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Saturday, October 25, 2008

भारत ऐक बेंजीन (C6H6)




बेंजीन (C6H6) का नाम सुना होगा आपने- बहुत ही ज्वलनशील पदार्थ है, कहते हैं जब वैज्ञानिक उसकी रासायनिक संरचना का चित्र बनाना चाहते थे तो उसकी संरचना समझ ही नहीं आ रही थी, हर बार कहीं न कहीं कमी रह जाती। ऐक बार केंकुले नाम के वैज्ञानिक ने अर्धनिद्रा मे देखा एक साँप अपने ही पूंछ को निगल रहा है, बस यही वो क्षण था जब केंकुले को बेंजीन की संरचना समझ आ गई और उसने उसे आकार दे दिया- एक ज्वलनशील पदार्थ की संरचना दुनिया के सामने आ गई।

अब भारत की ओर देखा जाय, क्या आप को नहीं लग रहा कि एक साँप अपनी पूँछ को ही खाये जा रहा है, उसकी संरचना और प्रकृति ठीक उस ज्वलनशील पदार्थ बेंजीन की तरह है , इस संरचना को समझने के लिये किसी Day-dream की जरूरत नहीं है। किसी केंकुले नाम के वैज्ञानिक की जरूरत नहीं है...पर सबसे दुखद तो यह है कि हम ऐसी संरचना को समझते बूझते हुए भी अंजान बने हुए हैं और ऐसे एक नहीं हजारों साँप हैं, कोई भाषा के नाम पर जहर उगल रहा है, कोई धर्म परिवर्तन के नाम पर तो कोई अलगाववाद के नाम पर , सभी साँप इस क्रिया कर्म में लगे हैं और सब के सब इतने ज्वलनशील हैं कि सारा देश अब उसकी आँच महसूस कर रहा है।

क्या भारत के संविधान में ऐसे किसी नेवले का प्रावधान नहीं है जो इन ज्वलनशील बेंजीन साँपों की काट बन सकें ।

- सतीश पंचम

12 comments:

राज भाटिय़ा said...

बिलकुल सही कहा सतीश जी आप ने , हम सब वेवकुफ़ो की तरह से अपने ही घर को तोडने पर लगे है, अरे जब यह आशियाना ही नही रहेगा तो फ़िर क्या करोगे...इस समय भारत की संस्कति का पुरा विश्व दिवाना है, ओर हम दिवाने है उस संस्क्र्ति के जो अपने यहां ई दम तोड रही है, आज नगां पन एक फ़ेशन है, फ़िर लिब इन आ गया, हम किस ओर जा रहै है किसी को भी नही पता, बस भाग रहे है एक दुसरे से आगे निकल जाने के लिये, ओर भेडो की तरह से इन गोरो के पीछे पीछे भाग रहे है.दिमाग को घर पर रख कर.
आप का लेख बहुत ही सुन्दर लगा
धन्यवाद
आपको को स्वपरिवार दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सटीक सोच है आपकी ! कुछ व्यवस्था तो इस सम्बन्ध में होनी ही चाहिए !
दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं

जितेन्द़ भगत said...

न भूलने लायक उदाहरण दि‍या आपने।

शोभा said...

वाह! बहुत सुंदर लिखा है.

Gyan Dutt Pandey said...

हमारा गोलू पाण्डेय (दिवंगत कुत्ता) अपनी पूंछ पकडने गोल गोल चकरघिन्नी काटता था। और तब मुझे बेंजीन/काकुलिया की याद आती थी।
आपने भी अच्छा जोड़ ढूंढ़ा - भारत की दशा से।

Vivek Gupta said...

बहुत सुंदर लिखा है| दीपावली की हार्दिक बधाईयाँ और शुभकामनाये |

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

उपमा तो अच्छी रही...। सवाल उस नेवले को ढूंढने क है जो न तो विदेश से आयातित होगा और न ही आसमान से टपकेगा। उसे तो इसी देश की मिट्टी में पैदा होकर बड़ा होना है...।

विचारणीय पोस्ट। बधाई।
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दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।
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Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

क्या समता ढूंढी है भाई, हम तो कायल हो गए आपके.

डॉ .अनुराग said...

विचारणीय पोस्ट......

आपको को स्वपरिवार दीपावली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाऐं.

अशोक पाण्डेय said...

****** परिजनों व सभी इष्ट-मित्रों समेत आपको प्रकाश पर्व दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। मां लक्ष्‍मी से प्रार्थना होनी चाहिए कि हिन्‍दी पर भी कुछ कृपा करें.. इसकी गुलामी दूर हो.. यह स्‍वाधीन बने, सश‍क्‍त बने.. तब शायद हिन्‍दी चिट्ठे भी आय का माध्‍यम बन सकें.. :) ******

ताऊ रामपुरिया said...

परिवार व इष्ट मित्रो सहित आपको दीपावली की बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं !
पिछले समय जाने अनजाने आपको कोई कष्ट पहुंचाया हो तो उसके लिए क्षमा प्रार्थी हूँ !

राज भाटिय़ा said...

अरे यह ऊपर मेरी टिपण्णी किसी ओर पोस्ट की यहां आ गई , केसे पता नही?
आप को दिपावली की बधाई.

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