कल ही मैं केन्द्रीय ब्लॉगर अनुसंधान संस्थान गया था। पहुँचते ही रिसेप्शनिस्ट ने पूछा – क्या आप ब्लॉगर हैं ?
हां ब्लॉगर हूँ।
हिंदी में लिखते हो या अंग्रेजी में ?
हिंदी में।
किस लिये आये हो ?
बस ऐसे ही बैठा था तो सोचा एक चक्कर इस नवनिर्मित केन्द्रीय ब्लॉगर अनुसंधान भवन के लगा आउं।
सुनते ही रिसेप्शनिस्ट खुश हो गईं। ऐसा लगा जैसे एक किलो चाँद उनके चेहरे पर उतर आया हो। हाथ के इशारे से बताया, उधर चले जाइये। मिस्टर अनोखेलाल ब्लॉगरवाल जी हैं। उनसे मिल लिजिये। वो आपको ब्लॉग भवन की सारी जानकारी दे देंगे।
मैं चला गया श्री अनोखेलाल ब्लॉगरवाल जी से मिलने। मिलते ही बोले – अरे सतीश पंचम जी। सफेद घर वाले। आईये....आईये।
मैं सकपका गया। ये क्या ? इसको तो मेरा नाम भी मालूम है। जरूर ब्लॉगिंग में काफी रिसर्च वगैरह कर रखी होगी इसने। तभी तो फट से मेरा नाम बता दिया । मेरे चेहरे के भाव देख कर ब्लॉगरवाल जी ने कहा – अरे आप आश्चर्य न करें। हमें तो सभी ब्लॉगरों के नाम , पते मालूम हैं। हैं ही कितने आप लोग।
मैंने कहा – कहीं सुना था कि हिंदी ब्लॉगरों की संख्या लाखों- हजारों में हैं।
अरे , सब दिल कलंदर बाते हैं। सक्रिय तो चार साढे चार सौ के आसपास भी नहीं हैं।
अभी ये बातें चल ही रही थी कि ब्लॉगरवाल जी ने कहा- चलो तुम्हें अपने ब्लॉग भवन की सैर करा लाउं। मैंने भी हां कर दी। दोनों जन चल रहे थे कि एक शीशे की बडी सी अलमारी के पीछे किसी को बैठे देखा। पूछने पर पता चला कि ये कुढित ब्लॉगर हैं। इस प्रकार के ब्लॉगर कुढते रहते हैं और रह रह कर अपने को अनदेखा किये जाने की बात कहते रहते हैं।
मैंने कहा – तभी ये उस दीवाल की तरफ मुंह फेरकर खडे हैं।
आगे बढे। एक जगह कोई स्टॉल लगा था। किसम किसम के पैकेट रखे थे। पूछने पर पता चला ये ब्लॉगिंग के बीज हैं जो खेतों में डाले जाते हैं।
कुरेदने पर ब्लॉगरवाल जी ने बताना शुरू किया।
जैसे फसलों के बीजों के नाम होते हैं – सरजू बावन, सोनालिका, अर्जुन, लतिका, कर्मप्रिया, विजया, कर्णप्रिया, सोना -35, चमक -80......उसी तरह ब्लॉगिंग के बीजों के भी नाम हैं – विवाद प्रिया, टिप्पणी प्रिया, अनामी, अनामिका, मीडिया–52, पत्रकार-56, चिठेरा – 80, लती-100, और ऐसी ही ढेरों किस्में हैं।
मैं ब्लॉगिंग के इन बीजों को देखकर हैरान था कि क्या ऐसे भी ब्लॉगिंग के बीज होते हैं ? तभी ब्लॉगरवाल जी ने उन बीजों के बारे में एक एक कर बताना शुरू किया –
विवाद प्रिया – ये ऐसे बीज हैं कि एक बार खेतों में आप उल्टे हाथ से भी छींट दोगे तो ब्लॉगिंग की फसल लहलहा उठेगी। पहले एक टिप्पणी आयेगी फिर उसके प्रतिउत्तर में दूसरी टिप्पणी आएगी और फिर टिप्पणीयो का सिलसिला शुरू हो जायगा। ऐसे बीजों की मांग अक्सर आती रहती है। ब्लॉगर भाई लोगों की ये लोकप्रिय किस्म है।
मैं हां में हां मिला रहा था। कुछ समझ रहा था कुछ समझने का नाटक कर रहा था। ब्लॉगरवाल जी का बताना जारी था।
