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Wednesday, February 25, 2009

चुनाव गूलर फूल


मिश्रा छेड देवे , मिश्राईन चुटकी लेवे
ललाईन मांग फेरे, यदुआईन ताना मारे
चुनाव गूलर फूल

माया रेरी मारे, कल्याण छनछनाये
अमर सुंघनी ले के, सब ओर हैं सुंघाये
आकाश हेलीकॉप्टर, तनिक जो हरहराये
मुलायम अपना टखना पहले ही सहलायें
चुनाव गूलर फूल

आये कैसी ये दुश्वारी, नेता ढोंवे जन असवारी
अंधा कौवा टांग लायें, हर वोट लगे है भारी
आडवाणी जिम में जायें, देह बुढौती में बनायें
मुस्की मारें मनमोहन, कोई गीत गुनगुनायें
चुनाव गूलर फूल

यौगेंन्द्र यादव भी चमके, टीवी पे चर्चा करके
प्रणय रॉय भी खुरचें, कान पेंसिल से सटाके
पहने कान कुण्डल , तीत विनोद दुआ जो बोलें
डाले खादी की अचकन, करें बंद , कभी खोलें
चुनाव गूलर फूल

फागुन का हो मौसम, और आम हो बौराये
ऐसे में कम्बख्त, जो चुनाव ढरक आये
बेसिर पैर कहे हैं नेता, होकर दिमागी पैदल
ऑस्कर बताते सबको, नौ नौ हमीं तो लाये
चुनाव गूलर फूल

मिश्रा छेड देवे , मिश्राईन चुटकी लेवे
ललाईन मांग फेरे, यदुआईन ताना मारे
चुनाव गूलर फूल


- सतीश पंचम

गूलर फूल - दरअसल गूलर का फूल होता ही नहीं, गूलर के केवल फल होते हैं, हमारे देश में भी चुनाव होता ही नहीं, उसके केवल फल होते हैं जो कि अब तक कीडेदार और दुंदुभीप्रिय ही दिखाई दिये हैं। हमें चुनाव एक गूलर से दूसरे गूलर के बीच ही करना है।

रेरी मारना - तू तडाक से बात करना

असवारी - दूल्हा -दुल्हन को ले जाने वाली पालकी


* पैरोडीगीत मूल रूप से छत्तीसगढी लोकगीत और आजकल दिल्ली-6 में बज रहे गीत ससुराल गेंदा फूल की तर्ज पर ।

( गूलर के फल का चित्र साभार http://flicker.com से)

12 comments:

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

वाह वाह कमाल है कमाल है यह गूलर फूल
हकीकत बताये आइना दिखाए गूलर फूल

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

ग़ज़ब!

MANVINDER BHIMBER said...

मिश्रा छेड देवे , मिश्राईन चुटकी लेवे
ललाईन मांग फेरे, यदुआईन ताना मारे
चुनाव गूलर फूल
वाह वाह कमाल है

संगीता पुरी said...

बहुत गजब लिखा है...अच्‍छा लगा पढकर।

नारदमुनि said...

maja aa gya aaj kee subah ka. narayan narayan

रंजना [रंजू भाटिया] said...

फागुन का हो मौसम, और आम हो बौराये
ऐसे में कम्बख्त, जो चुनाव ढरक आये
बेसिर पैर कहे हैं नेता, होकर दिमागी पैदल
ऑस्कर बताते सबको, नौ नौ हमीं तो लाये
चुनाव गूलर फूल

वाह वाह !! अब तो यह गाना ओरिजनल से अधिक अच्छा लग रहा है :) क्या बढ़िया बनाया है आपने इस को ..चुनाव गूलर फूल

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सटीक सामंजस्य बिठाये हैं आप भी. वाकई हमारे यहां सिर्फ़ चुनाव का फ़ल ही होता है. बहुत धन्यवाद.

रामराम.

राज भाटिय़ा said...

वाह बहुत ही सुंदर कविता लिखी आप ने मजा आ गया.
धन्यवाद

ज्ञानदत्त । GD Pandey said...

गजब। और गेंदा का फूल क्या?

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

इसे किसी गवैया से धोलक-नगाड़े पर गवाकर रिकॉर्ड कराइए। हम सुनने की प्रतीक्षा में है।:)

Science Bloggers Association said...

बहुत खूब, मजा आ गया। साथ ही साथ बचपन के दिन भी याद आ गये जब हम लोग गूलर के पेड पर चढ कर धमाचौकडी मचाते रहते थे।

pallavi trivedi said...

waah waah...maza aa gaya.

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