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Tuesday, November 17, 2009

फोडा जी, जरा कोने में आईये.....आप को एक बात पब्लिक में प्राईवेट होकर बतानी है :)

       हजारों-करोडों के माल असबाब की बरामदगी के बाद फोडा जी, जब आप  ने   यह कहा कि आपके खिलाफ साजिश की जा रही है।  कोई आपको परेशान कर रहा है। तो आपके इस अप्रतिम सच को देख मैं द्रवित हो गया और मैंने भी अब ठान लिया है कि मैं भी आपकी तरह  मन की बात सच सच सब लोगों को बता दूँ। और  पहला सच यही है कि वो शख्स मैं ही हूँ जो आपको लगातार परेशान कर रहा है। आपकी जो पंपापुर वाली प्रॉपर्टी छापे में पकडी गई है , उसे मैंने ही बताया था कि वह आपकी ब्लैक की कमाई है। और वो जो रजाईपुर की मसहरी वाली के नाम अकाउंट पकडा गया है , वो मैंने ही आयकर वालों को बताया था। फोडा जी आप सच कह रहे हैं कि कोई आपको परेशान कर रहा है। मैं अपने इस अपराध के लिये क्षमा चाहता हूँ।

          नहीं नहीं, मुझे रोकिये मत.....आज मुझे कह लेने दिजिये। आपके अप्रतिम सच से मैं सचमुच बहुत द्रवित हूँ। हाँ, तो मैं कह रहा था कि वह जो चिल्लेमिंयां की खदान  है न, उस पर रजिस्ट्री मैंने ही आपके नाम की करवा दी थी। करोडों की बात थी, तो मैंने सोचा था कि आपके नाम कर दूंगा तो आप जल्दी पकड में आ जाओगे, क्योंकि मंत्री बनने के पहले तक आपकी औकात एक लुंगी और बनियान पहन चप्पल फटकारते आदमी की ही थी। अचानक करोडों की खदान आपके नाम हो जाय तो समझा जा सकता है कि आपने कुछ हेराफेरी की होगी। इसलिये मैंने खदान की रजिस्ट्री आपके नाम कर दी थी। इसके लिये मैं मेरी अर्थी उठने तक क्षमाप्रार्थी हूँ। अर्थी उठने से याद आया कि आप तो सुबह देर से उठते थे क्योंकि आप खदानों के ठेके आदि के लिये ओवर टाईम भी करते थे। बताओ भला, ऐसे कर्मठ और वस्तुनिष्ठ प्रतिभा को मैं यूँ ही फंसाने की जुगत में था।


         फोडा जी, आई एम वैरी वैरी सॉरी.......आपको मैंने फंसाने की कोशिश की। अब मैं चाहता हूँ कि ये जो सब आय कर जायकर वाले हैं उनको भी आप यह सच बता दिजिये कि वह शख्स मैं ही हूँ जो आपको फंसा रहा था। आपके खिलाफ साजिश कर रहा था। आप मुझ पर जरा भी रहम न करें और सारी बातें खुल कर बताएं कि कैसे मैंने अपनी सपत्ति आपके नाम कर दी केवल इसलिये कि आप फंस जाएं। फोडा जी, आप संकोच न करें, उन्हें खुलकर बताएं की वह सारी संपत्ति मेरी है जो आपके नाम पर पकडी गई है। मैं जो चाहे सजा भुगतने के लिये तैयार हूँ। और हां, आप उन सारी संपत्तियों को निसंकोच मेरे नाम कर दिजिये। कहा गया है कि पाप की चीज को ज्यादा देर अपने पास नहीं रखना चाहिये। मैं पहले आपका विरोधी था, लेकिन आपकी सच्चाई को देख कर मैं यह पाप का बोझ आप पर लदने नहीं दूँगा। एक पैर पर खडा रहूँगा लेकिन आपको पाप के लांछन से मुक्त करके रहूँगा। इसके  लिये मुझे सरकार चाहे जो सजा दे, मैं तैयार हूँ। लुंगी, चड्ढी और गमझा सब मैंने पहले से ही झोले में रख लिया है। कंघी भी रख ही लेता हूँ। सुना है कि जेल में शेविंग क्रीम वगैरह नहीं होती, केवल पानी लगाकर ही शेव करना पडता है तो पामोलीव वाला शेविंग क्रीम भी ले ही लेता हूँ। तौलिया लूँ कि न लूँ इसी उलझन में हूँ क्योंकि लुंगी होने से तौलिये का भी काम हो जाता है, तो नाहक बोझ क्यों लेकर चलूँ। वैसे भी ये पाप का बोझ तो मेरे साथ है ही, अब और कितना बोझ लादकर चलूँ।
 
     रास्ते में चकचोन्हर वकील बाबू के यहां होकर चलियेगा। क्या है कि मेरे सभी माल असबाब की रख रखाव वही करते हैं, तो जो कुछ मैंने आपके नाम रजिस्ट्री किया है, उसे चकचोन्हर बाबू के हाथों ही मेरे नाम कर दिजिये। लगे हाथ यह काम भी हो जाय तो अच्छा है।

