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Saturday, December 13, 2008

बच्चों के स्कूल में चल रही महिलाओं की एक बतकूचन (वाकया)


कभी-कभी आस पास खडे लोगों की बातें सुनने से भी ज्ञान-चक्षु खुलते हैं। ऐसा ही एक वाकया हुआ है। अक्सर शनिवार के दिन मैं ही बच्चों को स्कूल से लाने और ले जाने का काम निपटाता हूँ , जो कि अक्सर श्रीमती जी ही करती हैं। हफ्ते में पाँच दिन की वर्किंग होने पर शेष दो दिनों में से एक दिन पत्नी के हवाले ही सही :) खैर, जब भी स्कूल जाता हूँ तो बडा अजीब लगता है। ज्यादातर महिलायें ही अपने बच्चों को लाने ले-जाने के लिये आती हैं। पुरूष कम ही दिखते हैं, ज्यादातर अपने Duty time पर होने की वजह से ही शायद । ऐसे मे थोडा अलग हट कर खडा होना पडता है, एक तो जगह कम उपर से अगल बगल बतकूचन करती महिलाओं की बातें सुनों तो हँसी रोके न रूके। कोई अपनी सास की निंदा करती है तो कोई अपनी साडी के इतिहास को बयान करती है - ये वाली दादर से ली है पल्लरी शो रूम से....उधर बहुत महंगा मिलता है। जाने पर ठंडा एसी एकदम कूल कर देता है। कोई कहती है मेरा लडके का कपडा कल Cambridge ( शो-रूम) से लिया था कहते वक्त यह भाव होता है जैसे कि बेटा Cambridge में ही पढ रहा है :) यदि ऐसी ही ढेरों बातें सुनते रहें और पकने की क्षमता हो तो और भी गूढ बातें पता चलें पर जल्द ही मैं ऐसी बातों से पकने लगता हूँ।

बच्चों के स्कूल से ही सटा एक कॉलेज भी है। वहाँ पर शायद कोई साडी डे मनाया जा रहा था। लडके कोट पैंट पहने आये थे, लडकियाँ साडी पहने। जिस जगह मैं खडा था वहाँ बगल में ही कोई घर था। उसके सामने ढेरों कॉलेज की लडकियाँ जमा थीं। एक भीतर जाती तो दूसरी बाहर इंतजार करती। दूसरी निकलती तो तिसरी....इस तरह लडकियाँ जा-आ रहीं थी। थोडा ध्यान देने पर पता चला कि आज साडी डे है, कई लडकियों को साडी बाँधने नहीं आती, सो वे इस घर की नई बहू के द्वारा ढंग से साडी पहन रही हैं। कई लडकियों के इस तरह आ जाने से शायद उस घर की मालकिन यानि उस महिला की सास को अच्छा नहीं लग रहा था कि बार-बार लडकियाँ आयें और इस तरह घर में भीड-भाड हो। खैर, जैसे तैसे इस मची हुई बमचक को झेल रहा था कि तभी आस पास खडी महिलाओं के बीच चली चर्चा ने ध्यान खींचा।

मेरे बगलवाली के बच्चे लोग बडे स्कूल में पढते है, उधर भी ऐसे ही कुछ न कुछ डे वगैरह रहता है। उन लोगों की शनिवार-रविवार को छुट्टी रहती है।

इन लोगों को भी देनी चाहिये छुट्टी।

हाँ क्यों नहीं, छुट्टी होने से सबको लगेगा तो सही कि बडा स्कूल है।


यह कहकर वे सभी आपस में हँस पडीं। मुझे यह नई बात पता चली कि यदि Five day working हो तो वह संस्थान बडा माना जाता है। बच्चों को स्कूल से ले वापस लौटानी में काफी देर तक मैं उस महिला की बात को मन ही मन घोंट-पीस रहा था - क्या नायाब नुस्खा है.....हफ्ते में दो दिन की ऑफिशियल छुट्टी रखो और बडे बन जाओ :)

- सतीश पंचम

11 comments:

राज भाटिय़ा said...

बहुत खुब मजा आ गया. आप दुवारा य बतकूचन पढ कर.....
अगर दो दिन की छुट्टी कर के कोई ... वाह वाह क्या बात है.लेकिन किसी महिला ( उस स्कुल की) ने आप का यह लेख पढ लिया तो.....?
धन्यवाद

रंजना [रंजू भाटिया] said...

:) आपने भी अच्छा वक्त पास किया न वह बातें सुन कर :) बढ़िया है

समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...

महिलाओ की आपसी तू मै मै याने बचकूचन वह भाई गजब यदि पढ़ लिया तो......

ताऊ रामपुरिया said...

यदि ऐसी ही ढेरों बातें सुनते रहें और पकने की क्षमता हो तो और भी गूढ बातें पता चलें पर जल्द ही मैं ऐसी बातों से पकने लगता हूँ।

भाई हम नही पक रहे हैं यह सब पढ कर ! आप तो अगली बार बच्चों को लेने जायें तो पुरी बात सुन कर लिखना ! :) बहुत मजा आया !

राम राम !

डा. अमर कुमार said...



यार पंचम भाई, तुम्हारी कान बिछा कर बात सुनने की आदत लगता है, कि कुछ गुल खिला कर रहेगी !
अरे, सीधे सीधे क्यों नहीं बोलते कि यह भी एक तरह की पश्चिम की मानसिक गुलामी है !
आख़िर में बना बुनू कर दो लाइनें इस आशय की डाल देते,
तो मुझ जैसे मूढ़ मग़ज़ को लेख का मर्म मिल जाता !

Gyan Dutt Pandey said...

क्या भैया - आपने डिप्रेस कर दिया। अपनी नौकरी तो २४x७ वाली है। :(
यानी सबसे छोटी श्रेणी।

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

@यदि ऐसी ही ढेरों बातें सुनते रहें और पकने की क्षमता हो तो और भी गूढ बातें पता चलें पर जल्द ही मैं ऐसी बातों से पकने लगता हूँ।

मैं तो आपकी इस नयी किस्म की क्षमता के परिचय पर देर तक हँसता रहा। वैसे यदि महिलाओं ने जान लिया कि आप उनकी बातों में इतना रस ले रहे हैं तो आपके लिए कई नये विशेषण तैयार मिलेंगे। कहिए तो पत्नी से पूछकर एकाध सुझाऊँ..!
:)

अनूप शुक्ल said...

आप इत्ती जल्दी कैसे पक गये? बड़ा संस्थान होने का सफ़ल फ़ार्मूला बताया आपने।

अल्पना वर्मा said...

यदि Five day working हो तो वह संस्थान बडा माना जाता है। .यह तो नयी बात मालूम हुई.
आप भी बड़ी अच्छी जानकारी ढूंढ लाये हैं.

'यदि ऐसी ही ढेरों बातें सुनते रहें और पकने की क्षमता हो तो और भी गूढ बातें पता चलें पर जल्द ही मैं ऐसी बातों से पकने लगता हूँ।'
-क्या कहें!
scientific तथ्य है कि स्त्रियों में वक् पटुता ज्यादा होती है और उन का शब्द कोष भी पुरूष के मुकाबले बड़ा होता है.'

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

"........और उन का शब्द कोष भी पुरूष के मुकाबले बड़ा होता है"@अल्पना वर्मा

सच है भाई!!!!
सतीश जी अब आप रह गए अपने शब्दकोष में श्री-वृद्धि करने से.......





प्राइमरी का मास्टर का पीछा करें

P.N. Subramanian said...

मज़े हैं. दो दिन की छुट्टी फॉरेन की स्टाइल है. इंपोर्टेड है.

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