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Saturday, November 15, 2008

ग्लोबल मंदी को हास्य के जरिये बताती चंद लाईनें - चाचा कैसे हो :)


एक E-mail के जरिये प्राप्त यह चंद पंक्तियाँ, ग्लोबल मंदी की सारी हकीकत हास्य के जरिये बता रही हैं।


चाचा कैसे हो ?

अब क्या बताउं,

बडा बेटा Share Broker है,

दूसरा बेटा Jet Airways में है

तीसरा बेटा Investment Banking में और

चौथा Software क्षेत्र में है......
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सबसे छोटा पानवाला है..........बस वही घर चला रहा है।

14 comments:

Gyan Dutt Pandey said...

पान ही अर्थ है, जीवन है। शेष सब पानी है!
सही कहा मन्दी में सारा प्रपंच बिला जाता है - कोर एक्टिविटी ही चल पाती है!

लवली कुमारी / Lovely kumari said...

क्या बात है सतीश जी.. लगे रहिये ..विभीषिका इसी को कहतें हैं.

musafir jat said...

सतीश जी, आज की अर्थव्यवस्था पर बहुत ही अच्छा कमेन्ट किया है। लगे रहो.

ताऊ रामपुरिया said...

भाई पंचम जी आपने तो बड़ी चिंता में डाल दिया ! लगता है पान की दूकान ही खोलनी पड़ेगी ! :)

Shiv Kumar Mishra said...

बहुत बढ़िया.

पहले केवल शेयर ब्रोकर पान खाता था. अब इनवेस्टमेंट बैंकर, सॉफ्टवेर इंजिनियर और एयरलाइन्स का कर्मचारी भी खाता है. टेंशनात्मक मामलों (अलोक पुराणिक जी से उधार लिया गया) में पान खाने से टेंशन दूर करने में सहायता मिलती है.

डॉ .अनुराग said...

hamare pas ye S.M.S aaya tha.

Jimmy said...

kiyaa baat ahi ji bouth he aacha post kiyaa aapne



Shyari Is Here Visit Jauru Karo Ji

http://www.discobhangra.com/shayari/sad-shayri/

Etc...........

कार्तिकेय said...

अब अपना क्या होगा पंचम जी?

makrand said...

bahut gambir pr bahut sunder chand line me kaha diya bahut kuch
regards

राज भाटिय़ा said...

पंचम जी बहुत सही कहा आप ने , दो चार पान हमे भेज दे, पान खाये जमाना गुजर गया,
धन्यवाद

शोभा said...

हा हा हा सच्चाई यही है।

रौशन said...

पान पर असर नही होगा बेकारी जतनी बढेगी लोग उतना ही बहार घूमेंगे और जितना बहार घूमेंगे उतना पान खायेंगे

pallavi trivedi said...

पान की दूकान खोलने के लिए लोन मिलता है क्या?

sareetha said...

वाकई गधा बहुत कीमती है ।
कल जो पनवाडी था आज वो हीरा है । पढने - लिखने में गधा अब पूरे परिवार का बोझा ढोकर अपनी कीमत बता रहा है ।
चाचा के काबुली घोडों पर मंदी के दौर में भारी है ये गधा ।

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