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Thursday, November 27, 2008

आतंकवाद की जडों में मट्ठा डालने में देर हो गई है।


मुंबई के आतंकी घटना के मूल में हमारा भ्रष्ट राजनैतिक इतिहास रहा है। आडवाणी को आज कहते सुना कि ये 1993 का ही Continuation है, लेकिन आडवाणी शायद भूल गये कि 1993 की जड में वही राममंदिर था जिसके दम पर उन्होंने सरकारी सुख भोगा था। और आगे बढें तो उस राममंदिर के मूल में हिंदू-मुस्लिम फसाद था जो आजादी के वक्त बहुत कुछ हमारे राजनितिज्ञों की दूरदृष्टि में कमी की वजह से पनपा था। फसाद के जड में यदि शुरूवात में ही मट्ठा डाल दिया जाता तो ये आतंकवाद का विषवृक्ष पनपने न पाता।
रही बात अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद की, तो वह भी इसी तरह के जैसे मसलों की उपज है। बस उसके जडों में मट्ठा डालने में देर हो गई है। अब ये आतंकवाद का वृक्ष कब तक फले-फूलेगा, समझ नहीं आ रहा।

- सतीश पंचम


( मुंम्बई में रहते हुए गेटवे ऑफ इंडिया कई बार जा चुका हूँ , लेकिन अब वहाँ कर्फ्यू सा माहौल है, बगल में ही ताज घायल है....कभी टैगोर ने आगरा के ताजमहल के बारे में कहा था वक्त के गाल पर ठिठके आँसू......आज यह आँसू लोग मुंबई के ताज में देख रहे हैं)



17 comments:

Udan Tashtari said...

बेहद निन्दनीय कृत्य. अति दुखद. मन व्यथित है.

Tarun said...

कुछ जड़ें ऐसी होती हैं जहाँ मट्ठे का भी असर नही होता ये भी उनमें से ही है और जो विवाद की बातें कह रहे हो ये सिर्फ बहाना है। वरना इतिहास ऐसे कई उदाहरणों से भरा पड़ा है जिनके बहाने हिंदू आतंकवाद भी फल फूल सकता था।

Gyan Dutt Pandey said...

मन दुखी हो रहा है।

रौशन said...

संकट के इन पलों में एकजुटता ही सबसे बड़ा संबल है. Continuation साबित करने की जगह उठाये जाने वाले कदमों की बात ज्यादा जरूरी है

सतीश पंचम said...

@ रौशन, जी हाँ मैं भी इस बात से सहमत हूँ कि अब आगे उठाये जाने वाले कदमों की बात जरूरी है, तो फिलहाल अगला कदम अब यही बचा है कि इस आतंकवाद को आग के हवाले कर दिया जाय....यानि जरूरत है आतंकवाद के प्रति जरा भी नरमी न बरतते हुए, सीधे कुचलने की.....अब यही देखना है कि हमारे नाकारा और शोहदे किस्म के नेता लोग क्या गुल खिलाते हैं.....रही बात जनता से उम्मीद की, तो पंजाब इसका उदाहरण है जहाँ आतंकवादी होना लोगों के बीच गाली का पर्याय बन गया....आज उसी प्रकार के जनमानस की आवश्यकता है।

अनुराग said...

उन्होंने जंग में भारत को हरा दिया है.
अपने ड्राइंग रूम में बैठ कर भले ही कुछ लोग इस बात पर मुझसे इत्तेफाक न रखे मुझसे बहस भी करें लेकिन ये सच है उन्होंने हमें हरा दिया, ले लिया बदला अपनी....

मलय said...

अब तो हद ही हो गयी। कुछ क्रान्तिकारी कदम उठाना चाहिए। कुछ भी...।

अब समय आ गया है कि देश का प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी को, राष्ट्रपति लालकृ्ष्ण आडवाणी को, रक्षामन्त्री कर्नल पुरोहित को, और गृहमन्त्री साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को बना दिया जाय। सोनिया,मनमोहन,शिवराज पाटिल,और प्रतिभा पाटिल को अफजल गुरू व बम्बई में पकड़े गये आतंकवादियों के साथ एक ही बैरक में तिहाड़ की कालकोठरी में बन्द कर देना चाहिए। अच्छी दोस्ती निभेगी इनकी।

इनपर रासुका भी लगा दे तो कम ही है।

ताऊ रामपुरिया said...