टिप्पणी प्रिया – ये ऐसे बीज हैं जिन्हें टिप्पणीयों के खाद पानी की जरूरत ज्यादा पडती है। समय से टिप्पणीयां न मिले तो ब्लॉगिंग की फसल जल्द मुरझा जाती है।
अनामी – ये ब्लॉगिंग के खर पतवार हैं। यहाँ वहाँ जब चाहे उग आते हैं। इन बीजों को कोई खरीदता नही है लेकिन जब ब्लॉगर भाई लोग किसी से दुश्मनी निकालते हैं तो एक दो बीज उसके खेतों में छींट देते हैं। कभी कभी तो सयाने ब्लॉगर भाई अपने ही खेतों में ये खर पतवार वाले बीज खुद ही छींट कर यह जताना चाहते हैं कि क्या करूँ मैं तो खुद इस खर पतवार से परेशान हूँ। इस बीज के कुछ जीन्स विवाद प्रिया जीन्स से मिलते हैं इसलिये इसे शंकर नस्ल भी कहा जाता है।
मीडिया – 52 – ये ऐसे बीज हैं जो मीडिया जगत से आये हुए हैं। जब हताशा की बयार चलने लगती है तो इस मीडिया 52 से उगी यह फसल ज्यादा गदराने लगती है। इस चैनल पर क्या है उस चैनल पर क्या है बताते हुए इससे निकली बालें आसमान को चूमती लगती हैं पर असल में होती जमीन पर ही हैं।
पत्रकार – 56- ये मीडिया 52 से मिलते जुलते नस्ल के हैं। इस पत्रकार छप्पन किसम की जो बीज है उसे पत्रकार अपने अखबार की क्यारी में नहीं बो पाते औऱ उसे ब्लॉग जगत की 56 किस्म की जमीनों पर ही बो देते हैं। फसल हो या न हो इसकी चिंता ही नहीं करते।
लती – 100 – ये ऐसे किस्म के बीज है जो ब्लॉगिंग के लती होते हैं। जब तक दिन में दो चार पोस्टें न फैला दें इन्हें चैन ही नहीं आता। काफी उपजाउ किस्म है पर क्वालिटी के मामले में अक्सर धोखा दे जाती है ये किस्म। लती 100 जहाँ बोई जाती है उस घर के सभी लोग हमेशा उसी खेत में लगे रहते हैं......पत्नी अलग कोसती है तो यार रिश्तेदार अलग ।
मैं अभी थोडा और घूमना चाहता था कि तभी एक रिसर्च साईंटिस्ट भागता हुआ ब्लॉगरवाल जी के पास आया – सर सर....वो विवाद प्रिया बीज से अंकुर फूटने लगे हैं और बगल में ही फॉलोवर वाली ट्रे भी भरने सी लगी है। जल्दी चलिये न पूरा ब्लॉग भवन इस बीज के लपेटे में आ जायगा।
ब्लॉगरवाल जी जल्दी से उस ओर बढ लिये जहाँ रिसर्च साईंटिस्ट ने घटना होने की बात की थी। मैं भी भागा भागा गया कि देखूँ क्या बात है।
पता चला कि विवाद प्रिया बीज ने विवाद खडा किया है कि पानी पीया जाता है कि गटका जाता है। बगल में ही टिप्पणी प्रिया बीज ने कहा कि पानी निगला भी जा सकता है। तभी लती-सौ टाईप का बीज बोल पडा - पानी सोखा जाता है। मैं सोच में पड गया – यार ये तो प्योर ब्लॉगिंग का बीज है। इससे ज्यादा शुध्द बीज तो कहीं और नहीं मिल सकता। बेहतर हो इन विवाद प्रिया बीजों से फासले बना कर रखूँ। यही सब सोचते हुए मैं ब्लॉग भवन से बाहर निकल रहा था कि तभी रेडियो पर एक गीत बजने लगा –
आप यूँ फासलों से गुजरते रहे
दिल पे कदमों की आवाज आती रही।
आहटों से अंधेरे चमकते रहे
रात आती रही, रात जाती रही
आप यूँ फासलों से गुजरते रहे.......
