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Saturday, February 28, 2009

मेरा ब्लॉग कन्टेंट चोरी हो गया है, कहीं आप का भी ब्लॉग लेख चोरी नहीं हो गया हो ।


           जी हां, मेरा ब्लॉग कन्टेंट चोरी हो गया है। एक ब्लॉग पर मेरे लेख चुपके से प्रकाशित कर दिये गये हैं। और जिस ब्लॉग पर यह कन्टेंट प्रकाशित हुआ है, वह ब्लॉग एक पॉर्न ब्लॉग है। मुझे इस घटना की जानकारी ही नहीं होती यदि मैंने अपने द्वारा रचे एक पात्र  'सदरू भगत'  के नाम पर गुगल सर्च न किया होता।

          बैठे बैठे अचानक ही मेरे मन में आया कि देखूं मेरे लिखे लेखों  का गुगल सर्च में क्या परिणाम आता है और सबसे पहले मैंने अपने द्वारा रचे गये पात्र सदरू भगत को ही  सर्च करना शुरू किया। आश्चर्य, सदरू भगत नाम के कई परिणाम आ मिले, लेकिन इन्हीं के बीच एक अनजाना सा लिंक दिखा जिसे पहली नजर में पढते ही पता चल गया कि ये कोई पॉर्न वेबसाईट है। लेकिन इसी के साथ सदरू भगत लिखा देख कर मेरा माथा ठनका कि सदरू भगत नाम का ये शब्द यहां कैसे,  और तभी मैने उस पर क्लिक किया। उसके बाद तो जैसे मेरा दिल धक् से हो गया। मेरा रचा गया पात्र, मेरा लिखा हर शब्द, मेरा लिखा पूरे का पूरा हास्य  लेख  एक पॉर्न वेबसाइट पर मेरे सामने था। अगल बगल और लोगों के होने की वजह से तुरत फुरत उस वेबसाइट को बंद किया। थोडी फुरसत मिली तो फिर सर्च किया और इस बार मेरा एक और लेख इस वेबसाइट पर दिखा।  इस लेख में मैंने समलैंगिक विवाह और उस पर बनाये जाने वाले कानून को लेकर व्यंग्य लिखा था। आप लोगों में से कइयों ने उसे पढा भी होगा - समलैंगिक विवाह और पंडित केवडा प्रसाद । बस फिर क्या था, मैं काफी सोच में पड गया । मन ही मन उस ब्लॉगर को हजार बार कोसने लगा। कम्बख्त ने छापा भी तो एक अश्लील साइट पर, जो इस लेख को पढेगा वो मेरे बारे में न जाने क्या सोचेगा। 


    खैंर, ले देकर ब्लॉग को फ्लैग कर अपना विरोध भी दर्ज करा दिया। लेकिन मन नहीं मान रहा था। सोचा आप लोगों से भी इस वाकये को बांटता चलूँ। लेकिन इस घटना ने मुझे यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर क्या सोच कर उस साइट वाले  ने मेरे लेख को वहां छापा । और इसी उधेड-बुन में मुझे सोचने पर मजबूर होना पडा कि मैं कैसा लिखता हूँ, मेरी शैली क्या है, क्या मैं इतना अच्छा लिखता हूँ कि कोई उसे चुरा लेना चाहता है या फिर मैं इतना घटिया लिखता हूँ कि उसे एक अश्लील साइट अपने यहां प्रकाशित करने योग्य मानती है।


    चोरी से प्रकाशित लेखों का विश्लेषण करने पर पता चला कि उनमें से एक लेख मैंने अखबारों में आये एक अनोखी खबर पर चुटकी लेते हुए लिखा था जिसके अनुसार कहीं के वैज्ञानिकों ने रीसर्च करके बताया था कि दिन में चार बार पत्नी को गले लगायें तो खुशहाली होती है घर में। अब ये खबर मुझे कुछ अटपटी सी जान पडी तो इस पर सदरू भगत और रमदेई नाम के मेरे द्वारा गढे गये पात्रों को लेकर एक लेख लिख दिया था। दूसरे लेख  को ध्यान से देखा तो यह लेख समलैंगिक विवाह को लेकर बनाये जा रहे कानून को लेकर लिखा गया था। यह एक व्यंग्य था जिसमें पंडित केवडा प्रसाद की उलझन और अन्य बातों का वर्णन था। पूरा लेख सीधे छाप मारा था छापने वाले ने। अब इन लेखों मे न जाने कौन सा अश्लीलता वाला तत्व दिखाई दिया था उस छपासी को कि उन्हें आव देखा न ताव फट् से छाप दिया अपने घटिया साइट पर। खैर, यही कहेंगे, जाकी रही भावना जैसी। सावन के अंधे को हर जगह हरा ही दिखाई देता है


