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Saturday, November 15, 2008

कतरन झूठ न बोले

हाल ही में New York Times में एक लेख छपा था जिसमें भारतीयों के बढते वर्चस्व को लेकर एक महत्वपूर्ण बात कही गई, कि भारतीय बच्चे अमरीकीयों के लिये एक नये किस्म की चुनौती बनते जा रहे हैं। मेरे पास इस लेख की कतरन एक E-Mail के जरिये आई है, आप भी जरूर उस कतरन को देखें।

- सतीश पंचम




"When we were young kids growing up in America, we were
Told to eat our vegetables at dinner and not leave them.
Mothers said, think of the starving children in India
And finish the dinner.'


And now I tell my children:
'Finish your homework. Think of the children in India
Who would make you starve, if you don't.'?"

11 comments:

Gyan Dutt Pandey said...

थॉमस फीडमैन की पोस्टें तो फीडरीडर में रखने योग्य हैं। लगभग सभी उत्कृष्ट होती हैं। इसे देखें।

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

yah to hamare liye prasantta ki bat hai

unke liye to ??????






hamare gareeb khane me bhi aana shuru kariye!!!!

Anil Pusadkar said...

ये उनके लिये चिंता का विषय हो सकता है पर फ़िलहाल हमारे लिये गर्व का विषय है।समय बदला तो ज़रुर है।

जितेन्द़ भगत said...

ऐसी बात पढ़कर मुस्‍कान चेहरे पे फैल जाती है, एक वि‍जेता की मुस्‍कान, मगर बाकी फि‍ल्‍ड का क्‍या कहना....

अल्पना वर्मा said...

ye sirf america mein hi nahin--'global chinta'[?] ban gayi hai--hindustani pratibha se ab har [Non-Indian ko]kisi ko ranj aur dar lagne laga hai--
-har jagah--भारतीय बच्चे एक नये किस्म की चुनौती बनते जा रहे हैं।

ताऊ रामपुरिया said...

इस खुश ख़बर के लिए शुक्रिया !

रंजना [रंजू भाटिया] said...

यह तो बहुत ही अच्छी ख़बर है ...अच्छा लगता है यूँ भविष्य को आगे बढ़ता देखना

डॉ .अनुराग said...

मुझे तो इसमे अच्छाई दिखती है

राज भाटिय़ा said...

हमे नाज होना चाहिये,कि हम मिसाल बनते है, यह बात अमेरिका मै ही नही पुरी दुनिया मै हो रही है, जेसा की अलपना जी ने कहा है.
हमे देख कर दुनिया हमारे कदमो पे चले...... ना कि हम उ न के कदमो पे चले.यह सच्चाई विदेश मै रहने वाले लोग बहुत पहले से जानते है.
धन्यवाद इस कतरन का

अनूप शुक्ल said...

रोचक!

musafir jat said...

बिल्कुल सही बात है। एक बार तो दिन सभी के फिरते हैं।

फोटो ब्लॉग 'Thoughts of a Lens'

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A Photo from - Thoughts of a Lens

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