आए गरियाता है। अब कोई किसी का हाथ तो पकड नहीं सकता ना।

-         ठीक कहते हो बेटा, ब्लॉगिंग का नशेडी वो, लती वो, उलूल जूलूल टिपियाये गरियाये वो.....लेकिन उसमें उसका कोई दोष नहीं है।

-         मौसी, आप तो मेरे दोस्त को गलत समझ रही हैं। वो तो इतना सीधा और भोला है कि आप तो बस बसंती की शादी उससे करके देखिये...ये ब्लॉगिंग और नेट वगैरह की आदत तो दो दिन में छूट जाएगी।

-         अरे बेटा, मुझ बुढिया को समझा रहे हो। ये ब्ल़ॉगिंग और इंटरनेट वगैरह की आदत आज तक किसी की छूटी है जो अब छूट जाएगी।

-         मौसी, आप मेरे दोस्त को नहीं जानती। विश्वास किजिये, वो इस तरह का इंसान नहीं है। एक बार शादी हो गई तो वो नेट और ब्लॉगिंग के जरिये अपनी बौद्धिक अय्याशीयां बंद कर देगा।

-         हाय हाय, बस यही एक कमी बाकी रह गई थी। क्या बहुत अय्याश किस्म का है।

-         तो इसमें कौन सी बुरी बात है मौसी, इस तरह की अय्याशियां तो बडे बडे उंचे लोग तक करते हैं. बडे बडे सेमिनार वगैरह में इसी तरह की अय्याशियां ही तो चलती हैं। और इस तरह की बौद्धिक अय्याशी करने वाले लोग अक्सर पढे लिखे और उंचे खानदान से ही होते हैं।

-         अच्छा तो बेटा ये भी बताते जाओ कि ये तुम्हारे गुनवान दोस्त किस खानदान से हैं।

-          बस मौसी खानदान का पता चलते ही आप को सबसे पहले बताउंगा। फिलहाल तो इसे अनानिमस ही समझिये।

-         एक बात की दाद दूँगी बेटा कि भले ही सौ बुराईयां हैं तुम्हारे  दोस्त में लेकिन तुम्हारे मुंह  से उसके लिये तारीफ ही निकलती है।

-         अब क्या बताउं मौसी, ब्लॉगरों का दिल ही कुछ ऐसा होता है। तो मैं ये रिश्ता पक्का समझूँ।

-         पक्का, अरे मर जाउंगी लेकिन मैं अपनी बिटिया का ब्याह एक ब्लॉगर से कत्तई नहीं करने वाली जो कि अपने बीवी बच्चों को छोड दीन दुनिया से जुडने की ललक में बौद्धिक अय्याशियां करता फिरे। मुझे ये रिश्ता मंजूर नहीं।


-         क्या बताउं मौसी, नहीं जानता था कि ब्लॉगिंग से लोग कुँवारे रह जाते है वरना अब तक तो देश की आबादी की समस्या हल हो गई होती औऱ सरकार खुद ही ब्लॉगर अनुसंधान संस्थानों की स्थापना करती फिरती। खैर, चलता हूँ। आपकी बात सुनकर मेरा ब्लॉगर दोस्त कहीं टंकी  न ढूँढ रहा हो :)  

- सतीश पंचम


स्थान - वही, जहां अंबानी भाईयों की इमारतों पर हेलीपैड बनवाने का विरोध आसपास के लोग कर रहे हैं और अब नौसेना उसे सुरक्षा के लिहाज से रिजेक्ट करने की ठान रही है। 


समय - वही, जब दो हेलीकॉप्टर आपस में बातें कर रहे हों कि यार हमारी हालत तो भिखारियों से भी गई गुजरी हो गई है, कम्बख्त कोई हमें अपने घर के पास पल भर रूकने भी नहीं देता :)  

26 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत सटीक...हा हा!!

खुशदीप सहगल said...

पंचम जी,
मैंने जितनी भी पोस्ट आज तक पढ़ी हैं, निस्संदेह उनमें से आपकी ये पोस्ट सर्वश्रेष्ठ है...बिल्कुल चार्ली चैपलिन स्टाइल...ऊपर से मुस्कुराते रहने वाले हर ब्लॉगर के अंदर के दर्द को बड़े सटीक ढंग से कैनवास पर उकेरा है...आभार जताने के लिए सभी शब्द छोटे पड़ गए हैं...

जय हिंद...

RAJNISH PARIHAR said...

कमाल की कल्पना...पर बहुत ही अच्छी प्रस्तुती.....