       चलिये, मेरे जेल जाने का वक्त हो रहा है, वैसे भी जल्दीयै लौटना भी तो होगा। किसी को बेबात फंसाने की सजा इतनी लंबी तो होती नहीं कि पूरी उमर जेल में ही बितानी पडे। और बित्ते भर की सजा पर गज भर का लाभ मिल रहा हो तो ऐसी सजा कौन न झेलना चाहेगा। तो, ऐसा किजिये कि आप जरा मेरा यह झोला पकडिये, मैं जरा छोटई की महतारी को ढाँढस बंधा आउं। उ भी बहुत दुखी थी कि मेरी वजह से फोडा जी सांसत में हैं। यह जानकर तो वह और दखी थी कि आपके नाम जो तमाम चार पांच हजार करोड की जो संपत्ति है वह असल में मेरी है। मुझे तो छोटई की माई ने बहुत दुत्कारा। कह रही थी कि जरा भी इंसानियत बची है मुझमें तो जाकर तुरंत आपसे माफी के  साथ साथ माल असबाब मांग लूँ ताकि आप और सांसत में न पडें।
 
      वो जो 640 करोड मिला है न उ महानगरीया में, तो उसमें से ही आप अपने लिये एक ठो चुडीदार पाजामा कुर्ता सिलवा लिजियेगा, लल्लन टेलर के यहां जाईयेगा तो वह अच्छा सिलकर देता है। बस उससे हमारा नाम भर बता दिजियेगा। आप का कपडा अच्छा सिलकर देगा। कपडा चुराएगा नहीं।
 
     तो चलूँ, जेल वाली दीवार मेरा इंतजार कर रही है। क्या कहूँ, आपसे बिछडते हुए बहुत दुख हो रहा है। सोचता हूँ कि आप भी साथ होते तो ये दुखियारे दिन जल्दी ही कट जाते। फिलहाल तो बकरे कटवाईये ताकि ईश्वर की अनुकंपा बनी रहे।  फोडा जी, ...........कहा थोडा....... समझना ज्यादा.......और क्या कहूँ, आप तो खुद समझदार हैं। ईश्वर से आपके लिये सुख की कामना करता हूँ। चलिये फिर मुलाकात होगी। कहा गया है कि सज्जन व्यक्ति ही सज्जनता का सम्मान करता है। आप जैसा सज्जन व्यक्ति तो इस संसार में ढूँढे न मिलेगा।

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   अरे, ये लाईट को क्या हो गया। सज्जन ढूँढने की बात कर रहा हूँ और यहां अक्षर तक ढूँढने पड रहे हैं। उफ्फ, इस देश का कुछ नहीं हो सकता । ढंग से व्यंग्य भी लिखना हो तो एकाध किलो तेल जनरेटर को अर्पण करना पडता है।

        अच्छा फोडा जी, गुड नाईट एंड शब्बा खैर। फिर मिलेंगे। 'नीड का निर्माण फिर' वाली कविता हम लोग दुबारा पढेंगे और हां, निर्माण से याद आया कि वो जो लतमारगंज में  अवैध निर्माण चल रहा है, उसे भी मैंने ही आपके नाम से कर रखा है, कोई पूछे तो मेरा नाम बता दिजिएगा :)




- सतीश पंचम

स्थान - वही, जहां पर अदृश्य  कन्वेयर बेल्ट के जरिये 640 करोड रूपयों की खोखा  ढुलाई झारखंड से महाराष्ट्र तक  हुई है।

समय - वही, जब कन्वेयर बेल्ट में लगने वाली एक घिरनी बगल वाली घिरनी से कहती है कि ऐसा भी क्या कमाना कि ढोने के लिये कन्वेयर बेल्ट लगे। सुनकर दूसरी घिरनी कहे, जानती नहीं क्या बहन......... पैसे में बहुत वजन होता है :)

( य़ह व्यंग्य आज की राजनीति पर है जो केवल चेहरे दर चेहरे  बदलती है, कर्म नही   - सतीश पंचम  )

6 comments:

Nirmla Kapila said...

बहुत सही व्यंग है शुभकामनायें

Murari Pareek said...

बहुत ही ग़ज़ब व्यंग कसा है भाई !!! फोड़ा जी से माफ़ी मान लीजिये और मॉस असबाब भी अगर आपको कोई तकलीफ होती है ऐसा करने में तो भाई हम भी पर सेवा में महारत रखते हैं!!!

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

मजेदार व्यंग्य। ऐसी सम्पत्ति मुफ़्त में देकर आपने बेचारे फोडा को संकट में डाल दिया। बेचारा। देना ही था तो कई लोगों को बाँट देते...! एक ही आदमी को इतना उड़ेल देना ठीक नहीं।

डॉ .अनुराग said...

bechara aadivaasi है इसलिए usko pareshan कर रहे हो.......

Mired Mirage said...

अच्छा हुआ आपने अपनी गलती मान ली।
घुघूती बासूती

ab inconvenienti said...

तुम्हे तो बैठे बैठे उपद्रव सूझता रहता है, बेचारे सीधे सादे गरीब आदिवासी को तुम्हारी वजह से कितनी शर्मिंदगी और परेशानी झेलनी पड़ी. कोई हिसाब दे सकते हो इसका? कभी सोचा था की तुम्हारी यह शैतानी बुद्धि एक गरीब बनवासी की जिंदगी नरक बना डालेगी.... ईश्वर कभी माफ़ नहीं करेगा तुम्हे, पाप पड़ेगा, कीड़े पड़ेंगे!

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