  जहां तक मेरे लेखों में भद्दे या अश्लीलता का प्रश्न है तो मैं उससे बचना ही चाहता हूँ, एक दो लेख पहले लिखे थे जिनमें कहीं कहीं आवश्यकता पडने पर शब्द न लिख कर वहां स्टार *** आदि का प्रयोग किया है मैने। लेकिन वही जहां पर जरूरी हो। आतंकवादीयों द्वारा मुंबई पर हुए हमले पर उन आतंकवादीयों के लिये लिखे गये शब्द भी मैने इसी ' Idi** लेखन शैली' में ही लिखे थे । हो सकता है उस चोट्टे ब्लॉगर को यही शैली मेरी सामान्य शैली लगी हो। और लगने का जहां तक सवाल है तो इस बात पर पल्लवी त्रिवेदी जी का ब्लॉग पोस्ट याद आ गया है जिसका शीर्षक ही है बस हमें लग गया सो लग गया....क्या कर लोगे हमारा

खैर, चौरकर्म को कहां तक रोका जा सकता है। राईट क्लिक डिसेबल करने पर भी लोग इमेल सब्सक्राइबर के जरिये माल उठा लेंगे। फीडर तो है ही। डॉ अमर जी इस समय मुझे बडे याद आ रहे हैं। ठिठोली जो करते हैं। कह रहे थे ब्लॉग पर ताला लगाना शुभ है। अब मैं सोच रहा हूँ ताला अलीगढ वाला लगाउं कि गोदरेज का :)

ब्लॉगर जनों, आप लोग भी अपने अपने ब्लॉग कन्टेंट्स को सर्च मारा किजिये, कहीं आप के द्वारा क्रियेट किया हुआ, रचा हुआ सदरू भगत किसी और रूप में न हों। मैं चलूं, सदरू भगत की पत्नी रमदेई और फाफामऊ वाली उनकी पतोहू इंतजार न कर रहे हों। रमदेई तो पहुँचते ही उबल पडेगी, कहां छोड आये मेरे सदरू भगत को। एक तो बुढौती, उपर से न जाने कौन-कौन इलाके में उन्हें छोड आते हो :)

अंत में - उम्मीद है, उस चोट्टे सन्नी ब्लॉगर तक मेरी यह पोस्ट पहुँच गई होगी।

- सतीश पंचम

 

24 comments:

नीरज गोस्वामी said...

अब आप पात्र ही इतने प्यारे रचते हैं की हर किसी का दिल उसे चुराने को करता है...एक बात और...जो लोग आपको जानते हैं वो पॉर्न साईट पर आप के पात्र देख कर उसे ही दोषी मानेगे....चिंता मत करें...
नीरज

मिस्टर बेनाम said...

जनाब अगर आप अच्छा लिखेंगे तो लोग चुरायेंगे ही अगर किसी की बीवी अच्छी हो तो सरे मुहल्लों के आवारों की नजर उसी पर होती है , अब इन चोरों को तो ताला तो के आप कुछ भी कर ले रोक नहीं सकते हा आप अपना लिखना बंद नहीं करे बस लिखते रहे इसी बहाने ऑफ़ पॉर्न साईट पर भी प्रशिद्ध हो ही गए हाहाहा .

Shiv Kumar Mishra said...

एक ही बात मन में आई. कन्फ्यूजियाहत का यह हाल है कि लोगों को प्यार, सेक्स और पॉर्न में अंतर ही नहीं दिखाई देता.

