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Wednesday, November 26, 2008

राम-नाम जपने का एक नया साधन


मुंबई की लोकल ट्रेन में अक्सर कुछ लोगों को माला जपते हुए देखता हूँ। हाथ में एक कपडे की थैली बाँधे, उसी के भीतर माला फेरते लोग अपने में ही मस्त होते हैं, कोई परिचित दिख भी जाता है तो अपने जप को जारी रखते हुए हाथ जय हो की मुद्रा में उठ भर जाते हैं और फिर वही जप शुरू । ऐसा कई बार लोकल ट्रेन में देखा है। लेकिन कल एक शख्स के हाथ में माला की बजाय Hand Tally Counter देखा। वह शख्स लगातार एक विशेष क्रम में उस काउंटर को दबाते जा रहा था और अपने इष्टदेव का नाम जप रहा था।

देखकर थोडा अचरज हुआ कि अब तक तो सिर्फ लोगों को तुलसी की माला या रूद्राक्ष आदि की ही माला लेकर जाप करते देखा था, लेकिन ये तो पूरी तरह का आधुनिकता से लबरेज नये किस्म का नाम जपने वाला साधन है। लोग बस अपने काउंटर को अंगुली से दबाते रहें और सारा आँकडा सामने दर्ज होता रहे। कुछ अलग सा लगा।
मैने इसके पहले किसी के हाथ में Hand Tally counter को परेल के Big Bazaar में गेट पर खडे सुरक्षाकर्मियों के पास देखा था। जैसे ही कोई व्यक्ति Entrance गेट से अंदर जाता, उस गेट वाला कर्मचारी खट से वह हैंड काउंटर दबा देता। इसी तरह Exit गेट पर भी जब कोई बाहर निकलता तो वहाँ भी काउंटर ऐसे ही दबा कर संख्या निर्धारित की जाती कि कितने लोग अंदर गये और कितने बाहर गये।

उस शख्स द्वारा बटन दबाकर नाम जपने की क्रिया देख मुझे कबीर वाणी भी अचानक ही याद आ गई -

मनका फेरत जुग गया, गया न मन का फेर ।
कर का मनका छाडि दे , मन का मनका फेर।।

खैर ये तो दुनियादारी की बातें हैं, आजकल तो लोग इंटरनेट के जरिये Online दर्शन कर प्रसाद तक पा लेते हैं, ट्रेन में ही कहीं-कहीं तो लोगों को नाम जपने के लिये एक विशेष प्रकार की डायरी भी लिखते देखा हैं जिसमें कि कई आयताकार खानों में अपने इष्टदेव का नाम लिखा जाता हैं।

मैंने पोस्ट लिखने से पहले थोडी छानबीन की तो पता चला कि यह काउंटर कीडें-मकौडों को गिनने, जानवर , पेड गिनने, सर्वे आदि के लिये बनाये गये थे। कुछ जगह गोदामों में सामान की काउंटिग वगैरह के लिये भी इसका इस्तेमाल बताया गया है। लेकिन उनके बनाये इस काउंटर का उपयोग राम-नाम जपने में होगा यह शायद इस काउंटर को बनाने वालों ने भी न सोचा हो ।
- सतीश पंचम

9 comments:

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

यह भी खूब रही...। अद्‍भुत।

मुसाफिर जाट said...

अरे सतीश जी, ऐसे लोगों को राम नाम से कुछ लेना देना नहीं है. वे तो सिर्फ हम और आप जैसों को दिखने भर के लिए ये ड्रामा करते हैं. भला राम नाम भी कोई गिनने की चीज है कि इतनी बार नाम लेंगे, उससे आगे नहीं.

Anil Pusadkar said...

हर आविष्कार का उपयोग आदमी अपने-अपने हिसाब से ही करता है।उन सज्जन को भी लगा होगा कि इससे गिनने का झंझट भी नही रहेगा,गल्तिया भी नही होंगी और पब्लिक देखेगी भी,मल्टिपल फ़ायदे सोच कर ही काम करते है लोग आजकल्।

रंजना [रंजू भाटिया] said...

इस तरह का यंत्र मैंने भी देखा था राम शरणं में कई के हाथ में ..सब बदल रहे हैं तो यह भी बदलना ही चाहिए :)

ताऊ रामपुरिया said...

भाई पंचम जी ये तो अपनी अपनी श्रद्धा है ! बोद्ध अनुयायी एक चक्र सा हाथ में रख के घुमाते रहते हैं और जितना घूम जाए वही संख्यां में जाप हो गया , ऐसा माना जाता है ! अब चुंकी अनगिनत घूमता रहता है तो अनगिनत यानी असीमीत जाप हो गए !
अब ताऊ भी इसी लिए तो अपना लट्ठ घुमाता रहता है की जितनी बार लट्ठ घूम गया उतने जाप हो गए ! आपने खाम्ख्वा ताऊ की पोल खोल दी ! :) इब रामराम !

डॉ .अनुराग said...

सही कहा बंधुवर टाटा स्काई भी बालाजी के लाइव दर्शन दे रहा है

Gyan Dutt Pandey said...

वाह, हाई-टेक सुमरिनी! मेरे पास तो मेरे मित्र की दी सुमिरनी जेब में रहती है। अब नये मित्र को तलाशना होगा जो हाईटेक सुमिरनी ला दे! :)

sareetha said...

हम भारतीयों की यही तो खूबी है । एक ही यंत्र के की तरह के उपयोग का दिमाग सिर्फ़ हम ही लोगों के पास है ।
माला फ़ेरने से तो मन का फ़ेर मिटा नहीं अब बटन दबा कर देखें ...। हाईटेक हो चुके ईश्वर के दरबार में सुनवाई के लिए सुमिरन का तरीका भी हाईटेक होना ज़रुरी है ,भाई । चित्रगुप्त के साफ़्ट्वेयर में एंट्री मुश्किल हो जाएगी और स्वर्ग - नरक के एलाटमेंट में भारी दिक्कत पेश आएगी ।

राज भाटिय़ा said...

बहुत घपला हो गया ? भई मेने तो आज तक सोचा ही नही कितनी बार भगवान का नाम लिया, वेसे तो मेने बहुत ही कम नाम लिया है,फ़िर हिसाब किताब केसा उसे तो सब पता है,्लगता है भगवान भी बदल गया है, अब भगति भी मीटर पर:)
धन्यवाद इस जान कारी के लिये

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