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Sunday, November 16, 2008

ब्लॉग, साहित्य या लेख लिखने के लिये पूरा कच्चा माल इस Website में है


उत्तर प्रदेश के जिलेवार लोकवाणी वेबसाईट्स एक तरह से साहित्य के लिये कच्चे माल की तरह है, जिसे यदि कोई चाहे तो पढकर ढंग का एक उम्दा उपन्यास लिख सकता है। कई बातें, कई शिकायतें ठेठ देहाती भाषा में ही लिखी गई हैं, मसलन - मेरी खेत की मेड पर पत्थर नसब करवाते समय लेखपाल ने जमीन लालता प्रसाद की ओर दाब दी है.......

मुझे बिला वजह (बिना वजह) दबंगई का शिकार होना पड रहा है....

मेरी मडैया में बकरी लाकर बाँध देते हैं......

मेरी साईकिल को जानबूझकर पंक्चर किया गया......

कोटेदार सीनाजोरी करता है, कोटे पर आया मिट्टी का तेल नहीं मिलने पाता....पहिले ही बिलेक कर देता है......

प्रार्थी कन्या विद्या धन हेतु पात्र है किंतु साजिशन गाँव के परधान और दबंग लोगों ने मिलकर लेखपाल द्वारा हमारे पिताजी की आय ज्यादा दिखा दी और हम अपात्र घोषित की गयीं है.....

ऐक जगह तो अजीब शिकायत देखने मिली -

दरखास है कि प्रार्थी ने उर्वरक व बीज ऋण लिया था, उक्त ऋण की वसूली हेतु अमीन श्री XXXX पुत्र श्री XXXXX, ग्राम XXXX, मौजा XXXXX, तहसील XXXXX मेरी अनुपस्थिती में मेरे घर आये, उस वक्त प्रार्थी घर पर नहीं था, प्रार्थी का लडका था, उसी से अमीन पूछताछ किये और चले गये......शाम को दुबारा आये और वही मेरा लडका मिला तब वे मेरे दरवाजे पर रखी गई कुल्हाडी स्वंय उठा ले गये और चार बोरा गेहूँ, चावल लगभग 50 किलो, सरसों लगभग 50 किलो, मटर लगभग 20 किलो, जो लगभग.......एक साईकिल, 2000 ईंट तामडा, बांस की दो टोकरी, तथा एक बैग ........मेरे सगे भाई श्री ........के यहाँ रखवा दिये । जब मैं दूसरे दिन घर आया तो सारी बातों की जानकारी हुई, तब अमीन के घर गया पूछा तो कहा पहले सब बकाया रू0 जमा कर दिजिए.....तब मुझसे बात करिये, मैं तब घर आ गया और अगले दिन ......प्रदेश चला गया.....मेरा लडका सब बकाया धीरे-धीरे जमा कर दिया लेकिन मेरा सामान आज तक वापस नहीं मिला......अतः श्रीमानजी से प्रार्थना है कि प्रार्थी का सामान वापस दिलाया जाय.........।

दूसरे एक रोचक शिकायत में तो और भी चीजें हैं मसलन,

प्रार्थी को दौरान सर्वे वोटर लिस्ट मृत घोषित किया गया जिससे प्रार्थी मत देने के अधिकार से वंचित रह गया है, जबकि प्रार्थी बहयात ( + जीवित) है और दौरान चुनाव अंतर्गत धारा 107 /116 CRPC जमानत भी दिनांक XXMarch2007 को कराया है । प्रार्थी के गाँव के चन्द मुखालफीन द्वारा इस प्रकरण का कृत्य किया गया है जो अवैधानिक है । इस प्रकरण की जाँच होकर दोषी कर्मचारी को सजा दिया जाना आवषुक( आवश्यक) है । प्रार्थी किसान है और सदैव घर पर ही रहता है। इसकी जाँच नितान्त आवषुक है, क्योंकि मृतक घोषित होने पर प्रार्थी मताधिकार से वंचित किया गया है।

उपर लिखे Application letter की भाषा को आप देखेंगे तो इसमें आपको बहुत कुछ समझ में आएगा, इसमें संस्कृत के शब्दों के अलावा उर्दू का भी इस्तेमाल किया गया है, कुछ ठेठ खडी बोली जैसे आवषुक को देखकर लगता है कि कहीं गाँव देहात की कचहरी में कोई फर्रा पढ रहा है......और जिस संदर्भ में यह लेटर लिखा गया है वह भी काफी मजेदार है कि प्रार्थी अपना मताधिकार उपयोग करने के लिये जिवित रहना चाहता है, इस लिये वह अपनी CRPC के अंतर्गत किये गये किसी अपराध वगैरह में जमानत भी पा चुका है ...........यानि Full Proof, मय सबूत कि मैंने आपराधिक मामले में जमानत पाई है, इसलिये मैं जिंदा हूँ :)

