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Monday, October 5, 2009

जब एक साल पहले 'विमान के ऑटोपायलट मोड' वाली मेरी लिखी पोस्ट के कुछ अंश विमान में वाकई घट गये ।


    अभी हाल ही में पता चला कि एक विमान में छेडछाड को लेकर हंगामा हुआ और विमान को दोनों पायलट ऑटोपायलट मोड में रख दिये ।  इसी ऑटोपायलट वाले मुद्दे को लेकर मैंने जो पोस्ट लिखी थी उसमें एक जगह कॉकपिट में हुई हल्की छेडछाड का भी जिक्र था। मुझे क्या पता था कि एक साल बाद वही सब घटित हो सकता है। लिजिये पेश है वह पोस्ट.....

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       नितिन के कदम खुदबखुद Pilot Rest-Room की ओर बढे जा रहे थे, कमबख्त इस बंगलोर वाली Flight ने परेशान कर रखा है , एक नजर घड़ी की तरफ़ डाली - ओह.... Its 4.00 am.....damm, I hate this timing. जब सभी लोग सो रहे होते हैं रात एक बजे , कमबख्त तभी इस Flight को attend करो , साले ये भी तो नही कह सकते की एक spare Pilot रखें, cost saving .......Bullshit.... मन ही मन नितिन कुढ़ता हुआ Pilot Rest Room मे दाखिल हुआ। सोफे पर धम्म से गिरते हुए जैसे उसे लगा अब यहीं सो जाऊं तो अच्छा रहे, तभी Rest Room attendent कृपाल सिंघ ने दरवाजा खटखटाया , May I sir, ............ya Come come, न चाहते हुए भी नितिन को बोलना ही पड़ा , इस वक्त वो किसी से बोलना नहीं चाहता था लेकिन एक कृपाल ही तो था जो रोज उसी की तरह नाईट ड्यूटी करता , और गाहे बगाहे जब उसे नाईट ड्यूटी से खीज होने लगती तो कृपाल को देख कर जैसे उसे अहसास होता की वो अकेला नहीं है, हालांकि Co-Pilot सुधीर साथ होता है लेकिन उसके साथ कितनी देर बात की जाय, बंगलोर से मुंबई तक तो लगभग रोज ही वो दोनों साथ साथ होते हैं और बातें भी तो वही पायलटों वाली , Poor Visibility, Hang-on, Hang-Off, one point Landing , Two Point Landing, कमबख्त इसके सिवा ज्यादा हँसी मजाक भी तो नहीं कर पाते , अभी उस दिन Air-Hostess मीना चटर्जी को सिर्फ़ Hi Kitty ही तो कहा था .  Flying Manager मिश्रा ने छूटते ही कह दिया , see , I don't want any escalations, Please behave properly in Cockpit, Your voice details are with us........no more to say.  साला जैसे उसे cockpit की इन्ही बातों को सुनने के लिए रखा है।

सुधीर साब नहीं आए - कृपाल ने पानी का ग्लास और नमकीन रखते हुए पूछा।

नहीं, उसके कोई गेस्ट मिल गए हैं , उनसे मिल कर बाद मे आएगा- अनमने होकर नितिन ने जवाब दिया ।

चाय ले आऊं ?

नहीं , आज मूड नहीं है । तुम जाओ , अभी थोड़ा सोना चाहता हूँ ।

जी अच्छा, - कहकर कृपाल वापस चला गया।

      पानी पीकर नितिन की नजर टेबल पर पड़ी aviation Magazines पर पड़ी, - कहीं Airspace है, तो कहीं Flying ढकी है, उसके बगल मे ही Wings दिख रही है , उसने ज्यादा इधर उधर न देखते हुए सोफे पर ही सो जाने का उपक्रम किया , पैर फैलाकर उसने आँखें बंद कर लीं , लेकिन कमबख्त नींद को क्या हो गया , वो भी नहीं आ रही अब, सामने पड़े Rest Bed पर नजर पड़ी , नितिन ने उठकर उसी पर सो जाना चाहा, पानी और नमकीन वैसे ही पड़े रहे, जैसे उन्हें पता हो की उन्हें कोई छूने वाला नहीं है- इतना वो भी जानते हैं।

     Bed पर पड़ने के बाद नितिन ने आँखें बंद कर सोना चाहा , लेकिन बहूत देर तक आँखें बंद करने के बाद भी नींद नहीं आई, कभी - कभी ऐसा भी होता है की जिस चीज की जब जरूरत होती है, वो अचानक मिल जाए तो उस चीज की वैल्यु ख़त्म सी हो जाती है। वह चीज जब तक सामने नहीं होती , लगता है , यही सबसे जरूरी चीज है।

अब........

