सफेद घर में आपका स्वागत है।

Saturday, September 12, 2009

सदरू भगत और शर्तिया इलाज वाले डॉक्टरों का विज्ञापन

    
    "अरे क्या तुम्हारा दीदा फूट गया था जो ई पूरे घर को नासपीटे बिज्ञापन से रंगा बैठे हो, चार दिन नैहर क्या गई ....घर को रसलील्ला अखाडा बना दिया" - रमदेई ने सदरू भगत से कहा। 

           सदरू कहें तो क्या कहें, चार अच्छर पढ लिये होते तो आज ये दिन न देखना पडता, कम्बख्तों ने बिज्ञापन भी छापा है तो शर्तिया ईलाज वाला.....गुप्त रोग, नामर्दी, स्वप्नदोष, श्वेत प्रदर और न जाने क्या-क्या पढकर सुना रहा था बासदेव का लडका, कह रहा था कोई डॉक्टर खान का बिज्ञापन है जो रोग-ओग का इलाज करते हैं।  उन्हें तभी इन्कार कर देना चाहिये था जब वो घर के दीवाल पर बिज्ञापन छापने वाले रंग रोगन लेकर आये थे, कह सकते थे कि हम अपने घर पर इस तरह का बिज्ञापन नहीं लगने देगे, बहू-बेटियों का घर है, लेकिन हाय रे अपढ बुढापा, पूछने पर इतना बताया कि दवा वाला, डॉक्टर वाला विज्ञापन है, आप का घर सडक के पास ही है सो उस घर की दीवाल पर बिज्ञापन छापेंगे बदले में सौ-पचास दे भी देगे, बाहर से घर भी रंगा देंगे सो भी आपको सुभीता हो जायेगा, जब से घर बनवाये हो लगता है कभी चूना छोड कोई दूसरा रंग नहीं लगाया, अब हम लगा देंगे। 
              
      ले दे कर एक दिन मे रंग पुता गया, दूसरे दिन लिख उख कर काम खतम, सौ रूपये मिले सो अलग, लेकिन क्या जानते थे कि ये जी का बवाल बो रहे हैं, सोचे थे लाल तेल या काढा-ओढा का बिज्ञापन होगा, लेकिन ये तो शीघ्रपतन, स्वप्नदोष और नामर्दी वाला बिज्ञापन है । इधर रामदेई पूरे उफान पर थी, क्या बडी बहू और क्या छोटी बहू सबकी खबर ले रही थी, "घर न हुआ चकचोन्हरों का अड्डा हो गया, जो आता है घर की ओर ताक कर हँसता है.....हँसेंगे नहीं जब हँसने लायक काम किये हैं तो......वो रामजस खटिक एक आदमी को रस्ता बता रहा था कि सीधे चले जाइये, वहीं बगल मे एक शीघ्रपतन वाला घर आयेगा, बस वहीं से मुड जाईयेगा......नासपीटा......बोली बोल रहा था.......खुद के घर की बहुरिया भले यहाँ वहाँ लपर-झपर करे लेकिन दूसरे के घर का नाम रखने मे ये आगे रहेंगे......हँसो और बोलो......इस घर के लोग ही जब हँसाने के लिये जोर लगाये हों तो और हँसो"।

तभी बडी बहू बाँस के झुरमुटों की आड से आती दिखी , साथ मे ननद रतना भी थी।

"कहाँ से आ रही हो दोनों जनीं" - रमदेई ने उसी रौ मे पूछा।

   रमदेई की फुफकारती आवाज से दोनों समझ गयीं कि आज अम्मा उधान हुई है....कहीं कुछ बोली तो चढ बैठेंगी.....रतना ने ही कहा - "भौजी का पेट दुख रहा है.......दवाई लेने गई थी"।

   रमदेई कडकते बोली, "अरे तो उसी नासपीटे डाकटर से ही ले लेती जिसका नाम घर पर चफना लाई हो....ये नहीं कि रोक-छेंक लगाती कि ऐसा बिज्ञापन नहीं लगने देंगे.....बस कोई आये चाहे घर ही लूटकर चला जाय लेकिन मजाल है जो इस घर के लोग चूँ तक बोले.....?"
  
       इधर लोगों की भीड बढती जा रही थी, हर कोई किसी न किसी बहाने इसी ओर चला आ रहा था, सब को मानों एक ही साथ काम निकल आया......कोई दुकान जा रहा था तो कोई खेत देखने , किसी को तो अपनी भैंस ही नहीं मिल रही थी, जाने चरते-चरते कहाँ चली गई.........लेकिन खोजने वाला रमदेई के यहाँ जरूर देखता चला......देखो आज सब कोई देख लो कि ई शीघ्रपतनौआ घर कैसा होता है। 

         कान खुजाते रमदू कोईरी बोले - मुदा हम तो समझे कोई टक्टर-ओक्टर का या बिस्कुट-उस्कुट का बिज्ञापन छापने आये हैं....इसलिये मैं तो कुछ न बोला....दो दिन घर से फुरसत ही न पाया, आज देखा तो ये हाल है.....। इधर सदरू भगत मन ही मन कह रहे थे - "खूब हाँक लो बच्चा, तुम भी तो वहीं थे जब वो लोग कलाकारी कर रहे थे....अब कैसे गाय बन गये हो"। 

    लल्ली चौधरी बोले - "अरे तो क्या हो गया जो एतना बावेला मचाये हो.......घर को रंग-ओंग दिया, जितना कीडा-उडा होगा सब मर गया होगा, सौ रूपया मिला सो अलग, अब क्या डॉक्टर अपना घर ही उठा कर दे दे ?"