उस चोट्टे ब्लॉगर को मेल लिखकर यह भी नहीं बता सकते कि वो बहुत ही घटिया सोच का प्राणी है. उसे यह बात मालूम है.

Suresh Chiplunkar said...

आप तो पॉपुलर हो रहे हैं… मजे लीजिये, और आपने यह लेख लिखकर उस चोर को उसकी जगह भी दिखा दी… बस इससे ज्यादा और क्या चाहिये… सदरू भगत की जय हो… :)

अंशुमाली रस्तोगी said...

न भाई हम बचे हुए हैं।

डॉ .अनुराग said...

यकीन जानिए मैंने भी ऐसा ही एक ब्लॉग देखा था किसी ने मुझसे कहा एक साहब आपकी पोस्ट त्रिवेणी छोड़कर ज्यूँ की त्यु उतार रहे है ..ओर उनका लिंक चिटठा चर्चा में तो दीखता है पर ब्लॉग वाणी में नहीं...वैसे उन्होंने मेरे चिट्ठे का लिंक भी अपने ब्लॉग पे लगाया हुआ था ...पर अपनी पोस्ट पर कही भी ये नहीं लिखा था की ये मेरी पोस्ट है....मुझे समझ नहीं आया .मैंने इमोशनल अत्याचार वाली अपनी पोस्ट देखी थी वहां .....समझ नहीं पाया वे क्या चाहते है ?इन दिनों चिटठा जगत में उन्हें ही ढूंढ रहा हूँ....

हिमांशु । Himanshu said...

शिव जी की बात के बारे में सोच रहा हूं. क्या सच में प्यार, पोर्न और सेक्स की विभाजन रेखा खो गयी है. यदि ऐसा है तो समाज कहां जा रहा है पता नहीं.
आपकी पोस्ट पढ़कर अभी कंटेंट चोरी के बारे में सोच ही रहा था कि शिवकुमार जी के कमेंट ने एक नयी चिंतन-चुगली कर दी.
आपकी अगली कोई प्रविष्टि इसी पर आये तो अच्छा लगेगा.

आलोक सिंह said...

प्रणाम
समस्या तो बहुत जटिल है , आप की रचना लगा दी उस करमजले ने भगवान उसके कम्पूटर में वाइरस भर दे जो किसी एंटी वाइरस से न जाये .
आपके साथ हुई घटना किसी के भी साथ हो सकती है, इसके लिए कोई ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है .

राम खेलावन said...

aapake saath bahut galat hua

अविनाश वाचस्पति said...

ताला लगाएं
न अलीगढ़ी
न गोदरेज
लगाएं ताला
ब्‍लॉगरेज का
या ब्‍लॉगगढ़
का स्‍पेशल
ताला।

बी एस पाबला said...

ओ जी बल्ले बल्ले हो गयी जी :-)

कहीं मिल जाये वह सन्नी तो उसे, बल्ले से खूब ठोकना।

बी एस पाबला said...
This comment has been removed by the author.
Hari Joshi said...

हमें पोस्‍ट चोरी का दुख नहीं है; दुख ये है कि चोर बहुत आला दर्जे का है।

ताऊ रामपुरिया said...

वाकई शर्मनाक बात है. आपके पात्र तो वाकई सजीव हैं. आज सदरू भगत और रमदेई नाम से ही गुदगदी होती है. मुझे वाकई बडा दुख हुआ ये जानकर. किसी से पूछ कर देखिये और सभी को बताईये कि इस बारे मे प्रभावी रुप से क्या किया जा सकता है? और पूरी एक पोस्ट ही इस बारे में लिखेंगे तो बहुत बेहतर होगा.

रामराम.

राज भाटिय़ा said...

चलिये कोई बात नही , बुरे लोग भी आप की अच्छी बाते पढ लेगे इसी बहाने... अगर आप चाहते है की आप के ब्लांग को निश्चित लोग ही पढे तो इस का इलाज तो है लेकिन चोरी का इलाज कोई नही, क्योकि यहां कहावत है कि ताला बाद मै बनता है, चोर उसे तोडने का तरीका पहले खोज लेता है..

सतीश पंचम said...