     अब क्या करूँ, ये अचानक नींद को क्या हो गया, अभी तक तो साली जैसे बदन तोड़ रही थी- नितिन जैसे मन ही मन बुदबुदाया। Bed के बगल मे पड़े न्यूज़ पेपर पर हाथ बढाया ..... सोये सोये ही खबरें अनमने सी देखने लगा , Nuclear deal issue गर्म था , एक जगह आरुशी हेमराज की खबरें बतायी गयी थीं, मुह का स्वाद जैसे कड़वा हो गया, एक मर्डर क्या हुआ पूरा मिडिया पीछे पड़ गया, तभी एक जगह नजर पड़ी- विमान मे पायलट सो गए , पूरी ख़बर मे दिलचस्पी बढ़ गयी, एक तो वैसे भी उसके पेशे से जुड़ी ख़बर थी, ऊपर से ये जिस तरह से हेडिंग लिखी गयी थी , उससे उसकी दिलचस्पी और बढ़ गयी, पूरी ख़बर को एक साँस मे पढ़ डाला, विमान Autopilot पर रख कर पायलटों के सो जाने की ख़बर थी की किस तरह विमान मे कई सौ यात्री थे और पायलट थे की सोये हुए थे, एक बार फ़िर नितिन को लगा मुह का स्वाद बिगड़ गया है, उठ कर बैठ गया, कुछ देर यूँ ही bed पर बैठने के बाद , उसने सोचा चाय पी जाय, बगल मे लगे काल बेल को बजाया, थोडी देर मे कृपाल वापस दरवाजे पर-

yes Sir?

कृपाल एक चाय लाना।

जी- कहकर कृपाल चला गया।

    नितिन फ़िर सोच मे डूब गया, - क्या होता अगर Autopilot Mode मे ही कोई accident वगैरह हो जाता। ऐसा नहीं है की नितिन ने प्लेन Autopilot मे न रखा हो, लेकिन कितनी देर, सिर्फ़ कुछ मिनट तक जब लगता की यहाँ ज्यादा कुछ Handle करने को नहीं है, और फ़िर CoPilot भी तो होता है, लेकिन यहाँ तो दोनों ही सो गए थे । सोचते हुए नितिन को News की headlines याद आई - गुर्जर आन्दोलन से rail सेवा बंद, सिखों ने बाबा राम रहीम के वजह से बंद किया, Jammu  बंद , अमरनाथ श्राइन बोर्ड से जमीन वापस ली गयी, मुंबई मे बाहरी- भीतरी के नाम पर हंगामा मचा है , लोगों को परेशान किया जा रहा है की तुम नॉर्थ वाले हो या कहाँ के ...............

     तभी नितिन ने सोचा - ये देश भी तो Autopilot पर है - कोई देखने वाला नहीं, कोई बोलने वाला नहीं - ऐसे मे कोई Accident हो जाए तो .......लेकिन accident तो उस विमान मे भी नहीं हुआ था , तो क्या देश सचमुच Autopilot पर है ?

* * * * *********

  उस समय  कमेंन्टस देते समय  ज्ञानदत्त जी ने एक बात कही थी कि -  सचमुच देश आटो पाइलट पर है। पिछले महीने गुर्जर आन्दोलन में गाडियां बन्द रहीं, पर आज पिछले महीने के बारे में विवरण लिखते समय कई प्लस पॉइण्ट हैं जो लिखे जा सकते हैं।






       
        अब जब एक साल से ज्यादा का वक्त गुजर गया है इस पोस्ट को लिखे, तो अब तो ढेरों प्वॉंइंट्स हैं.....एक तो यही जीता जागता मामला आ भिडा है......छेडछाड + ऑटोपायलट मोड वाला ।


      हांलाकि यह पोस्ट मैंने Short Story के रूप में लिखा था, लेकिन नहीं जानता था कि कभी इस तरह की छेडछाड वाली घटना कॉकपिट में वाकई घट सकती है।  फिलहाल ऐसी परिस्थ्ति में प्लेन को ऑटोपायलट मोड पर रख यदि दोनो ही पायलट कॉकपिट से बाहर आ गये ,  ऐसे में यदि कॉकपिट के दरवाजे  का ऑटोलॉक फिचर काम कर गया होता तो प्लेन को बचाना मुश्किल था, क्योंकि तब दोनों में से एक भी पायलट विमान की लैंडिंग कराने के लिये डैशबोर्ड तक नहीं पहुंच पाता। 