********************
( ये पोस्ट कुछ तो व्यंग्य और कुछ मजाकिया तौर पर लिखी गई है, इसे मजाक के तौर पर ही लें - केंन्द्रीय ब्लॉगर अनुसंधान संस्थान एक काल्पनिक नाम है। रेडियो से बजने वाला गीत सन 1977 का जां निसार अख्तर जी का लिखा गीत है)
-सतीश पंचम
समय – वही, जब खेतों में सूखे की जम्हाई, दूसरी ओर मायावती की मूर्तियों की लगवाई और दिल्ली में मेट्रो पुल की खुद ब खुद गिरवाई चल रही हो।


27 Comments:
समय से टिप्पणीयां न मिले तो ब्लॉगिंग की फसल जल्द मुरझा जाती है।
--कितनी अध्यात्मिक बात की गई है इस पोस्ट में. आपकी जय हो!!
सतीश भाई - पढ़ना शुरू किया तो पढ़ता ही चला गया - बहुत ही रोचक ढ़ंग से आपने सच्चाई को सामने लाया है। हृदय से तारीफ करता हूँ।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com
किस्में तो आपने खूब गिनायी, काफी मजेदार। लेकिन उन परजीवी बीजों के बारे में नहीं लिखा जो ई-मेल के माध्यम से सबके मेलबॉक्स में घुस-घुसकर नाक में दम कर रहे हैं। यह कोई वायरस संक्रमित प्रजाति लगती है। या कुछ शिकारी टाइप?
आपके आलेख को पढने के बाद ऐसा नहीं लगा कि केंन्द्रीय ब्लॉगर अनुसंधान संस्थान काल्पनिक है .. पूरा रिसर्च लगता है .. कहीं इसके डायरेक्टर आप ही तो नहीं ?
हा हा हा लगता है कि आज सारे दिन के लिये यही पोस्ट काफी है वैसे त्रिपाठी जी की बात तो मैं भी पूछना चाहती थी ्रचक पोस्ट बधाई
पंचम दा
केन्द्रीय ब्लागर अनुसंधान संस्थान खोलने का ख्याल अच्छा है। आप चाहे सर संधान करे या अनुसंधान ब्लागर के पास इतने संसाधन हैं कि आप द्वारा वितरित किसी भी बीज से किसी भी प्रकार की खेती कर ही लेगा। आपकी कल्पना को नमन। बहुत ही श्रेष्ठ व्यंग्य। बधाई।
बहुत बढ़िया.
केन्द्रीय ब्लॉगर अनुसन्धान संस्थान शायद जल्दी ही बने.
टिप्पणी की खाद डाल रहा हूँ, आपका चिट्ठा खूब फले फूले :)
एक बाल्टी खाद हमारी ओर से भी लीजिये… :)
aapka kndriy blog anusandhan kendr bhut hi sarthak lga .admition ke liye yogytaye bhi bata de .
bhut steek vygy .behd rochk lekhan.
krpya lge hatho blog ki pribsha bhi padh le .linkhai.
http://shobhanaonline.blogspot.com/2009/06/blog-post_17.html
dhnywad
बस -जय हो.....
भइया आपने इस संस्थान के निदेशक का नाम नहीं बताया। हम भी मिलने का प्रयास करते।
आपने तो एक ही पोस्ट में सब को लपेट लिया...बहुत ही रोचक पोस्ट्।
काफी रोचक पोस्ट. आभार
हम सभी को जानते हैं आप हैं ही कितने लोग। वास्तव में इसीलिए अभी केन्द्रीय संस्थान बना नहीं है। जल्द ही संख्या भी बढ़ेगी और इस नाम का केन्द्र भी स्थापित हो। आमीन।
बहुत उत्तम रिसर्च है ....पढ़कर मज़ा आ गया
मुझे भी शक हो रहा कि आप ही तो नहीं इस सेंटर के डायरेक्टर ;-)
आप सभी लोगों के स्नेह भरे विचारों से मैं गदगद हूँ। दरअसल यह 'केन्द्रीय ब्लॉगर अनुसंधान संस्थान' नाम मुझे एक बीज भंडार को देखकर सुझा। जून में जब जौनपुर गया था तब धान के पैकेट किसानों द्वारा खरीदे जा रहे थे। उन्हीं पर बीजों के नाम औऱ प्रकार आदि छपे थे।
सो अपनी ब्लॉगर बुध्दि से जैसा उल्टा सीधा बन पडा लिख दिया।
यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हों तो ब्लॉग भवन में शिकायत पुस्तिका रख दी है उस पर शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। वैसे आपकी जानकारी के लिये बता दूँ कि यह शिकायत पुस्तिका नहीं मिल रही है और उसकी शिकायत करने के लिये एक और शिकायत पुस्तिका रखवाई जा रही है :)
भौत भौत बधाई हो पंचम जी
गज़ब कहा सब कछु कह गए
मज़ा इत्ता आया की कोई सीमा नहीं
बधाई फिर से
जे बात ये नया रिसर्च सेंटर खुल गया ओर पता भी नहीं चला....वैसे कौन किये थे उद्घाटन इसका...तनिक बताये तो जरा ...