आप सभी लोगों ने अपनी बात रखी उसके लिये शुक्रिया। जब ये पोस्ट लिख चुका उसके कुछ देर बाद ही मेरे एक घनिष्ठ मित्र का फोन आया। कहने लगा - साले, पॉर्न स्टार हो गया है तू तो। एक काम कर कल से किसी फिल्म वाले को पकड । आज कल तुझ जैसे लोगों की ही चलती है इस लाइन में। यह टोटल बातचीत मजाकिया अंदाज में चली जैसे कि अक्सर घनिष्ठ मित्रों मे या स्कूली यार दोस्तों के बीच होती है उसी तू-तडाक वाले अंदाज मे।
अभी यह बातचीत चल ही रही थी कि सामने चैट बॉक्स पर मेरी पुरानी क्लासफेलो ने पिंग किया । छूटते ही बोल पडी - hey sati ( सतीश ) Whats going on yaar....
just got info....its too shocking that u r on porn site :)

उफ्फ, ये और इस तरह की बातें....बस आज का दिन यही चल रहा है। लेकिन सोचता हूँ ये मजाक तक तो ठीक है, कल को कहीं सचमुच हम लोगों पर यह तोहमत न लगने लगे कि ब्लॉगर्स का स्टैंण्डर्ड गिर गया है। पॉर्न कन्टेंट तक डालने लगे हैं।
अब तो यही है कि किसी तरह बचते बचाते लिखते रहें। चोट्टों की कमी न रहेगी।

pallavi trivedi said...

आपकी चिंता वाकई जायज़ है....मैंने भी कई लोगो का अच्छा कंटेंट चोरी होते देखा है! पर इसे रोकने का कोई उपाय मेरी समझ में तो नहीं आता!

अजित वडनेरकर said...

कभी मिले तो दस लाते जमाइयेगा उसे...

अजित वडनेरकर said...

कभी मिले तो दस लाते जमाइयेगा उसे...

सतीश चंद्र सत्यार्थी said...

अगर कोइ (ब्लॉग जगत का) शिशु ब्लॉगर किसी वरिष्ठ ब्लॉगर की कोइ रचना प्रभावित होकर अज्ञानवश अपने ब्लॉग पर डाल देता है तो वरिष्ठ ब्लॉगर उदारता का परिचय देते हुए (और कुछ हिन्दी को बढावा देने के उद्देश्य से भी) उसपर ध्यान नहीं देते हैं. पर किसी सभ्य मानुष की लिखी रचना पॉर्न साईट पर!!!!!!!!

यह तो किसी मायने में स्वीकार्य नहीं हो सकती. कृपया इसे हलके में न लें.

रमण कौल said...

सतीश जी, यदि आप ने अभी नहीं किया हो तो कॉपीस्केप में अपना वेब पता डाल कर खोज करें। आप को पता चलेगा कि आप का मसौदा कहाँ कहाँ अवतरित हुआ है। फीडरीडरों के अतिरिक्त जितनी साइटें हैं उन्हें डराने का मेल तो भेज ही सकते हैं। उन्हें कहिए कि "मेरा कंटेंट हटा दें अन्यथा मैं कार्रवाई करूँगा"। गारंटी नहीं है, पर आम तौर पर यह हथकंडा सफल रहता है।

sunny said...

hello

i get ur post by mail by sexy group so i publish it on my blog if u heart then i delete it form my blog

sunny said...

i get ur mail from this hindi_internet_love_making_stories@yahoogroups.com
yahoo group so i publish it on my post now i have deleted ur two post from my blog sorry for the hearing u

सतीश पंचम said...

Thanks Mr. sunny,

As u mentioned that u received my Post by mail, that means my Post's may be subscribed by some hazy groups also. May be by feed or whatever. Any way, You deleted my posts, thats the big relief for me. But ....please don do such kinds of things again.

I don have ur email ID,(your comment recvd in my mail box shows noreply-comment@blogger.com so i am giving my messg by this way.

Please do some creative and good work on your blog. Making porn kind of things is unethical at least in terms of our own soul.
So please....don do it again.

Anyway, best wishes from me.

Regrds
Satish Pancham

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'

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A Photo from - Thoughts of a Lens

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