Example -

http://jaunpur.nic.in/lokvani/

http://allahabad.nic.in/lokvani/



दूसरे जिले का नाम देखने के लिये जिलेवार लिंक में बदलाव कर Defaulters list पर क्लिक करें उसके बाद संबंधित अधिकारी या शिकायत संख्या पर क्लिक करें। कई जिलों में शिकायतों की संख्या जब ज्यादा होती है तो पेज खुलने में थोडा सा ज्यादा समय लगता है, लेकिन एक बार आप पढना शुरू करेंगे तो गाँव-देहात में चल रहे जमीनी हकीकत को देख पाएंगे, कि वहाँ के झगडे किस प्रकार के हैं, वहाँ के लोग किस तरह आपस में व्यवहारिक हैं, उनके मनमुटाव का मुद्दा क्या है, एक तरह से पूरा रिसर्च मैटेरियल ही समझें।

मेरे विचार से यदि किसी समाज या प्रदेश को देखना-परखना या समझना हो तो पहले उन लोगों के आपसी झगडों को, उनके बीच होने वाली अनबन को ध्यान से देखा पढा जाय, जीवन के सभी रस उसमें मिल जाते हैं, चाहे वह करूण रस हो, हास्य रस हो, या फिर रौद्र, हर एक रस इन्हीं झगडों में मिल जाता है। प्रश्न यही है कि हम ऐसी बातों को, ऐसे मनमुटाव को किस नजर से देखते हैं।




- सतीश पंचम


12 comments:

Arvind Mishra said...

सतीश जी यह तो आपने एक बड़ा रोचक मगर गंभीर मामले को उठा दिया है और उदाहरण भी मेरे गृह जनपद(जौनपुर 0 से लेनाथा ? भारत के जन जीवन का इतना प्रमाणिक दस्तावेज और कहां मिलेगा -आपकी अन्वेषक वृत्ति को सलाम !

Gyan Dutt Pandey said...

सही है। कई जनपदीय वेब साइट्स बड़ी रोचक हैं। बस वे अपडेट नहीं होतीं समय के साथ।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

पता लगता है कि ग्रामीण जनता के साथ कितना अन्याय हो रहा है, वह भी खुलेआम.

musafir jat said...

सतीश जी, आपने तो बड़ी ही अच्छी वेबसाइट दी है। आज भी हमारा समाज ऐसा है कि यहाँ पर कोई कमजोर आदमी अपनी बात किसी से कह भी नही सकता। उनके लिए ये कदम ठीक तो है, लेकिन गाँव देहात में इन्टरनेट कौन यूज करता है।

Anil Pusadkar said...

बहुत ही सहज भाव से आपने एक बेहद गंभीर मसले को सबके सामने रख दिया। बधाई आपको।

Jimmy said...

good post ji


visit my site shyari,recipes,jokes and much more visit plz


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ताऊ रामपुरिया said...

आपने एक गंभीर मसले को आपकी रोचक शैली में लिखा ! बड़ी पारखी नजर है आपकी ! बहुत शुभकामनाएं !

कविता वाचक्नवी said...

दुर्दशा है जनता की तो।

Dr. Chandra Kumar Jain said...

निराली पोस्ट...नई जानकारी
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डॉ.चन्द्रकुमार जैन

डॉ .अनुराग said...

दुर्भाग्यपूण है ओर सूचना के अधिकार का भी नियम से पालन नही हो रहा .....ऐसी पोस्ट पर किस बात की बधाई दूँ ?यही कहूँगा आपने एक जीवन ओर दिखाया है !

राज भाटिय़ा said...

आप ने रास्ता तो बहुत सुन्दर बताया, लेकिन यह दोनो साईड मेरे यहा नही खुल रही अगर खुल जाती है तो शव्द सही नही आते.
धन्यवाद, फ़िर से ट्राई करुगा

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

लोकवाणी योजना है तो बहुत महत्वाकांक्षी लेकिन इसके क्रियान्वयन में अभी बहुत अड़चनें आ रही हैं। आगे चलकर शायद कुछ सकारात्मक नतीजा निकले।

अच्छी खोज सामने लाने का आभार। इस योजना के उद्देश्य और प्रक्रिया की जानकारी भी दें तो उपयोगी होगा।

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