बेहद शर्मनाक कृत्य !बहुत शोकाकुल हूँ !

राज भाटिय़ा said...

हार्दिक श्रद्धांजली मेरे उन शहीद भाईयो के लिये जो हमारी ओर हमारे देश की आबरु की रक्षा करते शहीद हो गये।लेकिन मन मै नफ़रत ओर गुस्सा अपनी निकाम्मी सरकार के लिये

ab inconvenienti said...

समय आ गया है की आज नरेन्द्र मोदी से कम कोई भी प्रधानमंत्री के पद पर नहीं चलेगा, अडवाणी अनुभवी हैं, पर उम्र, चुनौतियों और हालातों को देखते हुए प्रधानमंत्री पद के कम राष्ट्रपति के अधिक योग्य हैं.

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

ॐ शान्तिः।

कोई शब्द नहीं हैं...।
बस...।

मुसाफिर जाट said...

आज मन बिलकुल अच्छा नहीं है. रात सपने में भी इसी घटना के दृश्य दीखते रहे. इसके लिए पूरी तरह से हमारे नेताओं की स्वार्थपरक राजनीती है.

डॉ .अनुराग said...

आपने कभी सोचा है की अमेरिका पे दुबारा हमला करने की हिम्मत क्यों नही हुई इनकी ?अगर सिर्फ़ वही करे जो कल मनमोहन सिंह ने अपने भाषण में कहा है तो काफ़ी है.....अगर करे तो....
फेडरल एजेंसी जिसका काम सिर्फ़ आतंकवादी गतिविधियों को देखना ....टेक्निकली सक्षम लोगो को साथ लाना .रक्षा विशेषग से जुड़े महतवपूर्ण व्यक्तियों को इकठा करना ....ओर उन्हें जिम्मेदारी बांटना ....सिर्फ़ प्रधान मंत्री को रिपोर्ट करना ,उनके काम में कोई अड़चन न डाले कोई नेता ,कोई दल .......
कानून में बदलाव ओर सख्ती की जरुरत .....
किसी नेता ,दल या कोई धार्मिक संघठन अगर कही किसी रूप में आतंकवादियों के समर्थन में कोई ब्यान जारीकर्ता है या गतिविधियों में सलंगन पाया जाए उसे फ़ौरन निरस्त करा जाए ,उस राजनैतिक पार्टी को चुनाव लड़ने से रोक दिया जाए .उनके साथ देश के दुश्मनों सा बर्ताव किया जाये .......इस वाट हम देशवासियों को संयम एकजुटता ओर अपने गुस्से को बरक्ररार रखना है .इस घटना को भूलना नही है....ताकि आम जनता एकजुट होकर देश के दुश्मनों को सबक सिखाये ओर शासन में बैठे लोगो को भी जिम्मेदारी याद दिलाये ....उम्मीद करता हूँ की अब सब नपुंसक नेता अपने दडबो से बाहर निकल कर अपनी जबान बंद रखेगे ....इस हमले को याद रखियेगा ......ये हमारे देश पर हमला है !

cmpershad said...

"आखिर कब तक..." जब तक कि हम धर्मनिरपेक्षता का सही अर्थ नहीं समझ पाते।

??????? said...

satish ji kabhi kabhi aadami ko apna samman chodkar nirday lena chahiye yeh apne hit me hota hai vaha aapko samman nahi sahi nirday lene ki jaroorat hoti hai vahi na karane per pachtawa hota hai
jo ki bapuji ne kiya hai -------------

Ratan Singh Shekhawat said...

"फसाद के जड में यदि शुरूवात में ही मट्ठा डाल दिया जाता तो ये आतंकवाद का विषवृक्ष पनपने न पाता।"
फ़िर तो इन नेताओं की राजनीती ही ख़त्म हो जाती |

बहुत ही दुखद व त्रास्त घटना मन व्यथित है.

कार्तिकेय said...

सतीश जी, मट्ठा तो डालना ही चाहिए, लेकिन किसे? इसकी जिम्मेदारी भी समय रहते तय हो जाए तो अच्छा है.

और जिसमें यह करने का बूता न हो, उसकी कुर्सी को इलैक्ट्रिक चेयर भी बना दिया जाए.

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