अरररररर!
इस संस्थान में विजटिंग फेकल्टी का कोई जुगाड़ है?! :)
एक किसानमना ही ऐसी पोस्ट के बारे में सोच सकता है। बधाई
Kya badhiya inst. khola hai...ham to student ke rup men hi wahan jayenge..pata bhi to dijiye.
बताया नहीं कि, सँस्थान जा रहे हो ।
लगे हाथ सिफ़ारिश कर देते कि मेरा ’ सस्पेन्शन आर्डर ’ निरस्त कर दिया जाय ।
मैं शपथ लेकर कह सकता हूँ कि, आइन्दा मैं बिना शर्त अनोखेखे खेलाल ब्लागरवाल जी की शुद्ध चमचागिरी करूँगा ।
चमचागिरी के अलावा वाह वाह पाउडर की मालिश भी उनके पीठ में करता रहूँगा ।
अब तो उन्होंने अपने कुछ प्रवक्ता भी पाल छोड़े हैं, सो, झुकना ही पड़ेगा !
अगली बार कब जाना होगा ? बताना ज़रूर से ज़रूर
@ डा अमर जी,
चमचागिरी के अलावा वाह वाह पाउडर की मालिश भी उनके पीठ में करता रहूँगा ।
- 'वाह वाह पाउडर' बहुत धांसू Concept है :)
आप सबों के प्यार और हौसला अफजाई से पिंकी के मामले में न्याय की आश एक बार फिर जगी हैं।एन0डी0टी0भी0और ई0टी0भी0बिहार ने इस मामले को सामने लाकर पूरे बिहार में भूचाल ला दिया हैं।मुख्यमंत्री सचिवालय इस मामले में मोनेटरिंग शुरु कर दी हैं और रातो रात नामजद अभियुक्त की कुर्की जप्ती हुई हैं वही अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी चल रही हैं।इस बीच खबर चलने का इतना असर दिखा की राजधानी पटना में 18जुलाई को संयुक्त राष्ट्र संघ के ड्रंग एव अपराध वींग द्वारा ट्रेफीकिंग को लेकर बुलाये गये सेमीनार में पिंकी का मामला छाया रहा।सेमीनार के दौरान पिंकी ने अपनी आप बीती सुनाई और सेमीनार में उपस्थित वरिय पुलिस पदाधिकारी और स्वयसेवी संगठनों से न्याय पाने के इस लड़ाई में सहयोग की मांग की।स्वसेवी संगठन जन चौकीदार ने सभी तरह का कानूनी सहायता उपलब्ध करने की घोषणा की हैं और बैठक में भाग लेने आये सी0बी0आई के ज्वाईट डाईरेक्टर पी0के0नायर ने इस मामले में दरभंगा के आलाधिकारी से बात की और इस मामले में क्या क्या हो सकता हैं इसकी सलाह दी ।बैठक में उपस्थित बाल श्रंम आयोग के अध्यक्ष ने अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़े करते हुए मुख्यमंत्री से पूरे मामले की पुन जांच कराने का आग्रह किया।शाम होते होते डी0जी0कार्यालय से लेकर मुख्यमंत्री आवास तक इस मलसे को लेकर बैठके होती रही और दरभंगा पुलिस को पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया गया हैं।परिवार को पूरी सुरक्षा मुहैया कराने का भरोसा मिलने के बाद आज सुबह पिंकी और उसके माता पिता दरभंगा गये हैं।वही दूसरी और कई संगठनों ने पिंकी को पढाने में मदद की घोषणा की हैं।यह सब आप सबों के सहयोग से सम्भव हो पाया हैं।और इसके लिए अपने मीडिया के बंधु को देर से ही सही और सार्थक पहल के लिए धन्यवाद के पात्र हैं।वही इस मामले में यह पंक्ष भी सामने आया की ब्लांग के माध्यम से भी बेजुवानों की आवाज को उठा कर एक अंजाम तक पहुचाया जा सकता हैं।
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