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

मजेदार है जी और तीर सी भी लगती है।

संगीता पुरी said...

बहुत मजेदार पोस्‍ट !!

Arvind Mishra said...

हा हा हा ..लाजवाब रूपक !

प्रवीण त्रिवेदी ╬ PRAVEEN TRIVEDI said...

वाह जी वाह!
अच्छा हुआ जो ब्लॉग्गिंग के लती होने के पहले ही शादी कर दी गयी ......... कम से कम एक अदद बीबी वाले तो हो गए !!

वरना तो ......... बजाते रह जाते और सतीश जी अच्छे दोस्त की तरह इसी तरह गवांते ? और क्या?

गिरिजेश राव said...

हा हा हा।
छा गए पूरे रंग से।
बौद्धिक अय्याशी वाला तो भई छा गया दिमाग पर।
अब ये बताइए कि शादीशुदा ब्लॉगर क्यों टंकी पर चढ़ते हैं?
कोई दूसरा रूपक हो जाय।

निर्मला कपिला said...

वाह वाह बहुत रोचक कल्पना है शुभकामनायें

सतीश पंचम said...

@ गिरिजेश जी, - शादी शुदा ब्लॉगर टंकी पर क्यों चढता है ....


- यूं तो कभी ब्लॉगर अपने घर की टंकी तक को साफ करने नहीं निकलता, पर चूंकि ब्लॉगिंग मे है तो वो टंकी पर चढता है कि इसी बहाने अपनी एक पोस्ट ठेल सके.....आखिर ब्लॉगर ठहरा .....आदत से बाज तो आएगा नहीं :)

अनिल कान्त : said...

ha ha ha :)

महफूज़ अली said...

बहुत मजेदार पोस्ट...... इसी बहाने कुछ तो population कण्ट्रोल होगी....... अब लगता है कि जल्दी शादी करनी पड़ेगी...... वैसे भी हमारी उम्र expire हो चुकी है...... और यह ब्लॉग्गिंग और मार डालेगी.......

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' said...

गज़ब करते हैं जी मज़ा आ गया

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

गजब ढ़ा रहे हो भाई। ले लो ढे़र बधाई।
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अदभुत है हमारा शरीर।
अंधविश्वास से जूझे बिना नारीवाद कैसे सफल होगा?

ताऊ रामपुरिया said...

पक्का, अरे मर जाउंगी लेकिन मैं अपनी बिटिया का ब्याह एक ब्लॉगर से कत्तई नहीं करने वाली जो कि अपने बीवी बच्चों को छोड दीन दुनिया से जुडने की ललक में बौद्धिक अय्याशियां करता फिरे। मुझे ये रिश्ता मंजूर नहीं।

पर मुझे तो उनकी चिंता है जिन ब्लागरों के हाथ पीले होगये..हे भगवान अब क्या होगा?

रामराम.

ज्ञानदत्त G.D. Pandey said...

भगवान की नियामत है - हमारी शादी पहले ही हो चुकी थी! :)

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

:) लाजवाब परिकल्पना!!

rashmi ravija said...

बहुत ही रोचक प्रस्तुति ..:)

ललित शर्मा said...

हां भाई ब्लागिंग बहुत बड़ी बिमारी है, भगवान करे किसी को ना लगे ये रोग, इतनी बड़ी बिमारी है जिसका वर्णन करने के लिए मेरे पास शब्द भी खतम हो गये है। इसलिए थोड़ा लिखा ज्यादा समझना। शानदार जानदार

रंजना [रंजू भाटिया] said...

:)बहुत ही मजेदार ..

Shefali Pande said...

vaah ji vaah ....bahut badhiya

बी एस पाबला said...

ब्लॉगिंग चीज ही ऐसी है ... ना छोड़ी जाएsssss

मज़ेदार चित्रण

बी एस पाबला

राज भाटिय़ा said...

महफूज़ अली भाई अभी भी समय है इस पोस्ट को पढ कर ब्लांगिग छोड दो......बहुत सुंदर लिखा सतीश जी

मनोज कुमार said...

ताजा हवा के एक झोंके समान शुष्क मन में बहार लाने वाली रचना है यह।
पढ़कर लोट-पोट होने लगा। आपके प्रयास का जवाब नहीं ! बधाई स्वीकारें।

anitakumar said...

बौद्धिक अय्याशीयां....:)excellent

Raviratlami said...

जबरदस्त. ब्लॉगिरी की शोले का यह सीन मस्त-मस्त है. :)

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'
A Photo from - Thoughts of a Lens

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