- Satish Pancham

स्थान - वही, जहां पर पिछले चौबीस घंटे से ज्यादा रिमझिम- रिमझिम बारीश हो रही है।

समय - वही, जब दोनो पायलटों को लगे कि अब विमान को ऑटोपायलट मोड पर रख थोडा यात्रियों की तरफ चला जाय तफरीह करने....... इस विश्वास के साथ कि कॉकपिट का ऑटोलॉक फीचर तो कब का लॉक है  :)

9 comments:

गिरिजेश राव said...

यह देश ऑटो पायलट मोड में ही चल रहा है - रामभरोसे हिन्दू होटल जैसा।
पायलट दो ही हैं - नर और नारी। छेड़ छाड़ की सम्भावना तो लगभग शून्य है लेकिन दोनों सोए हुए हैं। कभी कभी अटेंडेंट कुछ ऐसा कर देते हैं कि जगना पड़ता है - कैटल क्लास को सँभाल कर दोनों फिर सो जाते हैं।...
हाँ,विमान में कोई एक्सेक्यूटिव क्लास नहीं है। सब इकोनॉमी मोड में सफर कर 'सफर' कर रहे हैं - चुपचाप घिघ्घी बाँधे कि कब लैण्डिंग हो ?
... मैं फिर गड़बड़ा रहा हूँ, बन्द करता हूँ।

Arvind Mishra said...

दहशतनाक मंजर -आप तो भविष्यद्रष्टा निकले !

लवली कुमारी / Lovely kumari said...

शायद वह पहली पोस्ट थी जबसे मैंने आपको पढ़ना शुरू किया ..है न?

कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra) said...

अभी हालिया एक फिल्म देखी जिसमें एक सन्दर्भ आता है...

एक विदेशी नास्तिक जनाब भारत आते हैं। १५ दिन बिताने के बाद जब वे वापस स्वदेश लौटते हैं ति घोर आस्तिक बनकर।

रहस्य पूछने पर बताते हैं कि भारत में हर कोई अपने बगल वाले से नफरत करता है- हिन्दू मुसलमान से, कार वाला ऑटो वाले से, रिक्शा वाल पैदल से and vice versa...

इतना सब होने के बाद भी ये देश न सिर्फ़ चल रहा है बल्कि तरक्की कर रहा है... निश्चित ही इस देश को भगवान चला रह है..

शोभना चौरे said...

आपका कहना सही है कहते है जो सपने में भी नही सोचा वो हो गया \परन्तु कई बार हम कुछ सोचकर या फिर कल्पना करते है और वही घटित हो जाता है कभी कुछ अच्छा होता है तो सबको बता ने में कुछ हर्ज नही लगता लेकिन कुछ बुरा घटित होता है तो सबंधित व्यक्ति को बता भी नहीं सकते |
सही मायनो में हमारा देश अपने आप ही चल रहा है |
आभार

सतीश पंचम said...

लवली जी, आपने सही कहा, यही वह पोस्ट थी जिसे आपने मेरे ब्लॉग पर पहली बार पढा था।

@ अरविंद जी,
आप तो भविष्यद्रष्टा निकले ...

अरविंद जी, मेरे लिये इतने भारी भरकम शब्द न कहिये डर लगता है। भविष्यदृष्टा....

फिलहाल तो अपनी पेंसिल ढूँढ रहा हूँ, यहीं कहीं रखी थी :)

और हां, अभी रात में न्यूज सुनने पर पता चला कि वही चैनल जो गला फाड कर चिल्ला रहे थे कि छेडछाड हुई थी...अब कह रहे हैं कि दुआ सलाम को लेकर रार हुई थी ।
हां विमान के ऑटोपायलट में होने की बात जरूर बता रहे हैं।


अब सोचता हूँ कि पोस्ट नाहक लिखी

सतीश पंचम said...

फिलहाल तो इतने से जरूर संतोष मिला कि कोई हताहत नहीं हुआ उस हाथापाई के दौरान। वरना आजकल हर रोज बुरी खबरें आ रही हैं कि यहां बाढ है, वहां भूकंप है तो उस ओर सुनामी है।

गनीमत है कि इस विमान के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ।

वन्दना अवस्थी दुबे said...

कमाल है!! अद्भुत!!

नवीन त्यागी said...

aapke paas to hame bhi aana padega.

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