             रमदेई लिहाज करती थी लल्ली चौधरी का - एक तो गाँव के बडमनई, दूसरे दूर के रिश्ते मे बहनोई.......धीमे-धीमे ही भुनुर-भुनुर करती बोली - "ये और आये हैं आग लगाने - अरे ईतना ही चाव है कीडा मरन्नी का तो अपने घर ई बिज्ञापन रंगा लेते......घर के कीडा के साथ , दिमाग का कीडा भी मर जाता......आये हैं साफा बाँधकर" ।

          रामराज ड्राईवर जो हरदम अपने साथ रेडियो लेकर चला करते थे वह भी आ गये थे बवाल सुनकर, रेडियो अब भी उनका बज ही रहा था........तुलबुल परियोजना पर भारत पाकिस्तान वार्ता शीघ्र शुरू होने की संभावना प्रधानमंत्री ने व्यक्त की है। कल एक जीप के खड्ड मे गिर जाने से राजमार्ग संख्या 10 पर हादसा हुआ......। इधर रामदेई का भी समाचार जारी था - "आग लगे ई बुढौती में.....न चूल्हा न चक्की केकरे आगे बक्की......"। 

      तभी रेडियो पर संदेश प्रसारित हुआ....."सुरक्षित यौन संबंधों हेतु कंडोम का इस्तेमाल करें.....कंडोम है जहाँ, समझदारी है वहाँ"। सुनकर सभी को जैसे लगा यह विज्ञापन रमदेई के लिये ही था.....सभी मुंह दबाकर हँस रहे थे उधर सदरू भगत सोच रहे थे क्या कहा जाय......ससुर मैं तो किसी ओर में नहीं हो रहा हूँ......ईधर ये बुढिया जान खा रही है, उधर ये सब लबाडी-सबाडी.....आज खुब तमासा लगा है दरवाजे पर....ये रमदेई जो न कराये सो कम है.....।

          तब तक लल्ली चौधरी खंखार कर बोले - ऐसा है सदरू महराज कि आज जमाना बदल गया है, अब वो लाज लिहाज वाला जमाना रहा नहीं........सो तुम लोग कहाँ अपने प्राण बचाते फिरोगे.....एक काम करो.....जाकर चूना लो और पोत दो दीवाल पर पूरी दीवाल ही सफेद हो जाय , सौ रूपया मिल ही गया है.....जब वो रंग-रोगन वाले औ लिखने वाले डॉक्टर पूछें तो कह देना कि - क्या बतायें डॉक्टर साहब, हमारी दीवाल को लगता है श्वेत प्रदर हो गया है.......इसलिये सफेद -सफेद लग रही है.....अब आप ही कुछ करें और जल्दी करें......वरना कोई और शर्तिया डॉक्टर आकर न लिख जाय.....सफेद दागों का शर्तिया ईलाज :) 



- सतीश पंचम


स्थान - मुंबई, जहां बीच सडक अचानक बडा गड्ढा हो गया है।


समय - वही, जब एक  चलताउ चैनल उस गड्ढे को उल्का पिंड के गिरने से निर्मित बताने की फिराक में हो और तभी एक चैनल सही खबर चला दे और चलताउ चैनल कह उठे  -   
- दगाबाज कहीं का,...... बिरादरी से धोखा कर गया   :) 




चित्र : साभार MID DAY से 

7 comments:

Dipti said...

कई शब्दों का अर्थ समझ नहीं आया लेकिन, फिर भी जो समझ आया वो मज़ेदार था।

अभय तिवारी said...

ज़बरदस्त है पंचम जी.. गजब की सिचुएशन पकड़े हैं..

shama said...

Aise vigyapan to aksar UP adi , mP adi jagahon pe deevaaron pe likhe dikh jate hain!
Bhasha padhke bada maza aata hai...kuchh samay bharat ke uttar poorbee pradeshon me beeta hai, isliye aur adhik maza aata hai...!

http://shamasansmaran.blogspot.com

http://aajtakyahantak-thelightbyalonelypath.blogspot.com

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

अच्छी प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

यह केमॉफ्लॉज है! सदरू-सदरुआइन हाईली इण्टेलेक्चुअल हैं अपने यूपोरियन खोल में।
मैं उन्हे लिबरेट करना चाहता हूं बटुली-अदहन-गाय-गोरू-एम्प्लीट्यूड माड्युलेटेड रेडियो से। पर क्या बतायें, कलम में जोर नहीं है। :(

Manish Kumar said...

मन आनंदित हुआ इस सिचुएशन पर आपकी लेखनी का कमाल देख कर..

rajani kant said...

धन्य हैं प्रभु आप ! हँसते-हँसते पेट दुख गया ।

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'
A Photo from - Thoughts of a Lens

ढूँढ ढाँढ (Search)

© इस ब्लॉग की सभी पोस्टें, कुछ छायाचित्र सतीश पंचम की सम्पत्ति है और बिना पूर्व स्वीकृति के उसका पुन: प्रयोग या कॉपी करना वर्जित है। फिर भी; उपयुक्त ब्लॉग/ब्लॉग पोस्ट को हापइर लिंक/लिंक देते हुये छोटे संदर्भ किये जा सकते हैं।




© All posts, some of the pictures, appearing on this blog is property of Satish Pancham and must not be reproduced or copied without his prior approval. Small references may however be made giving appropriate hyperlinks/links to the blog/blog post.